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Wednesday, June 8, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/6/8
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


बिहारःदूर होंगी सचिवालयकर्मियों की समस्याएं

Posted: 07 Jun 2011 11:29 AM PDT

सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने सचिवालय सेवा संघ के शिष्टमंडल को आश्वासन दिया है कि उनकी वाजिब मांगों को जल्द पूरा किया जायेगा। मंगलवार को संघ की अध्यक्ष नीलम कपूर, महासचिव अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में शिष्टमंडल दस सूत्री मांगों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव से मिला था।
सहायक के रिक्त पदों को शीघ्र भरने, सचिवालय सेवा के विभिन्न पदों पर प्रोन्नति, सचिवालय सेवा के ग्रेड पदों का पुनर्गठन, सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति, सचिवालय सेवा की अद्यतन वरीयता सूची का प्रकाशन, एसीपी की विसंगतियां दूर करना 34 दिनों की हड़ताल एवं 1 दिन के सामूहिक आकस्मिक अवकाश को उपार्जित अवकाश में समायोजित करते हुए उक्त अवधि का भुगतान किया जाना, कम्प्यूटर सक्षमता के नाम पर वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश में संशोधन आदि इनकी प्रमुख मांगें हैं(दैनिक जागरण संवाददाता,पटना.7.6.11)।

यूपीःबढ़ेंगी बीटीसी की 42500 सीटें!

Posted: 07 Jun 2011 11:15 AM PDT

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने उत्तर प्रदेश में बीटीसी कोर्स संचालित करने के इच्छुक 850 कॉलेजों को मान्यता प्रदान करने के मकसद से राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मांगे हैं। यदि इन सभी कॉलेजों को एनसीटीई से बीटीसी कोर्स संचालित करने की मान्यता और राज्य सरकार से संबद्धता मिलती है तो प्रदेश में बीटीसी की 42,500 सीटें बढ़ जाएंगी। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक नियुक्त होने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक व बीटीसी है। 70 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में बीटीसी की 10,400 सीटें हैं। वहीं सूबे में संचालित 97 निजी कॉलेजों में बीटीसी की 4,850 सीटें हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में बीटीसी की 15,250 सीटें हैं। बीटीसी कोर्स संचालित करने के लिए आवेदन करने वाले कॉलेजों को एनसीटीई पहले मान्यता देती है। 
प्रदेश में बीटीसी कोर्स संचालित करने के इच्छुक तकरीबन 850 नये कॉलेजों ने मान्यता के लिए एनसीटीई के समक्ष आवेदन किया है। एनसीटीई ने इन कॉलेजों को मान्यता देने से पहले राज्य सरकार से एनओसी मांगा है। शासन इन कॉलेजों को एनओसी देने के बारे में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से रिपोर्ट मांगने जा रहा है। कॉलेजों को एनओसी के बारे में एससीईआरटी से एक हफ्ते में शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई है। इस संबंध में एससीईआरटी को पत्रावलियां भेजने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। शासन को एनसोसी की रिपोर्ट देने के लिए एससीईआरटी कॉलेजों का स्थलीय निरीक्षण कर उनके संसाधनों की पड़ताल करेगा। इन सभी कॉलेजों को एनसीटीई से मान्यता मिलती है और राज्य सरकार भी उन्हें संबद्धता दे देती है तो प्रदेश में बीटीसी की 42,500 सीटें बढ़ जाएंगी(दैनिक जागरण,लखनऊ,7.6.11)।

यूपी बोर्ड के अपूर्ण परीक्षाफल का निस्तारण दो माह में

Posted: 07 Jun 2011 11:13 AM PDT

यूपी बोर्ड में चार प्रतिशत ऐसे परीक्षार्थी हैं, जिनका परीक्षाफल अपूर्ण घोषित हुआ है। ऐसे परीक्षार्थियों के अंकपत्र में डिवीजन के स्थान पर 'आइएनसी' अंकित है। बोर्ड और विद्यालयों की तकनीकी खामियों के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। हालांकि, यह किस्सा हर साल का है। प्रत्येक वर्ष अपूर्ण परीक्षाफल छात्रों और अभिभावकों के लिए समस्याएं पैदा करते हैं। दरअसल, परीक्षा फार्म भरते के दौरान निर्धारित विषयों में विसंगति और छात्र, विद्यालय अथवा स्वयं परिषद की लापरवाही के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के अधिकारियों की मानें तो त्रुटिपूर्ण परीक्षाफल को दो माह में ठीक कर लिया जाएगा। अपूर्ण परीक्षाफल की घोषणा के बाद छात्रों के लिए स्नातक कक्षाओं में दाखिला लेने की राह आसान होगी। संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में वांछित आपत्ति के निस्तारण के बाद बोर्ड छात्रों के अंकों के आधार पर अंकपत्र निर्गत कर देगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद के मेरठ, बरेली, वाराणसी और इलाहाबाद के क्षेत्रीय कार्यालयों में इसके लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। अपूर्ण परीक्षाफल में एवार्ड ब्लैंक में गड़बड़ी, अनिर्धारित विषय, नकल में पकड़े जाना, पंजीकरण में गड़बड़ी, स्कूलों में निर्धारित संख्या से अधिक छात्रों का पंजीकरण जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। सोमवार को इंटर परीक्षाफल की घोषणा के समय बोर्ड की सचिव प्रभा त्रिपाठी ने अपूर्ण परीक्षाफल की स्थिति स्पष्ट की। लगभग सभी जिलों में तीन से आठ प्रतिशत तक छात्रों के परिणाम अपूर्ण हैं(दैनिक जागरण संवाददाता,इलाहाबाद,7.6.11)।

ग्रामीण लड़कियों की पहली पसंद बना डीयू का भगिनी निवेदिता कॉलेज

Posted: 07 Jun 2011 11:00 AM PDT

नजफगढ़ क्षेत्र के कैर गांव स्थित डीयू के भगिनी निवेदिता कॉलेज ग्रामीण छात्राओं की पहली पसंद है। यहां पढ़ने वाली लगभग 80 फीसदी छात्राएं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। यहां बीए प्रोग्राम के तहत इतिहास, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत व अर्थशास्त्र की पढ़ाई होती है। वहीं रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए कई कोर्स यहां उपलब्ध हैं। बीए प्रोग्राम के तहत ही वस्त्र डिजाइन व प्रबंधन, फूड टेक्नोलॉजी, न्यूट्रीशन व हेल्थ एजूकेशन, फेमिली एंड चाइल्ड वेलफेयर, कंप्यूटर एप्लीकेशन के कोर्स उपलब्ध हैं। कॉलेज प्राचार्य डॉ. पूरबि सेकिया ने बताया कि कला, वाणिज्य, विज्ञान तीनों ही संकायों की यहां पढ़ाई होती है। यही नहीं छात्राओं की संगीत संबंधी रुचि को देखते हुए कॉलेज में संगीत की पढ़ाई भी होती है। इसके अलावा बीएससी फिजिकल साइंस के तहत दो कोर्स की सुविधा है। एक में भौतिकी, रसायन के साथ गणित तो दूसरे में भौतिकी व गणित के साथ कंप्यूटर विषय पढ़ाया जाता है। कॉमर्स में दाखिले की इच्छुक छात्राओं के लिए बीकॉम प्रोग्राम की सुविधा यहां है। वहीं ऑनर्स कोर्स की पढ़ाई सिर्फ हिंदी में ही होती है। कॉलेज में पांच फीसदी सीटें स्पो‌र्ट्स व अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधि (ईसीए) कोटे के तहत आरक्षित हैं। यहां की कई लड़कियों ने खेल की दुनिया में अपना नाम रोशन किया है। कॉलेज आने-जाने में छात्राओं को कोई असुविधा नहीं हो, इसके लिए अपनी बस सर्विस है। यह बस प्रत्येक पीरियड के बाद कॉलेज से मित्राऊ स्टैंड तक जाती है। ये सेवा निशुल्क है(दैनिक जागरण,दिल्ली,7.6.11)।

डीयूःआ‌र्ट्स के छात्र भी कर सकेंगे बीएससी

Posted: 07 Jun 2011 10:47 AM PDT

बारहवीं में आ‌र्ट्स या कॉमर्स पढ़ने वाले छात्रों को भी डीयू बीएससी में की डिग्री प्रदान करेगा। कोर्स में दाखिले की शर्त यह है कि छात्र ने बारहवीं में गणित और अंग्रेजी विषय जरूर पढ़ा हो। डीयू के गणित विभाग के अध्यक्ष और दाखिला कोर्स निर्माण कमेटी के अध्यक्ष प्रो. बीके दास ने बताया कि सेमेस्टर सिस्टम के आधार पर अब छात्रों को सिलेबस दो हिस्सों में पढ़ना होगा, इससे उनकी समझ भी बेहतर बन सकेगी। उन्होंने बताया कि डीयू में पहले बीए ऑनर्स गणित और बीएससी ऑनर्स गणित विषय की अलग-अलग डिग्री मिलती थी। जबकि कोर्स का सिलेबस एक था। इसलिए इसे मिलाकर एक बनाया गया। बीएससी ऑनर्स गणित, बीएससी ऑनर्स कंप्यूटर साइंस और बीएससी ऑनर्स सांख्यिकी में दाखिले के लिए जरूरी है कि छात्र ने बारहवीं में गणित और अंग्रेजी पढ़ी हो। कट ऑफ लिस्ट में अगर अंक प्रतिशत सही बैठता है तो वे दाखिला ले सकते हैं। खास बात है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी मैथमेटिक्ल साइंस कोर्स पढ़ाया जा रहा है। अभी यह कोर्स तीन कॉलेज में पढ़ाया जा रहा है, लेकिन जल्द ही इसे अन्य कॉलेजों में शुरू किया जाएगा। कई कॉलेजों से इस कोर्स को शुरू करनी की मांग आ चुकी है। हाल ही में इस कोर्स का नया सिलेबस तैयार किया गया है। जिसमें सोशल साइंस, आ‌र्ट्स, कॉमर्स और साइंस विषयों को क्रेडिट विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। जबकि चार में से तीन विषयों को मुख्य विषय के रूप में। यह तीन विषय गणित के अलावा ऑपरेशनल रिसर्च, सांख्यिकी और कंप्यूटर साइंस हैं(दैनिक जागरण,दिल्ली,7.6.11)।

राज्य मांगेंगे मॉडल कॉलेजों के लिए नियमों में ढील

Posted: 07 Jun 2011 10:30 AM PDT

केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग से प्रदेश में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े जिलों में मॉडल कॉलेजों की स्थापना के लिए शासन को जमीन नहीं मिल पा रही है। कॉलेजों के लिए जमीन का बंदोबस्त कर पाने में नाकाम होने के बाद शासन उन्हें सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) के आधार पर भी स्थापित करने में असफल रहा है। बुधवार को नई दिल्ली में होने वाले राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में जमीन के मानक को शिथिल करने की मांग की जाएगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े 374 ऐसे जिलों को चिन्हित किया है जिनमें उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 10 प्रतिशत से भी कम है। इनमें से 41 जिले उत्तर प्रदेश के हैं। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने इन जिलों में मॉडल कॉलेजों की स्थापना की योजना शुरू की है। केंद्र ने पहले चरण में योजना को प्रदेश के श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, ललितपुर तथा बदायूं में शुरू करने का फैसला किया। इन जिलों में उच्च शिक्षा में नामांकन प्रवेश दर छह प्रतिशत से कम है। यह कॉलेज इन जिलों के ऐसे क्षेत्रों में खोले जाने हैं जिनमें अनुसूचित जाति/जनजाति या अल्पसंख्यक या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की तादाद ज्यादा हो। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार मॉडल कॉलेजों की स्थापना के लिए कस्बों में दो हेक्टेयर और ग्रामीण क्षेत्रों में चार हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए। यह जमीन राज्य सरकार को नि:शुल्क उपलब्ध करानी है। केंद्र सरकार के आकलन के मुताबिक मॉडल कॉलेज के निर्माण पर आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें से एक तिहाई धनराशि केंद्र राज्य को अनुदान के तौर पर देगा। निर्माण का शेष खर्च राज्य को वहन करना है। दिक्कत यह है कि राज्यों को मॉडल कॉलेजों के लिए यूजीसी के मानक के अनुसार जमीन नहीं मिल रही है(दैनिक जागरण,लखनऊ,7.6.11)।

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणामःसरकारी पर भारी पड़े निजी स्कूल

Posted: 07 Jun 2011 08:30 AM PDT

उत्तराखंड बोर्ड की हाई स्कूल व इंटर के परीक्षा परिणामों में प्राइवेट के सामने सरकारी स्कूलों की चमक फीकी रही। प्रदेश की वरिष्ठता सूची में प्राइवेट कालेजों का ही बोलबाला रहा। वरिष्ठता सूची में एक बार फिर विद्या भारती द्वारा संचालित विद्या मंदिरों के अनेक छात्र वरिष्ठता सूची में स्थान पाने में कामयाब रहे। बोर्ड के परीक्षाओं परिणामों से एक बार फिर सरकारी स्कूलों की पोल-पट्टी खुलकर समाने आ गई है। इंटर की 62 परीक्षार्थियों की वरिष्ठता सूची में सरकारी स्कूलों के 20-22 छात्रों को ही स्थान मिल पाया। इसके विपरीत प्राइवेट स्कूलों में विद्या भारती से सम्बद्ध स्कूलों के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। इन स्कूलों के करीब 23 विद्यार्थी के नाम वरिष्ठता सूची में शामिल हैं। हाईस्कूल की वरिष्ठता सूची कमोवेश ऐसी ही स्थिति ही रही। 86 छात्रों की सूची में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत रही। हाई स्कूल में भी विद्या भारती के स्कूलों का वर्चस्व रहा। इन स्कूलों के करीब 40 छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर वरिष्ठता सूची में जगह बनाई। वरिष्ठता सूची के आंकड़े ने सरकारी स्कूलों को आइना दिखाकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हर माह हजारों रुपए का वेतन लेने वाले सरकारी स्कूलों के शिक्षक बेहतर परफाम्रेस देने में नाकाम साबित हुए। वेतन, अवकाश समेत सुविधाओं में सरकारी शिक्षकों के मुकाबले मामूली वेतन पर कार्य करने वाले प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों ने अपनी लगन व मेहनत के दम पर छात्रों की प्रतिभा को निखारने में सफल रहे। खास बात यह है कि मास्साब का सबसे पसंदीदा सुविधाजनक स्थानों में स्थित स्कूलों का प्रदर्शन भी छाप नहीं छोड़ पाया, जबकि हर साल इन स्कूलों में शिक्षकों तैनाती पाने के लिए मारामारी होती है(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,7.6.11)।

उत्तराखंडःहाईस्कूल मेरिट लिस्ट के टॉप 86 में दून के मात्र पांच विद्यार्थी ,मुंह छिपाने को विवश हुए अफसर

Posted: 07 Jun 2011 07:30 AM PDT

सोमवार को घोषित हुए उत्तराखंड हाईस्कूल व इंटर के बोर्ड परीक्षा परिणाम में जिले के बेहद खराब प्रदर्शन से विभागीय अधिकारी भी मुंह छिपाने को विवश रहे। निदेशक विद्यालयी शिक्षा सीएस ग्वाल जहां देर शाम तक फोन बंद किए हुए थे वहीं जिला शिक्षा अधिकारी गीता नौटियाल भी इस बारे में बात करने से कतराती रही थीं। पूरी घंटी बजने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। बता दें की हाईस्कूल मेरिट लिस्ट में टॉप 86 विद्यार्थियों में मात्र पांच देहरादून के हैं। जबकि इंटर की मेरिट लिस्ट में टॉप 62 विद्यार्थियों में से चार ही देहरादून के हैं। उत्तराखण्ड हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की मेरिट लिस्ट में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज राजपुर रोड की मेघा मिश्रा 91.20 प्रतिशत अंक लेकर 12वीं रैंक पर रहीं जबकि एमए राजकीय इंटर कॉलेज डाकपत्थर से यश अरोड़ा भी 91.20 प्रतिशत अंक लेकर 12वीं ही रैंक पर रहे। इसके बाद राजकीय इंटर कॉलेज बुल्लावाला की शैफाली 90.40 प्रतिशत अंक लेकर 16वीं रैंक हासिल किया। डीएवी इंटर कॉलेज प्रेमनगर से भगवत सिंह चौहान 89.40 प्रतिशत अंक लेकर मेरिट लिस्ट में 21वीं रैंक पर रहे। जबकि सरस्वती विद्या मंदिर नेहरू मार्केट डाकपत्थर से विवेक कुमार सिंह 89.20 प्रतिशत अंक लेकर 22वीं रैंक पर रहे। इन पांचों में से तीन ही सरकारी स्कूलों से हैं। उधर इंटर की मेरिट लिस्ट में एसजी सरस्वती विद्या मंदिर सुमननगर धर्मपुर के प्रदीप कुमार कुशवाह 87.60 प्रतिशत अंक लेकर 6ठी रैंक पर रहे। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज विकासनगर देहरादून से अतुल कुमार 85.20 प्रतिशत अंक लेकर 16वीं रैंक पर रहे। जबकि राजकीय इंटर कॉलेज खदरी खडकमाफ से 83.60 प्रतिशत अंक लेकर शोमित गिरी 24वीं रैंक पर रहे। एसजी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज सुमननगर धर्मपुर से सत्यम सिंह 83.40 प्रतिशत अंक लेकर 25वीं रैंक पर रहे। इस तरह इंटर की मेरिट लिस्ट में भी चार विद्यार्थियों में से मात्र एक ही सरकारी स्कूल का है। इस तरह पूरे परीक्षा परिणाम पर नजर डालें तो हाईस्कूल व इंटर की मेरिट लिस्ट में शामिल दून के कुल नौ में से मात्र चार विद्यार्थी ही सरकारी स्कूलों के हैं। जबकि पांच विद्यार्थी निजी स्कूलों के रहे। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है की तमाम सुविधाओं के मिलने के बाद भी सरकारी स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थियों के शिक्षण कार्य में कितनी रुचि ले रहे हैं। खराब बोर्ड परीक्षा परिणाम के बारे में जिला शिक्षा अधिकारी गीता नौटियाल से बात करनी चाही तो उन्होंने व्यस्तता का बहाना बताते हुए फोन काट दिया जबकि उसके बाद घंटों उनकी फोन की घंटी बजाने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। जबकि दूसरी ओर निदेशक विद्यालयी शिक्षा सीएस ग्वाल का मोबाइल देर शाम तक फोन स्वीच ऑफ बताता रहा। विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम से ही शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होना था। अब देखना है की खराब प्रदर्शन के बाद पढ़ाने में रुचि न लेने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभाग किस तरह की कार्रवाई कब तक करता है(ललित कुमार,राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,7.6.11)।

बिहारःअब ना रहेंगे सरकारी पद खाली

Posted: 07 Jun 2011 07:10 AM PDT

अब ना रहेंगे सरकारी पद खाली। प्रभार दिये बिना कर्मियों के गायब हो जाने से अक्सर सरकारी कामकाज और विकास की गतिविधियां बाधित होती है। साथ ही सरकारी कर्मी को बिना काम किए भारी-भरकम वेतन का भुगतान करना पड़ता है। लम्बे समय तक विचार-विमर्श के बाद सरकार ने इस समस्या से उबरने का रास्ता तलाश लिया।

मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी ने सभी प्रधान सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पांच उपाय सुझाये हैं। पूरी कवायद का मकसद अफसरों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य करना है। नयी व्यवस्था में प्रत्येक विभाग और कार्यालयों जहां स्थानांतरण, पदस्थापना और प्रभार सौंपे जाने की कार्रवाई होती है वहां विशेष सेल खोला जायेगा।


सेल हरेक पदाधिकारी और कर्मचारी को सौंपी गयी जिम्मेदारी का हिसाब रखेगा। जितने भी सरकारी कर्मी पदस्थापनन और प्रभार की प्रतीक्षा में होंगे उन्हें हरेक शुक्रवार को विभागीय सचिव, विभागाध्यक्ष और कार्यालय प्रधान के समक्ष पेश होना पड़ेगा। मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि पदों के प्रभाररहित होने की स्थिति कम होनी चाहिए।

प्रभार रहित होने की वजहः मनोनुकूल या मलाईदार पदस्थापन नहीं होना, क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा प्रभार लेने में आनाकानी, सक्षम प्राधिकार द्वारा पदस्थापना में देर, बगैर रिक्ति के गलत पदस्थापन।

समस्या का समाधानः नई नियुक्ति के ही साथ पदस्थापन का भी निर्णय, रिक्तियों की अद्यतन ब्योरा तैयार हो, वेटिंग फॉर पोस्टिंग की हरेक माह हो समीक्षा, पोस्टिंग संभव नहीं होने पर कर्मी से मुख्यालय में काम करायें, तैनाती के बाद प्रभार रहित अवधि पर लें निर्णय(हिंदुस्तान,पटना,7.6.11)।

नेतरहाट स्कूल: शिक्षकों ने ही साख पर लगाया बट्टा

Posted: 07 Jun 2011 06:50 AM PDT

वर्ष 2011 की मैट्रिक परीक्षा में देश का जाना माना नेतरहाट आवासीय विद्यालय के शिक्षकों ने ही साख बचाने के लिए कदाचार की खुली छूट दे रखी थी। एवज में नेतरहाट में ही स्थित दूसरे सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने भी इस ख्यातिप्राप्त विद्यालय के छात्रों को कदाचार के हर हथकंडे में साथ निभाया। दोनों विद्यालय के प्रबंधनों ने आपसी सहमति के आधार पर ऐसा किया।


कदाचार कराके यह प्रयास किया गया कि नेतरहाट आवासीय विद्यालय की बनी प्रतिष्ठा बरकरार रहे। साथ ही साथ सरकारी विद्यालय का रिजल्ट भी बेहतरीन हो जाए। अंतरिम जांच रिपोर्ट में कई चौंकानेवाले तथ्य उजागर किए गए है। मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय कमेटी ने अंतरिम रिपोर्ट एकेडमिक कौंसिल को सौंप दी है। इसमें कॉपी में व्हाइटनर लगाने के साथ-साथ कदाचार की बात भी कही गई है। शिक्षकों के सामने ही छात्र मजे में परीक्षा लिखते रहे। जैक ने दोनों स्कूल के प्राचार्यो को शो कॉज जारी किया है।

क्या है मामला
कॉपी पर व्हाइटनर लगाए जाने के कारण नेतरहाट के छात्रों का रिजल्ट रोक दिया गया है। साथ ही बगल के सरकारी स्कूल का भी रिजल्ट प्रकाशन पर रोक लगा दिया गया। पूरे मामले की जांच के लिए एचआरडी के उपसचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी। जांच रिपोर्ट के बाद जैक अब प्राचार्यो के जवाब के इंतजार में है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शो कॉज का जवाब नहीं दे रहे प्राचार्य
प्राचार्य शो कॉज का जवाब देने से कतरा रहे हैं। जैक को मिली जानकारी के अनुसार नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्राचार्य शादी में गए हैं। साथ ही सरकारी स्कूल के प्राचार्य को पत्र रिसिव करा दिया गया है। बावजूद इसके कौंसिल को जवाब नहीं मिल पाया है(राजीव,दैनिक हिंदुस्तान,रांची,7.6.11)।

उत्तराखंडःपढ़ाई ही नहीं, खेलों में भी फिसड्डी हैं सरकारी स्कूल

Posted: 07 Jun 2011 06:30 AM PDT

सरकारी स्कूल महज मास्टर लोगों की रोजी-रोटी के साधन बन कर रह गए हैं। पढ़ाई ही नहीं दूसरी गतिविधियों में इन स्कूलों की भूमिका सिफर ही है। बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने देहरादून जैसे विविख्यात शिक्षा के केंद्र की आंखें खोल दी हैं। देहरादून के सरकारी स्कूलों का सिर शर्म से झुक गया है। मामला सिर्फ पढ़ाई का नहीं है, शिक्षक बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं, लेकिन भरपूर स्टाफ होने के बाद भी यहां खेल व दूसरी गतिविधियों का परिणाम भी कुछ ऐसा ही है। इन मदों में पैसा जमकर खर्च होता है, लेकिन उपलब्धि करीब-करीब शून्य ही है। सोमवार को उत्तराखंड में 10वीं 12वीं के बोर्ड परिणाम घोषित किए गए। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाला दून सरकारी स्कूलों के चलते अपनी पहचान दिनों दिन खोता जा रहा है। इस साल भी यहां का बोर्ड परिणाम कुछ खास नहीं रहा है। वैसे तो सरकारी स्कूलों के मास्टर अपने-अपने स्कूलों को हर गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ बताते हैं। पढ़ाई के अलावा खेल, सांस्कृतिक समारोह या जीके प्रतियोगिता हो इसमें भी सरकारी स्कूलों के छात्र फिसड्डी साबित हुए हैं। इन स्कूलों के अलावा दून के अधिकतर प्राइवेट स्कूलों के छात्र हर गतिविधियों में वास्तव में अव्वल स्थान बनाए हुए हैं। खेल हो जीके प्रतियोगिता उनके नाम गोल्ड ही आया है। हाल ही में आईसीएसई, सीबीएसई के परिणाम घोषित हुए थे उसमें भी दून के प्राइवेट स्कूलों के छात्रों ने टॉप किया। सरकारी स्कूलों में इतना पैसा खर्च करने के बावजूद यहां के छात्र पीछे ही रह जाते हैं। सही मायने में देखा जाये तो प्राइवेट स्कूलों में छात्रों से अधिक पैसा वसूला जाता है, लेकिन सरकारी स्कूलों में सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं छात्रों तक नहीं पहुंच पातीं शायद इसलिए ही प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल हमेशा से ही पीछे रहा है। राष्ट्रीय स्कूल की खेल प्रतियोगिताओं में भी सरकारी स्कूलों के छात्रों को न के बराबर प्रोत्साहित किया जाता है। जिसके चलते गिने-चुने ही सरकारी स्कूलों छात्र प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक अपने नाम कर पाते हैं, इनके अलावा प्राइवेट स्कूलों के छात्र लगभग सभी खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपना डंका पिटते नजर आए हैं। पढ़ाई हो या खेल राज्य सरकार केवल अपनी डींगे हांकती रही है। जबकि देखा जाय तो सरकारी स्कलों में छात्रों की ओर से किसी का ध्यान आकषिर्त नहीं है। स्कूलों में बैठे मास्टर भी केवल अपनी नौकरी पूरा करना चाहते हैं। श्रीगुरु राम राय इंटर कालेज नेहरूग्राम के खेल अध्यापक रमाशंकर शर्मा ने कहा कि राजकीय स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों के छात्र सभी गतिविधियों में ज्यादा सफल रहते हैं। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों में अधिक कार्य होने के बावूजद अन्य काम भी सौंप दिए जाते हैं। स्कूलों में कम संख्या होने पर टीचर्स के ट्रांसफर भी कर दिये जाते हैं। साई कोच पीके महषर्ि का मानना है कि अधिकतर सरकारी स्कूल दूर होते हैं, स्कूल दूर होने की वजह से छात्र थक जाते हैं, जिसके कारण खेल तो दूर की बात बच्चे पढ़ने में भी हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए बच्चों की शारीरिक फिटनेस बहुत जरूरी है, जिसके लिए बच्चों का खेलना अत्यंत जरूरी है। शरीर फिट रहेगा तो मानसिक तनाव भी दूर होंगे। महर्षि का यह भी कहना है कि गरीब तबके के लोग ट्यूशन नहीं पढ़ पाते जिसकी वजह से उन्हें सर्वाधिक अंक लाने में भी परेशानी होती है, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को आर्थिक समस्या कम होती है(सुभाष छेत्री,राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,7.6.11)

अंग्रेजी के मुद्दे पर गोवा में प्रदर्शन

Posted: 07 Jun 2011 06:10 AM PDT

प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में मान्यता देने के गोवा सरकार के फैसले के विरोध में सोमवार को प्रदर्शनकारी 'गोवा बंद' का आह्वान करते हुए सड़कों पर उतर आए। इसके चलते यातायात प्रभावित हुआ। गोवा सरकार ने हाल ही में अंग्रेजी को मराठी और कोंकणी के साथ ही शिक्षा के माध्यम की भाषा के तौर पर मान्यता दी है। इससे अब अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों को भी अनुदान मिल सकेगा। इस फैसले का कड़ा विरोध हो रहा है। विरोध करने वालों को आशंका है कि इस फैसले से स्थानीय भाषाओं में चलने वाले स्कूलों का महत्व कम हो जाएगा। भारतीय भाषा सुरक्षा मंच ने गोवा बंद का आह्वान किया है। इसे भाजपा, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, शिवसेना तथा राज्य के 67 संस्थान समर्थन दे रहे हैं। सुबह से गोवा में अंतरशहरी बसें नहीं चल रही हैं। कुछ ही बसों में कुछेक यात्री बैठे देखे गए। गोवा में स्कूल भी बंद रहे जबकि सोमवार को नए अकादमिक वर्ष का पहला दिन था। जो स्कूल खुले थे, उनमें शिक्षक समय पर नहीं पहुंच सके और विद्यार्थियों की संख्या भी काफी कम रही। पुलिस ने कहा कि मारगोवा और बिछोलिम में प्रदर्शनकारियों ने सरकार संचालित कदम्ब परिवहन निगम लिमिटेड की दो बसों पर पथराव किया(राष्ट्रीय सहारा,पणजी,7.6.11)।

बढ़ेगी डीयू के हॉस्टलों की फीस

Posted: 07 Jun 2011 05:50 AM PDT

कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली यूनिवसिर्टी के कॉलेजों के हॉस्टलों को मॉडर्न लुक दिया गया था और स्टूडेंट्स को बिल्कुल नया हॉस्टल मिला। अब कॉलेजों के सामने इन हॉस्टलों का मेंटनेंस किसी चैलेंज से कम नहीं है। बेहतर रखरखाव के लिए कॉलेज अपने हॉस्टलों की फीस में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहे हैं।

सेंट स्टीफंस कॉलेज ने हॉस्टल फीस में करीब 20 फीसदी का इजाफा भी कर दिया है। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, किरोड़ीमल कॉलेज, रामजस कॉलेज भी फीस बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं। कॉलेजों का कहना है कि स्टूडेंट्स को हॉस्टल में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं और हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी किए बिना हॉस्टल का बेहतर रखरखाव मुश्किल होगा।

सेंट स्टीफंस कॉलेज में र्फस्ट सेमेस्टर में स्टूडेंट्स को 18,000 और सेकंड सेमेस्टर में 14,500 रुपये हॉस्टल फीस के रूप में देने होंगे। र्फस्ट सेमेस्टर में 12,000 रुपये मेस चार्ज भी देने होंगे। सेकंड सेमेस्टर के मेस चार्ज का अभी ऐलान नहीं किया गया है। कॉलेज में एडमिशन कमिटी के इंचार्ज के. एम. मैथ्यू का कहना है कि महंगाई बढ़ गई है और मेंटनेंस का काम भी महंगा हो गया है, यही कारण है कि हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी करनी पड़ी है।

नॉर्थ कैंपस के रामजस कॉलेज में पिछले साल हॉस्टल फीस में काफी कमी कर दी गई थी। मसलन एनुअल चार्ज 2,320 रुपये से कम कर 900 रुपये कर दिए गए थे और इलेक्ट्रिसिटी और वॉटर बिल भी 2,200 रुपये से घटाकर 1,400 रुपये कर दिया गया था। बाकी चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया था।


लेकिन अब कॉलेज का कहना है कि चार्ज कम किए जाने से हॉस्टल के रखरखाव में काफी समस्या आई। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजेंद प्रसाद का कहना है कि हॉस्टल फीस कम किए जाने से समस्या आई क्योंकि जो फैसिलिटी स्टूडेंट्स को दी गई थी, उसे देखते हुए मेंटनेंस पर भी काफी खर्च होता है। हालांकि अभी कॉलेज ने यह तय नहीं किया है कि कितनी फीस बढ़ाई जाएगी। लेकिन हॉस्टल वॉर्डन का कहना है कि फीस के पुराने स्ट्रक्चर को तो वापस लाया ही जाएगा। इस मसले पर कॉलेज हॉस्टल कमिटी की जल्द ही मीटिंग होगी, जिसमें फैसला लिया जाएगा। 

एसआरसीसी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पी. सी. जैन का कहना है कि हॉस्टल फीस में कम से कम 15 पर्सेंट की तो बढ़ोतरी करनी ही होगी ताकि स्टूडेंट्स को पहले की तरह ही सुविधाएं मिलती रहें। उन्होंने कहा कि गेम्स के चलते हॉस्टलों को नया रूप तो दिया गया लेकिन इसे बरकरार रखने के लिए भी काफी पैसे की जरूरत पड़ती है। किरोड़ीमल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. भीम सेन सिंह का कहना है कि हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी तो होनी है लेकिन कब और कितनी बढ़ोतरी होगी, इसके बारे में अभी फैसला लिया जाना बाकी है(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,7.6.11)।

उत्तराखंडःएसजीआरआर को पीजी में सात विषयों के लिए 14 सीटों के लिए मिली मान्यता

Posted: 07 Jun 2011 05:30 AM PDT

श्री गुरुराम राय मेडिकल कालेज (एसजीआरआर) को पीजी कोर्स कराने की मान्यता मिल गई है। केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल कालेज को सात विषयों में 14 सीटों पर पीजी कराने की मंजूरी दे दी है। दूसरी तरफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कालेज को रिकोग्नाइज्ड कर दिया गया है। मेडिकल कालेज के प्रशासनिक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में गुरुराम राय चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान के स्वास्थ्य व शिक्षा सलाहकार डा. एसके घिल्ड़ियाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने एसजीआरआर मेडिकल कालेज को पूर्ण मान्यता दे दी है। सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि कालेज को सात विषयों में पीजी कोर्स के लिए 14 सीटों की मान्यता मिल गई है। इसमें माइक्रोबायलॉजी, फिजियोलॉजी, पेथोलॉजी, एंटोमी, कम्यूनिटी मेडिसीन, एसएमटी व फार्माकालॉजी में पीजी कोर्स शामिल हैं, जबकि माइक्रोबायोलॉजी की मान्यता का प्रोसेस केंद्र स्तर पर चल रहा है। इसके अलावा अगले वर्ष के लिए 12 अन्य विषयों के लिए भी आवेदन किया हुआ है। उन्होंने बताया कि केवल उन्हीं डाक्टरों को दाखिला दिया जाएगा जो एक वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करने का अनुबंध करेंगे। हालांकि सीटें पहले ही भर जाने से इस वर्ष इस शर्त को नहीं रखा गया है, अगले वर्ष से यह शर्त लागू होगी। यह सभी सीटें गुरुराम राय मेडिकल कालेज के लिए ही हैं। सीटों का आवंटन लिखित परीक्षा कर मैरिट को देखकर किया जाएगा। घिल्ड़ियाल ने बताया कि मेडिकल कालेज ने गढ़वाल के प्रत्येक जनपद में हेल्थ सेंटर खोलने की योजना भी बनाई हुई है। इस हेल्थ सेंटर में एक डाक्टर, लैब व लैब टेक्नीशियन को रखा जाएगा। अभी पौड़ी गढ़वाल के थैलीसैंण में अस्पताल बनाने बनाने के लिए जमीन स्थानांतरण की प्रक्रिया चल रही है। घिल्ड़ियाल ने बताया कि पीजी की पचास फीसद सीटें प्रदेश सरकार को देना का कोई औचित्य नहीं होता है। नियमों के तहत मेडिकल कालेज इसके लिए अधिकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज एमबीबीएस सीटों में तीन वर्ष से सरकारी कोटा देता आ रहा है। कोटा देने की एवज में सरकार ने उनसे सरकारी कोटे से एमबीबीएस करने वालों को तीन वर्ष के लिए ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने की बात की थी लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। इस संबंध में दस जून को कालेज की प्रबंध कमेटी की बैठक तय की है, जबकि 11 जून को सरकार से वार्ता होगी(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,7.6.11)।

मुंबई में सिख युवाओं के लिए अभिनव आयोजन

Posted: 07 Jun 2011 05:10 AM PDT

मुंबई का सिख समाज हमेशा से प्रोग्रेसिव रहा है और 11 जून को वो एक ओर प्रोग्रेसिव कदम उठाने जा रहा है और यह कदम है गुरुद्वारों के माध्यम से समाज के युवाओं को जिंदगी की रेस जीतने के काबिल बनाना। इस पहल का मकसद है युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद करना और कॉम्पिटिशन के युग में हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करना।

11 जून को दादर वेस्ट के यशवंत नाट्य मंदिर में होने जा रहे इस कार्यक्रम में एनजीओ और धार्मिक प्रमुखों के साथ - साथ विभिन्न क्षेत्रों के विश्व स्तरीय विशेषज्ञ अपने अनुभव शेयर करेंगे।


इस अभिनव योजना के कर्ताधर्ता और सिखों की जानीमानी संस्था गुरसिख के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनप्रीत सिंह कहते हैं कि कलश पर सोना चढ़ाने से ज्यादा जरूरी है युवा वर्ग की परेशानी दूर करना। साधनों और जानकारी की कमी की वजह से युवा कुंठित हो रहे हैं और भटकाव के मार्ग तक भी पहुंच रहे हैं। इसीलिए हमने देश के 50 हजार गुरुद्वारों को सेवा केंद्र बनाकर समाज के युवाओं को सक्षम बनाने की जिम्मेदारी उठाई है। हम युवाओं को बताते हैं कि नौकरी के लिए इंटरव्यू कैसे दें। हम उनका मॉक इंटरव्यू लेते हैं, फिर उन्हें बताते हैं कि कहां सुधार की जरूरत है। बेरोजगारों को उनके पसंदीदा काम वाली कंपनी से जोड़ना और जरूरी हो तो पहले उन्हें उस काम में दक्षता हासिल करने का मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिलाते हैं। हम युवाओं का एप्टीट्यूट टेस्ट करवाकर बताते हैं कि उनके लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र या विषय कौन सा हो सकता हैं। 


मनप्रीत सिंह कहते हैं कि हम समाज के युवाओं को ग्राम पंचायत की योजनाओं से लेकर जिला परिषद, महानगर पालिका, राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार से लेकर वर्ल्ड बैंक तक की योजनाओं की जानकारी देकर इनका लाभ दिलाने तक में मदद करते हैं। फिलहाल 15 संस्थाएं इस काम में गुरुसिख के साथ काम रही हैं। डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन और उमंग इस काम में विशेष रूप से सहयोग कर रही हैं। डेढ़ साल पहले शुरू किए गए इस काम में करीब 6000 लोग जुडे हैं। इनमें से आधे अनुभवी लोग हैं और 50 प्रतिशत जानकार युवा हैं। गुरसिख के इस अभिनव आयोजन के बारे में अधिक जानकारी उनकी वेबसाइट www.youngsikhleaders.com से भी ली जा सकती है(मीरा जैन,नवभारत टाइम्स,मुंबई,7.6.11)।

आरपीएससी का नम्बर नहीं लग रहा

Posted: 07 Jun 2011 04:50 AM PDT

प्रदेश में अभ्यर्थियों की समस्या के लिए सदैव तत्पर रहने का दम भरने वाले राजस्थान लोक सेवा आयोग के अफसरों से कोई फोन पर सम्पर्क करना चाहे तो यह कौन आसान काम नहीं है। आयोग की वेबसाइट और विज्ञापनों में दिए गए हेल्पलाइन नम्बरों पर कई दिनों से व्यस्त या नम्बर उपलब्ध नहीं है की टोन सुनाई पड़ रही है।
आयोग ने इन दिनों द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न भर्तियां निकाल रखी हैं। पिछले दिनों आयोग ने प्रधानाध्यापक सहित अन्य पदों की विज्ञप्ति निकाली हैं। आयोग को आर.ए.एस. की नईभर्ती निकालनी है। ऎसे में पूरे प्रदेश से अभ्यर्थी आयोग से सम्पर्क करना चाहते हैं, लेकिन फोन पर किसी से सम्पर्क नहीं हो पा रहा है। अगर कोई फोन उठा भी ले तो ढंग से जवाब देने की बजाए अभ्यर्थी को टालदिया जाता है।
राजस्थान पत्रिका को पिछले दिनों प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से अभ्यर्थियों ने आयोग के इस रवैये की शिकायत की। उदयपुर के दिव्यराज सिंह ने बताया कि उसने कई दिनों से इन नम्बर पर कॉल किया, लेकिन फोन लगातार व्यस्त या नो रिप्लाई रहा। पत्रिका
ने शिकायतों की जांच के लिए आयोग के विभिन्न फोन नम्बरों पर सम्पर्क किया। सोमवार को दोपहर से लगातार कई बार बेसिक व मोबाइल से फोन नम्बरों पर सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। दूसरी ओर सचिव व अध्यक्ष के पी.ए. के फोन नम्बरों पर आसानी से सम्पर्क हो गया। नोडल अधिकारी घनश्याम टिलवानी से सम्पर्क नहीं हो सका।
इन नम्बरों पर नहीं लगा फोन
0145-5151200, 5151240, 5151090 और नोडल अधिकारी घनश्याम टिलवानी का नम्बर 5151218.
इन पर आसानी से लगा फोन
0145-2627801 (अध्यक्ष), 0145-2627643 (सचिव)(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,7.6.11)।

दून के शिक्षक 'जुगाड़' में पास, परीक्षा में फेल

Posted: 07 Jun 2011 04:30 AM PDT

पर्वतीय जनपद जहां मास्टरों के लिए तरस रहे हैं, वहीं राजधानी बनने के बाद दून के सभी सरकारी स्कूलों में मास्टरों की भीड़ है। एक मास्टर भी रिटार्यड या प्रोन्नत होता है तो वहां तबादले के लिए सैकड़ों अर्जियां सरक जाती हैं। लेकिन जब बात ईमानदारी से पढ़ाने की हो तो ये 'जुगाडू'मास्साब फिसड्डी साबित हो रहे हैं। कम से कम उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम तो यही साबित कर रहा है। भारी भरकम वेतन, शहरी सुविधाएं और ऊंचे संपर्क से बीमारी का बहाना बना तबादला लेकर दून पहुंचे 'बीमार मास्साब' कुछ ऐसे बच्चे तैयार नहीं कर सके जो मेरिट लिस्ट में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकें। इंटर में प्रदीप कुशवाह (छठा स्थान) को छोड़ दिया जाए तो बाकी टॉप 25 की सूची में दून का एक भी छात्र शामिल नहीं है। हाईस्कूल में भी यही स्थिति है। बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने देहरादून में जुगाड़ के दम पर तबादले करा कर आये मास्टरों का असली चेहरा सामने आ गया है। परिणाम ने साबित कर दिया है कि बीमारी के बहाने तबादले कर देहरादून पहुंचे मास्टर अब भी बीमार चल रहे हैं। सोमवार को घोषित हुए इंटर व हाईस्कूल की परीक्षा में जो मेरिट लिस्ट सामने आयी है, उसमें पर्वतीय अंचलों व तराई के ग्रामीण इलाकों ने बाजी मारी है। चंद छात्र ऐसे रहे जिन्होंने दून की गरिमा संभवतया अपनी मेहनत के बल पर बचाने की कोशिश की है। देहरादून व पहाड़ के किसी गांव के स्कूल की तुलना करें तो दोनों में बड़ा फर्क यह है कि यहां स्टाफ आवश्कता से अधिक है और वहां शायद ताला खोलने से लेकर क्लर्क व मास्टर सभी काम एक अध्यापक करता है। ब्लाक व जिला मुख्यालयों में होने वाली बैठकों के चलते भी कई बार स्कूल भी बंद रखना पड़ता है। इतना कुछ होने के बाद भी वहां के मास्टरों ने कुछ तो बचा के रखा है वर्ना मेरिट के 95 फीसद छात्र दून से बाहर (गांव व पहाड़) के न होते। इसके उलट देहरादून का कोई विद्यालय ऐसा नहीं है जहां एक भी मास्टर की कमी हो। फर्क इतना है कि यहां जम चुके ज्यादातर मास्टर या तो संघ की राजनीति में पैर जमा रहे हैं या विधायकों-मंत्रियों के अघोषित सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो प्रापर्टी के धंधे में भी जमकर हाथ आजमा रहे हैं। मास्टरों के झुंड के झुंड सचिवालय, विधानसभा, विधायक हास्टल व यमुना कालोनी में घूमते देखे जा सकते हैं। बीस से 40 हजार रुपये तक वेतन ले रहे ये मास्टर शायद स्कूल पहुंचते ही बीमार पड़ जाते हैं, क्योंकि इनमें से ज्यादातर के तबादले पहाड़ से इसी आधार पर हुए हैं कि ये बीमार हैं और इन्हें देहरादून जैसे शहर में उपचार की सख्त आवश्यकता है। शिक्षा का स्तर न सुधरने के लिए शिक्षकों का तर्क यह होता है कि उन्हें जनगणना से लेकर चुनाव व अन्य कार्य निपटाने पड़ते हैं, लेकिन ये काम तो पहाड़ का मास्टर भी कर रहा है। एक पुरानी घटना याद आती है, तत्कालीन शिक्षा मंत्री नरेन्द्र सिंह भंडारी ने तबादलों की अर्जियां का ढेर देखकर झुंझलाहट में कहा था कि जो मास्टर बीमार हैं वह तबादले के लिए नहीं रिटार्यडमेंट के लिए आवेदन करें और घर पर आराम फरमाएं। पूर्व शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस का कहना था कि ये पढ़े लिखे लोग शिक्षक की नौकरी को सिर्फ रोजी-रोटी के रूप में देख रहे हैं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का इन्हें अहसास ही नहीं है। पूर्व शिक्षा निदेशक एनएनपी पांडे ने भी तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप से खासे नाराज रहे। कई बार वे खुद भी इस बात को कहते रहे कि राजनीतिज्ञों ने शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला बना दिया है पढ़ाई पर कभी बात नहीं होती है अपने चहेतों को देहरादून में तबादला करवाना है। सरकारी स्कूलों के अध्यापक पढ़ाएंगे क्या और शिक्षक पढ़ेंगे क्या जब इस सत्र की किताबें ही सभी विद्यालयों में नहीं पहुंच पाई है जबकि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का कोर्स काफी हद तक पूरा हो गया है(अरूण बिष्ट,राष्ट्रीय सहारा,7.6.11)।

डीयूःकेट में 75-80% हैं तो मिलेगा पॉपुलर कॉलेज

Posted: 07 Jun 2011 04:10 AM PDT

बीए ऑनर्स (इंग्लिश) कोर्स में एडमिशन के लिए हुए कंबाइंड एप्टिट्यूड टेस्ट फॉर इंग्लिश (केट) का स्कोर 13 जून को डीयू की वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा और उसके बाद केट कोर कमिटी कॉलेज के प्रतिनिधियों के साथ कट ऑफ को लेकर मीटिंग करेगी। इंग्लिश डिपार्टमेंट केट रिजल्ट और 12वीं के मार्क्स के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी करेगा।

केट स्कोर की वेटेज 70 पर्सेंट और 12वीं के मार्क्स की वेटेज 30 पर्सेंट होगी और इन दोनों के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी। इंग्लिश डिपार्टमेंट के हेड प्रो. सुमन्यू सत्पथी का कहना है कि केट में 90 पर्सेंट तक स्कोर करना बहुत मुश्किल होता है और 82 से 89 तक स्कोर करने वाले कम स्टूडेंट्स ही होते हैं जबकि 75 से 80 फीसदी के बीच स्कोर करने वाले स्टूडेंट्स की संख



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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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