Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Thursday, May 30, 2013

कोयला की कीमतें तय करने का एकाधिकार बना रहेगा बना रहेगा कोल इंडिया का!

कोयला की कीमतें तय करने का एकाधिकार बना रहेगा बना रहेगा कोल इंडिया का!


विनिवेश की योजना फिलहाल टल गयी है और प्रतिरोध के मद्देनजर वित्त मंत्रालय ने भी रणनीति बदल दी है और अब बायबैक की संभावना वाली कंपनियों में डिसइन्वेस्टमेंट के लिए पहले ओएफएस और इसके बाद शेयर बायबैक होगा।


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


कोयला नियमक बनने से कम से कम घरेलू बाजार में कोयला की कीमतें तय करने का एकाधिकार बना रहेगा बना रहेगा कोल इंडिया का!तमाम बुरी खबरों के बीच कोल इंडिया के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यही है। नये बिजली संयंत्रों को कोल लिंक देने की बाध्यता से भी कोल इंडिया इस वक्त मुक्त है। शेयरबाजार में उतार चढ़ाव के बीत कंपनी के शेयर कमोबेश मजबूत है और मुनाफा का दौर जारी है। उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ कोल इंडिया की अब प्राथमिकता होगी कि किसी भी तरह उसके कर्मचारी हड़ताल का आखिरी हथियार का इस्तेमाल न करें और इसके साथ ही कंपनी के विनिवेश का फैसले को भी लंबित रखने का दबाव बनाया रखा जाये।उद्योग चलाने के लिए कोयले की मांग करने वाले सभी प्रकार के नए आवेदकों के लिए कोल लिंकेज का दरवाजा बंद होने जा रहा है। कोयला लिंकेज के लिए लंबित आवेदनों और कोयले की मांग व आपूर्ति में बढ़ते अंतर को देखते हुए कोयला मंत्रालय अब नए आवेदकों को कोई मौका नहीं देने का पूरा मन बना चुका है। इस प्रस्ताव पर सिर्फ स्टैंडिंग लिंकेज कमेटी (लांग टर्म) की मुहर लगना बाकी है। लिंकेज कमेटी की बैठक 31 मई को प्रस्तावित है।


कोलइंडिया की दस फीसद हिस्सेदारी अगस्त महीने में बेचने की तैयारी थी, जिसके खिलाफ प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कोयला मजदूर यूनियनों ने हताल की धमकी दी तो विनिवेश की योजना फिलहाल टल गयी है और प्रतिरोध के मद्देनजर वित्त मंत्रालय ने भी रणनीति बदल दी है और अब बायबैक की संभावना वाली कंपनियों में डिसइन्वेस्टमेंट के लिए पहले ओएफएस और इसके बाद शेयर बायबैक होगा।


केंद्रीय वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कंपनियों को चूना लगाते रहने की नीति पर लेकिन अडिग है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भारी नकदी रखने वाली पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) से अन्य सरकारी कंपनियों में सरकार की इक्विटी खरीदने पर विचार करने के लिए कहा है, जिससे मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 40,000 करोड़ रुपए के विनिवेश लक्ष्य को पूरा किया जा सके। कोल इंडिया, ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी पीएसयू के पास काफी नकदी है।अब तक यह दबाव भारतीय जीवन बीमा निगम और भारतीय स्टेट बैंक पर ही था।कोल इंडिया के लिए यह नया संकट है कि उसे अपना मुनाफा सरकार के विनिवेस अभियान में कपाना पड़ सकता है।केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस सिलसिले में ज्यादा नकदी रखने वाली सरकारी कंपनियों से नकदी बैलेंस और कैपिटल एक्सपेंडिचर की लेटर लिखकर जानकारी मांगी है और उनसे कहा है कि अगर उनके पास कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए मजबूत योजना नहीं है, तो वे सरकारी शेयर बायबैक करें या ज्यादा डिविडेंड दें।


सरकार ने मौजूदा फाइनैंशल इयर में 40,000 करोड़ रुपए के डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट को पूरा करने के लिए कई कंपनियों की पहचान की है। देश की 17 बड़ी पीएसयू में सीआईएल, ओएनजीसी, एनएमडीसी और ओआईएल शामिल हैं। इनके पास 2012-13 के दौरान 1.62 लाख करोड़ रुपए का कुल कैश रिजर्व था।कोल इंडिया के पास 43,776 करोड़ रुपए के साथ सबसे अधिक कैश और बैंक बैलेंस था। दूसरे स्थान पर ओएनजीसी (22,450 करोड़ रुपए) थी। इसके बाद एनएमडीसी (17,230 करोड़ रुपए) और एनटीपीसी (16,185 करोड़ रुपए) का नंबर था। ऑयल इंडिया (ओआईएल) के पास कैश और बैंक बैलेंस 11,770 करोड़ रुपए, सेल के पास 13,207 करोड़ रुपए और इंडियन ऑयल कॉर्प के पास 1,290 करोड़ रुपए था। सरकार सीआईएल, इंडियन ऑयल और सेल जैसी कंपनियों में डिसइन्वेस्टमेंट करने पर विचार कर रही है।


मंत्रियों के समूह ने देश में कोयला की गुणवत्ता और इस क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की निगरानी के साथ ही इसमें पारदर्शिता लाने और इस उद्योग की क्षमता बढ़ाने में मदद करने के उद्देश्य से कोयला नियामक के गठन को बुधवार को  अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। मंत्रियों के समूह में शामिल बिजली मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में समूह की पांचवीं बैठक के बाद यहां कहा कि समूह ने कोयला नियामक प्राधिकरण विधेयक के प्ररूप को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अगले 10 दिनों में एक नोट बनाकर मंत्रिमंडल के समक्ष रखे जाने की उम्मीद है।  इस नियामक को हालांकि कोयले की घरेलू बाजार में कीमतें तय करने का अधिकार नहीं होगा। इस क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड का कोयला की कीमतें तय करने का एकाधिकार बना रहेगा। नियामक कोयला ब्लॉक के आवंटन को लेकर भी कोई राय नहीं दे सकेगा। मंत्रियों के समूह ने इसके साथ ही कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमेंट,  इस्पात और बिजली उत्पादकों पर डालने के लिए एक तंत्र बनाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।


2013-14 में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) में शेयर की सेल सरकार का सबसे बड़ा डिसइन्वेस्टमेंट प्रपोजल है। इसके जरिए सरकार लगभग 17,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है। अधिकारी ने बताया कि सीआईएल में 10 फीसदी स्टेक सेल को ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) और कंपनी की सरकारी इक्विटी के बायबैक में बांटा जा सकता है।


सरकार निजी कोयला खदानों (कैप्टिव माइंस) में उत्पादित सरप्लस कोयले को नियामक के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कोयला नियामक (जो कीमत व कोयला खदान के संचालन में पारदर्शिता लाएगा) कोल इंडिया के लिंकेज कोल की कीमतों के अलावा निजी खदानों में उत्पादित कोयले की कीमतों की व्यवस्था का फैसला करेगा।


वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अगुआई वाली नौ सदस्यीय समिति की बैठक में कोल रेग्युलेटरी अथॉरिटी बिल पर विस्तृत चर्चा के बाद कोयला मंत्रालय ने निजी खदानों को शामिल करने के लिए मसौदे में एक अलग धारा जोड़ी है। एक साल पहले सासन अल्ट्रा पावर परियोजना के लिए आवंटित खदान से उत्पादित सरप्लस कोयले का इस्तेमाल इसके चित्रांगी पावर प्लांट करने की अनुमति आर पावर को दी गई थी।


कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, अगर नई धारा  पर अमल हुआ तो इससे नियामक की जद में टाटा पावर, रिलायंस पावर, जिंदल स्टील ऐंड पावर समेत कई और निजी कंपनियां शामिल हो जाएंगी। निजी खदानों से उत्पादित कोयले की कीमत का फैसला सिद्धांतों और नियामक की तरफ से कीमत तय करने के तरीके के आधार पर होगा और यह यह सरप्लस कोयले की कीमतें तय करने का आधार बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि निजी खदानों से उत्पादित कोयले की कीमतों को राज्य सरकारों के लिए रॉयल्टी के आकलन का आधार बनाया जाएगा।


मौजूदा व्यवस्था के तहत कैप्टिव कोल माइंस का संचालन करने वाली निजी कंपनियों के लिए अनिवार्य है कि वह सरप्लस उत्पादन नजदीकी कोल इंडिया की सहायक कंपनी के साथ सरकार द्वारा तय ट्रांसफर प्राइस के हिसाब से साझा करे। कोयला मंत्रालय ने सरप्लस कोल पॉलिसी के मसौदे में प्रस्ताव रखा था कि निजी खदान मालिकों को अपने सरप्लस उत्पादन सीआईएल को उत्पादन लागत से कम या फिर अधिसूचित कीमत पर बेचनी चाहिए। बाद में यह नीति त्याग दी गई।


साथ ही कैप्टिव कोल माइनिंग कंपनियां मौजूदा समय में नजदीकी कोल इंडिया की सहायक कंपनी में लागू रॉयल्टी की दर के बराबर ही रॉयल्टी का भुगतान करती है।


पिछले वर्ष जनवरी में सरकार ने कहा था कि देश में कोयला क्षेत्र की समस्या को निपटाने एवं इसके गुणवत्ता आदि से जुड़े मसलों के समाधान के लिए कोयला नियामक बनाया जायेगा। इसके बाद मंत्रिमंडल ने कोयला नियामक के गठन के प्रस्ताव पर विचार किया और पिछले वर्ष मई में इसके लिए मंत्रियों का एक समूह बनाकर उसे नियामक की शक्तियां एवं कार्य प्रणाली तय करने के लिए कहा था। मंत्रियों के समूह में वित्त मंत्री के अतिरिक्त कोयला मंत्री, वन एवं पर्यावरण मंत्री, बिजली मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के साथ ही कुछ दूसरे सदस्य भी शामिल है।


कोयला मंत्रालय के मुताबिक, कोयला आपूर्ति के लेटर ऑफ एश्योरेंस (एलओए) पाने के लिए 1590 आवेदन आ चुके हैं। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इन सभी आवेदकों को कोयले की आपूर्ति करने पर सालाना 32,000 लाख टन कोयले की जरूरत होगी जो कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के उत्पादन से बहुत अधिक है।


मंत्रालय के मुताबिक, कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनियां 1,08,000 मेगावाट बिजली के लिए 176 एलओए पूर्व में जारी कर चुकी हैं। 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम तीन वर्षों में इनमें से 26,000 मेगावाट बिजली की क्षमता की स्थापना हो चुकी है। शेष 80,000 मेगावाट बिजली की क्षमता की स्थापना 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्रस्तावित है।


कोयला मंत्रालय के मुताबिक, चूंकि पहले से ही 80000 मेगावाट की बिजली परियोजनाओं के लिए एलओए जारी किए जा चुके हैं, इसलिए 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अब किसी भी नए आवेदक को एलओए जारी करने की स्थिति कहीं से भी नहीं बन सकती है।


मंत्रालय के मुताबिक, कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनियों का कोयला संतुलन पहले से ही नकारात्मक चल रहा है। कोयला मंत्रालय के मुताबिक, इन्हीं वजहों से मंत्रालय ने अब किसी भी क्षेत्र को एलओए जारी नहीं करने का मन बनाया है और अब नए आवेदकों से आवेदन नहीं लिए जाएंगे।


मंत्रालय के मुताबिक, इस मामले में लिंकेज कमेटी की मुहर लगते ही इस संबंध में नोटिस जारी कर दिया जाएगा। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, पिछले छह महीनों के दौरान एलओए के लिए प्राप्त लंबित आवेदनों पर  यह विचार किया जाएगा कि उनके आवेदन को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।


इसके लिए उन आवेदनों को संबंधित विभाग के पास परामर्श के लिए भेजा जाएगा। कोल इंडिया के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान कोयले की कुल मांग  7,728 लाख टन होगी, जबकि उत्पादन 6,150 लाख टन तक ही पहुंच पाएगा। ऐसे में कोयले की मांग व आपूर्ति में 1,578 लाख टन का अंतर होगा।


No comments:

मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

Tweet Please

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA

THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER

http://youtu.be/NrcmNEjaN8c The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today. http://youtu.be/NrcmNEjaN8c Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program ______________________________________________________ By JIM YARDLEY http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR

Published on 10 Apr 2013 Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya. http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP

[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also. He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM

Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia. http://youtu.be/lD2_V7CB2Is

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk