THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER

http://youtu.be/NrcmNEjaN8c The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today. http://youtu.be/NrcmNEjaN8c Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program ______________________________________________________ By JIM YARDLEY http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP

[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also. He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA

THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR

Published on 10 Apr 2013 Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya. http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk

THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM

Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia. http://youtu.be/lD2_V7CB2Is

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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Saturday, December 20, 2014

जरा अपने घर में भी झांक कर देख लें घर वापसी कराने वाले

जरा अपने घर में भी झांक कर देख लें घर वापसी कराने वाले

जरा अपने घर में भी झांक कर देख लें घर वापसी कराने वाले

Posted by: हस्तक्षेप 2014/12/20 in आपकी नज़र Leave a comment

 

   मानव जाति की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी है, जो कि शक्ति के स्रोतों (आर्थिक-राजनीतिक-धार्मिक) का लोगों के विभिन्न तबकों और उनकी महिलाओं के मध्य असमान बंटवारे से उत्पन्न होती रही है। यही वह समस्या है जिसके खात्मे के लिए गौतम बुद्ध, मज्दक, सवोनरोला, विलियम गाड्विन, सेंट साइमन,वाल्टेयर, रॉबर्ट ओवन, मार्क्स, माओ, लेनिन, आंबेडकर इत्यादि जैसे ढेरों महामानवों का उदय हुआ। इनके प्रयत्नों से मानव जाति की सबसे बड़ी समस्या से पार पाने की दिशा में ठोस काम हुए, बावजूद इसके कमोबेश इसकी व्याप्ति दुनिया में सारी जगह है। किन्तु इस मामले में भारत जैसी बदतर स्थिति विश्व के अन्य किसी देश में नहीं है। दुनिया के किसी भी देश में हजारों साल के परम्परागत रूप से विशेषाधिकारयुक्त व सुविधासंपन्न अल्पजन लोगों का शक्ति के स्रोतों पर 80-85 प्रतिशत कब्ज़ा नहीं है। इस सुविधासंपन्न वर्ग द्वारा खड़ी की गयी विषमता की खाई के कारण देश गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा, विच्छिन्न्तावाद, आतंकवाद के दलदल में बुरी तरह फँस गया है। विषमता की यह स्थिति पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों का परिणाम है, जिन्होंने शक्ति के स्रोतों के वाजिब बंटवारे की दिशा में सम्यक कदम नहीं उठाया। ऐसे में जब अच्छे दिन आने का सपना दिखा कर भारी बहुमत के साथ भाजपा की सरकार सत्ता में आयी तब इस पार्टी के ख़राब रिकार्ड के बावजूद अंततः इस लेखक को उम्मीद थी कि राष्ट्र-भक्ति का सब समय उच्च उद्घोष करने वाली यह पार्टी इस बार विषमता के खात्मे की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाएगी तथा विभाजनकारी भावनात्मक मुद्दों से दूर रहेगी, जिसके लिए यह देश-विदेश में बदनाम है। किन्तु हुआ उल्टा। विषमता का मुद्दा पता नहीं कहाँ खो गया और अभूतपूर्व रूप से उभरकर आ गया वह विभाजनकारी मुद्दा जिसे तुंग पर पहुंचाने की इस पार्टी और इसके सहयोगी संगठनों को महारत हासिल है।

   आज इस पार्टी के सहयोगी संगठनों के सौजन्य से सारे आवश्यक मुद्दे पृष्ठ में चले गए हैं, मुख्य मुद्दा बन गया है धर्मान्तरण जिसे 'घर वापसी' का नाम दिया जा रहा है। यही आज सड़क से लेकर संसद और बौद्धिक बहसों का प्रधान मुद्दा बन गया है। अभी तक घर वापसी के निशाने पर कुछ खास जिले ही थे, किन्तु अब भाजपा के मातृ संगठन संघ के एक अनुषांगिक संगठन की ओर से 2021 तक भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खुली घोषणा कर दी गयी है। इसके नेता ने खुलकर कह दिया है कि 2021 तक मुस्लिम और ईसाईयों को हिन्दू बना लिया जायेगा। बहरहाल संघ के तीन दर्जन अनुषांगिक संगठनों की गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि यह आर्थिक और सामाजिक विषमता को पूर्ववत रखना चाहता है। ऐसा इसलिए कि जिन विशेषाधिकार युक्त व सुविधासंपन्न अल्पजनों का शक्ति के समस्त स्रोतों पर प्रायः एकाधिकार है, यह संगठन उन्हीं के हित का पोषण करने के उद्देश्य से बना है। ऐसे में अल्पजनों के प्रभुत्व को अटूट रखने लिए यह वंचितों की उर्जा विषमता के खात्मे की बजाय अन्य दिशा में मोड़ना चाहता है। इसलिए ही वह जज्बाती मुद्दे को तूल दे रहा है। बहरहाल आज की तारीख में जब सुविधाभोगी वर्ग के हित में वंचितों की उर्जा घर वापसी में लगाने की दिशा में संघ के आनुषांगिक संगठन सुपरिकल्पित रूप से आगे बढ़ रहे हैं, यह लेखक उनसे अपने घर में झांकने की गुजारिश कर रहा है। क्या जिस घर में वर्षों पूर्व घर छोड़े लोगों की वापसी करने की कवायद हो रही है,उसमें पहले से रह रहे लोग संतुष्ट हैं? मेरा प्रश्न है क्या कुछ विशिष्ट किस्म के ब्राह्मणों को छोड़कर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण से कई सहस्रों मानव प्रजातियों में बंटे हिन्दू स्त्री-पुरुषों, जिनमे रंचमात्र भी आत्मसम्मान और विवेक है, को हिन्दू धर्म में रहना चाहिए?

  याद करें भूमिहार, उपाध्याय, आचार्य, महापात्र, दुबे, तिवारी, चौबे वगैरह की नम्बुदरीपाद, वाजपेयी, मिश्र इत्यादि ब्राह्मणों के समक्ष सामाजिक मर्यादा। क्या इनकी तुलनात्मक सामाजिक मर्यादा हिन्दू धर्म से मुक्त होने के लिए प्रेरित नहीं करती? इसी तरह हिन्दू समाज में सिंहों की भांति विचरण करने वाले क्षत्रियों से हिन्दू धर्म यह कहता है कि सत्तर वर्ष के क्षत्रिय को चाहिए कि वह दस वर्ष के ब्राह्मण बालक को पिता जैसा मानते हुए प्रणाम करे, और बड़ी-बड़ी मूंछे फहराए क्षत्रिय ऐसा करते भी हैं। क्या यह शास्त्रादेश क्षत्रियों को हिन्दू-धर्म से मोहमुक्त होने के लिए प्रेरित नहीं करता ? और हिन्दू धर्म में वैश्य मात्र वित्तवान होने के अधिकार से समृद्ध हैं, पर ब्राह्मण और क्षत्रियों के समक्ष उनकी हीनतर स्थिति क्या हिन्दू धर्म के परित्याग का आधार नहीं बनाती? आत्मसम्मान के अतिरिक्त हिन्दू-धर्म अर्थात वर्ण-धर्म के मात्र आंशिक अनुपालन से उपजी विवेकदंश की समस्या तो इनके साथ है ही, पर आत्मसम्मान और विवेक विसर्जित कर भी सवर्णों के हिन्दू धर्म में रहने की कुछ हद तक युक्ति है क्योंकि इसके विनिमय में उन्हें हजारों साल से शक्ति के स्रोतों में पर्याप्त हिस्सेदारी मिली है। पर, आत्मसम्मान व विवेक से समृद्ध सवर्ण नारियां व शुद्रातिशुद्रों से कैसे कोई प्रत्याशा कर सकता है कि वे हिन्दू धर्म में बने रहेंगे?

  जिन्हें हिन्दू माना जाता है उनका हिंदुत्व वर्ण-धर्म के पालन पर निर्भर है। और वर्ण-धर्म के पालन का अर्थ है कि सच्चा हिन्दू वर्ण और कर्म-संकरता से दूर रहेगा। वर्ण-संकरता से बचने का मतलब एक सच्चे हिन्दू को जाति सम्मिश्रण की सम्भावना को निर्मूल करते जाना होगा। वहीँ कर्म-संकरता से बचने का एकमेव मार्ग प्रत्येक जाति/वर्ण के हिन्दू को जन्मसूत्र से निर्दिष्ट कर्म/पेशे में ही लगा रहना होगा। अर्थात चमार व दुसाध जैसे चर्मकारी व सुअर पालन छोड़कर अध्यापक, पुजारी सैनिक इत्यादि नहीं बन सकते, उसी तरह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य क्रमशः हलवाही, कुलीगिरी, धोबीगिरी इत्यादि जैसा सेवा कर्म नहीं कर सकते। लेकिन किसी भी समाज को वर्ण व कर्म संकरता से बचाए रखना असंभव कार्य लगता है क्योंकि यह मानवीय इच्छा की पूर्णतया हत्या किये बिने संभव ही नहीं है। वैसे दुनिया में हिन्दू समाज को छोड़कर अन्य समाजों ने इसकी जरुरत ही महसूस नहीं की। लेकिन भारत में असंभव सा काम ब्रिटिशराज स्थापित होने के पूर्व तक ब्राह्मणों के शास्त्रों और क्षत्रियों शस्त्रों के सम्मिलित प्रयास से सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया। हिन्दू समाज को वर्ण व कर्म-संकरता से बचाए रखने में सवर्ण नारियों और शुद्रातिशुद्रों को जिस तरह इस्तेमाल होना पड़ा है, वह अपने आप में एक इतनी गहरी तिक्त अभिज्ञता है जो इनके आत्मसम्मान को गहराई से ललकारते हुए हिन्दू-धर्म से भागने की विकत आवाज लगाती है।

   हिन्दू- धर्म स्त्रियों को किस रूप में देखता है इस तथ्य से गाँव की अनपढ़ चमारिन, दुसाधीन, अहिरिन वगैरह तो अनजान हो सकती हैं, किन्तु इंदिरा गाँधी, किरण बेदी, ऐश्वर्या राय बनने की आकांक्षी शहरी पढ़-लिखी महिलाएं तो जानती ही हैं कि हिन्दू-धर्म नारियों को जिस रूप में देखता है उससे कोई भी स्वाधीन नारी एक पल भी इसमें नहीं रहना चाहेगी। वैसे तो आमतौर पर सभी नारियों को ही कुटिल, मिथ्याभाषिणी, रूप और उम्र का विचार किये बिना सदैव परपुरुष के सम्भोग की आकांक्षी इत्यादि बताते हुए हिन्दू-धर्म उन्हें सदा पुरुष की छाया में रखने की हिदायत देकर नीच साबित करता रहता है। किन्तु वर्ण-संकरता से समाज को बचाए रखने के लिए सती-विधवा-बालिका विवाह और बहु-पत्निवादी-प्रथा के माध्यम से उच्च-वर्ण (ब्राह्मण-क्षत्रिय) नारियों का जीवन जिस तरह नारकीय बनाया गया है, वह किसी भी सभ्य व सुशिक्षित नारी को हिन्दू-धर्म परित्याग की घोषणा  करने के लिए प्रेरित  करेगा। पर भारत की सभ्य व सुशिक्षित माने जाने वाली नारियां, जो मुख्यतः सवर्ण समुदाय से हैं, अभी भी पराधीन हैं और पति की दासी के रूप में जीवन का उपभोग करने की अभ्यस्त हैं, इसीलिए हिन्दू-धर्म में बनी हुई हैं. लेकिन इन्होने भी अब खुद को दलित कहना शुरू कर दिया है। जिस दिन इनमें आंबेडकरवाद से दीक्षित दलितों का अहसास आ जायेगा उस दिन….

      जहां तक अहसास का सवाल है सवर्ण नारियों की तरह सछूत- शूद्र (ओबीसी) भी इससे मीलों दूर हैं। एक मशहूर एक्टिविस्ट के मुताबिक, 'विदेशों में जिन्हें स्लेव (दास) कहते हैं, हिन्दू धर्म में वही शूद्र हैं। जिस दिन शूद्रों के अपने शुद्र्त्व का अहसास हो जायेगा उस दिन भारत में सामाजिक क्रांति हो जाएगी।' शूद्र चूंकि आत्मसम्मान और दासत्व के अहसास से शून्य हैं इसलिए ही ये अभी भी हिन्दू धर्म में बने हुए हैं। पर क्या एक मिनट के लिए भी इनके हिन्दू धर्म में रहने की युक्ति है? आजहिन्दू आरक्षण-व्यवस्था (वर्ण-व्यवस्था) के विकल्प के रूप में विकसित अम्बेडकरी आरक्षण व्यवस्था के सहारे कई हजार सालों से शक्ति के स्रोतों से पूरी तरह बहिष्कृत शुद्रातिशूद्र (दलित –पिछड़े) शासक-प्रशासक, अध्यापक, डाक्टर, इंजीनियर, व्यवसायी इत्यादि बनकर बेहतर जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं। ऐसे लोग यदि उपलब्धि कर लें कि हिन्दू-धर्म के कारण ही हजारों सालों से उनके पुरुखों को शक्ति के स्रोतों से पूरी तरह वंचित होकर सवर्णों की मुफ्त सेवा में लगा रहना पड़ा तो क्या उनका आत्मसम्मान एक पल भी हिन्दू-धर्म में बने रहने की इजाजत देगा?

  आज आंबेडकरवाद से दीक्षित जिन लोगों में आत्मसम्मान व विवेक जाग्रत हो गया है,वे हिन्दू धर्म का परित्याग कर रहे हैं.अफ़सोस यही है कि ऐसा सिर्फ शिक्षित दलितों में ही हो पाया है, सवर्ण नारियों और शूद्रों में जाग्रत होना बाकी है। पर क्या इनका इनका आत्मसम्मान व विवेक सदा सुप्त ही रहेगा? नहीं संघ के लोग यह जान गए हैं कि देर- सवेर उनका भी आत्मसम्मान व विवेक जाग्रत होगा, फिर हिन्दू-धर्म तो वे हिन्दू धर्म को वीरान कर देंगे। इस अप्रिय भविष्य को ध्यान में रखकर ही सवर्णवादी संघ के आनुषांगिक संगठन मुस्तैद हो गए हैं। उनके घर वापसी अभियान का मुख्य लक्ष्य यह है कि धर्मान्तरण के मुद्दे को गरमा कर किसी तरह थोक भाव से होने वाले धर्मान्तरण पर रोक लगाने का कानून बनवा लिया जाय। बिना ऐसा किये वे अपने घर में रह रहे लोगों को घर छोड़ने से रोक नहीं पाएंगे

 O-    एच. एल. दुसाध

 

About The Author

एच. एल. दुसाध, लेखक प्रख्यात बहुजन चिंतक हैं। वे बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं

कुछ न कुछ पका है दिल्ली में! लेकिन बंगाल दखल करने का ख्वाब फिलहाल संघपरिवार का पूरा होना मुश्किल! असम में संघ परिवार 2021 तक भारत को मुसलमानों और ईसाइयों से मुक्त करने का संकल्प दोहरा रहा है तो निशाने पर हैं बौद्ध,सिख और जैन धर्म के अनुुयायी भी। कोलकाता में अपनी पिछली सभा में अमित साह कह गये हैं कि बंग विजय के बिना भारत विजय असंभव है।उनका तेवर ऐसा है कि जैसे किसी हमलावर विदेशी सेना के सिपाहसालार किसी देश के एक के बाद एक जनपद को रौंदता चला जा रहा हो।बहरहाल बंगविजय का सपना कम से कम 2016 में तो पूरा होते नहीं दीख रहा है। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

कुछ न कुछ पका है दिल्ली में!


लेकिन बंगाल दखल करने का ख्वाब फिलहाल संघपरिवार का पूरा होना मुश्किल!

असम में संघ परिवार 2021 तक भारत को मुसलमानों और ईसाइयों से मुक्त करने का संकल्प दोहरा रहा है तो निशाने पर हैं बौद्ध,सिख और जैन धर्म के अनुुयायी भी।




कोलकाता में अपनी पिछली सभा में अमित साह कह गये हैं कि बंग विजय के बिना भारत विजय असंभव है।उनका तेवर ऐसा है कि जैसे किसी हमलावर विदेशी सेना के सिपाहसालार किसी देश के एक के बाद एक जनपद को रौंदता चला जा रहा हो।बहरहाल बंगविजय का सपना कम से कम 2016 में तो पूरा होते नहीं दीख रहा है।



एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास


भाजपाई पहल पर बने तीनों छोटे राज्यों उत्तराखंड,झारखंड और छत्तीसगढ़ में संघ परिवार की विजययात्रा भले ही केकवाक साबित हो,ऐसा अनार्यभूमि के बाकी हिस्सों में भी हो कोई जरुरी नहीं।बंगाल,ओड़ीशा,तमिलनाडु और असम जीतना उतना अासान भी नहीं है।बहरहाल,ताजा परिदृश्य के मुताबिक पश्चिम बंगाल ने राजनीतिक परिदृश्य में 2014 में निश्चित रूप से बदलाव महसूस किया। इस साल लोकसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन कर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा एक ओर एक मजबूत ताकत के रूप में उभरी वहीं शारदा चिट फंड घोटाले एवं बर्द्धमान विस्फोट का लाभ उठाते हुये उसने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को`बैकफुट' ला दिया।



असम में संघ परिवार 2021 तक भारत को मुसलमानों और ईसाइयों से मुक्त करने का संकल्प दोहरा रहा है तो निशाने पर हैं बौद्ध,सिख और जैन धर्म के अनुुयायी भी।मीडिया की खबरें से मिल रहे तथ्यों के आदार पर जमीनी हकीकत के बरखिलाफ बंगाल में केसरिया गुब्बारे खूब उड़ाये जा रहें है और एकमुश्त कश्मीर और तमिलनाडु समेत पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत यूपी बिहार एमपी राजस्थानमहाराष्ट्र की तर्ज पर घनघोर घृणा अभियान की पूंजी के दम पर जीत लेने की तैयारी में है संघ परिवार।


कोलकाता में अपनी पिछली सभा में अमित साह कह गये हैं कि बंग विजय के बिना भारत विजय असंभव है।उनका तेवर ऐसा है कि जैसे किसी हमलावर विदेशी सेना के सिपाहसालार किसी देश के एक के बाद एक जनपद को रौंदता चला जा रहा हो।बहरहाल बंगविजय का सपना कम से कम 2016 में तो पूरा होते नहीं दीख रहा है।


तो मोहन भागवत ने खुल्ला ऐलान करते ङुए घरवापसी जारी रखने का उद्घोष कोलकाता की सरजमी से किया जहां तीस फीसद से ज्यादा मुसलमान हैं और एक तिहाई सीटों पर मुसलमानों के वोट निर्मायक हैं।


हिंदू समाज जागने लगा है। भारत में रह रहे हिंदुओँ को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि, हम किसी अन्य देश से यहां नहीं आये। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' को संबोधित करते हुए य बातें  कहीं।


वाममोर्चा शासन में जहां संघ की शाखाएं भी बंगाल में नहीं लगीं,ममता बनर्जी की नाक के नीचे शंग परिवार की यह युद्धघोषणा निश्चय ही ममता बनर्जी और परिवर्तन के बाद सत्ता में आय़ी मां माटी मानुष सरकार की महान उपलब्धि है।


मोहन भागवत ने जो कहा,वह असम में मुसलमानों और ईसाइयों के सफाये की घोषणा की पृष्ठभूमि है।उनने कहा कि घुसपैठ के चलते भारत में हिंदुओँ की संख्या घट रही है। एक वक्त था जब भारत में रहने वाले सभी हिंदु हुआ करते थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या घट कर देश की कुल जनसंख्या का ८२ प्रतिशत हो चुकी है। उन्होंने आशंका प्रकट करते हुए कहा कि कहीं यह संख्या घट कर ४२ प्रतिशत न हो जाये। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त कराने का संकल्प जाहिर कियाŸतथा गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की। सम्मेलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय नेताओँ व विभिन्न पंथों से जुडे धर्मगुरुओं व संतो ने भी संबोधित किया। लगभघ सभी वक्ताओं ने qहदू समाज को संगठित और सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया व हिंदुओं के लिये विश्व हिंदू परिषद द्वारा दुनिया भर में किये जा रहे कार्यों की सराहना की।


बहरहाल,हुआ इतना है कि सीबीआई महिमा की वजह से कटघरे में हैं ममता बनर्जी और एक के बाद एक दागी मंत्री सासद वगैरह वगैरह जेल की सलाखों के पीछे हैं।तपिश और दबिश दोनों ममता बनर्जी के खिलाफ हैं।


केंद्र के खिलाफ दिल्ली और कोलकाता में जिहाद का ऐलान करने वाली ममता बनर्जी राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के अनुरोध पर नई दिल्ली रुक गयी और अचानक उनके साथ प्रधानमंत्री राष्ट्रपति भवन में भेंटा गये,यह गप्प बंगाल में किसी के गले उतर नहीं रहा है,जबकि जीएसटी बिल की शुरुआत से कड़ा  विरोध करने वाली ममता ने इसके सबसे भयंकर विरोधी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री जो अब प्रधानमंत्री बनकर उस कानून को बाराक बाबू के आगमन से पहले राज्यसभा में जरुरी बहुमत के बिना जैसे तैसे पासकराने की जुगत लगा रहे हैं,के साथ खड़ी दीख रही हैं।


बाकी कानून पास करने में भी तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के समर्थन बेहद निर्णायक साबित होेने वाला है।


ममता की दिल्ली यात्रा और उनकी आग उगलू प्रेस कांफ्रेंस के मध्य यकबयक जीएसटीबिल ममता की हरी झंडी के बिना लोकसभा में पेश करने वाले कारपोरेट वकील अरुण जेटली जो बीमा समेत तमाम सुधार कानून पास करने का दावा करने लगे हैं,उससे सीबीआई जांच का पुराना इतिहास दुहराया जाता नजर आ रहा है,जिसमें कटघरे में तो सारे के सारे क्षत्रप हुएकभी न कभी,लेकिन सजा अकेले लालू प्रसाद की हो गयी।बाकी सारे लोग छुट्टा घूम रहे हैं।



एक्जिट पोल में मीडिया ढाक ढोल पीटकर झारखंड में भाजपाई जीत का ऐलान कर रही है जबकि इकोनामिक टाइम्स ने खास हिंदुत्व के गढ़ जम्मू में नैसेटी ब्लो के लिए भाजपा को सतर्क पहले ही कर दिया है और कश्मीर में जो भारी मतदान हुआ है वह संग परिवार के खिलाफ है।


जाहिर है कश्मीर को जीत लेने का दावा करने वाला केसरिया मीडिया अब खामोश हैं।


पहलीबार कोलकाता नगरनिगम के चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री आ रहे हैं।किसी प्रधानमंत्री ने दिल्ली महापालिका के लिए कभी चुनाव प्रचार किया है या नहीं,इस बारे में हमें जानकारी नही है।संघपरिवार की शाखाएं बंगाल में खूब लग रही हैं और संघ संगठनों ने तो बाकायदा बंगाल जीतने का ऐलान ही कर दिया है।


प्रधानमंत्री से ममता की संजोगवश मुुलाकात के मध्य ही मुरझाये हुए जेलबंदी मदनमित्र जेल रवाना होने से पहले माकपा के तीन नेताओं रोबिन देब,मोहम्मद सलीम और सुजन चक्रवर्ती के जो शारदा फर्जीवाड़े में नाम गिना गये,उसके नतीजे देखना दिलचस्प होगा।


दरअसल संघ परिवार को असम और बंगाल का जनसंख्या विन्यास मालूम है।शत प्रतिसत धारिमिक ध्रूवीकरण हुआ तो अपर पक्ष भी खामोश बैठने वाला नहीं है और उनके वोट कश्मीर की तरह भाजपा विरोधी शक्तियों को पड़ने वाले हैं।


ममता को भगाने से ही बंगाल दखल संभव नहीं है,जाहिर है।इसके लिए वामदलों का सफाया जरुरी है और चुनावी पराजयों के बाद अब जो तेजी से गोलबंद होने लगे हैं।उत्तरी बंगाल में कांग्रेस के गढ़ अभी बने हुए हैं,जिन्हें ध्वस्त करने की भी चुनौती है।


अब बंगाल मिशन के तहत दरअसल भाजपा तृणमूल काग्रेस के अलावा कांग्रेस और वामदलों की घेराबंदी करने की तैयारी में हैं और गुल अभी और तरह तरह के खिलने वाले हैं।जाहिर है कि कड़कती सर्दियों में भी बागों में बहार है।


इसीलिए विहिप सम्मेलन में उमडे जनसैलाब को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत हिंदुओँ का देश है और हिंदू यहां पूरी तरह सुरक्षित हैं। उसे कहीं और जाने की जरूरत नहीं है। हिंदू अपनी भूमि छोड कर कहीं नहीं जायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक हिंदू समाज सिर्फ सहता रहा है लेकिन अब और सहने की जरूरत नहीं है।



विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडिया ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए घुसपैठ की समस्या पर गंभीर चिंता जाहिर की। घुसपैठ को भारत  के लिये बडा खतरा करार देते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से लाखों की तादाद में घुसपैठिये भारत में आ चुके हैं जो हिंदुस्तान के लिये खतरा पैदा कर रहे हैं।

लव जिहाद का मुद्दा उठाते हुए तोगडिया ने कहा कि इस अभियान के जरिये हिंदू लडके-लडकियों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा है। इसे कतई सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपने घर में ठहरने नहीं देने की अपील करते हुए कहा कि जो भारत के नागरिक नहीं है उन्हें घर किराये पर देना अपराध है।



राज्य में नरेन्द मोदी की लहर के सहारे मई में हुये लोकसभा चुनाव में भाजपा की झोली में 17 प्रतिशत मत आये जबकि 2011 में हुये विधानसभा चुनाव में पार्टी को राज्य में केवल चार फीसदी मत हासिल हुये थे। बहुकोणीय मुकाबले में, तृकां को सबसे अधिक लाभ मिला और राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 34 पर उसने कब्जा कर लिया। भाजपा के एक ताकत के रूप में उभरने के कारण बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव महसूस किया गया और पूर्व में एक मजबूत ताकत रही वाम किनारे चली गयी। वाम मोर्चे की वरिष्" सहयोगी माकपा बशीरहाट और चौरंगी विधानसभा सीटों पर हुये उपचुनाव में अपनी जमानत जब्त करवा बैठी।


भाजपा ने बशीरहाट सीट जीत ली जबकि चौरंगी सीट पर वह दूसरे नम्बर पर रही जहां तृकां ने चुनाव जीता। ना केवल अपने राजनीतिक विरोधियों बल्कि पार्टी के भीतर भी माकपा को आलोचना का शिकार होना जिससे बाद पार्टी ने अपने दो नेता अब्दुर रज्जाक मुल्ला और लक्ष्मण से" को `पाटी विरोधी गतिविधियों' के आरोप के कारण निलंबित कर दिया।


भाजपा के उभार को देखते हुये तृकां प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ हमले तेज कर दिये हैं और उनपर देश बेचने का आरोप लगाया और सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश के लिए भाजपा पर हमला किया।

कोई शक नहीं कि ताजा हालाते जो दीख रहे हैं,वे इस तरह हैं कि राजनीतिक परिदृश्य में कई करोड़ के शारदा घोटाले की गूंज सुनाई देती रही और सत्तारूढ़ पार्टी के परिवहन मंत्री मदन मित्रा और दो राज्यसभा सांसद सृंजय बोस और कुणाल घोष को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया जिससे पार्टी को बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा।

दो अक्तूबर को बर्द्धमान विस्फोट में जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के दो संदिग्ध आतंकवादी मारे गये थे और इस मुद्दे को लेकर भी राज्य सरकार पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य सरकार पर यह आरोप लगाते हुए हुए शिंकजा कसा कि इसमें भी सारधा घोटाले के धन का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, केन्द ने बाद में कहा कि जांच में अभी तक इस तरह के किसी भी लेन-देन का पता नहीं चला है जिसमें आतंकवादी गतिविधियों के लिए बांग्लादेश पैसा जा रहा हो।

इसी बीच ममता पर और दबाव बनाने के लिएशारदा घोटाले के मामले बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी है।गिरफ्तार मंत्री मदनमित्र को अदालत में पेश करने के दौरान समर्थकों की भारी भीड़ के देखते हुये शारदा घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के विशेष अपराध शाखा मामले को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकती है, ऐसा बताया जा रह है जिससे सत्ता खमे में जाहिरा तौर पर खलबली मच गयी है।

सीबीआई के एक सूत्र ने बताया 'शनिवार को अलीपुर अदालत में पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री मदन मित्रा को पेश करने के दौरान भारी भीड़ को देखते हुये हम लोग किसी दूसरे राज्य में मामले को स्थानांतरित करने के बारे में विचार कर सकते हैं।'

अदालत में मित्रा को पेश करने के लिए जाने से पहले और बाद में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के हजारों समर्थक अदालत परिसर के सामने जमा हो गये और उनमें से कई लोगों ने एसयूवी को घेर लिया जिसमें मंत्री और सीबीआई के एक अधिकारी बैठे हुये थे।

सूत्र ने बताया 'भीड़ उपद्रवी थी। हम लोगों ने पश्चिम बंगाल पुलिस प्रशासन से अगली बार 16 दिसंबर को फिर से मंत्री की पेशी के दौरान बेहतर व्यवस्था करने की मांग की है।' सूत्र ने बताया 'देखते हैं, क्या होता है। अगर 16 दिसंबर को स्थिति में सुधार नहीं होता है तब हम दूसरे विकल्प पर विचार करेंगे।'



Quite a new equation to help the passage of the all reform bills in the Parliamnet.The snow melts at last.

Quite a new equation to help the passage of the all reform bills in the Parliament.The snow melts at last.Mamata already hinted to support GST which was most opposed by then Gujarat Chief Minister Narenrda Bahi modi who is incidentally the Chief Minister of India and has an uphill task to pass all the reform Bills to serve US interest lest he should not be balmed for policy paralysis.
Uncle Sam is coming! Christmas or No Christmas!

Palash Biswas
16.12.2014 (7 photos)
Kolkata gets ready to be in a festive mood to celebrate Christmas and 

New Year.

Today, the 4th Kolkata Christmas Festival was inaugurated at Allen Park, 

Park Street.

From 18th December to 2nd January, 2015, as part of the festival, there 

will be Christmas Carols, Live Bands, cultural programs, food courts, 

entertainment zones and lots of fun. The entire area will be decorated 

with festival lights.

I invite all of you to come and enjoy the festivities.
Mamata Banerjee's photo.
Mamata Banerjee's photo.
Mamata Banerjee's photo.
Mamata Banerjee's photo.

Face the real threat before Obama comes!

Face the real threat before Obama comes!

The war against terror,terror strikes,Muslim Brotherhood and US economy of war,civil war,weapon and oil under dollar Hegemony in reference to the rise of Hindu Imperialism!

White House Declares Muslim Brotherhood Not Terrorists!

Not enough,The U.S. backed secret negotiations with the spiritual leadership of the Islamic State group, conducted by two al Qaeda-linked clerics and a former Guantanamo detainee, in a bid to secure the release of American hostage Peter Kassig, who changed his name to Abudul-Rahman after converting to Islam, according to an investigation carried out by the Guardian.

Palash Biswas

  1. The Muslim Brotherhood was founded in Ismailia, Egypt by Hassan al-Banna in March 1928 as an Islamist religious, political, and social movement.

  2. History of the Muslim Brotherhood in Egypt - Wikipedia, the ...

  3. en.wikipedia.org/wiki/History_of_the_Muslim_Brotherhood_in_Egypt

More about Muslim Brotherhood


As we welcome the US President Barack Obama on the republic day nad Indian Parliament passes all the reform bills slated for ethnic cleansing and before manusmriti rule becomes only monopoly regime in India killing rural India,Indian business and industry under bull run,we should be aware that the Peshawar strike was predestined on the day first when United States of America decided to handover the muslim world to Taliban and Al Qaeda it created during the cold war.


We must know that beside Taliban ,Al Qaeda,ISIS,Muslim brotherhood supported by United States of America may disintegrate despite the internal security network monitored by NASA,Pentagon,NATO,CIA,M16 and Mossad.


Mind you,he White House is declaring that the Muslim Brotherhood is not a terrorist group.


The move comes in response to a petition with 213,146 signatures on the White House's "We the People" site.


The petition states: "Muslim Brotherhood has a long history of violent killings and terrorizing opponents. Also MB has direct ties with most terrorist groups like Hamas."


Not enough,The U.S. backed secret negotiations with the spiritual leadership of the Islamic State group, conducted by two al Qaeda-linked clerics and a former Guantanamo detainee, in a bid to secure the release of American hostage Peter Kassig, who changed his name to Abudul-Rahman after converting to Islam, according to an investigation carried out by the Guardian.

The negotiation effort was the work of Stanley Cohen, a controversial New York attorney, who among others has represented Osama Bin Laden's son-in-law, Abu Gaith, in U.S judicial proceedings.

According to the Guardian, Cohen enlisted the help of Abu Muhammed al-Maqdisi, a jihadi scholar, radical Islamist cleric Abu Qatada, and an unnamed Kuwaiti who was a veteran of al Qaeda and a former Guantanamo prisoner.

In return for Kassig's life, the clerics were offering to ensure that al Qaeda would cease its criticism of ISIS as being without proper Islamic credentials.

Senior FBI officials were aware of the effort, and had agreed to pay thousands of dollars in expenses incurred by Cohen, according to the paper.

The negotiations, which went on for a number of weeks, collapsed after Jordanian security services arrested Maqdisi, despite an agreement secured by Cohen that the country would not intervene in their attempts to contact ISIS.

Cohen told the Telegraph that here was now "no chance" that Islamic factions opposed to ISIS' hostage-taking would try to secure the release of other captives.

Kassig was eventually murdered by his captors, and a graphic video was posted online last month purporting to show the aftermath of his killing.

The negotiations are not the first incidence of al Qaeda intervening on behalf of a Western hostage held by ISIS. The group also appealed for the release of British hostage Alan Henning, because it believed he was an innocent aid worker who was genuinely trying to help suffering Muslims, according to the U.K.'s Independent.

Al Qaeda has, in the past, also not shied away from expressing disquiet at the brutal tactics employed by other Islamist militant groups. In personal letters from Osama Bin Laden, described in Mark Bowden's book "The Finish: The Killing Of Osama Bin Laden," the al Qaeda leader urged Abu Musab al-Zarqawi, then the leader of al Qaeda in Iraq, to refrain from killing fellow Muslims in bomb attacks.

The fate of many Western hostages, including Kassig, who have been killed by ISIS terrorists in recent months, has caused many in the U.S. and U.K. to re-examine the longstanding policy of refusing to negotiate with terrorists, or to pay ransoms for hostages.

The U.S. government is currently conducting a review of how it handles hostage situations, but it is thought that the policy is unlikely to change.

In stark contrast to the U.S. and U.K., many central European nations have reportedly paid ransoms to secure the release of their nationals from the hands of groups like ISIS, attracting criticism that they are effectively bankrolling terrorist activity, according to the New York Times.



When the petition was first posted July 7, 2013, the group's Islamic regime had just been ousted from power in Egypt.


"The Muslim Brotherhood has shown in the past few days that it is willing to engage in violence and killing of innocent civilians in order to invoke fear in the hearts of its opponents. This is terrorism. We ask the U.S. government to declare MB as a terrorist group for a safer future for all of us," the petition said.


The White House finally responded more than a year later, stating "We have not seen credible evidence that the Muslim Brotherhood has renounced its decades-long commitment to non-violence."


CBN News has reported that Brotherhood followers hold influential advisory positions in the Obama administration.


Has Muslim Brotherhood failed?It is an article to have a look into latest status of Muslim Brotherhood itself and the US sponsored Arabian Spring exported by United States of America on the line of Taliban and Al kaeda.


As a state,United States of America had to bear the most of the burns it created to sustain its economy of war,civil war,weapons and oil under omnipotent dollar hegemony hitherto unchallenged.


Muslim brotherhood and Arabian spring do knock the doors of this bleeding geopolitics  which are wide open thanks to free market economy and free flow of foreign capital.

I am posting a write up which justify Muslim Brotherhood activities and dismiss all criticism published in Bangladesh which is inflicted with the coup threat by Islamists  and which has to have greater impact on India as we know from our experiences since 1971.


We may not help Pakistan to recover from the terror network it created and suffering from at the cost of innocent citizens,women and children across the border.


We may not help the Tamil,Indian origin humanscape in Srilanka from ethnic cleansing!


We could not make Nepal a real friend to make it a Hindu Nation once again despite the fact the Hinutva elements there has a open agenda of greater Nepal and demands the entire Himalaya and the Terai.

Despite the complicated refugee problem and the complex corridors ,Bangladesh power politics factions Awami League as well as BNP wants to remain friend of India.Because in Bangladesh the democracy is sustained despite coup threats as the democratic and social forces,secular elements are united rock solid.


This article pronounces the real threat that Pro America governance and policy making makes India a subject to direct or indirect intervention with its known weapons of terror which has been used in South East Asia, Europe, USSR,Middle East,Latin America,Africa and everywhere in the glob grabbed by the dollar hegemony.


Earlier today,I have posted a clipping of an Assamese news item in which RSS claims to make India free form Muslims and Christians.Understandably,RSS agenda is hitherto quite hidden how it wants to wipe out Sikhs,Buddhists and even Jainies without which the Hindu Rashtra Mission should be incomplete.

Since the recent brutal terror strike in Peshawar,I have ben writing time and again,we should stop Hindu imperialism lest we become a Pakistan.

How real is the threat ,just read this story in Bengali:


মুসলিম ব্রাদারহুড কি ব্যর্থ?

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॥ ড. আজ্জাম তামিমী॥

ভালো নিয়তে হোক বা খারাপ নিয়তে হোক, এখানে সেখানে কেউ কেউ দাবি করছেন যে, ২০১৩ সালে মিসরে যা ঘটেছে তাতে মুসলিম ব্রাদারহুডের পতনের শুরু হয়ে গেছে। শুধু তাই নয়, এদের অনেকে এও দাবি করছেন যে মুসলিম ব্রাদারহুড সংগঠন হিসেবে নিজেরাই ভেঙে দিয়ে পরিসমাপ্তি করে দেয়া উচিত, কারণ এই সংগঠনটি পুরোপুরি ব্যর্থ হয়ে গেছে এবং এর আর কোনো সম্ভাবনা বা ভূমিকা নেই।

যারা এমন দাবি করে আসছেন তাদের কেউ কেউ নিজেদেরকে ব্রাদারহুড বা তার যুব শাখার লোক বলে পরিচয় দেন। কিছুদিন আগ পর্যন্ত এদের কেউ কেউ ব্রাদারহুড এর সিনিয়র নেতাও ছিলেন।

১৯৫৪ সালে যখন ব্রাদারহুড তার প্রথম বড় চ্যালেঞ্জ এর সম্মুখীন হয় তখন আমার জন্ম ও হয়নি। সে সময় সংগঠনটির কয়েকজন বড় নেতাকে ফাঁসি দেয়া হয়েছিলো, শতশত কর্মীকে জেলে নেয়া হয়েছিলো, হাজার হাজার গুম, আন্ডারগ্রাউন্ড বা দেশছাড়া করা হয়েছিলো। ১৯৬৫ সালে যখন সংগঠনটি দ্বিতীয়বার বড় বিপর্যয়ের মুখোমুখি হলো তখন আমার বয়স ছিলো ১০ বছর। সেবারও বিখ্যাত লেখক সাইয়্যেদ কুতুবসহ এর কয়েকজন প্রথমসারির নেতাকে ফাঁসি দেয়া হয়েছিলো, শতশত জেলবন্দী করা হয়েছিলো এবং হাজার হাজার গৃহছাড়া বা দেশছাড়া করা হয়েছিলো।

আমার মনে নেই যে আমি তখন এই বিষয়গুলো পুরোপুরি বুঝতাম কিনা, কিন্তু স্পষ্ট মনে আছে যে আমার অনেক নিকট আত্মীয় যারা জামাল আব্দুন নাসেরকে মুসলিমবিশ্বের আশু ত্রাণকর্তা এবং ফিলিস্তিনের উদ্ধারকারী হিসেবে মনে করতেন, তারা মুসলিম ব্রাদারহুডের এই বিপদে উল্লাস প্রকাশ করেছিলেন এবং এর বিপর্যয়ে অত্যন্ত আনন্দিত হয়েছিলেন। জামাল নাসেরের মিডিয়ামেশিন অত্যন্ত সফলতার সাথে ব্রাদারহুড এর ইমেজ ধ্বংস করতে পেরেছিলো এবং সমগ্র মিডেলইস্ট এর জনমতকে ভুল পথে প্রভাবিত করতে পেরেছিলো।

আমি এখন মনে করতে পারি যে ১৯৫০ এবং ১৯৬০ এর দশকে এর চরম বিপর্যয়ের সময় কিছু মানুষ ব্রাদারহুড সম্পর্কে কি বলেছিলেন। তখন যা বলা হয়েছিলো তা এখন যা বলা হচ্ছে তার থেকে ভিন্ন কিছু নয়। এসব কথার সারাংশ ছিলো এই যে, 'সব কিছুর জন্য ব্রাদারহুড নিজেই দায়ী'। এর নেতাদের কে তীক্ষè সমালোচনা করা হয়েছিলো, এবং দাবি করা হয়েছিলো যে ব্রাদারহুড নিজ থেকেই সংগঠনটির পরিসমাপ্তি করে দেয়া উচিত এবং অন্যদেরকে নতুনভাবে কাজ করার জন্য জায়গা ছেড়ে দেয়া উচিত।

ব্যাপারটা এইরকম যে, ব্রাদারহুড এর উক্ত সমালোচকরা সংগঠনটির বিরুদ্ধে এবং এর সমর্থক অন্যান্য দল বা গোষ্ঠীর বিরুদ্ধে সামরিক জান্তার সকল জুলুম নির্যাতনের জন্য ব্রাদারহুডকেই মূলত দায়ী মনে করেন। তাই সমালোচকরা মনে করেন যে, ব্রাদারহুড তার জায়গা ছেড়ে চলে না গেলে তারা তাদের নতুন উদ্ভাবিত কোনো শক্তি বা পন্থা অনুযায়ী কাজ করার জায়গা পাবেন না, এবং মুসলিম উম্মাহর জন্য এমন বিজয় অর্জন করতে পারবেন না যা ব্রাদারহুড এর মত ৮০ বছরের বৃদ্ধ দলটি করতে ব্যর্থ হয়েছে।

একথা মনে করার কোনো কারণ নেই যে, আমি ওই সমস্ত লোকদের বিরুদ্ধে যারা মনে করেন বর্তমান অবস্থা থেকে ব্রাদারহুডের অনেক কিছু শিক্ষা গ্রহণ করা উচিত বা ব্রাদারহুডের কিছু সংস্কার করা উচিত। মুসলিম ব্রাদারহুড বা অন্য যেকোনো সংগঠন ভুল বা সমালোচনার ঊর্ধ্বে নয়। কিন্তু গতবছরে রক্তক্ষয়ী সামরিক ক্যু এর পর থেকে ব্রাদারহুড এর বিরুদ্ধে যে সমস্ত সমালোচনা করা হয়েছে তাতে আমি তেমন কোনো নিরপেক্ষতা, ন্যায্যতা বা গভীরতা দেখতে পাইনি। ব্রাদারহুডের কিছু সিদ্ধান্তের কথা উল্লেখ করে সমালোচকরা সেগুলো ভুল সিদ্ধান্ত বলেন, যা আপাতত সঠিক মনে হয়। কিন্তু সে সিদ্ধান্তগুলো আরো গভীরভাবে বিশ্লেষণ করার দরকার আছে, এবং যারা তখনকার সময় বিভিন্ন সিদ্ধান্ত নিয়েছিলেন তাদের পক্ষ থেকেও বিস্তারিত ব্যাখ্যা জানা দরকার- কিন্তু তারা অধিকাংশই বর্তমানে জেলে অথবা আন্ডারগ্রাউন্ডে আছেন।

যে সমস্ত যুবকরা তীব্র সমালোচোনা করছেন তাদের অনেকেরই অনেক সূক্ষ্ম বিষয় সম্পর্কে গভীর জানাশুনার অভাব ধরা পড়েছে। তারা যেসব সমালোচনা করছেন তার বেশিরভাগই নানারকম ভিত্তিহীন কানাঘুষা বা ব্রাদারহুড বিরোধী প্রচারণায় প্রভাবিত।

যারা ব্রাদারহুড সম্পর্কে এমন সিদ্ধান্ত দিচ্ছেন যে, সংগঠনটি ব্যর্থ হয়ে গেছে, তারা ব্রাদারহুড থেকে এমন বিশাল কিছু আশা করছিলেন যার বাস্তবায়ন হয়নি। যদি এমনটিই হয়ে থাকে, তাহলে তাদের এরকম কল্পনাবিলাসের জন্য ব্রাদারহুড দায়ী হবে কেনো? ব্রাদারহুড তো কখনো এমন প্রতিশ্রুতি দেয়নি যে আমরা তোমাদের জন্যে এই দুনিয়াকে বেহেশত বানিয়ে দিবো। ব্রাদারহুড কেবল এমন একটি আদর্শের প্রচার করে যা তারমতে এই দুনিয়া ও আখিরাতে মানুষের জন্য কল্যাণকর হবে; সেইসাথে মানুষকে দুনিয়ার ও আখিরাতের জীবন উন্নত করার উদ্দেশ্যে চেষ্টা সাধনা করার জন্য উৎসাহিত করে।

ব্রাদারহুড কখনো কাউকে খুশি বা তুষ্ট করার জন্যে কাজ করেনি। তার উদ্দেশ্য কোনো মানুষকে খুশি করা নয়, বরং আল্লাহর সন্তুষ্টি লাভ করাই তার চূড়ান্ত উদ্দেশ্য। সংগঠনটির স্লোগান সবসময় এটাই ছিলো যে : আল্লাহ আমাদের লক্ষ্য, রাসূল (সা.) আমাদের আদর্শ, জিহাদ আমাদের পথ, এবং আল্লাহর পথে শাহাদাৎ আমাদের সর্বোত্তম কাম্য।

যখন কেউ মুসলিম ব্রাদারহুড কে ব্যর্থ বলে সমালোচনা করে তখন আমার কুরআন শরিফের সূরা আল-বুরুজে বর্ণিত ঐতিহাসিক ঘটনা মনে পড়ে। এক স্বৈরাচারী শাসক নিজেকে খোদা বলে দাবি করেছিলো। যারা আল্লাহর তাওহিদ ছেড়ে ওই স্বৈরাচারীকে খোদা বলে মানতে অস্বীকার করেছিলো তাদেরকে পুড়িয়ে মারার জন্যে গর্ত খুড়ে তাতে আগুন জ্বালা হয়েছিলো। তাহলে এই সমালোচনাকারীরা কি দাবি করবে যে ঐসব সাহসী নেকবান্দা, যারা ওই স্বৈরাচারী শাসককে অস্বীকার করে আগুনে পুড়ে মরতে প্রস্তুত ছিলো, তারা ব্যর্থ? অথবা হাদিসে বর্ণিত সেই বালকের কথা- যে নিজের কপালে তীর বরণ করে নিয়ে শাহাদাৎ বরণ করেছিলো এই উদ্দেশ্যে যে, তার শাহাদাতের মাধ্যমে মানুষ সত্য ও মিথ্যার পার্থক্য বুঝতে পারবে- সেই বালক কি ব্যর্থ বা পরাজিত?

নিঃসন্দেহে যখন আগুনে পুড়ে মুমিনদের কে মারা হচ্ছিলো তখন তা দেখে অনেকে ভয়ে ঘাবড়ে গিয়েছিলো, এবং এই যন্ত্রণাদায়ক মৃত্যুকে অসহনীয় মনে করে সেই স্বৈরাচারের দাসত্ব গ্রহণ করেছিলো, বিনিময়ে অল্প কিছুদিন বেশি বেঁচে থাকার সুযোগ পেয়েছিলো। তারা হয়তো মনে করেছিলো যে আগুনে পুড়ে মৃত্যুকে সাদরে গ্রহণকারী ঈমানদারগণ ব্যর্থ হয়েছেন। তাহলে উক্ত দুই দলের মধ্যে কারা সঠিক পথে ছিলো আর কারা ভুল পথে ছিলো?

কিছু হতাশ তরুণ এরকম মনোভাব প্রকাশ করছে যে তারা ব্রাদারহুড এর বয়স্ক নেতাদের উপর বিরক্ত যারা নিজেদের পজিশন আঁকড়ে ধরে আছে এবং তা ছেড়ে দিতে নারাজ। এই তরুণরা দাবি করছে যে, বৃদ্ধরা অবসরে চলে গিয়ে তরুণদের নেতৃত্বে আসার সুযোগ করে দেয়া উচিত। একথা বলার সময় এই তরুণরা ভুলে যায় যে, যে বৃদ্ধদের প্রতি তাদের এত অপবাদ- সেই বৃদ্ধরাই বর্তমানে স্বৈরাচারের জুলুম নির্যাতনের কাছে মাথানত করতে অস্বীকার করায় জেলে বন্দী। এই বৃদ্ধরা তাদের উপর সমস্ত বিপদ আপদকে সাহসিকতার সাথে সহ্য করে যাচ্ছেন। এই বৃদ্ধদের অবিচল আত্মবিশ্বাস আছে যে, সহসাই তারা সঠিক প্রমাণিত হবেন। এই বৃদ্ধরা জানেন যে তারা যেসমস্ত বিপদের সম্মুখীন হচ্ছেন তা তাদের পূর্ববর্তী যারা ন্যায়, মর্যাদা ও স্বাধীনতার জন্যে সংগ্রাম করেছিলেন তারাও এসব কিছুর সম্মুখীন হয়েছিলেন।

কিছু কিছু সমালোচনাকারীর একটা অভ্যাসে পরিণত হয়েছে এমন লোকদের মৃত মাংস ভক্ষণ (গিবত) করা, যারা হয়তো আর বেঁচে নেই অথবা জেলে বন্দী অথবা নির্বাসনে। এই সমালোচনাকারীরা উক্ত লোকদের তাদের দৃষ্টিতে ভুলভ্রান্তি উল্লেখ করে অনেকটা উল্লাসের সাথে সমালোচনা করে বেড়াচ্ছে। তারা দম্ভোক্তি করে বলে বেড়াচ্ছে যে, প্রেসিডেন্ট মুরসি বা খায়রাত আল শাতেরের জায়গায় তারা থাকলে সবকিছু অনেক ভালোভাবে করতে পারতো। হায়- এই লোকদের সময় ও শক্তি নষ্ট করার কি আজব পন্থা! এদের এসব কাজকর্ম সম্পূর্ণ নিরর্থক।

ব্রাদারহুডের বিভিন্ন সময়ে নেয়া কিছু সিদ্ধান্তের ব্যাপারে বারবার একই অভিযোগ করা হচ্ছে। অথচ কি পরিস্থিতিতে ওই সিদ্ধান্তগুলো নেয়া হয়েছিলো তার সঠিক জ্ঞান সমালোচনাকারীদের জানা নেই। আর যদি ধরেই নিই যে ওই সিদ্ধান্তগুলোর কিছু আসলেই ভুল ছিলো বা সর্বোত্তম ছিলোনা- যা হওয়া স্বাভাবিক- তাহলে তাতেই বা কি এসে যায়? ইজতিহাদের পন্থাই হলো বিদ্যমান পরিস্থিতির প্রয়োাজন অনুসারে নিজস্ব বিশ্লেষণ, সর্বোচ্চ সামর্থ্য ও জ্ঞান অনুযায়ী সিদ্ধান্ত গ্রহণ করা. এভাবে নিজেদের নেয়া সিদ্ধান্ত সঠিকও হতে পারে, আবার ভুলও হতে পারে। ইসলামী শিক্ষা অনুযায়ী সিদ্ধান্ত যাই হোক- ইজতিহাদ করলে চেষ্টা সাধনা করার কারণে সওয়াব হবে- সঠিক হলে দুই সওয়াব, আর ভুল হলে এক সওয়াব।

ব্রাদারহুডের পারফরমেন্স এবং অবদানের ব্যাপারে যারা অসন্তুষ্ট, বিশেষ করে যারা একসময় এর সদস্য ছিলেন কিন্তু এখন এর নেতৃত্বের মুখ দেখাদেখি বন্ধ, তাদের প্রতি আমার আন্তরিক পরামর্শ এই যে, আপনারা (নিজেদের কর্মসূচি নিয়ে) এগিয়ে যান, কারণ ময়দান অনেক বড় ও প্রশস্ত। দোয়া করি যাতে আপনারা সফল হোন. নিজেরা যা সঠিক মনে করেন তা করতে থাকুন, অন্যরা যেখানে ব্যর্থ হয়েছে আপনারা সেখানে সফল হোন।

১৯২৮ সালে প্রতিষ্ঠার পর থেকে অনেকেই এই সংগঠন ছেড়ে স্বেচ্ছায় চলে গেছেন। এটা তেমন বড় কোনো ব্যাপার নয়। যারা ছেড়ে চলে গেছেন তারা বিভিন্নজন বিভিন্ন পথে গেছেন। কেউ কেউ ভালো কিছু করেছেন, কেউ কেউ তেমন ভালো কিছু করতে পারেননি। যারা ভালো কিছু করেছেন তাতে তারা নিজেরাই লাভবান হয়েছেন, আর যারা খারাপ করেছেন তার ফল তাদের উপর। মুসলিম ব্রাদারহুডই কেবল ইসলাম নয়, বা ইসলামের একমাত্র সংগঠন নয়, বরং এটি বৃহত্তর মুসলিম উম্মাহর মাঝে একটি সংগঠন। এর সমস্ত চেষ্টা সাধনা ও কর্মসূচি পরিচালিত হয় এর সদস্যদের সর্বসম্মত কিছু নিয়ম কানুন অনুযায়ী। যারা ছেড়ে চলে যান তারা এতে কোনো পাপ করেন না; তারা স্বেচ্ছায় প্রবেশ করেছিলেন, আবার স্বেচ্ছায় বের হয়ে যাবার স্বাধীনতাও তাদের আছে।

কিন্তু মুসলিম ব্রাদারহুডের দিন শেষ হয়ে গেছে আর তাই নিজেরাই একে ভেঙ্গে দেয়া উচিত- কারো এরকম দাবি করা বৃথা ও অনর্থক। সবকিছুর উপরে কথা হলো- ব্রাদারহুড একটি আদর্শের নাম, আর আদর্শের কোনো মৃত্যু নেই; এটি একটি আশার বাণী, আর আশা আকাক্সক্ষার কোনো শেষক্ষণ নেই; এটি একটি সংস্কার কর্মসূচি, আর সংস্কার হলো ইসলামী বিশ্বাসের মর্মমূলে। তাই, যাদের অনেক তাড়া, যারা হতাশ, বা যারা ফল লাভে মরিয়া, তাদের কে বলবো যে, ব্রাদারহুড কে এত তাড়াতাড়ি অবান্তর মনে করবেন না। যতক্ষণ পর্যন্ত কোনো ব্রাদার্স থাকবে, ততক্ষণ পর্যন্ত ব্রাদারহুড থাকবে। ব্রাদারহুড আবার সেভাবেই পুনরুজ্জীবিত হবে, অতীতে বারবার যেভাবে হয়েছিলো।

আপনাদের মাঝে যারা দীর্ঘকাল বেঁচে থাকবেন তারা দেখতে পাবেন যে কষ্টের পরে আরাম আসবে, বিপদের পরে আসবে শান্তি। আজকের সঙ্কট আগামীদিনের জন্যে সুপ্ত আশীর্বাদ হিসেবে প্রমাণিত হবে ইনশাল্লাহ।

অনুবাদ : সাকিব হেলাল

সূত্র : মিডল ইস্ট মনিটর

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  2. The Economist-18-Dec-2014

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  4. Egypt detains 102 alleged Muslim Brotherhood members

  5. The Muslim News-3 hours ago

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  7. Egypt alliance urges protests against military rule

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  13. Trial opens of Muslim Brotherhood deputy in Jordan

  14. The Daily Star-18-Dec-2014

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  16. Trial of Muslim brotherhood's deputy opens in Jordan

  17. Press TV-18-Dec-2014

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  19. Trial of senior Muslim Brotherhood official opens in Jordan

  20. Al-Bawaba-19-Dec-2014

  21. A senior Jordanian Muslim Brotherhood official has gone on trial at a military tribunal in Jordan's capital, Amman, for criticizing the United Arab ...

  22. www.worldbulletin.net

  23. 41 Muslim Brotherhood supporters sentenced to prison

  24. Business Standard-18-Dec-2014

  25. At least 41 Muslim Brotherhood supporters were sentenced today from one to 15 years in prison in Egypt for torching five churches, the Judges ...

  26. Egypt police arrest 102 Brotherhood members

  27. www.worldbulletin.net-19-Dec-2014

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  29. Egyptian court cancels confiscation of Muslim Brotherhood assets

  30. Middle East Monitor-17-Dec-2014

  31. File photo of the Muslim Brotherhood's headquarters An Egyptian administrative court yesterday overturned a decision by a special committee ...

  32. Egyptian court overturns some Muslim Brotherhood asset seizures

  33. Reuters-16-Dec-2014

  34. Explore in depth (111 more articles)

  35. International Business Times

  36. Muslim Brotherhood Leader Arrested in Egypt

  37. New York Times-20-Nov-2014

  38. CAIRO — The last remaining senior leader of the Muslim Brotherhood who was not in prison was arrested on Thursday by the Egyptian police, ...

  39. Egypt Arrests Mohammed Ali Bishr, Key Negotiator Between Muslim ...

  40. International Business Times-20-Nov-2014

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  42. Video: Robert Spencer on the Muslim Brotherhood in the American ...

  43. FrontPage Magazine-16-Dec-2014

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  45. Al-Arabiya

  46. Jordan Arrests Muslim Brotherhood Official Over Criticism of United ...

  47. New York Times-21-Nov-2014Share

  48. AMMAN, Jordan — The Jordanian authorities have arrested a senior leader of the Muslim Brotherhood for criticizing the United Arab Emirates, ...

  49. Jordan arrests deputy head of Muslim Brotherhood for criticizing UAE

  50. Al-Arabiya-21-Nov-2014

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