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Sunday, June 12, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/6/12
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


नागपुरःफिर लौटेगी सरकारी स्कूलों की रंगत

Posted: 11 Jun 2011 09:26 AM PDT

आने वाले दिनों में संभाग के सरकारी स्कूलों की खोई हुई पुरानी रंगत लौट सकती है। विद्यार्थियों का टोटा भी खत्म होने की संभावना है। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी एक व्यापक कार्यक्रम में जुटने वाले हैं। इस कार्यक्रम को शिक्षा अधिकार जनप्रबोधन कार्यक्रम का नाम दिया गया है।

गांव-गांव जाएंगे अधिकारी

कार्यक्रम के तहत खुद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपने क्षेत्र के गांवों का दौरा करेंगे। घर-घर जाकर पालकों का मार्गदर्शन कर विद्यार्थियों को स्कूल में दाखिला दिलाएंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 12 जून को संभाग के सभी अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बैठक में विभागीय आयुक्त बी. वी. गोपालरेड्डी मौजूद रहेंगे। साथ ही अधिकारियों को बताएंगे कि उन्हें क्या करना है।

15 जून से शुरू होगा कार्यक्रम

सूत्रों की मानें तो सरकारी स्कूलों की दिन-ब-दिन बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए शालेय शिक्षा विभाग की ओर से यह कार्यक्रम चलाया जाने वाला है। गत 2 जून को इस संबंध में मुंबई में एक बैठक हुई थी, जिसमें राज्य के सभी विभागीय शिक्षण उपसंचालकों समेत सभी आला अधिकारियों को बुलाया गया था और कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा तैयार की गई।

इसके मुताबिक 11 जून को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक के दूसरे दिन जिला स्तर पर भी केन्द्र प्रमुख और शिक्षा विस्तार अधिकारियों की बैठक होगी। 14 जून को पंचायत समिति स्तर पर भी शालाओं के मुख्याध्यापकों के लिए कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

15 जून से कार्यक्रम की शुरूआत होगी। कार्यक्रम स्कूल शुरू होने से चार दिन पूर्व अर्थात 23 जून तक चलेगा। सूत्रों ने बताया कि शालेय शिक्षा मंत्री राजेन्द्र दर्डा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ ही सांसद व विधायकों समेत सभी जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पत्र भी लिखा है।


तैयार होगी रिपोर्ट

कार्यक्रम के दौरान विभाग की ओर से संभाग के सभी स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके अलावा उन बच्चों की भी पूरी सूची बनाई जाएगी, जो स्कूल में जाने के लिए पात्र हैं। 

पालकों के लिए विशेष कार्यक्रम

कार्यक्रम की तय की गई रूपरेखा के मुताबकि पालकों को मार्गदर्शन देने के लिए विशेष कार्यक्रम बनाए गए हैं। इसके तहत शिक्षा विभाग के अधिकारी गांव में जाकर पालकों की सभा लेंगे। उन्हें अनिवार्य शिक्षा कानून की जानकारी देंगे। इसके अलावा उनके लिए विविध स्पर्धा तथा सांस्कृतिक व प्रबोधनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 

छात्राओं पर दिया जाएगा विशेष जोर

इस दौरान छात्राओं को शाला में दाखिल कराने पर विशेष जोर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि मीन मंच उपक्रम के तहत हर गांव में 6 से 14 वर्ष की आयु की छात्राओं को खोजा जाएगा। उन्हें स्कूल में दाखिल कराया जाएगा। यदि किसी छात्रा ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है तो उन्हें आयु के मुताबिक संबंधित कक्षा में दाखिला दिलाया जाएगा। 

शिक्षा से कोई वंचित न रहे

कार्यक्रम सरकारी शालाओं में विद्यार्थियों का टोटा खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि अनिवार्य शिक्षा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए चलाया जा रहा है। ताकि कोई बच्च शिक्षा से वंचित नहीं रह सके। 
महेश करजगांवकर, विभागीय शिक्षण उपसंचालक(दैनिक भास्कर,नागपुर,11.6.11)

हिमाचलःअकाउंट में आएगा सचिवालयकर्मियों का मेडिकल व टीए

Posted: 11 Jun 2011 09:21 AM PDT

सचिवालय कर्मचारियों को अगले महीने से मेडिकल बिलों और यात्रा भत्ते का भुगतान सीधे बैंक अकाउंट में होगा। सचिवालय कर्मचारियों को मेडिकल और यात्रा भत्ते के लिए कतारों में खड़े नहीं होना पड़ेगा। इससे सचिवालय कर्मियों को मेडिकल व टीए का भुगतान करने वाली शाखा से दबाव घटेगा तो धन के भुगतान में पारदर्शिता भी आएगी। प्रदेश सरकार ने इसके लिए संबंधित बैंकों तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से मिलकर कंप्यूटरीकरण के लिए सभी पहलुओं पर चर्चा की गई है।

कर्मियों को सुविधा
सचिव सचिवालय प्रशासन डॉ. अजय भंडारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि सचिवालय में 'कैश लेस ट्रांजेक्शन' के लक्ष्य को हासिल करना है। इसके अलावा कर्मचारियों को भी सुविधा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगले माह से सचिवालय कर्मचारियों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार सचिवालय कर्मचारियों को सीधे बैंक अकाउंट में वेतन की सुविधा पहले ही शुरू कर चुका है।

औपचारिकता पूरी
सचिवालय प्रशासन ने स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के जनरल मैनेजर और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के साथ योजना की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा के बाद यह फैसला लिया है। कंप्यूटरीकरण से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

अब तक की व्यवस्था
मेडिकल और टीए बिलों के भुगतान की प्रक्रिया अब तक नियमित तौर पर चलती रहती है। बिलों की अदायगी के लिए फाइल निचले स्तर से ऊपर तक पहुंचकर जैसे ही शीर्ष अधिकारी से हस्ताक्षरित होती है वैसे ही कर्मचारी बिल के भुगतान के लिए कैश काउंटर पर पहुंच जाते हैं। इससे कर्मचारी काम-धाम छोड़कर कैश काउंटर पर अपने बिल की राशि प्राप्त करने को जमा हो जाते हैं।


अब मेडिकल और टीए बिलों की स्वीकृति के बाद कर्मचारियों को कैश काउंटर पर खड़े नहीं होना पड़ेगा। कर्मचारियों की धन राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा हो पाएगी। सचिव सामान्य प्रशासन का कहना है कि प्रदेश सरकार की नई योजनाएं सचिवालय से ही शुरू होती हैं, हो सकता है कि जल्द ही अन्य सरकारी महकमों में भी इस योजना को शुरू करें।

1642 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सचिवालय में काम कर रहे 1642 से अधिक कर्मचारियों को इस योजना के शुरू होने से सीधे लाभ मिलेगा। आला अधिकारियों का कहना है कि अब तक बिलों के भुगतान की जिम्मेवारी संभाल रहे कर्मचारियों को भी दूसरे कार्यो की जिम्मेवारी सौंपी जा सकेगी। प्रशासन सचिवालय में पूरी तरह कैश लेस ट्रांजेक्शन के लक्ष्य को हासिल करने का दावा कर रहा है। वहीं सामान्य प्रशासन के आला अधिकारी इस योजना को प्रदेश के अन्य सरकारी विभागों में भी जल्द शुरू करने की संभावना व्यक्त कर रहा है(दैनिक भास्कर,शिमला,11.6.11)।

यूपी बोर्डः'ट्राई अगेन ट्राई' के मंत्र से राजमिस्त्री की बेटी ने किया टॉप

Posted: 11 Jun 2011 09:20 AM PDT

यूपी बोर्ड के हाईस्कूल में राजमिस्त्री की बेटी प्रियंका साह ने टाप किया है। बिना कोचिंग और संसाधनों के पढ़ाई में राज्य भर में लड़कियों में सर्वोच्च 91.50 फीसदी अंक लाने वाली प्रियंका साह आइएएस अधिकारी बनना चाहती है। प्रियंका बाबा रामदेव के आंदोलन को सही मानती हैं। शुक्रवार को जब परिणाम आया तो प्रियंका बिहार के सीवान जिले में अपने गांव में थी। जब उसे पता चला कि उसने प्रदेश में बालिकाओं में पहला स्थान मिला है वह बेहद खुश हो गई।

वह इंदिरानगर के स्कूल लखनऊ मॉडल पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं। इंटर में वह भौतिकी, रसायन व गणित से पढ़ाई करने के बाद आइएएस अधिकारी बनना चाहती हैं ताकि शिक्षा व्यवस्था ठीक कर सकें। प्रियंका ने फोन पर बताया कि बहुत से बच्चे पढ़ नहीं पाते और जो स्कूल जाते हैं, उनमें भी कई बच्चों की पढ़ाई ठीक से नहीं होती। बिहार में तो हालत और खराब है। ऐसे बच्चों के लिए जरूर कुछ करूंगी।


'ट्राई अगेन ट्राई'

प्रियंका के पिता प्रभुनाथ मूलत: बिहार के सीवान के रहने वाले है। वर्ष 1984 में बिहार के सीवान से लखनऊ मजदूरी करने आए थे। पत्नी और तीन बच्चों के पिता प्रभुनाथ कमाल के है। वे खुद इंटर पास है और अनपढ़ पत्नी को आठवीं तक पढ़ाया। बड़े बेटे राजन ने 78 फीसदी अंकों के साथ इंटर पास किया। चयन के बाद भी पैसे न होने के कारण उसे इंजीनियर नही बना सके। वह प्रतियोगी परीक्षाएं दे रहा है। प्रभुनाथ का मंत्र है 'ट्राइ अगेन ट्राइ'(दैनिक भास्कर,लखनऊ,11.6.11)।

चंडीगढ़ में है जवानों की जबां पर उर्दू

Posted: 11 Jun 2011 09:07 AM PDT

हे डूड वट्स अप.. हाय गायज, लेट्स हैंग आउट.. आस-पास ये स्लैंग सुनकर अंदाजा हो जाता है कि बोलने वाला कोई यूथ ग्रुप ही होगा। पर शहर के किसी कोने में 'म़मख़सूस', 'शिरीन' और 'मुस्तक़बिल' जैसे उर्दू के शब्द सुनाई दें तो? तो जान लें, कि ये भी यंगस्टर्स ही हैं।मिक्स्ड पंजाबी, हिंदी और इंग्लिश बोलने वाले शहर के यंगस्टर्स में बहुत से ऐसे भी हैं जो कई कारणों से उर्दू लिखना और बोलना सीखने में लगे हैं।किसी को गीतकार बनना है, तो किसी को पर्सनैलिटी अच्छी करनी है, किसी को उच्चारण बेहतर करना है तो किसी को भाषा से जुड़ा करियर बनाना है।

जिंदगी बेहतर हो रही है

हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी ये तीनों ही लैंग्वेज संदीप को आती हैं।मगर उर्दू की नजाकत उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है।वह तो यहां तक कहते है कि उर्दू की क्लासेस लेने के बाद उनकी पंजाबी और हिंदी तक बेहतर हो गई है। सिंगिग का पैशन है और उसके भी लहजे में फर्क आ गया है। संदीप कहते हैं, 'मैं पहले गजल सुनाने से पीछे हटता था, लेकिन आज मुझे कोई डर नहीं है।


अब तो पूरी कोशिश कर रहा हूं कि खुद भी नज्म लिखना शुरू कर दूं।' उर्दू में एमए कर रहे सिमरजीत सिंह भी इस बात पर हामी भरते हैं। सिमर का सपना गीतकार बनने का है, और इसके लिए वह ज्यादा ध्यान इस भाषा पर दे रहे हैं। वह कहते हैं, 'मुझे पता है कि जितना ज्यादा मैं उर्दू में शब्दों के साथ खेल सकता हूं उतना किसी और भाषा में नहीं।'

मुझे एक बार पुलिस वालों ने पकड़ लिया था और उस वक्त मेरे हाथों में उर्दू की किताब थी। जब उन्होंने मेरी किताब देखी तो पूछा कि तुम्हें उर्दू आती है। मैंने कहा हां, तो उन्होंने मुझसे किताब में कुछ पढ़कर सुनाने को कहा। फिर छोड़ दिया। शायद उन्हें यही लगा उर्दू की तरह मैं भी मधुर हूं।- तलविंदर, स्टूडेंट

पिछले कुछ साल में यंगस्टर्स में इस भाषा का क्रेज बढ़ा है। वजहें कई हैं। किसी को म्यूजिक इंडस्ट्री में जाना है तो किसी को राइटर बनना है। इस भाषा को सीखने के बाद हिंदी में पकड़ काफी अच्छी हो जाती है। उच्चारण बेहतर होता है। मुश्किल बस इतनी है कि सीरियस होकर मेहनत करनी पड़ती है।- शकील एम खान प्रफेसर, उर्दू डिपार्टमेंट, पीयू

आज भी उर्दू की कई ऐसी स्क्रिप्ट हैं जो पढ़ी नहीं गई हैं। उनकी ट्रांसलेशन के लिए ज्यादा लोग नहीं है। और जहां कम लोग होते हैं वहां जरूरतें ज्यादा होती हैं। तो फ्यूचर में भी उर्दू को लेकर काफी ज्यादा ऑप्शन मौजूद हैं।-
कमलजीत, रिसर्च स्कॉलर(प्रियंका चोपड़ा,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,11.6.11)

हिमाचलःअब लेट फीस देकर मिलेगी एडमिशन

Posted: 11 Jun 2011 09:03 AM PDT

कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम दिन आरकेएमवी और कोटशेरा कॉलेज में छात्रों की प्रवेश लेने के लिए भीड़ लगी रही। बिना लेट फीस के प्रवेश की अंतिम तारीख 10 जून थी। आरकेएमवी में शुक्रवार को आवेदन के अंतिम दिन सैकड़ों छात्राओं ने प्रवेश लिया।

आरकेएमवी में अभी तक 1389 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। कला संकाय की 840, कॉमर्स में 332 और साइंस में 190 छात्राओं ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है। कोटशेरा कॉलेज में अभी तक करीब 300 आवेदन आए हैं। इनमें शुक्रवार को सबसे अधिक 200 आवेदन आए हैं। शुक्रवार को कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए काफी छात्रों ने आवेदन किया जिसमें से अधिकतर छात्रों को प्रवेश मिल गया। कोटशेरा कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. वीपी महाजन ने बताया कि 11 जून से नियमित कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। आरकेएमवी कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. नरेश महाजन का कहना है कि कॉलेज में शनिवार से नियमित कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। लेट फीस देकर छात्राएं 20 जून तक प्रवेश ले सकती हैं(दैनिक भास्कर,शिमला,11.6.11)।

एएमयू कुलपति के खिलाफ सीबीआइ जांच

Posted: 11 Jun 2011 09:00 AM PDT

वित्तीय अनियमितताओं व अन्य मामलों में फंसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति डा. पीके अब्दुल अजीज के खिलाफ अब सीबीआइ जांच होगी। विश्वविद्यालय की विजिटर (राष्ट्रपति प्रतिभादेवी सिंह पाटिल) ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक विजिटर की मंजूरी के बाद अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय जल्द ही इस मामले को सीबीआइ को सौंपने जा रहा है। संभव है कि मंत्रालय अगले हफ्ते अपनी सिफारिश सीबीआइ को भेज दे। गौरतलब है कि कुलपति के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए लगभग दो वर्ष में दो बार अलग-अलग समितियां गठित करनी पड़ीं। एक समिति जांच पूरी नहीं कर सकी तो जस्टिस बीए खान और जस्टिस एएन दिवेचा की दो सदस्यीय जांच समिति फिर से बनानी पड़ी। इस समिति की जांच के दौरान कुलपति पर असहयोग का आरोप भी लगा। जबकि यह समिति भी निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाई। लिहाजा उसका कार्यकाल बढ़ाना पड़ा। फिर भी रिपोर्ट आई तो दोनों जज एक निश्चित नतीजे पर नहीं पहुंचे। गंभीर आरोपों पर कार्रवाई को लेकर उनकी अलग-अलग राय के चलते मंत्रालय ने इसकी तह में जाने के लिए सीबीआइ जांच ही मुनासिब समझी। उल्लेखनीय यह भी है कि कुलपति की ओर से वित्तीय अनियमितताओं व उनकी कार्यशैली को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र भी अर्से तक आंदोलन पर रहे हैं। जबकि एएमयू कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य वसीम अहमद कुलपति पर लगे आरोपों की जांच के लिए बीते वर्षो में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह व मौजूदा मंत्री कपिल सिब्बल का दरवाजा कई बार खटखटा चुके हैं। उनकी मांग थी कि कुलपति के एएमयू में पूरे कार्यकाल की जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय में इस मामले की जांच को जल्द से जल्द पूरा कर लेना चाहता है जिससे ऊहापोह की स्थिति खत्म की जा सके(दैनिक जागरण,दिल्ली,11.6.11)।

चंबाःडॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना नहीं देख सकते चुराह के बच्चे

Posted: 11 Jun 2011 08:59 AM PDT

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र के गरीब बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने नहीं पाल सकते। विद्यार्थी दसवीं के बाद विज्ञान या वाणिज्य विषय नहीं चुन सकते। ऐसा किसी रोक के कारण नहीं बल्कि व्यवस्थागत खामी के कारण है। खामी यह है कि चुराह में केवल एक ही सरकारी स्कूल ऐसा है जहां विज्ञान और वाणिज्य नहीं पढ़ाए जाते। चुराह स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय लोहटिक्करी में चांजू, देहरा, चरड़ा, बघेइगढ़, दियोला, जसौरगढ़, भराड़ा, लोहटिक्करी, लेसूंई, गड़फरी व थल्ली समेत 11 पंचायतों के 255 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं, लेकिन विज्ञान व वाणिज्य जैसे विषय न होने से उन्हें मजबूरन कला विषय लेना पड़ता है। आस-पास करीब चालीस किलोमीटर तक कोई अन्य स्कूल भी नहीं है जहां छात्र पढ़ाई कर सकें। संसाधन संपन्न परिवारों के बच्चे भंजराड़ू या चंबा जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं लेकिन बाकी कला (आ‌र्ट्स) पढ़ने को विवश हैं। हालांकि चांजू में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है लेकिन यहां भी विज्ञान और वाणिज्य विषय नहीं पढ़ाए जाते हैं। इस संबंध में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहटिक्करी के प्रधानाचार्य लोकिंद्र सिंह राठौर कहते हैं कि विद्यालय में 255 छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। यहां कला विषय ही पढ़ाए जाते हैं, विज्ञान या कामर्स के नहीं। इस बारे में बात करने पर सेकेंडरी शिक्षा के उपनिदेशक विजय सिंह ने कहा, यदि सरकार विज्ञान एवं कॉमर्स विषय शुरू करने के आदेश देती है तो उन पर तत्काल अमल किया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र भारद्वाज का कहना है कि यह स्कूल कांग्रेस के कार्यकाल में खोला गया लेकिन भाजपा सरकार ने भी यहां अन्य विषय शुरू करवाने के प्रयास नहीं किए गए। कांग्रेस सता में आई तो इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। वहीं, पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मोहन लाल ने कहा, क्षेत्र के लोगों ने इस विषय में मांग की तो वह प्रदेश सरकार के समक्ष मुद्दा जरूर उठाएंगे(दौलत शर्मा,दैनिक जागरण,चरड़ा,11.6.11)।

हिमाचल यूनिवर्सिटी में कानून की किताबें सीलन के हवाले

Posted: 11 Jun 2011 08:55 AM PDT

यूनिवर्सिटी में लॉ के छात्रों को आधुनिक सुविधाएं देने और पर्याप्त शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाने के प्रशासन के दावों की हवा निकल गई है। लॉ विभाग में छात्रों को अलग से लाइब्रेरी की सुविधा दी है। लाइब्रेरी में पुराने सिलेबस से लेकर आधुनिक समय की शिक्षण सामग्री भी मौजूद है लेकिन प्रशासन इसका रखरखाव करना भूल गया है। लॉ विभाग की इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बनी लाइब्रेरी में सीलन से किताबों के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। विभाग के कई कमरों की खिड़कियां भी टूट चुकी हैं।

लॉ के 280 छात्र
लॉ विभाग में एलएलबी के 210 छात्र हैं। एलएलएम में भी करीब 70 छात्र हैं और पीएचडी के 60 स्कॉलर भी लाइब्रेरी का उपयोग करते हैं।

14,370 किताबें
लाइब्रेरी में करीब 14,370 किताबें हैं। 1187 जर्नल भी मौजूद हैं। छात्रों को हर महीने जर्नल भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। लेकिन, इन जर्नल को रखने के लिए जगह नहीं है।

नहीं हो रही बाइंडिंग
लाइब्रेरी में सैकड़ों पुरानी किताबों की बाइंडिंग पिछले दस साल से बंद हैं। दस साल पहले सैकड़ों किताबों को बाइंडिंग किया गया, लेकिन उसके बाद से यह काम बंद पड़ा है। कई किताबों के पेज भी गायब हो रहे हैं।


सही हो व्यवस्था
एससीए अध्यक्ष खुशी राम वर्मा का कहना है कि लाइब्रेरी के रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। एससीए ने पहले भी इस समस्या को उठाया है और यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

कर्मचारियों के आशियाने असुरक्षित
शिमला। लॉ विभाग के साथ लगती अनसेफ बिल्डिंग में कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था की गई है। बिल्डिंग की एक दीवार ढहने की कगार पर है जबकि खिड़कियां, दरवाजे भी जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। भवन में करीब आधा दर्जन कर्मचारियों के ठहरने की सुविधा दी गई है। प्रशासन ने कुछ माह पहले इस बिल्डिंग को डिसमेंटल कर इसके स्थान पर आर्ट्स फेस थ्री का निर्माण करवाने की योजना बनाई थी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ के महासचिव नरेश कुमार का कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षित आशियाना उपलब्ध करवाने के लिए जल्द ही प्रशासन से बात की जाएगी।

विभागों की जर्जर हालत 
पत्रकारिता, योगा और ज्योग्राफी विभाग भी पुराने जर्जर कमरों में चल रहे हैं। इन विभागों के पास छात्रों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक-एक कमरा है। इनमें से कुछ विभागों को मल्टी फैकल्टी बिल्डिंग में शिफ्ट करने की योजना थी, लेकिन फिलहाल यह कागजों तक ही सीमित है(अशोक चौहान,दैनिक भास्कर,शिमला,11.6.11)।

छत्तीसगढ़ःसिविल सेवा परीक्षार्थी ध्यान दें

Posted: 11 Jun 2011 08:39 AM PDT

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से 12 जून को सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए रायपुर में 34 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इन परीक्षा केंद्रों में 13 हजार 308 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

परीक्षा दो पालियों में सुबह 9:30 से 11:30 और दोपहर 2:30 से 4:30 बजे से होगी। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए कलेक्टोरेट में कंट्रोल रूम बनाया गया है। परीक्षा तिथि तक कंट्रोल रूम में सुबह 7 से रात 8 बजे तक काम होगा। इसका प्रभारी राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना अधिकारी केएस पटले को बनाया गया है।


जानकारी के लिए यहां करें संपर्क

परीक्षा से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी 0771-2421622 और 99266-15200 फोन नंबर से ली जा सकती है। इसके अलावा उनके सहयोगी अधिकारी बीके सहारे और वायए मंडलोई से भी परीक्षा संबंधी जानकारी 98936-38761 और 98261-37446 मोबाइल नंबर पर ली जा सकती है। 

परीक्षा संबंधित जानकारी लोक सेवा आयोग की वेबसाइट डब्लूडब्लूडब्लू डॉट यूपीएससी डॉट जीओवी डॉट इन पर भी उपलब्ध है(दैनिक भास्कर,रायपुर,11.6.11)।

राजस्थानःयूनिवर्सिटी व सभी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू

Posted: 11 Jun 2011 08:35 AM PDT

सीबीएससी व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सीनियर हायर सैकंडरी के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इनमें सफल होने वाले स्टूडेंट्स कॅरियर को संवारने के लिए कॉलेज लाइफ में पहला कदम रखेंगे। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय सहित शहर के सभी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्स की सीटें बढ़ा दी गई हैं, वहीं सामान्य कोर्स में भी इस बार प्रवेश की राह आसान होगी।

आरपीईटी के रिजल्ट का इंतजार: बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन ने प्रदेश भर में आरपीईटी की परीक्षा आयोजित कर ली है। लेकिन इसका परिणाम अभी तक घोषित नहीं किया गया है। परिणाम आने के बाद ही इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स के प्रवेश की राह तय हो पाएगी। जोधपुर में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज व निजी कॉलेजों की मिलाकर करीब 4 हजार सीटें हो जाएंगी।

मैनेजमेंट की 1500 सीटों पर होंगे प्रवेश: भीलवाड़ा राजकीय महाविद्यालय ने गुरुवार को आरमेट का परिणाम घोषित कर दिया है। जोधपुर से परीक्षा देने वालों में अच्छे नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स वरीयता के आधार पर जेएनवीयू में प्रवेश लेंगे। इनके अलावा वरीयता के आधार काउंसलिंग के माध्यम से निजी कॉलेजों में एमबीए कोर्स में प्रवेश लेंगे। जोधपुर में एमबीए की वर्तमान में करीब 1500 सीटें हैं।


बीबीए व बीसीए का क्रेज: बीबीए व बीसीए का अब क्रेज बढ़ गया है। पिछले वर्ष से जेएनवीयू के यूसीक सेंटर में भी बीसीए कोर्स शुरू कर दिया गया है। बीबीए की फिलहाल करीब 1500 व बीसीए की 1200 सीटें हैं। इस बार जेएनवीयू व उनके संबद्ध कॉलेजों में बीबीए में प्रवेश परीक्षा तथा काउंसलिंग के बाद प्रवेश दिया जाएगा। 
बीएड की सीटें ज्यादा एमएड की कम: जेएनवीयू हाल ही पीटीईटी आयोजित कर चुका है। बीएड की पहले जोधपुर में सीटें बहुत कम थीं। अब संबद्ध कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ बीएड की सीटें भी बढ़ गई हैं। जोधपुर में बीएड की 4 हजार से ज्यादा सीटें हैं। एमएड में प्रवेश के लिए सीटें बहुत कम हैं। जोधपुर के दो कॉलेजों में एमएड की 50 सीट हैं। 

एमडीएस भी शुरू: जोधपुर ने इस वर्ष मेडिकल के क्षेत्र में भी एक कदम आगे बढ़ाया है। जोधपुर में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करवाई जाती थी। पिछले आठ वर्षो में जोधपुर से बीडीएस (डेंटल) का कोर्स भी शुरू हो गया था। हाल ही में जोधपुर के व्यास डेंटल कॉलेज को एमडीएस की 24 सीटें स्वीकृत कर दी गई हैं। 

और बढ़ सकती हैं सीटें: जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज व कई निजी कॉलेजों ने अपने यहां इंजीनियरिंग की सीटें बढ़ाने के लिए एआईसीटीई में आवेदन कर रखा है। संभवतया सोमवार तक सीटें बढ़ने की स्थिति साफ हो जाएगी। वहीं जोधपुर के निजी कॉलेजों ने सामान्य कोर्स के लिए भी जेएनवीयू से स्वीकृति मांगी है, जिसकी शीघ्र स्वीकृति जारी होगी(दैनिक भास्कर,जोधपुर,11.6.11)।

हिमाचल के स्कूलों में झाड़ू लगाते हैं बच्चे

Posted: 11 Jun 2011 08:31 AM PDT

हिमाचल के कबायली जिले किन्नौर के अजीत और टिकम नेगी क्षेत्र के बच्चों को तालीम हासिल करनी है तो जरूरी है कि वे पत्तों के झाड़ू से आंगन साफ करना जानते हों। क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों को ककहरा सीखने से पहले पत्तों के झाड़ू से कमरे व आंगन जो साफ करना पड़ता है। आंगन चकाचक हो भले ही बच्चों की ड्रेस व काले जूतों पर धूल की मोटी परत जम जाए, या मिट्टी के कारण मिड-डे मील पचाना भी मुश्किल हो। किन्नौर के चोलिंग प्राथमिक पाठशाला में 26 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए तीन अध्यापक तैनात हैं। बच्चे अध्यापकों से पहले विद्यालय पहुंचते हैं, अध्यापकों की कुर्सी को आंगन में लगाने से पहले धूल-मिट्टी साफ करते हैं क्योंकि कोई सफाई कर्मचारी या तैनात नहीं है। मिड डे मील के लिए भी यही नन्हें अपने गुरुओं की मदद करते हैं। कुछ ऐसा ही हाल दुर्गम स्थानों पर स्थित अन्य प्राइमरी स्कूलों का है। यहां शिक्षक हो या कोई अन्य कर्मचारी काम नहीं करना चाहता, क्योंकि यह वे इलाके हैं जहां जरा सी बर्फबारी इस क्षेत्र को दुनिया के शेष हिस्सों से महीनों तक काट देती है। संसाधन न के बराबर है। एक बार कर्मचारी यहां तैनात हो गया तो वह तब तक नहीं बदलता जब तक उसकी जगह दूसरा कर्मी नहीं आता। दूसरा कर्मी यहां आना ही नहीं चाहता। यह पीड़ा है हिमाचल के उस क्षेत्र की जहां के लाल मीठे सेब का नायाब जायका है,लेकिन बुनियादी शिक्षा के लिए भी यह क्षेत्र तरसता है। तिब्बत के साथ सटी सीमा के करीब निगुलसरी स्कूल में भी अध्यापक कम हैं। जिले में जितने भी शिक्षण संस्थान है वहां स्टाफ ही नहीं है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि यहां लेक्चरर के 32, मुख्यध्यापक के 13, प्रिंसिपल के 8, डीपी के 2, अधीक्षक के 27, सीनियर असिस्टेंट के 4, क्लर्क के 25 और चतुर्थ श्रेणी के 4 पद खाली पड़े हैं। गत वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 5904 प्राथमिक स्कूलों में, 3811 माध्यमिक स्कूलों में, 2184 उच्च पाठशालाओं में, 1673 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में और 321 महाविद्यालय में छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। जिले में 21 उच्च, 27 वरिष्ठ माध्यमिक, 189 प्राथमिक और 38 माध्यमिक पाठशालाएं हैं लेकिन न स्टाफ पूरा है न संसाधन। शिक्षा उपनिदेशक (उच्च) कर्म दास वर्मा मानते हैं कि स्कूलों में सफाई कर्मचारी नहीं होते, इसलिए बच्चे ही काम करते हैं। समाज सेवियों का कहना है कि शिक्षा अधिकार व मुफ्त शिक्षा जैसी पहल के बावजूद यह किसी भी तरह से उचित नहीं लगता(प्रबिंद्र सिंह नेगी,दैनिक जागरण, रिकांगपिओ,11.6.11)।

सीएस का रिजल्ट 25 अगस्त को

Posted: 11 Jun 2011 08:29 AM PDT

कंपनी सेक्रेटरी की परीक्षा गुरुवार को खत्म हुई। फाउंडेशन, एक्जीक्यूटिव और फाइनल ग्रुप के पेपर से इस बार कोई खास चुनौती नहीं मिली। आखिरी पेपर गवर्नेस बिजनेस एथिक्स एंड सस्टेनेबल का था। इसमें ज्यादा थ्योरी होने से समय से पहले ही विद्यार्थी पेपर सॉल्व करने में सफल रहे।

सीएस कराने वाली आईसीएसआई संस्था के इंदौर प्रभारी कमलेश जोशी ने बताया तीनों ग्रुप में से सिर्फ दो पेपर ऐसे थे जिनका पैटर्न बदला हुआ था। सभी विद्यार्थी इस बार के पेपर से संतुष्ट हैं। 25 अगस्त को दोपहर 12 बजे तीनों ग्रुप के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

सालभर होंगे रजिस्ट्रेशन

अभी तक सीएस में रजिस्ट्रेशन कराने वाले ज्यादातर विद्यार्थी शहर के ही हुआ करते थे। आईसीएसआई के अनुसार अब सीए की तरह सीएस में भी राजस्थान और अन्य प्रदेशों के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। इसका कारण लगातार सुधरते परिणाम और अच्छे फैकल्टीज को माना जा रहा है। आईसीएसआई ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरे साल के लिए ओपन कर रखी है।


सिलेबस और बेहतर

सीएस की तैयारी के लिए आईसीएसआई सिलेबस मॉडच्यूल को बेहतर बनाने की कोशिश में है। इस बार की सीएस परीक्षा में मॉडच्यूल का 60 फीसदी से ज्यादा सिलेबस परीक्षा में पूछा गया। इससे विद्यार्थियों को काफी सपोर्ट मिला। कोचिंग सेंटर के एक जैसे नोट्स की आदत खत्म करने के लिए हर साल सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है(दैनिक भास्कर,इन्दौर,11.6.11)।

दिल्लीःभारी तनाव में काम कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर

Posted: 11 Jun 2011 08:15 AM PDT

राजधानी के डाक्टर न केवल तनाव में जी रहे हैं, बल्कि इसी स्थिति में मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं। इसका खुलासा यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, गुरुतेग बहादुर हॉस्टीपल के डाक्टरों की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि रेजिडेंट डाक्टरों में इस तनाव की मुख्य वजह काम का बढ़ता बोझ बताया जा रहा है। हाल ही में एम्स में एक महिला रेजिडेंट डाक्टर का रहस्यमय तरीके से मौत का मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि काम के बढ़ते दबाव की वजह से डाक्टर तनाव में थीं। ऐसे में अध्ययन इस बात को साफ कर दिया कि डाक्टर भी तनाव में जी रहे हैं। अध्ययन के अनुसार राजधानी में पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों का इलाज करने वाले 32.8 प्रतिशत रेजिडेंट डाक्टर तनाव में जी रहे हैं। क्लीनिकल और नॉन क्लीनिकल डाक्टरों में तनाव की मुख्य वजह कई-कई घंटों तक काम करना, समय पर काम पूरा करने का दबाव, अपनी पढ़ाई के साथ इमरजेंसी मरीजों, दुर्घटना तथा मौत की स्थिति में मरीजों के परिजनों को समझाने से लेकर उनके व्यवहार तक से जूझना आदि हैं। अध्ययन के अनुसार 32.8 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टर तनाव में हैं। इनमें 2.9 डाक्टर गंभीर रूप से पीडि़त हैं, जबकि 17.7 प्रतिशत सामान्य रूप से तथा 12.2 प्रतिशत हल्के तनाव में हैं। दिल्ली के बाहर के डाक्टरों की परेशानी और बढ़ जाती है। अध्ययन के अनुसार इनके अलावा असुरक्षित नौकरी, परिवार तथा निजी समस्या भी वजह हैं। अध्ययन में डाक्टर एनके सैनी, संदीप अग्रवाल, डा. एसके भसीन, एमएस भाटिया, डा. एके शर्मा शामिल थे। अध्ययन में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज, सुचेता कृपलानी मेडिकल अस्पताल, व‌र्द्धमान मेडिकल कॉलेज तथा सफदरजंग अस्पताल, यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंसेज, गुरुतेग बहादुर हॉस्टीपल के रेजिडेंट डाक्टरों को शामिल किया गया था। इनमें से 35 प्रतिशत डाक्टरों ने इसकी वजह काम का दबाव बताया तो 23 प्रतिशत ने आर्थिक तथा 11-11 प्रतिशत ने परिवार व संवेदना को इसकी वजह बताया। इस अध्ययन में विभिन्न कॉलेजों के 930 डाक्टरों ने हिस्सा लिया(राहुल आनंद,दैनिक जागरण,दिल्ली,11.6.11)।

डीयू शिक्षकों को मिला यूजीसी का तोहफा

Posted: 11 Jun 2011 08:14 AM PDT

डीयू के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मंजूर नई सेवा शर्तो के तहत अब उन्हें मिलने वाला पे बैंड-3 से 4 का प्रमोशन कॉलेज स्तर पर ही मिल जाया करेगा। अभी तक इसके लिए कॉलेज विश्वविद्यालय की मंजूरी का रोना रोते थे।

कुलपति प्रो. दिनेश सिंह और शिक्षक प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में शिक्षकों के लिए सेवा शर्तो को लेकर हुई अहम चर्चा के बाद अब 30 जून 2010 तक पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों को मिलने वाले पुरानी व्यवस्था के तहत पदोन्नति दे दी जाएगी। शिक्षकों की मानें तो कुलपति के साथ हुई सकारात्मक चर्चा के बाद हुए अहम निर्णयों के बाद डीयू के ढ़ाई हजार से ज्यादा शिक्षक सीधे लाभान्वित होंगे।

एकेडमिक्स फोर एक्शन एंड डेवलपमेंट (एएडी) की उपाध्यक्ष डॉ. रेखा दयाल व प्रेस सचिव डॉ. राजीव वर्मा ने बताया कि कुलपति प्रो. दिनेश सिंह से हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही और उन्होंने न सिर्फ शिक्षक प्रतिनिधियों को सुना, बल्कि उनकी जायज मांगों पर तुंरत अमल की तैयारी भी शुरू कर दी।


डॉ. वर्मा ने बताया कि कुलपति से हुई चर्चा के बाद पे-बैड प्रमोशन और नए नियमों के मंजूर न होने के चलते पुरानी व्यवस्था के तहत पदोन्नति देने के अहम फैसलों के साथ-साथ एमफिल व पीएचडी के स्तर पर मिलने वाले शिक्षकों की पदोन्नतियों पर भी आम रॉय बनी है, जिसका फायदा जल्द ही शिक्षकों को मिलने लगेगा। 
सेवानिवृत्ति के करीब उन शिक्षकों की समस्या पर भी कुलपति बेहद गम्भीर दिखे जो अभी भी सीपीएफ से जीपीएफ व्यवस्था में आना चाहते हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि इस मुद्दे को लेकर वह जल्द ही यूजीसी के स्तर राहत के लिए पर प्रयास करेंगे। 

एएडी के जनरल सेक्रेट्री जे खूंटिया और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य डॉ. शिबासी पांडा ने बताया कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर कुलपति से हुई चर्चा के दौरान टीचर्स ग्रीवांस सेल को फिर जीवंत करने को लेकर भी चर्चा हुई। 

इसे लेकर कुलपति ने भरोसा दिलाया है कि इस दिशा में जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि शिक्षक बिरादरी की समस्याओं का समाधान समय रहते ही हो सके। इसके अलावा, शिक्षक बिरादरी ने एक्सटर्न सेल को फिर से शुरू करने पर भी जोर दिया और कहा कि क्योंकि स्कूल ऑफ ओपन लर्निग में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता लागू कर दी गई है सो 33 प्रतिशत पाकर पास होने वाले छात्रों को भी डीयू में पढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए। 

प्रमोशन के लिए कॉलेज स्तर पर होगा फैसला, एमफिल-पीएचडी में पदोन्नति के नए नियम लागू(दैनिक भास्कर,दिल्ली,11.6.11)।

जूनियर को पहले प्रमोशन मिलने से 400 सीनियर डॉक्टरों में असंतोष

Posted: 11 Jun 2011 08:13 AM PDT

केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा में मरीजों की देखभाल करने वाले लगभग 400 डाक्टरों में काफी समय से असंतोष है। सरकरी तंत्र का दुरुउपयोग करते हुए उनके जूनियरों को पदोन्नति देकर ऊंचे पदों पर नियुक्त कर दिया गया। यह सारा काम उन आधिकारियों ने किया जो डाक्टरों की एसीआर अर्थात सालभर की गयी सेवाओं का लेखाजोखा रखते हैं। सीनियर डाक्टरों का कहना है कि उन की एसीआर गहरी साजि़श के तहत खराब की गई और सालभर के कार्य कलाप का ब्यौरा देने के बजाय उनसे व्यक्ति गत दुश्मनी निकाली गयी। सीनियर डाक्टरों का कहना है कि एक साथ 400 लोगों का करियर खराब करने के पीछे उस मानसिकता का हाथ है जो खुशामद करने वालों को ऊंचे पदों पर आसीन करती है और अपने काम से काम रखने वालों को परेशान करती है। केंद्रीय स्वास्थ्य योजना केंद्र सरकार की ओर 1954 से चलाई जा रही है और इससे कई लाख सरकारी कर्मचारी, संसद सदस्य और पेंशनर्स स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। सीनियर डाक्टरों का कहना है कि एसीआर खराब किए जाने के मामले में भी वही गुट लिप्त है जो एक साफ सुथरी सेवा पर काला दाग़ है। जबकि सीनियर डाक्टरों के मामले में उच्चतम न्यायालय का भी निर्देश है कि इन अनियमितताओं को दूर किया जाए और उनकी पदोन्नति रुकने न पाए(दैनिक जागरण,दिल्ली,11.6.11)।

छत्तीसगढ़ःअब नई कसौटी पर होंगे प्राइवेट स्कूल

Posted: 11 Jun 2011 08:09 AM PDT

पुरानी मान्यता के आधार पर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। अब उन्हें नए प्रपत्र के आधार पर आवेदन करना होगा। शिक्षा का अधिकार कानून कसौटी होगी, जिसके आधार पर वहां की व्यवस्था परखी जाएगी।

इस पर खरा उतरने के बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी मान्यता देंगे। संचालक लोक शिक्षण ने प्राइवेट स्कूलों को कानून समझाने में आ रही दिक्कतों की शिकायत के बाद निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि
किसी भी बोर्ड से संबद्घता रखने वाले विद्यालयों को मान्यता डीईओ
ही देंगे।

शुक्रवार को रायपुर में हुई बैठक में मिले निर्देश के बाद शिक्षा विभाग नई कवायद करने की तैयारी में है। बताया गया कि जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों को नए सिरे से मान्यता प्राप्त करने नोटिस भेजा जाएगा। उन्हें नए प्रपत्र के आधार पर आवेदन करने 30 दिनों की मोहलत दी जाएगी।

इसके बाद डीईओ द्वारा गठित टीम स्कूलों का निरीक्षण कर वहां निहित व्यवस्थाओं का जायजा लेगी। शिक्षा के अधिकार कानून के मापदंडों पर स्कूलों को जांचा जाएगा। खामी नजर आने पर उन्हें उसे पूरा करने निर्धारित समयावधि दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार कानून लागू होने के बावजूद सीबीएससी व अन्य बोर्डो से संबद्ध विद्यालय डीईओ के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को की गई थी।


इसी आधार पर संचालक लोक शिक्षण ने स्पष्ट किया कि कोई भी बोर्ड परीक्षा पैटर्न को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन विद्यालय संचालन की मान्यता जिला शिक्षाधिकारी से ही मिलेगी। 

शासन से मिलेगी यूनिफार्म 

गरीब परिवार के बच्चों को यूनिफार्म, पुस्तकें आदि सर्व शिक्षा अभियान से मुहैया कराया जाएगा।निजी स्कूलों के नार्म्स के अनुसार उन्हें सारी चीजें मुहैया कराई जाएंगी। इसके अलावा शासन द्वारा निर्धारित फीस भी निजी विद्यालयों को दी जाएगी।

"निर्धारित नार्म्स के आधार पर निजी स्कूलों को मान्यता लेनी होगी। नार्म्स पूरा नहीं करने वाले विद्यालयों को समय दिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद खरा नहीं उतरने पर उनकी मान्यता भी रद्द की जाएगी।"

बीएल र्कु, डीईओ(दैनिक भास्कर,भिलाई-रायपुर,11.6.11)

रांची का रूपेश इंटर में झारखंड टॉपर

Posted: 11 Jun 2011 08:08 AM PDT

झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने शुक्रवार को इंटर का रिजल्ट जारी कर दिया। संत जॉन्स इंटर कॉलेज, रांची के रूपेश कुमार गुप्ता ने 405 अंक लाकर स्टेट टॉप किया। रूपेश के पिता ओमप्रकाश गुप्ता बस ड्राइवर हैं। इंटर कॉलेज हजारीबाग के मयंक कुमार ने 402 अंक के साथ राज्य में दूसरा और रांची कॉलेज रांची के राज कुमार शाह ने 400 अंक लाकर तीसरा स्थान हासिल किया। साइंस के ये तीनों छात्र अपने संकाय में भी क्रमश: ओवरऑल फस्र्ट, सेकेंड और थर्ड आए हैं। राज्य में संत जेवियर कॉलेज, रांची की सना उस्मानी ने 374 अंक लाकर आर्ट्स टॉपर व संत जेवियर कॉलेज की प्रियंका रूंगटा ने 375 अंक लाकर कॉमर्स टॉपर होने का गौरव हासिल किया।
57.70 फीसदी छात्र फेल
इंटर में राज्य से 2,93,842 विद्यार्थी शामिल हुए। इनमें महज 42.30 फीसदी सफल रहे। बाकी 57.70 फीसदी फेल हो गए(दैनिक भास्कर,रांची,11.6.11)।

छत्तीसगढ़ः15 जुलाई तक होंगे तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले.

Posted: 11 Jun 2011 08:07 AM PDT

राज्य शासन ने कर्मचारियों के तबादलों पर लगा प्रतिबंध एक महीने के लिए हटा लिया है। तृतीय और चतुर्थ वर्ग के



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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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