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Wednesday, July 11, 2012

राजनीति से अवकाश क्यों नहीं

http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/20-2009-09-11-07-46-16/23893-2012-07-11-06-15-41

Wednesday, 11 July 2012 11:44

पुष्परंजन 
जनसत्ता 11 जुलाई, 2012:चीन राजनीति का नया इतिहास रचने की तैयारी में है। इस साल नवंबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की अठारहवीं कांग्रेस में राष्ट्रपति हू जिनताओ, प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ समेत इस देश के पचीस दिग्गज नेता राजनीति से अवकाश लेने की घोषणा करेंगे। अड़सठ साल के राष्ट्रपति हू जिनताओ और सत्तर पार कर चुके प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ उम्र के जिस पड़ाव पर राजनीति से संन्यास ले रहे हैं, उससे यह बहस छिड़नी तय मानिए कि आखिर राजनीति में बने रहने की आयु सीमा क्या हो। 
चीन में हर पांच साल पर पार्टी कांग्रेस इसलिए भी होती है, ताकि नीतियों में परिवर्तन की जरूरत महसूस हो तो वह किया जा सके। बाहर से सीसीपी यानी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में एका दिखाने की कोशिश की जाती है, पर वास्तविकता यह है कि सीसीपी दो ध्रुवों में बंटी है। वहां गांव-कस्बों में रहने वाले आम आदमी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता कम हो रहे हैं और शहरी मध्यवर्ग और तेजी से मध्य से उच्चवर्ग की तरफ जा रही जनसंख्या को नेतृत्व देने वाले नेता बढ़ रहे हैं। चीन में इस समय सैंतीस प्रतिशत से अधिक जनता को मध्यवर्ग की श्रेणी में रखा गया है, वर्तमान में इसे ही वास्तविक वोट बैंक माना जा रहा है। 
माओ का देश मध्य और उच्चवर्ग के इर्दगिर्द घूमने लगा है। नौ सदस्यीय सर्वशक्तिशाली 'पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी' से सात लोग इस बार सेवानिवृत्त होंगे। इनकी जगह युवा और कॉरपोरेट घराने से जुडेÞ नेताओं को लाने की तैयारी है। बारह सदस्यीय केंद्रीय सैन्य आयोग से भी सात पुराने जाएंगे, और इनके बदले अभिजात नेताओं को भरने की तैयारी है। पार्टी कांग्रेस से पहले माहौल बनाया जा रहा है कि राजनीति से रिटायर होने की उम्र सीमा अड़सठ साल तय हो ही जाए।
सर जॉन मेजर सात साल तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे। दो मई 1997 को प्रधानमंत्री पद छोड़ने के दो साल बाद जॉन मेजर ने राजनीति से अवकाश लेने की घोषणा कर दी। इसके बाद ब्रिटेन के राजनेता इस बहस से कतराने लगे कि वे कब अवकाश प्राप्त कर रहे हैं। ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संसद में दो ऐसे मौके आए जब आयरलैंड के प्रधानमंत्री बर्टी अहर्न से मेरी बातचीत हुई। 2003-04 के दौरान दोनों बार बातचीत में बर्टी का जोर राजनीति से अवकाश लेने पर केंद्रित रहा था। 2010 के दिसंबर में बर्टी साठ साल के हो जाते, लेकिन इससे पहले ही बर्टी ने राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी।
आयरलैंड के प्रधानमंत्री रहे और चौंतीस साल तक सांसद रह चुके बर्टी अहर्न कोई 'साबरमती के संत' नहीं हैं कि राजनीति से उनका मोहभंग हो रहा था। 1993-94 के बीच बर्टी अहर्न व्यापारियों से उनचालीस हजार पौंड उगाही के विवाद में फंसे थे। बाद में मीडिया को दिए बयान में बर्टी ने माना था कि व्यापारियों से उन्होंने 'उधार' में पैसे लिए थे। आपको जान कर हैरानी होगी कि उनचालीस हजार पौंड घूस लेने पर हुई जांच में पंद्रह साल लगे और खर्च हुआ इक्कीस करोड़ पौंड। आखिरकार आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री बर्टी अहर्न घूस लेने के दोषी पाए गए। 
आयरलैंड की पार्टी 'फिएन्ना फेल' बर्टी अहर्न को बाहर निकालती, उससे पहले बर्टी ने 24 मार्च 2012 को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राजनीति से अवकाश का एलान करने वाले बर्टी पता नहीं क्यों अपनी पार्टी से चिपके रहे। ऐसी स्थिति को क्या कहें, पूर्व प्रधानमंत्री बर्टी अहर्न ने राजनीति को अलविदा कहा या राजनीति ने उन्हें विदा कर दिया? मार्च 2012 में आयरलैंड जैसी ही घटना पश्चिम अफ्रीकी देश लाइबेरिया में हुई। 
लाइबेरिया के मुख्य विपक्षी दल 'कांग्रेस फॉर डेमोक्रेटिक चेंज' के नेता विंस्टन टबमैन ने छह मार्च को राजनीति से अवकाश लेने का एलान किया। उससे एक दिन पहले विंस्टन टबमैन को उनकी पार्टी ने निष्कासित करने का प्रबंध कर लिया था। टबमैन पर पार्टी तोड़ने और भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा था। 
यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि क्या कभी किसी अमेरिकी नेता ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है? इस संदर्भ में अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन का नाम आता है, जिन्होंने दो बार राष्ट्रपति रहने के बाद तीसरी बार इस पद के लिए चुनाव लड़ने से मना किया और 1796 में राजनीति से 'रिटायर' होने की घोषणा कर दी। 17 सितंबर 1787 कोे लागू अमेरिकी संविधान में तब तीसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने का प्रावधान था। सड़सठ साल की उम्र में जॉर्ज वाशिंगटन गुजर गए। उनके कद का फिर कोई ऐसा अमेरिकी नेता नहीं हुआ, जिसने सत्ता और राजनीति त्यागने का संकल्प किया हो। खैर, 21 मार्च 1947 को बाईसवें संविधान संशोधन द्वारा तय किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति सिर्फ दो बार चुने जा सकेंगे।
कनाडा के नेता भी सियासत को अलविदा कहने में आगे रहे हैं। पियरे इलियट ट्रूदेऊ, मनमोहन सिंह की तरह अपने समय के विद्वान, संजीदा और राष्ट्र के लिए समर्पित प्रधानमंत्री माने जाते थे। पंद्रह साल तक प्रधानमंत्री पद पर रहने के बाद पियरे इलियट ट्रूदेऊ ने 30 जून 1984 को राजनीति से रिटायर हो जाने की घोषणा कर दी। कनाडा के क्यूबेक प्रांत के स्वायत्त होने के सवाल पर कराए गए मतसंग्रह में विफल होने से पियरे परेशान थे। आर्थिक मोर्चे पर भी पियरे ट्रूदेऊ कनाडा की जनता को संतुष्ट नहीं कर पाए।

एफडब्ल्यू डी क्लार्क दक्षिण अफ्रीका के सातवें और अंतिम श्वेत राष्ट्रपति थे। 1994 तक   वे राष्ट्रपति पद पर रहे। 1997 में डी क्लार्क ने राजनीति से रिटायर होने की घोषणा कर दी। उसी साल सत्ताईस अप्रैल को दक्षिण अफ्रीका में आम चुनाव हुआ और नेल्सन मंडेला पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। एएनसी नेता नेल्सन मंडेला ने अपने सार्वजनिक जीवन में जो दो बड़े धमाके किए, उनमें से पहला था 1996 में पत्नी विनी मंडेला से तलाक, और दूसरा, 1999 में राजनीति का परित्याग। मंडेला तब इक्यासी साल के थे। पूर्वी एशिया की ओर देखें तो मलेशिया के चौथे प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का नाम आता है, जिन्होंने 2003 के अक्तूबर में राजनीति से अवकाश लेने का निर्णय किया था। 
पुरानी बातों से बाहर निकलते हैं और वर्तमान की चर्चा करते हैं। जर्मन साप्ताहिक 'फ्रैंकफर्टर आल्गेमाइने जोन्टाग त्साइटुंग' ने पंद्रह जून, रविवार के संस्करण में छापा कि ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद 2013 में राजनीति से निवृत्त हो रहे हैं। अगले साल की शुरुआत में अहमदीनेजाद का दूसरा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अहमदीनेजाद ने जर्मन साप्ताहिक से कहा था कि आठ साल बहुत हुए, अब मुझे विश्वविद्यालय में अकादमिक कार्य करने हैं। 
पचपन साल के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद हाइड्रोलिक इंजीनियर रह चुके हैं और 1997 में 'ट्रांसपोर्ट सिस्टम' पर शोध में उन्हें पीएचडी की उपाधि भी मिल चुकी है। लेकिन अमेरिका, इजराइल और पूरे यूरोप की नाक में दम करने वाले राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद क्या सिर्फ अकादमिक अभिरुचि के कारण राजनीति छोड़ रहे हैं, यह बात गले नहीं उतरती।
लेकिन क्या अपने देश में राजनेता रिटायर होने की उम्र पर संजीदा होकर सोचते भी हैं? इस साल 24 मई को गुना से खबर आई कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह राजनीति से सेवामुक्त होने के बारे में गंभीर हैं। उन्होंने कहा, 'अब समय आ गया है कि हमारी उम्र के नेता राजनीति से रिटायर हों और उनकी जगह नौजवान नेतृत्व संभालें।' दिग्विजय सिंह पैंसठ साल के हो चुके हैं। उनके प्रवचन का आशय यह तो नहीं था कि राजनीति से रिटायर होने की उम्र सीमा पैंसठ साल हो?
यह बात भी आई-गई हो गई। 2004 में यही सवाल कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी उठाया था। सचिन पायलट को जैसे-तैसे शांत कराया गया। पिछले महीने राकांपा नेता शरद पवार ने बयान दिया कि 2014 का आम चुनाव नहीं लड़ेंगे। तो क्या वाकई पवार राजनीति से सेवानिवृत्त हो रहे हैं? कोई खास चुनाव नहीं लड़ना और राजनीति को हमेशा के लिए छोड़ देना, दो अलग-अलग बातें हैं। 
कहने के लिए दलाई लामा भी राजनीति से अवकाश ले चुके हैं, लेकिन आए दिन उनके राजनीतिक बयानों से शक होता है कि उन्होंने राजनीति से संन्यास लिया है। इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी उदाहरण के रूप में हैं। 30 दिसंबर 2005 को पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मुंबई की सभा में विधिवत घोषणा की थी कि मैं राजनीति से रिटायर हो रहा हूं। तबसे शायद ही उन्होंने कोई राजनीतिक बयान दिया हो। फिर भी भाजपा के किसी बडेÞ बुजुर्ग नेता ने वाजपेयी का अनुसरण नहीं किया, न ही भारतीय जनता पार्टी ने कभी इस गंभीर विषय पर विचार किया। 
भारत में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की उम्र में अवकाश ग्रहण करते हैं। अपने देश में यह शायद सेवानिवृत्त होने की अधिकतम उम्र सीमा है, जो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के जजों को हासिल है। देश में लगभग सभी सरकारी या कॉरपोरेट महकमों में सेवानिवृत्त होने की उम्र तय है। तो फिर राजनीति को ऐसा पवित्र स्थल क्यों बनाया गया है, कि इस पर बहस ही न हो?
ठीक से सर्वेक्षण हो, तो 'डाइपर' पहन कर राजनीति करने वाले बुजुर्ग राजनेताओं की खासी संख्या निकल आएगी। 13 मई 2012 को संसद के साठवें स्थापना दिवस पर इसकी चर्चा होते-होते रह गई कि हमारे कितने सांसद, संसद की उम्र से भी ज्यादा के हैं। कई तो इतने बुजुर्ग हैं कि चलने-फिरने में लाचार हैं, लेकिन मंत्री, राज्यपाल या लाभ वाले बडेÞ पद का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। यहां मेरी मंशा बढ़ती उम्र या बीमार, बुजुर्ग राजनेताओं पर तंज करना नहीं है। देश में शायद ही किसी ने कम उम्र के व्यक्ति को राज्यपाल के पद पर देखा हो। इसलिए यह सिर्फ नारा भर रह गया, 'सिंहासन खाली करो, कि जनता आती है।' दूसरी पीढ़ी के अधिकतर नेता इंतजार में ही उम्र गंवा देते हैं।
यह गौर करने की बात है कि दुनिया के जिस हिस्से में भी राजनेताओं ने रिटायर होने की घोषणा की, उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की पूरी पारी खेली। तो क्या उनके रिटायर होने की घोषणा को हम बहुत बड़ा त्याग मान लें? सबके बावजूद राजनीति से अवकाश-प्राप्ति बहस का विषय तो है, मगर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त वाइएस कुरैशी इसे क्रेजी (पागलपन भरा) आइडिया कहते हैं। क्या सचमुच वैसा ही विचार है?

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अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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