डेटलाइन कोलकाता छब्बीस

बंगाल के दूरस्थ ग्रामीण इलाके में हरिचांद मंदिर प्रांगण में हम बांग्ला दलित साहित्यकारों और शरणार्थी आंदोलनकारियों के साथ सन 2000 के आसपास।
बंगाल के विभाजन के शिकार दलितों की आपबीती पर विख्यात उपन्यास उजानतलीर उपकथा के लेखक Kapil Krishna Thakur ने यह तस्वीर भेजकर बहुत सारी स्मृतियां को जिंदा कर दिया है।
उन्होंने लिखा है
আপনার কালেকশনে থাকা দরকার ছবিটা।
इस छवि में कपिलबाबू दाएं से दूसरे नंबर पर हैं। मेरे बगल में कोट पैंट में अंग्रेजी और बांग्ला के लेखक व कोलकाता के रिटायर्ड पोस्टमास्टर जनरल मनोहर मौली विश्वास हैं।
बीच में सबसे लंबे सज्जन सबसे बुजुर्ग और सबसे जवान बांग्ला दलित साहित्य आंदोलन के संस्थापकों में प्रमुख नकुल बैरागी हैं।
बंगाल में matua आंदोलन हरिचांद ठाकुर के युवा वंशज शांतनु ठाकुर के केंद्र में मंत्री बनने के साथ ही संघ परिवार में समाहित हो गया है।
बंगाल विधानसभा में भाजपा को ज्यादातर सीटें दलित matua इलाकों में मिली हैं।
फिर भी बांग्लादेश के फरीदपुर के ओराकांदी में आज भी कर्मकांड का विरोध जारी है। भारत में भी अनेक लोग हरिचांद गुरुचांद के आदर्शों पर चलने वाले अनेक लोग हैं।जैसे इस तस्वीर के सारे लोग।
आभार कपिलबाबू।
पलाश विश्वास
16.03.2023

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