डेटलाइन कोलकाता चौदह
अत्यंत दुखद
तेज बारिश में भगदड़,17 मरे
#डेटलाइन_कोलकाता
हम जब धनबाद में थे 1980 से 1984 तक,तब भी पांच घंटे की दूरी ट्रेन से तय करके अक्सर कोलकाता जाते थे।फिर 1991 से 2018 तक कोलकाता में रहे।कोलकाता महानगर और उसके उपनगरों में पूजा पंडाल आकर्षण के केंद्र होते हैं। महालया के बाद इन दिनों पंडालों में भीड़ उमड़ने लगती है। पूजा की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और राजनीति से भीड़ लगातार अनियंत्रित होती जा रही है। अस्सी के दशक में इतनी अनियंत्रित भीड़ नहीं होती थी। भीड़ होती थी,लेकिन अनियंत्रित नहीं।
कोलकाता में दुर्गा पूजा की सप्तमी की शाम चोरबागान सर्वजनिन दुर्गोत्सव समिति के पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. मां दुर्गा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान बाहर हो रही तेज बारिश के बीच पंडाल में अफरा-तफरी मच गई।
पूजा के दौरान कोलकाता में अक्सर बारिश होती है।इसके लिए तैयारी भी रहती है। क्या इस बार तैयारी नहीं हुई?
हम हमेशा दफ्तर जाते हुए इस भीड़ में फंस जाते थे।मीलों पैदल चलकर, बारिश हुई तो पानी में चलकर दफ्तर पहुंचते थे। उत्तर कोलकाता में शोभाबजार के अहिरिटोला में इंडियन एक्सप्रेस समूह का दफ्तर था। प्रेस के भीतर भी दुर्गापूजा होती थी।एकदम बगल में बड़ा सा अहिरीटोला पूजा पंडाल। इसके पीछे शोभाबजार राजवाड़ी।आसपास दर्जनों पूजा पंडाल।जिनमें चोर बागान भी शामिल।
आधे घंटे, एक घंटे की दूरी पर तमाम विख्यात पंडाल।दफ्तर से ही हमें भीड़ की हलचल मालूम होती रहती थी। लेकिन हमारे सामने कभी भगदड़ नहीं मची।
हां, कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन हर बार स्थिति नियंत्रित कर ली गई। जैसे वर्ष 2015 का हादसा (देशप्रिय पार्क): 19 अक्टूबर 2015 को दक्षिण कोलकाता के देशप्रिय पार्क दुर्गा पूजा पंडाल में भी भारी भीड़ और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई थी।
• वजह और नुकसान: वहां दुनिया की सबसे ऊंची (88 फुट) दुर्गा प्रतिमा देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, जिसके कारण मची अफरा-तफरी में 11 लोग घायल हो गए थे और सुरक्षा कारणों से पंडाल को दर्शन के लिए बंद करना पड़ा था।
रात के दो,तीन,चार बजे पूरे महानगर और उपनगरों की परिक्रमा करके हम सोदपुर अपने घर पहुंचते थे। रात भर ट्रेन बस चलती है।पूजा देखकर लौटने वाली भीड़ और भोर में पूजा देखने जा रही भीड़ में दफ्तर की गाड़ी से भी चलना मुश्किल होता था। तेज बारिश, आंधी तूफान में भी भीड़ रहती ही है।
इस साल सत्ता परिवर्तन हुआ है।। भाजपा की सरकार है और धर्म की राजनीति है।फिरभी चूक कहां हुई?
घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया है. इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य घायलों का हाल जानने अस्पताल पहुंच गए हैं. दुर्घटना में 17 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 35 लोग घायल हैं.
पूजा आयोजकों का कहना है कि पूजा पंडाल में भीड़ उमड़ रही थी. इस दौरान बारिश होने लगी और बारिश की वजह से लोग पंडाल में घुसने लगे. इस दौरान ही यह दुर्घटना घटी. यह दुर्घटना करीब शाम साढ़े सात बजे घटी. दुर्घटना में चार-पांच लोगों के घायल होने की सूचना है.
बता दें कि सप्तमी की शाम को मां दुर्गा के दर्शन के लिए मंडप में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि तिल रखने की जगह नहीं थी. हादसा शायद मंडप का कोई हिस्सा या स्ट्रक्चर गिरने से हुआ होगा. इस अचानक हुई घटना से पल भर में दहशत फैल गई.
एक दर्शनार्थी ने कहा, मैंने सुना कि मंडप का एक हिस्सा गिर गया था. सब लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. वे गिर रहे थे, और कुचले गए. वहीं, अन्य दर्शनार्थी का कहना है कि भारी भीड़ थी. बारिश के दौरान लोग बचने के लिए मंडप में घुसने लगे और इसी दौरान भारी भीड़ बढ़ गई और ज्यादा लोग एक साथ घुसने से भगदड़ मच गई.
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