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Wednesday, August 17, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/17
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


सुपर सफलता के पांच सूत्र

Posted: 16 Aug 2011 11:15 AM PDT

स्टेप 1 : 
'आई' का करो यूज तुम कि तनी देर तक कि सी चीज पर कॉन्सन्ट्रे शन क र पाते हो? हमने यह क्वेश्चन पिछले तीन सालों में क रीब 50,000 स्टू डें ट् स से कि या। इ नमें से 99 प्रतिशत ने 'न' में आंसर दिया। कै से बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रे शन पावर ? जब तुम अपनी पसंद की फि ल्म देखने जाते हो तो तीन घंटे उसी में आंखें गड़ाए बैठे रहते हो। उसी तरह क्रि के ट मैच में खाना-पीना छोड़क र एक टक उ से देखते रहते हो। तुम खुद को उ सी में लगा देते हो, लेकि न पढ़ाई क रते हु ए ध्यान बंटने में ज्यादा टाइ म नहीं लगता। अगर मीलों दूर म्यूजिक बज रहा हो तो जैसे पढ़ाई से ध्यान हटाने का बहाना मिल गया हो, तुम्हारा ध्यान तुरं त पढ़ाई से हट जाता है । पहले समझो कॉन्सन्ट्रे शन का मीनिंग इसे समझने के लिए हमें 'रुचि' को अच्छे ढं ग से समझना होगा। इ मेजिन क रो कि तुम्हें पिछले वीक पार्टी के फोटो दिए जाते हैं , जिसमें तुम भी थे। तुम उन फोटो में क्या देखोगे? जाहिर है , तुम उन फोटो में अपनी फोटो देखने की कोशिश क रोगे। ज्यादातर टाइ म तुम्हारी रु चि अपने आप को देखने में रहती है । इसका मतलब, जिस सब्जेक्ट में तुम ज्यादा रु चि लेते हो, उसमें कॉन्सन्ट्रे शन ज्यादा क र पाते हो। तुम उ स सब्जेक्ट को जल्दी सीख भी लेते हो। एग्जांपल एक मेमोरी टेस्ट में हमने क्लास 6 के स्टूडेंट्स को दो ग्रुप में डि वाइ ड कि या और उ न्हें प्राचीन मानव और उनके विकास के बारे में बताया। पहले ग्रुप को यह बताया गयाप्राचीन मानव गुफा में रहा क रता था। उन्होंने दो पत्थरों को आपस में रगड़क र आग की खोज की। वे पत्ते पहना क रते थे...। दूसरे ग्रुप से कहा, वे अपने आपको आदिमानव के रूप में सोचें और उन्हें बताया'तुम गुफा में रहा क रते थे। तुमने पत्थरों को रगड़क र आग की खोज की। तुम शरीर में पत्तियां और जानवरों की खाल पहनते थे...!' क्या पता चला दूसरे ग्रुप के स्टू डें ट् स ने जल्दी पाठ सीखा और एक साल बाद क रीब-क रीब ठीक उसी ढं ग से क हानी दोहराई भी। इम्पॉर्टें ट क्लू खुद को शामिल क रो। 

स्टेप 2 : 
रिपीट करो हमें यह मानना पड़ेगा कि 'मजबूत मेमोरी उ तनी अच्छी नहीं, जितना एक वीक प्वाइं ट !' जब तक हम रि पीट न क रें , कि सी चीज को पढ़ने और सीखने का कोई महत्व नहीं है । तुम हम सब जानते हो कि दोहराना कि तना जरू री है , लेकि न अच्छा रि जल्ट पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रि पीट क र ना इम्पॉर्टें ट है । वैज्ञानिक तरीके से रि पीट क र ना इसे हम एक उदाहरण से समझने की कोशिश क रते हैं । अगर हम कि सी टॉपिक को दो घंटे दिन में याद क रते हैं , तो इसे क ब रि पीट क र ना चाहिए? वैज्ञानिक तौर पर क हे ं तो पह ले 24 घंटे खत्म होने तक हो जाना चाहिए। इ सका एक कारण है । हमारा दिमाग नई सीखी हु ई चीज या सूचना 80 से 100 प्रतिशत तक के वल 24 घंटे के लिए ही धारण  कर पाता है । अगर इस दौरान दोबारा न पढ़ा जाए या रि पीट न कि या जाए तो उतनी ही तेजी से भूलने का चक्र भी शुरू हो जाता है । इसलिए पहला रिवीजन 24 घंटे खत्म होने तक जरूर हो जाना चाहिए। 24 घंटे में एक बार रि पीट क र ने के बाद हमारा दिमाग इस सूचना को लगभग सात दिन तक याद र खता है । सात दिन के बाद भूलने का चक्र दोबारा तेजी से शुरू हो जाता है । अगला रिवीजन सात दिन बाद होना चाहि ए अगर हम 24 घंटे में पहला और सात दिन बाद दूसरी बार रिवाइज करें , तो हमारा रि पीट क र ने का टाइ म के वल 10 प्रतिशत ही रह जाता है । यह दस प्रतिशत उस समय का है , जो टॉपिक को सीखने में लगा है । इम्पॉर्टेंट क्लू: 24 घंटे/ सात दिन 

स्टेप 3 : 
बेहतर ढंग से पढ़ाई सोचो कि एक ह फ्ते बाद तुम्हारा एग्जाम है । तुम्हें सारे सब्जेक्ट् स की तैय् क र नी है । अब तुम कौन सा तरीक अपनाओगे? तरीका 1एक दिन में एक टॉपिक पढ़ो और छठे दिन अंतिम रू प से सभी विषय रि पीट क रो। तरीका 2सभी विषयों को एक साथ पढ़ो, जैसे दो घंटे मैथ्स, फि र अगले दो घंटे इतिहास आदि। आओ अब देखें कि क्या हु आ? जब हम कोई सब्जेक्ट जैसे मैथ्स पढ़ते हैं तो दिमाग के एक खास भाग पर ज्यादा दबाव बनता है , जो कि ठीक नहीं है । इसलिए सभी सब्जेक्ट्स को बदल-बदल कर संयुक्त रूप से पढ़ें, जैसे दो से तीन घंटे गणित पढ़ने के बाद, भूगोल फि र अगले दो घंटे में अन्य विषय। 

स्टेप 4 : आराम करने का महत्व हर 40 से 50 मिनट की पढ़ाई के बाद रेस्ट करना जरूरी होता है । यह आराम क रीब 10 मिनट का होना चाहि ए। 10 मिनट के आराम का अर्थ है , इस दौरान पूर्ण आराम। नहीं तो अलग-अलग पढ़ा हुआ ज्ञान व सूचना, दिमाग को उलझाए रखेंगे और दिमाग में गड़ बड़ी होती रहेगी। 10 मिनट में तुम अपना मनपसंद संगीत सुन सक ते हो या हल्की आरामदायक एक्सर साइज भी कर सकते हो। इम्पॉर्टेंट क्लू : 45 मिनट/ 10 मिनट 

स्टेप 5 : खुद को प्रेरणा दो बाजार में दिमाग तेज क रने वाली क ई दवाइयां मौजूद हैं, क्या ये दवाइयां या टॉनिक वाक ई में काम कर ते हैं ? यह जानने के लिए हमने एक प्रयोग कि या। हमने तीस लोगों का एक ग्रुप बनाया, जो एक ही बैक ग्राउंड से थे। हमने उनसे कहा कि हमारे पास एक ऐसा स्मृति टॉनिक है, जो तीन महीने में याददाश्त में वृद्धि क रने में हेल्पफुल होगा। फि र हमने एक छोटा टेस्ट लिया और उस ग्रुप में से 15 लोगों को जाने-माने ब्रांड की बोतल में रंगीन पानी दिया। इस तर ह सभी लोगों को तीन महीने तक वही पानी, टॉनिक बोलक र पिलाया गया । इसके बाद हमने फिर टेस्ट लिया। 

रिजल्ट : सभी को टेस्ट में बराबर के अंक मिले थे। 

क्यों हु आ ऐसा: सभी ने यही विश्वास कि या कि वे दिमाग तेज क रने के लिए कुछ अलग कोशिश क र रहे हैं , जिससे उनकी मेमोरी पावर में सुधार होगा। यह उनका सेल्फ कॉन्फिडें स ही था, जिसने उन्हें टेस्ट में अच्छा क रने के लिए प्रोत्साहित कि या। हमें हे नरी फोर्ड की यह बात भी याद रखनी चाहिए कि जैसा तुम सोचते हो वैसा ही कर भी सकते हो। अगर अच्छा सोचते हो तो अच्छा ही पर फॉर्म क रते हो, नहीं तो उ सका उलट(बिस्वरूप राय चौधरी,हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11) ।

साइंस और टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनाती है संस्कृत

Posted: 16 Aug 2011 09:30 AM PDT

अभी कु छ समय पह ले ब्रिटे न में एक शोध कि या गया, जिसमें दुनिया की तमाम भाषाओं के मनुष्य के मस्तिष्क पर पड़ ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिकों ने काफी बारीकी से विश्लेषण कि या। इसमें पाया गया कि संस्कृ त दुनिया की ऐसी भाषा है जिसे बोलने या सीखने वाले लोगों की न्यूरो लिंग्विस्टि क गतिविधियां काफी विलक्षण होती हैं । वे दुनिया की कि सी भी भाषा और तक नीकी को दूसरों से काफी जल्दी सीख सकते हैं । और हम जो आईटी में भारत के इतने अधिक विकास को देखते हैं और दुनिया में भारतीय युवा टेक्नोलॉजी क्षेत्र में जो अचानक इतना छा गए हैं , बहुत मुमकिन है कि इसका एक बड़ा और प्रमुख कारण भी यही हो। ह मारे यहां सब भाषाएं प्राय: संस्कृत से ही निकली या उस पर ज्यादा आधारि त हैं । तो हमारा संस्कृत का जो बेस है , वह ह में आईटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की नई भाषाएं जल्दी सीखने का कारण निश्चित ही हो सकता है । आखिर इस देश में कुछ विशेषता तो है । मैं कहना यह चाहता हूं कि ब्रिटेन जैसे देश ने अपने व्यापक शोध में संस्कृ त का जो वैज्ञानिक समझदारी में जल्द निपुण होने का सूत्र देखा तो उ सने उ से अपनाया भी है। हमें खबर मिली है कि ब्रिटेन के तीस जाने-माने शिक्षा संस्थानों में संस्कृत को अनिवार्य कर दिया गया है । तो इससे यही साबित होता है कि ह मारे ऋ षि-मुनियों ने हजारों साल पहले विज्ञान में जितनी खोज कीं उसमें संस्कृत का कितना बड़ा योगदान र हा होगा। अपनी इस थाती को हमने कैसे भुला दिया, हम क्यों चूक गए, यह एक सवाल है । हम अध्यात्म के क्षेत्र में तो विश्वगुरु बन ही सकते हैं , लेकिन अगर संस्कृत भाषा को सीखने पर भी ध्यान दें तो विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी शक्ति भारत जरूर बन सकता है(हिंदुस्तान,रांची,स्वतंत्रता दिवस,2011) ।

एप्टीट्यूड टेस्ट

Posted: 16 Aug 2011 08:30 AM PDT

समाज में किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन एप्टीट्यूट टेस्ट से ही हो पाता है। उसमें इंजीनियर बनने की क्षमता है या ड्राइवर या कलाकार, इसे पता लगाने का सटीक उपाय है एप्टीट्यूट टेस्ट। दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र अमोल संगीतज्ञ बनना चाहता है लेकिन उसके माता-पिता उसे इंजीनियर के रूप में देखना चाहते हैं। पिता और अमोल के बीच करियर के चुनाव को लेकर काफी दिनों तक खींचतान चलती रही। घर में इस कलह को दूर करने के लिए उसे काउंसलरों ने एप्टीट्यूट टेस्ट कराने की सलाह दी। अमोल के एप्टीट्यूट टेस्ट के बाद ही यह पता लगाया गया कि वह सफल संगीतज्ञ बन सकता है। टेस्ट में उसमें क्रिएटिव इनोवेशन के लक्षण ज्यादा पाए गये । इस क्षेत्र में उसकी विशेष रुचि भी देखी गई। अमोल अकेला ऐसा छात्र नहीं। उसकी तरह कई और भी छात्र हैं जिसके जीवन को सही दिशा देने के लिए माता-पिता अब एप्टीट्यूट टेस्ट कराने लगे हैं। दिल्ली विविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रो. एनके चड्ढा कहते हैं, करियर का सही चुनाव और उसमें मौजूद क्षमता के आकलन के लिए एप्टीट्यूट के साथ उसकी रुचि भी देखी जाती है। ऐसा करने पर करियर के चुनाव में खासी मदद मिलती है। एप्टीट्यूट और इंटरेस्ट दोनों एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं और साथ-साथ चलते हैं। अगर एक है और दूसरा नहीं तो करियर को सही दिशा नहीं मिलती। काउंसलर गीतांजलि कुमार करियर और जीवन को सही दिशा देने में एप्टीट्यूट और इंटरेस्ट के साथ व्यक्ति के व्यक्तित्व और शारीरिक क्षमता को भी एक कड़ी मानती हैं। वह कहती हैं, तीनों को मिलाकर ही किसी को करियर या जीवन में कोई राह चुनने की सलाह दी जाती है। अगर किसी में किसी कार्य के प्रति एप्टीट्यूट है पर रुचि या करने की इच्छा नहीं तो उस दिशा में भेजना बेकार है। इसी तरह पहली दोनों चीजे हैं लेकिन शारीरिक क्षमता या उचित एप्टीट शारीरिक क्षमता, व्यक्तित्व नहीं तो ऐसे करियर के चुनाव की सलाह देना बेकार है। वह कहती हैं, व्यक्तित्व भी पॉजिटिव मोटिव देता है। इसलिए तीनों को देखना जरूरी है।

पहचानें खुद को

लॉजिकल रीजनिंग
एप्टीट्यूट टेस्ट के कई आयाम हैं जिनमें एक है लॉजिकल रीजनिंग। इसके तहत कार्य कारण संबंध पर जोर होता है। किसी व्यक्ति में मानसिक स्तर पर कलकुलेशन की क्षमता कितनी है, इसका आकलन लॉजिकल रीजनिंग करता है। अगर वह लॉजिकल रीजनिंग में ज्यादा स्कोर करता है तो इससे पता चलता है कि वह कायदे-कानून में रहकर कठिन से कठिन समस्याओं को हल कर सकता है। इस क्षमता से लैस युवा मैनेजर, वैज्ञानिक और व्हाइट कॉलर जॉब में जाने के उपयुक्त होते हैं।

ऑब्सट्रैक्ट रीजनिंग :

इसके तहत युवा बिखरी हुई चीजों को एकत्रित करके प्लान के साथ काम करने में विशेष हुनर रखता है। इसमें एप्टीट्यूट किस तरफ जा रहा है, उसकी दिशा क्या है। वह एक एरिया से दूसरे एरिया में लिंक कर रहा है या नहीं, आदि भी देखा जाता है। सिविल और इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग में बेहतर करने वाले युवाओं में ऑबस्ट्रक्ट रीजनिंग हल करने की क्षमता ज्यादा पाई गई है।

न्यूमेरिकल रीजनिंग :

यह किसी व्यक्ति की गणितीय क्षमता की जानकारी देता है। वह गुणा-भाग करने और सांख्यिकीय सवालों को हल करने की कितनी क्षमता रखता है, इसका आकलन किया जाता है। इसे देखकर ही उसे इस विषय या क्षेत्र से जुड़े करियर में जाने की सलाह दी जाती है। मसलन सीए, गणितज्ञ और लेखाकार आदि बनने के लिए न्यूमेरिकल रीजनिंग में बेहतर होनी चाहिए।

आई हैंड कोऑर्डिनेशन :

आमतौर से टेक्निकल काम मसलन ड्राइविंग हो या पायलट या फिर किसी मशीन को चलाने के लिए मशीनमैन, उनमें यह एप्टीट्यूट जरूर होनी चाहिए। इसमें व्यक्ति हाथ, पैर व आंख को काम करते वक्त कितना केन्द्रित कर पाता है, आदि देखा जाता है। ऐसा व्यक्ति दुर्घटनाओं को कम करने में काफी मददगार साबित होता है। ड्राइवर, पायलट, मशीनमैन और ऐसे मैकेनिकल जॉब के लिए यह एप्टीट्यूट बढ़िया माना जाता है।

क्रिएटिव इनोवेशन :


इसमें किसी व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता का आकलन किया जाता है। उसमें कलात्मक रुझान व रुचि का पता लगाया जाता है। आमतौर पर व्हाइट कॉलर जॉब में इस तरह के लोगों की जरूरत पड़ती है । इसके तहत यह भी देखा जाता है कि वह निर्णय कितना शीघ्र और सही रूप में लेता है। उसमें फ्लेक्सिबिलिटी भी होनी चाहिए। कोई व्यक्ति स्वभाव में अड़ियल तो नहीं है। उसमें जिद्दीपना तो नहीं है। अगर उसमें फ्लेक्सिबिलिटी का स्तर बेहतर है तो उसे ऊपरी यानी उच्चतम पदों की जिम्मेदारी दी जाती है। इसमें उसके अंदर बड़प्पन कितना है, इसका आकलन भी किया जाता है। एप्टीट्यूट टेस्ट में ओरिजनैलिटी और मौलिकता को भी देखा जाता है । ऐसे चंद ही व्यक्ति होते हैं, जो अलग किस्म के आइडिया से लैस होते हैं। इस टेस्ट में ओरिजनल आइडिया को देखा व समझा जाता है। इसे बहुविध सोच के रूप में भी देखा जाता है। यह गुण जिसमें है, उसमें अध्यापक, लेखक, अभिनेता, संगीतज्ञ और अविष्कारक बनने की क्षमता होती है।


उचित मनोदशा में हो टेस्ट

गीताजंलि कुमार, काउंसलर

एप्टीट्यूट टेस्ट में एप्टीट्यूट, इंटरेस्ट और व्यक्तित्व या शारीरिक क्षमता, तीनों को देखा जाता है। तीनों को मिलाकर ही किसी को करियर या जीवन में कोई राह चुनने की सलाह दी जाती है। अगर किसी में किसी कार्य के प्रति एप्टीट्यूट है पर रुचि या करने की इच्छा नहीं है तो उस दिशा में भेजना बेकार है। इसी तरह पहली दोनों चीजे हैं लेकिन शारीरिक क्षमता या व्यक्तित्व नहीं है तो ऐसे करियर में किसी व्यक्ति को भेजना बेकार है। व्यक्तित्व भी पॉजिटिव मोटिव देता है, इसलिए तीनों को देखना जरूरी है। आज नौकरी के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों का होना जरूरी है लेकिन ऐसे लोग कम ही उपलब्ध हैं। किसी कार्य या करियर के लिए कौन उपयुक्त है या नहीं इसकी पहचान के लिए प्रशिक्षित या दक्ष साइकोलॉजिस्ट का भी होना अनिवार्य है। एक और बात यह कि इस तरह के टेस्ट हर समय नहीं किए जाते। सही रिजल्ट जानने के लिए व्यक्ति की मानसिक स्थिति से भी रूबरू होना जरूरी है । जैसे कि वह तनावग्रस्त या थका हुआ नहीं हो। उसे जबर्दस्ती टेस्ट के लिए भी बाध्य नहीं करना चाहिए। सामान्य स्थिति या मनोदशा में ही इस तरह के टेस्ट होने चाहिए।


क्यों है जरूरी

एप्टीट्यूट टेस्ट ही किसी छात्र या व्यक्ति के करियर और काम की दिशा बताता है। उसकी क्षमता और रुचि को बताता है। इसके बाद उसे सही प्रोफेशन चुनने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ऐसा नहीं होता तो अमुक व्यक्ति में आगे चलकर कुंठा का जन्म होता है। वह काम को एन्जाय नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में उसके अंदर नकारात्मक सोच हावी हो जाता है। वह विध्वंसात्मक दिमाग का हो जाता है। उसमें पहचान का संकट भी पैदा होने लगता है। एप्टीट्यूट, रुचि और व्यक्तित्व के हिसाब से काम नहीं मिलने पर वह अपने पेशे में उतना सक्षम साबित नहीं होता जितना दूसरे लोग। ऐसी स्थिति में वह दूसरों को नीचा दिखाने के लिए कई बार उल्टे-सीधे हथकंडे भी अपनाता है। सफलता नहीं मिलने पर वह कई बार अवसाद की स्थिति में आ जाता है और आत्महत्या को मजबूर हो जाता है। इसलिए संस्थानों को सरकार ने बच्चों का करियर की दिशा तैयार करने को कहा। शिक्षण संस्थाओं में करियर एंड काउंसलिंग सेंटर आए दिन इसी वजह से खोले जा रहे हैं। यह हर संस्थान और काम की जगह की जरूरत बनती जा रही है। भारत में इस तरह की समस्याओं के लिए निजी प्रैक्टिशनर की ओर से जगह-जगह नगरों व महानगरों में काउंसलिंग सेंटर खुल गए हैं लेकिन इसे चलाने वाले बंदे आमतौर पर क्वालिफाइड नहीं हैं। काउंसलिंग के लिए कौन-सा व्यक्ति उपयुक्त है या नहीं, इसके लिए नेशनल एजेंसी बनी है। वह क्वालिफिकेशन तय करती है।

(
अनुपम,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)।

आरक्षण पर राजनीति

Posted: 16 Aug 2011 07:30 AM PDT

यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि हमारे देश में शुरू से ही आरक्षण की व्यवस्था पर राजनीति होती रही है। अब तो आरक्षण के नाम पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हमले शुरू हो गए हैं। हाल ही में रिलीज फिल्म आरक्षण के कुछ संवादों और दृश्यों पर दलित नेताओं को ऐतराज है। हालांकि दलित नेताओं की आपत्ति के बाद फिल्म से ये संवाद और दृश्य हटा लिए गए हैं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने फिल्म का विरोध जारी रखा। क्या यह दलित नेताओं का खोखला आदर्शवाद नहीं है? जिन संवादों और अनुभवों से दलितों को अपने वास्तविक जीवन में रोज दो-चार होना पड़ता है अगर वे संवाद और दृश्य दलितों की पीड़ा व्यक्त करने के उद्देश्य से फिल्म में आते हैं तो उन पर इतनी आपत्ति क्यों? विडंबना यह है कि आरक्षण के तवे पर सब अपनी-अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम दलितोद्धार के अन्य विकल्पों पर भी विचार करें। अगर आरक्षण ही करना है तो सरकार को अपने बजट का एक बड़ा भाग दलितों के लिए आरक्षित करना चाहिए ताकि इस बजट से दलितों के लिए अच्छे हॉस्टल, पुस्तकालय और कोचिंग जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जा सके और दलित व पिछड़े वर्गो के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आत्मविश्वास के साथ अगड़ी जातियों के छात्रों से आगे निकल सकें। दलितों को आगे बढ़ाने के लिए अगड़ी जातियों को भी आगे आना होगा। इस उद्देश्य के लिए सरकारी व्यवस्था के तहत निजी संस्थानों में दलितों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे समाज में भी यह संदेश जाएगा कि अगड़ी जातियां दलितों की दुश्मन नहीं हैं। दुख की बात यह है कि अभी तक निजी क्षेत्र ने दलितों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है। हाल ही में एक बार फिर कुछ जाट नेताओं ने आरक्षण के नाम पर सरकार को घेरने की चेतावनी दी है। गुर्जर नेता भी आरक्षण को लेकर मुखर हैं। आरक्षण एक ऐसी आग बन गया है जिसे बुझाने की जितनी कोशिश की जाती है, यह उतनी ही भड़कती है। इस समय प्रत्येक जाति एवं वर्ग को आरक्षण एक ऐसा हथियार दिखाई दे रहा है, जिसके माध्यम से वे जिंदगी की बड़ी से बड़ी जंग जीत सकते हैं। यह सत्य है कि आरक्षण ने समाज की मुख्यधारा से कटे लोगों का जीवनस्तर सुधारा है, इसलिए आरक्षण के महत्व एवं उद्देश्यों पर शक नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि क्या आज भी आरक्षण का उद्देश्य वही रह गया है जो इस व्यवस्था की स्थापना के समय था? क्या कारण है कि आज समाज की मुख्यधारा से कटे लोगों के उत्थान के लिए आरक्षण को ही एकमात्र विकल्प के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है? अगर हमारे नीति-निर्माताओं को दबे-कुचले लोगों के उत्थान या पतन की वास्तविक चिंता होती तो कुछ ऐसी नीतियां बनाई जातीं जिनसे ऐसे लोग आत्मविश्वास से सराबोर होकर स्वयं ही आरक्षण जैसी व्यवस्था को नकार देते। आरक्षण को ही जिंदगी की सफलता का सूचक मान लेना तर्कसंगत नहीं है। हमें यह समझने की जरूरत है कि इस दौर में हमारे राजनेता हमें आरक्षण का स्वप्न दिखाकर अपना हित साध रहे हैं। इन सब बातों का अर्थ आरक्षण का विरोध करना नहीं है। अगर आरक्षण को राजनीति से न जोड़ा जाता तो यह दबे-कुचले लोगों के उत्थान का सशक्त माध्यम होता। हमारे राजनेताओं द्वारा आरक्षण को राजनीति से जोड़ने के कारण आज यह व्यवस्था नेताओं के उत्थान का एक सशक्त माध्यम बन गई है। आरक्षण की राजनीति के कारण अगर किसी का पतन हो रहा है तो वह आम जनता ही है। सवाल यह है कि आरक्षण के नाम पर सरकार एवं एकदूसरी जातियों को घेरने की राजनीति कब तक होती रहेगी? इस समय कुछ पिछड़ी जातियां अन्य जातियों को पिछडे़ वर्ग में शामिल करने पर एतराज जता रही हैं। इसलिए विभिन्न जातियों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता जा रहा है। अगर आरक्षण के नाम पर समाज से आपसी भाईचारा खत्म हो रहा है तो इसकी प्रासंगिकता पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है(रोहित कौशिक,दैनिक जागरण,16.8.11)।

एनजीओ में करिअर

Posted: 16 Aug 2011 06:30 AM PDT

आदिवासी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जमीन के लिए लड़ रहे हैं। समाज का निम्न तबका अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। प्राकृतिक ऊर्जा को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। सामूहिक विकास की बात हो रही है। शहरी समाज लगातार गुस्साता जा रहा है। ऐसे में, एनजीओ सेक्टर और इससे जुड़े लोगों की भूमिका काफी बढ़ जाती है।

वर्तमान में भागदौड़ वाली जिंदगी और प्रतिस्पर्धा में इज्जत के साथ नाम और पैसा कमाना भी अहम होता जा रहा है। बावजूद इसके, समाज में एक वर्ग या लोग ऐसे हैं, जो सिर्फ फायदे के लिए नहीं बल्कि दूसरे के लिए काम करते हैं। एनजीओ सेक्टर सेंसिटिव लोगों के लिए लिए है जो सामाजिक समस्याओं को समझते और उन्हें दूर करने में अपना योगदान देना चाहते हैं। यदि आपको लगता है कि आप एनजीओ सेक्टर के लिए उपयुक्त हैं तो आपको यह भी समझना पड़ेगा कि इस फील्ड में आप किस तरह करियर बना सकते हैं।

कोर्स


बाल शोषण, महिलाओं का शोषण, नशाखोरी, स्वास्थ्य मामले, डिसएबिलिटी, गरीबी, ओल्ड एज प्रॉब्लम्स आदि ऐसे फील्ड हैं जहां गैर सरकारी संस्थाओं के साथ सोशल सर्विस ग्रुप की जरूरत है। इससे जुड़ी संस्थाएं सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करती हैं। आज के युग में एनजीओ पूरी तरह प्रोफेशनल होकर सामने आ रहे हैं। वे अब अपने टारगेट एरिया को लेकर काफी फोकस्ड और ऑरिएंटेड हो चुके हैं। यदि आप इस प्रोफेशन से जुड़ना चाहते हैं तो आपको भी पूरी तरह प्रोफेशनल रवैये के साथ अपना आउटलुक बदलना होगा। यदि आप इस फील्ड में पूरी तरह प्रोफेशनली आना चाहते हैं तो आप मान्यता प्राप्त विविद्यालय से डिग्री अवश्य हासिल करें। किसी भी एजुकेशनल बैकग्राउंड के छात्र इस फील्ड में आ सकते हैं और समाज के लिए कुछ अलग कर सकते हैं। हालांकि कई कॉलेजों और विविद्यालयों में सोशल वर्क से संबंधित कोर्स की पढ़ाई होती है, जिसके द्वारा छात्रों को मूलभूत जानकारी मिलती है। बारहवीं के बाद छात्र बीएसडब्ल्यू या सोशल वर्क के बीए प्रोग्राम्स में शामिल हो सकते हैं। जो बैचलर्स डिग्री हासिल कर चुके हैं वे एमए या फिर एमएसडब्ल्यू कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। कई कॉलेजों में सोशल वर्क में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट की भी पढ़ाई हो रही है।


अवसर

सामाजिक समस्याओं के बढ़ते कारणों के चलते भारत जैसे देश में एनजीओ सेक्टर का महत्व बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में इससे जुड़े लोगों की मांग बढ़ी है। कई तरह के एनजीओ, मसलन वॉलेन्टियर सेक्टर, ग्रासरूट ऑग्रेनाइजेशन, सिविक सोसाइटी, प्राइवेट वॉलेन्टियर आग्रेनाइजेशन, सेल्फ हेल्प ग्रुप आदि युवाओं को काफी मौके देते हैं। कोई भी अभ्यर्थी एनजीओ सेक्टर में बतौर लीगल एडवाइजर ज्वाइन कर सकता है, मीडिया को हैंडल करने के लिए बतौर पब्लिक रिलेशन्स अफसर भी काम किया जा सकता है। इसके जरिए, इंटरपर्सनल स्किल्स और बाजार में अपनी पहचान बनाने के लिए भी काम किया जा सकता है। जो लोग एकाउंट में रुचि रखते हैं वे एनजीओ के एकाउंट को मैनेज कर सकते हैं क्योंकि इनके भरोसे ही तमाम फंड और खर्च का हिसाब-किताब होता है। एनजीओ सेक्टर में रिसर्च के लिए भी तमाम मौके हैं।

वेतन

कॉलेज से निकलने के बाद किसी भी फ्रेशर को कम से कम दस हजार रुपए मासिक वेतन मिलना तय है। हालांकि अधिकतर मामलों में संस्थान के आकार के हिसाब से ही वेतन मिलता है फिर भी छोटे लेवल पर जहां शुरू में कम से कम दस हजार रुपए मिलते हैं, वहीं पर्सनल और लेवर वेलफेयर ऑफीसर को इससे कहीं अधिक वेतन मिलता है।

संस्थान
- इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल वेलफेयर एंड बिजनेस मैनेजमेंट, कोलकाता यूनिवर्सिटी
-टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई पल्ली संगथान विभाग (रूरल रकिंस्ट्रक्शन कॉलेज)
- दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
-जामिया, मिल्लिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली
-इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, आगरा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गुरुनानक खालसा कॉलेज, यमुना नगर
-डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क कुरुक्षेत्र कर्व इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, पूना यूनिवर्सिटी, पुणे
(विनीत उत्पल,राष्ट्रीय सहारा,16.8.11)

एएमयू का स्कूल खोलने का प्रस्ताव खारिज

Posted: 16 Aug 2011 06:23 AM PDT

मुसलिम बच्चों में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए एएमयू ने अपने अधीन कुछ नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव एचआरडी मंत्रालय को भेजा था, जिसे मंत्रालय ने खारिज कर दिया। मंत्रालय का तर्क था कि विश्वविद्यालय का काम स्कूली शिक्षा देना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा पर ध्यान देना है। यह प्रस्ताव स्कूलों में दाखिले को लेकर हो रही मारामारी को देखते हुए भेजा था।इस वर्ष एएमयू के अब्दुल्ला नर्सरी में दाखिले को लेकर हो रही मारामारी को देखते हुए एएमयू के कुलपति प्रो. पीके अब्दुल अजीज ने जिलाधिकारी को एक पत्र लिखकर शहर में नर्सरी स्कूल खोलने का सुझाव दिया है। एएमयू ने एचआरडी मंत्रलाय को करीब एक साल पहले स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा था। कुछ महीने पहले ही इसका जवाब एएमयू को मिला है। इससे एएमयू की परेशानी और अधिक बढ़गई है। एएमयू के अब्दुल्ला नर्सरी में 90 सीट हैं। इसमें इस साल 2674 आवेदन आए। 90 सीट में 20 फीसदी यानि 18 सीट कुलपति को नामाकंन करने का अधिकार है, जब कि 36 सीटें जनरल हैं और 36 सीट एएमयू कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। स्कूल प्रशासन ने 90 सीट सेल्फ फाइनेंस सिस्टम के अनुसार शाम की शिफ्ट में खोली हैं। इसमें 250 आवेदन आए। सेल्फ फाइनेंस की सुवधि केवल एएमयू के कर्मचारियों के लिए ही है(अमर उजाला,अलीगढ़,स्वतंत्रता दिवस,2011)।

उत्तराखंडःप्रोन्नत वेतनमान के लिए पीजी की बाध्यता समाप्त करने की मांग

Posted: 16 Aug 2011 06:22 AM PDT

राजकीय शिक्षक संघ की जिला कार्यकारिणी की बैठक में सहायक अध्यापक प्रोन्नत वेतनमान के लिये स्नातकोत्तर की बाध्यता समाप्त किये जाने सहित कई प्रस्ताव पारित किये गए।
रविवार को राजकीय इंटर कालेज पटेलनगर में हुई बैठक में शिक्षकों ने 30 फीसदी छठे वेतनमान के एरियर भुगतान, एलटी प्रोन्नत वेतनमान के लिये पीजी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई। कहा गया कि 12 जुलाई 2002 के बाद प्रोन्नत वेतनमान के लिये शिक्षकों पर पीजी की अनिवार्यता को थोपा गया है। बैठक में प्रवक्ता वरिष्ठता सूची 2001-09 को स्रोत संवर्ग की ज्येष्ठता के आधार पर दोबारा तैयार करने, तदर्थ नियुक्त शिक्षकों का विनियमितीकरण एवं छह फीसदी डीए का शासनादेश जारी करने की मांग की गई(अमर उजाला,देहरादून,स्वतंत्रता दिवस,2011)।

यूपीः2 साल बाद होगी पीएचडी प्रवेश परीक्षा

Posted: 16 Aug 2011 06:18 AM PDT

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में होगी। इस घोषणा से पिछले दो वर्षों से प्रवेश परीक्षा का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों के चेहरों पर प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है। खुशी इसलिए है कि अब इनका रिसर्च का सपना पूरा होगा, वहीं डा. बीआर अंबेडकर विवि के ऐसे छात्र दुविधा में है, जिन्होंने दो वर्ष पूर्व 500 रुपये खर्च कर पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए फार्म भरा था और आज तक परीक्षा नहीं हुई। दुविधा का कारण है कि नवंबर में होने वाली परीक्षा के लिए उन्हें अलग से फार्म भरना होगा या पहले भरे फार्म से ही काम चल जाएगा(अमर उजाला,अलीगढ़,स्वतंत्रता दिवस,2011)।

पूर्वांचल के पाठ्यक्रम से विद्या निवास मिश्र के निबंध गायब

Posted: 16 Aug 2011 06:16 AM PDT

'आंगन का पंक्षी और बंजारा मन', 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' तथा 'चितवन की छांव' जैसे कालजयी निबंध गढ़ने वाले पद्म भूषण विद्या निवास मिश्र पूर्वांचल के पाठ्यक्रम से गायब हैं। बीते 11 अगस्त को विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल से अनुमोदित पाठ्यक्रम में विद्या निवास मिश्र का कहीं उल्लेख नहीं है। चर्चित कहानीकार मुंशी प्रेमचंद के साथ भी अन्याय हुआ। यूजी में उनका उपन्यास गबन अब नहीं पढ़ाया जाएगा। पीजी में मोहन राकेश का नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' भी हटा दिया गया है। यह दीगर कि पाठ्यक्रम के संपादक मंडल के कई सदस्यों की किताबें अनुमोदित ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर ली गई हैं।

हाल ही जारी हिंदी के पाठ्यक्रम पर गौर करें तो यूजी प्रथम वर्ष के छात्र अब पहले प्रश्नपत्र में उपन्यास में डा. शिव प्रसाद सिंह का 'गली आगे मुड़ती है' डा. राम दरश मिश्र की 'पानी के प्राचीर' जैनेंद्र कुमार की 'सुुनीता' पढ़ेंगे। अभी तक मुंशी प्रेमचंद का गबन भी पढ़ाया जाता था। अब प्रेमचंद हटा दिए गए। हालांकि कहानी में वह शामिल हैं। उनके अलावा चंद्रधर शर्मा गुलेरी, जय शंकर प्रसाद, मोहन राकेश, कृष्णा सोबती, ऊ षा प्रियंवदा, अमरकांत भी शामिल हैं। इनमें से किसी की भी कहानी कालेज पढ़ा सकते हैं। निबंध के ताजा पाठ्यक्रम में बालकृष्ण भट्ट, महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डा. हजारी प्रसाद द्विवेदी, कुबेरनाथ राय, शंकर पुणतांबेकर के निबंध शामिल किए गए हैं। विद्या निवास मिश्र के निबंध को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है। इस भाग का संपादन शिबली कालेज आजमगढ़ के हिंदी विभागाध्यक्ष डा. निजामुद्दीन अंसारी तथा गांधी स्मारक कालेज कोयलसा आजमगढ़ के विभागाध्यक्ष डा. ज्ञान स्वरूप लाल ने किया है। 
इसी तरह बीए तृतीय वर्ष के पहले पेपर के समकालीन काव्यधारा में पहली बार गोरखपुर के वरिष्ठ साहित्यकार परमानंद श्रीवास्तव, शलभ श्रीराम सिंह शामिल किए गए हैं। ये दोनों पहले पाठ्यक्रम में शामिल नहीं थे। जौनपुर के साहित्यकार श्रीपाल सिंह क्षेम के नवगीत भी पढ़ाए जाएंगे। पीजी प्रथम वर्ष के तृतीय प्रश्नपत्र से मोहन राकेश का नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' हटा दिया गया है। हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास 'पुनर्नवा' भी पाठ्यक्रम से बाहर है। पीजी में मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास गोदान और कोई एक कहानी पढ़ाई जाएगी। कमलेश्वर, डा. नामवर सिंह, डा. परमानंद श्रीवास्तव, डा. बच्चन सिंह, डा. विवेकी राय की कई किताबें पाठ्यक्रम में शामिल हैं। हालांकि जरूरी नहीं कि कालेज इन्हीं की किताबें पढ़ाएं। अनुमोदित ग्रंथों में संबंधित टॉपिक पर किसी की किताब लागू कर सकते हैं। यहां बता दें कि विद्या निवास मिश्र हिंदी के टॉप पांच निबंधकारों में गिने जाते हैं। देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इनके निबंध आज भी पढ़ाए जा रहे हैं। टीडी पीजी कालेज के रीडर डा. सुनील विक्रम सिंह कहते हैं कि हिंदी निबंध की पहचान डा. विद्या निवास मिश्र से होती है। देश क्या दुनिया में जहां भी हिंदी पढ़ाई जाती है वहां विद्या निवास मिश्र पाठ्यक्रम में शामिल हैं। सिविल सर्विसेज में भी इनके निबंध पूछे जाते हैं। पद्म भूषण का पाठ्यक्रम से बाहर होना अफसोसजनक है। इसके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

संपादन में जौनपुर और आजमगढ़ का दबदबा
पूर्वांचल के पाठ्यक्रम तैयार करने में जौनपुर और पूर्वांचल के शिक्षकों का वर्चस्व रहा है। उसमें भी आजमगढ़ के शिबली कालेज का। यूजी के पाठ्यक्रम का संपादन 16 शिक्षकों ने किया। इनमें पांच आजमगढ़ के, आठ जौनपुर के, एक गाजीपुर तथा दो मऊ के शिक्षक शामिल थे। पीजी का संपादन 13 शिक्षकों ने किया। इनमें आजमगढ़ के आठ, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, हंडिया पीजी कालेज इलाहाबाद के एक-एक शिक्षक को शामिल किया गया था। वैसे नेशनल शिबली कालेज आजमगढ़ की अहम भूमिका रही। यहां के हिंदी विभागाध्यक्ष डा. निजामुद्दीन अंसारी, डा. परवीन निजाम अंसारी, डा. शम्स आलम खां, डा. अल्ताफ अहमद ने कई प्रश्नपत्रों का संपादन किया। एक कालेज से इतने शिक्षक संपादन मंडल में शामिल नहीं हैं।

तीन संपादकों की किताबें भी अनुमोदित
जौनपुर। पाठ्यक्रम संपादन में शामिल तीन वरिष्ठ शिक्षकों की चार किताबें पढ़ाने के लिए अनुमोदित की गई हैं। यह अलग बात कि कालेजों पर इनकी किताबें पढ़ाने का दबाव नहीं है। तीनों शिक्षक आजमगढ़ के ही हैं। इनमें नेशनल शिबली पीजी कालेज के विभागाध्यक्ष डा. निजामुद्दीन अंसारी की सूफी कवि जायसी का प्रेम निरूपण यूजी और पीजी में, साहित्य सिद्धांत और हिंदी आलोचना, शोध प्राविधि, डा. परवीन निजाम अंसारी की पीजी में पूर्वांचल के मुस्लिम गीत, श्रीकृष्ण गीता डिग्री कालेज के प्राचार्य डा. सत्येंद्र सिंह की साहित्य शास्त्र और हिंदी आलोचना अनुमोदित की गई है। ये सभी अनुमोदित ग्रंथ हैं। कालेज इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर सकते हैं(अमर उजाला,जौनपुर,14.8.11)।

गोरखपुर में खुलेगा नर्सिंग कालेज

Posted: 16 Aug 2011 06:15 AM PDT

विश्व बैंक के सहयोग से गोरखपुर में नर्सिंग कालेज और छात्रावास खोलने के लए सीएमओ से जमीन मांगी गई है। जमीन मिलने के बाद प्रस्ताव के पहले चरण में चिकित्सालय का सर्वेक्षण होगा। उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (यूपीएचडीसीपी) के अपर परियोजना निदेशक आरके दीक्षित ने सीएमओ डा. आरएन मिश्र्ा को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि विश्व बैंक सहायतित परियोजना में बीएससी नर्सिंग कालेज और छात्रावास विचाराधीन है। भवन निर्माण संबंधी अधिनियम के अनुसार तीन से चार एकड़ भूमि की जरूरत होगी। कालेज में नर्सिंग की पढ़ाई होगी और जिला अस्पताल में ट्रेनिंग दी जाएगी। एचडीसीपी विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित फेज दो प्रस्ताव के पहले चरण में कालेज के लिए जमीन फाइनल होने के बाद चिकित्सालय का सर्वेक्षण होगा। पत्र लेकर सीएमओ से मिलने आए यूपीएचडीसीपी के सहायक अभियंता अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि यदि जमीन मिल जाएगी तो जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इतनी जमीन शहर में मिलने के आसार कम ही दिखते हैं(अमर उजाला,गोरखपुर,स्वतंत्रता दिवस,2011)।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोगःसात साल में पहली बार वेतन संकट में

Posted: 16 Aug 2011 03:51 AM PDT

अल्पसंख्यकों की तालीम और तरक्की के सरकारी दावे अपनी जगह हैं, लेकिन देश में शैक्षणिक संस्थानों का अल्पसंख्यक दर्जा तय करने वाले आयोग के सामने खुद सरकार ने ही नया संकट खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमइआइ) के गठन के बाद सात साल में पहला मौका है, जब उसके कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिल पा रही है। सरकार ने आयोग को हर तिमाही मिलने वाला अनुदान रोक दिया है। सूत्रों के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आयोग का जुलाई से सितंबर का अनुदान अब तक नहीं दिया है। नतीजा यह है कि आयोग के लगभग ढाई दर्जन कर्मचारियों को अगस्त में मिलने वाली तनख्वाह नहीं मिल सकी है। यह स्थिति तब है, जब आयोग ने अनुदान की धनराशि न मिलने की स्थिति में अगस्त का वेतन न बंट पाने की बाबत मंत्रालय को जुलाई में ही आगाह कर दिया था। अल्पसंख्यक संस्थानों से जुड़े मामलों के विवादों को निपटाने वाले इस आयोग को मंत्रालय सालाना 2.44 करोड़ का अनुदान देता है। जुलाई से सितंबर की तिमाही के लिए उसे 80 लाख रुपये अनुदान की दरकार है। जानकार सूत्र बताते हैं कि आयोग की इस अनदेखी के पीछे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास कोई ठोस वजह नहीं है। आयोग के लिए रजिस्ट्रार का एक पद स्वीकृत है। वह पद खाली पड़ा है। आयोग स्वायत्तशासी है, लिहाजा उसने तात्कालिक जरूरतों के मद्देनजर एक सलाहकार की नियुक्ति जरूर कर रखी है। मंत्रालय को शायद वह नियुक्ति नहीं पच रही है। इस बारे में आयोग के चेयरमैन जस्टिस एमएसए सिद्दीकी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के सालाना खर्चे का आडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) करता है। उसकी रिपोर्ट संसद में पेश होती है। उस स्तर पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई है। गौरतलब है कि आयोग ने इसी साल जामिया विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक होने का फैसला सुनाया है। जबकि बीते महीने ही उसने दिल्ली में सिख समुदाय से संचालित चार कॉलेजों के भी अल्पसंख्यक दर्जे के होने का फैसला दिया है(दैनिक जागरण,दिल्ली,16.8.11)।

प्रतिभावान बनें

Posted: 16 Aug 2011 03:30 AM PDT


यूथ जेनरेशन को जिंदगी का भरपूर मजा लेना है तो कुछ चैलेंज के साथ आगे बढ़ना होगा। माना जाता है कि युवा अपने पेशे के प्रति काफी सीरियस होते हैं। उनके मन में नौकरी को लेकर कई तरह के सपने भी होते हैं। साथ ही, उनकी चाहत होती है, ऊंचे पदों पर आसीन होना। आज की पीढ़ी के युवा नई शक्ति के रूप में उभर रहे हैं और उनकी सोच का दायरा विस्तृत है। केवल भावनाओं के बलबूते ही वे निर्णय नहीं लेते बल्कि सोच-समझकर अपनी क्षमताओं का प्रयोग करते हैं। उनकी सोच का स्वागत की जानी चाहिए। आखिर यूथ ही देश के भावी कर्णधार हैं। तेज गति बदलते कॉरपोरेट कल्चर में कंपनियां भी सफलता प्राप्त करने के लिए अपने तरीके में बदलाव ला रही है। इन तरीकों के साथ खुद को बदलने के साथ नियम-कानून भी बदल रही है। परंपरागत मैनेजमेंट तकनीक के माध्यम से सफलता प्राप्त कर कंपनियां अब अपने पुराने तौर-तरीकों में बदलाव लाने का काम कर रही है। इन दिनों कॉरपोरेट कल्चर में जो बदलाव आ रहे हैं वह युवा पीढ़ी के टैलेंट के नतीजे हैं। ग्लोब्लाइजेशन के इस दौर में हर क्षेत्र में नए एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं। वर्तमान दौर में जो बदलाव देखने को मिल रहा है, वह काफी तेजी से हो रहा है, जिसे न रोका जा सकता है और न ही मोड़ा जा सकता है। युवा पीढ़ी का ही परिणाम है कि आज ट्रेडिशनल मैनेजमेंट के तरीके से काम करने वाली कंपनियां पिछड़ने लगी हैं। उन्हें भी आधुनिक कॉरपोरेट कल्चर में ढलना के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दरअसल, क्रिएटिव कॉपरेशन के माध्यम से युवा कर्मचारी न केवल अपने टैलेंट को सही तरीके से सामने ला रहे हैं बल्कि कंपनी के भीतर भी एडजेस्ट करके चलते हैं। ऐसा ही क्रिएटिव और एडजेस्ट की भावना सभी कर्मचारी में आ जाए तो निश्चित रूप से संस्था का माहौल बदलेगा। कंपनी को आगे ले जाने में युवा कर्मचारियों का सबसे बड़ा हाथ होता है। वे केवल नौकरी नहीं करते बल्कि अपनी जिंदगी को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं और दिल से काम करते हैं। जिन युवाओं में जोश होता है वे दूसरों को काम कराने के जोश दिखाने के साथ दूसरों के सामने बेहतर उदाहरण के रूप में सामने होते हैं। जब आप कुछ अलग करते हैं , तभी लोगों की नजर में आते हैं। ऐसे युवा टैलेंट को आगे लाने जरूरत है तथा इन्हीं से माहौल में परिवर्तन भी आएगा। युवा टेलेंट ही सही मायने में कंपनी के लिए उपयोगी है चाहे वह कंपनी सरकारी हो या गैरसरकारी। इसलिए दिल से यूथ के टैलेंट को वेलकम करना चाहिए।

(प्र.अनिता घोष,राष्ट्रीय सहारा,16.8.11)

अर्द्धसैनिक बल के जवान को नौकरी से हटाने का निर्णय दिल्ली हाईकोर्ट ने उचित ठहराया

Posted: 16 Aug 2011 02:01 AM PDT

याचिकाकर्ता अनुशासित पैरा मिल्ट्री फोर्स का एक सदस्य था। यह सर्विस कभी भी किसी जवान के पथभ्रष्ट व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर सकती है, विशेषतौर पर जब मामला गलत तरीके से अवैध हथियार रखने का हो। यह टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय ने बीएसएफ के उस कांस्टेबल को राहत देने से इंकार कर दिया है जिसे अवैध चाइनीज पिस्तौल रखने के मामले में नौकरी से हटा दिया गया था। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति सुनील गौड़ की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता विरेंद्र कुमार को बीएसएफ का कांस्टेबल होने के नाते पता था कि बिना लाइसेंस के हथियार रखना अवैध है। यह घटना वर्ष 1990 की है। उस समय पंजाब में आतंकवाद पर पूरी तरह काबू नहीं पाया गया था। पंजाब के बार्डर आउट पोस्ट पर आतंकियों द्वारा छुपाए आ‌र्म्स व विस्फोटक में आग लग गई थी। अगले दिन की गई सर्च में काफी सारे हथियार मिले थे। सर्च पार्टी में शामिल कुछ जवानों ने अपने पास कुछ पिस्तौल रख लीं। याचिकाकर्ता ने भी एक पिस्तौल रख ली। इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वह सर्च पार्टी का हिस्सा था या नहीं। उसने बताया था कि एक रिश्तेदार को पिस्तौल दी थी। उसने किसी अन्य को बेच दी थी। इनकी निशानदेही पर वह बरामद भी हो गई थी। याचिकाकर्ता पंजाब के बार्डर आउट पोस्ट पर तैनात था। 25 मई 1990 को इलाके में आग लग गई। आतंकियों द्वारा छुपाए विस्फोटक तक आग पहुंच गई और विस्फोट हो गया। इस मामले में याचिकाकर्ता सहित सात जवान को दोषी करार दिया गया था(दैनिक जागरण,दिल्ली,16.8.11)।

मैक्सिकन गवर्नमेंट छात्रवृत्ति-2012

Posted: 16 Aug 2011 01:30 AM PDT

मैक्सिको में पढ़ाई के लिए भी कई तरह की आर्थिक सहायता भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध है। जो छात्र 2012 के शैक्षिक सत्र में मैक्सिको के विविद्यालयों में अध्ययन करने के इच्छुक हैं, उन्हें मैक्सिको सरकार स्कॉलरशिप प्रदान करेगी। इस साल यह सिर्फ पांच भारतीय छात्रों को मुहैया कराई जाएगी

योग्यता

जो छात्र मैक्सिको में अध्ययन करना चाहते हैं, उन्हें कम से कम स्नातक होना चाहिए। साथ ही, वे उन्हीं विषयों में स्नातक किए हों, जिस विषय में वे मैक्सिको में अध्ययन करना चाहते हैं। पीएचडी करने के इच्छुक अभ्यर्थी के पास मास्टर डिग्री जरूर होनी चाहिए। मैक्सिको सरकार द्वारा उन छात्रों को तवज्जो दी जाती है, जो उन ग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन चाहते हैं, जो उनके देश में नहीं हैं।

लैंग्वेज

जिन छात्रों की मातृभाषा स्पेनिश नहीं है, उन्हें स्पेनिश भाषा के जानकार होने का प्रमाणपत्र देना होगा। यह प्रमाणपत्र या तो किसी विविद्यालय का हो या फिर किसी लैंग्वेज लर्निग सेंटर का।


स्कॉलरशिप

प्रोग्राम और संस्थान के अनुसार एडमिशन और ट्य़ूशन फीस मुहैया कराई जाएगी। मास्टर डिग्री के छात्रों को करंट मिनिमम वेज से चार गुना आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह रकम करीब 7 लाख 178,40 पेसोस होगा। पीएचडी के छात्रों को भी इसी तरह की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो करीब 8 लाख 973,00 पेसोस होगा। मेडिकल इंश्योरेंस में मैक्सिकन सोशल सेक्योरिटी इंस्टीट्य़ूट (आईएमएसएस) द्वारा किया जाएगा। मैक्सिको शहर में चल रहे संस्थान में जाने और आने का भी खर्च इस स्कॉलरशिप के तहत वहन किया जाएगा(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)।

दाखिले की अंतिम तारीखें नोट करें

Posted: 16 Aug 2011 12:20 AM PDT

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी 

वेबसाइट www.nludelhi.ac.in पाठ्यक्रम-पीजी डिप्लोमा इन जजिंग एंड कोर्ट मैनेजमेंट योग्यता- 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट अंतिम तिथि- अभी तय नहीं

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड

वेबसाइट-www.iict.in पाठ्यक्रम-एमबीए इन फार्मा मार्केटिंग योग्यता- ग्रेजुएट या तीन साल का पॉलीटेक्निक डिप्लोमा साथ में तीन साल का कार्यानुभव अंतिम तिथि- 30 अगस्त

इंस्टीट्यूशन ऑफ परमानेंट वे इंजीनियर्स, रेलवे मिनिस्ट्री

वेबसाइट-www.ipweindia.com पाठ्यक्रम-डिप्लोमा इन रेलवे इंजीनिरिंग, पत्राचार माध्यम योग्यता- इंजीनियरिंग की किसी भी शाखा या मैथ या साइंस में ग्रेजुएट अंतिम तिथि- 1 सितम्बर

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी

वेबसाइट-www.ignou.ac.in पाठ्यक्रम-पीजी डिप्लोमा इन एचआईवी मेडिसिन योग्यता- एमबीबीएस अंतिम तिथि- 31 अगस्त

फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून

वेबसाइट- www.icfc.org पाठ्यक्रम-पीजी डिप्लोमा इन एरोमा टेक्नोलॉजी योग्यता- 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी। बीएस में एक विषय के रूप में केमेस्ट्री अनिवार्य अंतिम तिथि- 26 अगस्त

स्कूल ऑफ आर्काइव्स स्टडीज, नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया


वेबसाइट- - www.nationalarchives.nic.in पाठ्यक्रम-सर्टिफिकेट कोर्स इन रेप्रोग्राफी योग्यता- 45 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट अंतिम तिथि- 19 अगस्त

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इरीगेशन एंड पावर

वेबसाइट-www.cbip.org पाठ्यक्रम- पीजी डिप्लोमा इन थर्मल प्लांट इंजीनियरिंग योग्यता- बीई या समकक्ष डिग्री अंतिम तिथि- 9 सितम्बर

सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी

वेबसाइट- www.manipalu.in पाठ्यक्रम- बीबीए योग्यता- इंटरमीडिएट अंतिम तिथि- अभी तय नहीं

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी

वेबसाइट-www.kuk.ac.in पाठ्यक्रम-मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉम्रेशन साइंस योग्यता- बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस अंतिम तिथि- 16 सितम्बर

(प्रवीण,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)

कोल इंडिया 1,500 नई भर्तियां करेगी

Posted: 15 Aug 2011 11:23 PM PDT

सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड ने सोमवार को क हा कि वह अगले साल दिसंबर तक प्रबंधकीय पदों के लिए 1,500 नई भर्तियां क रेगी और इसके लिए सूचनाएं 2012 में जारी की जाएंगी। कोल इंडिया के कार्मिक निदेशक आर मोहनदास ने यह जानकारी दी। उन्होंने क हा,हम दिसंबर 2012 तक लगभग 1,500 प्रबंधन प्रशिक्षु रखेंगे। इस बारे में विज्ञापन अगले साल फ रवरी या मार्च में जारी होगा।उन्होंने क हा कि दुनिया की इस सबसे बड़ी कोयला कं पनी के यहां लगभग 4,000 रिक्तियां हैं। दास के अनुसार कंपनी मानव संसाधन, वित्त, विपणन तथा बिक्री सहित 16 शाखाओं में भर्तियां क रेगी(हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11)।

हरित ऊर्जा क्षेत्र में लाखों नौकरियां

Posted: 15 Aug 2011 11:21 PM PDT

देश में तेजी से बढ़ते हरित ऊर्जा क्षेत्र से अगले दो साल में लगभग दस लाख रोजगार मिलने की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हरित ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल से विविध क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर होंगे। पर्यावरण को लेकर जागरुकता बढ़ने, वैश्विक कार्बन बाजारों में वृद्धि तथा हरित भवनों की संख्या बढ़ने के कारण आने वाले समय में वकीलों, नीति लेखकों, कार्बन फिनांस परामर्शकों, व्यापार जोखिम विश्लेषकों, वास्तुविदों तथा अभियंताओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर होंगे जो हरित भवन नियमों के हिसाब से अपना-अपना काम कर सकें । ग्रीनस्पेसेज के प्रवर्तक कमल मितले ने कहा, ये तो कुछ ही क्षेत्र और रोजगार हैं, भविष्य में हजारों रोजगार सजित होंगे। मानव संसाधन परामर्श फर्म यूनिसन इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक उदित मित्तल का भी कुछ ऐसा ही मानना है। उन्होंने क हा, बहुत बड़ी संभावनाएं हैं और अगले दो साल में भारत में लगभग दस लाख हरित रोजगार सृजित होंगे। यहां हरित रोजगार से आशय किसी भी उद्योग में ऐसे रोजगार से है जो पर्यावरणीय गुणवत्ता संरक्षण या अभिवृद्धि में योगदान करे। इस क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में रोजगार पहली बार उत्पन्न हुए हैं (हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11)।

फैशन कोरियोग्राफी में करिअर

Posted: 15 Aug 2011 11:20 PM PDT

फैशन कोरियोग्राफी को कैटवॉक कोरियोग्राफी भी कहते हैं। फैशन इंडस्ट्री स्पेशलाइजेशन और सुपर-स्पेशलाइजेशन में अधिक से अधिक संभावनाओं को क्रिएट करता है।

शैक्षिक योग्यता

फैशन कोरियोग्राफी में करियर बनाने के लिए न्यूनतम योग्यता किसी भी विषय में बारहवीं अच्छे अंकों के साथ पास होना जरूरी है। आधारभूत जरूरतों में शामिल है क्रिएटिव टैलेंट। आप जितना क्रिएटिव और नए आइडियाज के साथ स्टेज शो पर उतरें गे उतना ही फैशन शो के साथ आपका करियर भी चमकेगा। इस फील्ड में प्रवेश पाने के लिए किसी खास कोर्स को करने की जरूरत नहीं होती। आप चाहें तो इंडस्ट्री में स्थापित व सफल कोरियोग्राफर को असिस्ट करने से भी अपनी शुरु आत कर सकते हैं। फिर भी, यदि आपको फैशन कोरियोग्राफी में दिलचस्पी है और कुछ हट कर करना चाहते हैं, तो फैशन में बैचलर या मास्टर डिग्री मददगार साबित हो सकती है।


फैशन की दुनिया जितनी बड़ी व विस्तृत है, उतने ही इसमें प्रत्येक दिन कुछ न कुछ बदलाव, नए पन देखने को मिलते ही रहते हैं। ऐसे में यदि कोई भी छात्र फैशन से जुड़े डिफरेंट फील्ड, आयामों में अपना भविष्य तलाशने की कोशिश करता है तो उसका फैसला बिल्कुल गलत नहीं। यदि आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जो फैशन व ग्लैमर की दुनिया में रहना चाहते हैं, इससे प्यार करते हैं और साथ ही साथ क्रिएटिव भी हैं, तो आप फैशन इंडस्ट्री से संबंधित आयाम फैशन कोरियोग्राफी को बतौर करियर अपना सकते हैं। फैशन कोरियोग्राफी को कैटवॉक कोरियोग्राफी भी कहते हैं। जैसे कि फैशन इंडस्ट्री काफी विस्तृत रूप में फैली हुई है, ऐसे में यह स्पेशलाइजेशन और सुपर-स्पेशलाइजेशन में अधिक से अधिक संभावनाओं को क्रिएट करता है। फैशन की दुनिया में करियर बनाने का मतलब यह नहीं कि सिर्फ आपको कपड़ों में ही डील करना होगा बल्कि डिजाइनिंग, मैनुफैक्चर और एक्सेसरीज मर्चेंडाइजिंग जैसे जूलरी, बैग्स, फुटवियर आदि में भी डील करना होता है। मोटे तौर पर इसमें फैशन कोरियोग्राफी के अलावा फैशन फोटोग्राफी और फैशन जर्नलिज्म भी शामिल है। ब्यूटी बिजनेस और मॉडलिंग भी फैशन इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ करियर है। जो छात्र टैलेंटेड होते हैं वे फैशन इं डस्ट्री में होने वाले फैशन शोज का हिस्सा बनकर बतौर फैशन कोरियोग्राफर के रूप में प्रवेश कर सकते हैं। फैशन कोरियोग्राफी में कई तरह के मूवमेंट पैटर्न्‍स शामिल होते हैं, जो मॉडल द्वारा रैम्प पर फॉलो किया जाता है, जिसमें खास तरह की म्यूजिक, ट्यून्स को मैच करते हुए स्टेप्स रखे जाते हैं। इस ट्यून्स को डिजाइनर सेलेक्ट करते हैं, जिससे वॉक में रिदिम शामिल होता है। फैशन, कैटवॉक कोरियोग्राफर्स ताल के उतार-चढ़ाव, थीम, फील और फैशन रनवेज शोज के डिजाइन में बहुत ही कठिन व निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ये मुख्य रूप से शो डायरेक्टर की तरह होते हैं। उन्हें मॉडल्स को म्यूजिक के साथ कैटवॉक की कला को सिखाना व बताना होता है, जो बहुत ही जिम्मेदारियों भरा कार्य होता है। यह न सिर्फ सौंदर्यपरकता (एस्थेटिकली अपीलिंग) से प्रभावित करने वाला लगे बल्कि ग्लैमरस और फैशनेबल भी दिखना चाहिए। फैशन कोरियोग्राफर पूरे फैशन शो को बना या बिगाड़ सकता है। आज, डिजाइनर्स टैलेंटेड कोरियोग्राफर्स को नियुक्त करने में काफी दिलचस्पी इसलिए भी दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि शो को सफलता दिलाने में कोरियोग्राफर्स बहुत ही आवश्यक फैक्टर होते हैं। फैशन कोरियोग्राफर फैशन डिजाइनर व स्टाइलिस्ट के साथ कार्य करते हैं ताकि वे फैशन शोज को डिजाइनर की सोच, दूरदर्शिता के आधार पर प्लान करने के साथ उसे लागू या कार्यान्वित भी कर सकें। इस फील्ड में कार्य करने का मतलब है डिजाइनर द्वारा पेश किए गए स्टाइल के भाव, थीम से खुद को बेहतर रूप से कनेक्ट करना। फैशन कोरियोग्राफी कमर्शियल और प्रोफेशनल रैम्प शोज, प्रो डक्ट लॉन्च जहां क्लाइंट स्टेज शो की मांग करते हैं, फैशन वीक्स जहां कपड़ों की प्रदर्शनी पर मुख्य फोकस होता है, में डील करता है। यह काफी लॉन्ग लर्निग प्रोसेस होता है, जिसमें नए टेक्नीक पर काफी रिसर्च करनी पड़ती है ताकि लास्ट शो से अपकमिंग शो हर पहलू, क्वालिटी में बढ़िया हो। यह ऐसा फील्ड है, जहां महिलाओं का ही वर्चस्व कायम है, लिहाजा यह लड़कियों के लिए बेस्ट करियर ऑप्शन हो सकता है। कई मॉडल्स तो मॉडलिंग में लंबा अनुभव करने के बाद कोरियोग्राफी फील्ड में आ जाती हैं क्योंकि उन्हें इस करियर फील्ड की टेक्नीक्स के बारे में अच्छी तरह से पता हो जाता है। जॉब प्रॉस्पेक्टस और करियर ऑप्शनडिजाइ नर्स से लेकर फैशन ब्रांड्स, सभी कैटवॉक कोरियोग्राफर्स को हायर करते हैं ताकि उनका शो सफल व हिट हो सके। आज के दौर में फैशन शोज बहुत जल्दी-जल्दी ऑर्गनाइज होने वाला इवेंट बनता जा रहा है और इंटरटेनमेंट का भी बेहतर स्रेत है। ऐसे में फैशन कोरियोग्राफर्स की मांग, कार्यक्षेत्र, अवसर भी बढ़ते ही जा रहे हैं। कोई भी कॉलेज डे बिना किसी फैशन शो के पूरा नहीं होता यहां तक कि कॉरपोरेट इवेंट में भी फैशन शोज आयोजित होने लगे हैं। फैशन शोज की सफलता फैशन कोरियोग्राफर्स के हाथों में ही टिकी होती है। एक बार जब डिजाइनर अपने कलेक्शन और प्रेजेंटेशन आइडियाज को फैशन कोरियोग्राफर को समझा देता है तो शो को हिट करने का कोरियोग्राफर का जॉब होता है कि वह किस तरह हर स्टेप को प्लान और एग्जीक्यूट करता है। फैशन कोरियोग्राफर सामान्य रूप से शो की प्रत्येक जानकारियों, बारीकियों पर गौर करता है जैसे एम्बिएंस डेकोर, स्टेज, रैम्प डिजाइन, लाइटिंग इफेक्ट्स, ऑडियो विजुअल्स, म्यूजिक, मॉडल्स, मेकअप और आउटफिट के हिसाब से हेयरस्टाइलिंग पर गौर करना जैसे कार्य शामिल हैं। उन्हें फैशन शो को कुछ इस तरह से प्लान करना होता है, जिससे डिजाइनर्स ड्रेसेज अच्छी तरह से हाईलाइट हो सके और वहां बैठे दशर्क पहले से ही अनुमान लगा लें कि थीम क्या है। किसी दो लोगों का स्टाइल आइडिया कभी भी एक समान नहीं हो सकता क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग ही स्टाइल होता है। ऐसे में जिस भी स्टाइल में कोरियोग्राफर शो को प्रस्तुत करता है वह यूनीक होना चाहिए। फैशन कोरियोग्राफर्स प्राय: क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की टीम के साथ कार्य करते हैं जैसे डिजाइनर, मॉडल्स, स्टाइलिस्ट और फोटोग्राफर्स। आप चाहें तो अपना खुद का ग्रुप बना सकते हैं या फिर दूसरे समूहों में भी कार्य कर सकते हैं। चाहें तो स्थापित कोरियोग्राफर को असिस्ट करने से शुरुआत कर सकते हैं। इंडस्ट्री में अनुभव, नाम, शोहरत प्राप्त करने के बाद आप चाहें तो फ्रीलांसर के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं। आपके सामने स्कूल खोलने का भी ऑप्शन है, जहां आप न्यू स्टूडेंट्स को कोरियोग्राफी टेक्नीक्स के बारे में शिक्षा दे सकते हैं। यहां तक कि डिजाइनर्स के साथ-साथ ब्रांडेड आइटम के डीलर्स भी दुनिया के सामने अपने प्रोडक्ट्स को प्रस्तुत करने के लिए फैशन कोरियोग्राफर्स की नियुक्ति करते हैं। इसके अलावा आप मॉडलिंग कंपनी में कार्य कर मॉडल्स को कैटवॉकिंग की कला के बारे में प्रशिक्षित कर सकते हैं।
वेतन इस फील्ड में सैलरी पैकेज स्किल और एक्सपीरियंस के आधार पर निर्भर होता और बढ़ता भी है। कैटवॉक कोरियोग्राफी सही मायने में आपकी सभी जरूरतों को पूरा करने का करियर है। नाम-शोहरत होने पर बेहतर कोरियोग्राफर हाई इन्कम भीहासिल कर सकता है। स्टैब्लिश्ड कोरियोग्राफर जहां अपना मेहनताना अपने हिसाब से डिमांड करता है वहीं फेशर्स को जो मिलता है उसी में संतुष्ट होना पड़ता है

व्यक्तिगत गुण

चूंकि यह काफी क्रिएटव करियर है, ऐसे में क्रिएटव होने के साथ- साथ रंगों, स्टाइल आदि पर कुशाग्रबुद्धि भी जरूरी है। बेहतर कम्यूनिकेशन स्किल्स जैसे अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ क्योंकि कई मॉडल्स विदेशी होती हैं, जिन्हें आप चीजों को अंग्रेजी में ही सही ढंग से समझा सकते हैं। साथ ही स्वाभाविक रूप से रिदम और फैशन को समझने की कला, व्यवहार- कुशल, शांत और आत्मविासी भी होना होगा। इसके साथ शो के सफलतापूर्वक संचालन के दौरान किसी भी तरह की समस्या पैदा होने पर उसे बेहतर तरीके से हैंडल करने की योग्यता भी होनी चाहिए। कभी भी किसी भी समय घंटों काम करने के अलावा तनाव भरे माहौल में भी कार्य करने में माहिर होना जरूरी है

संस्थान : 
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), नई दिल्ली(अंशुमाला,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)

इग्नू में मनपसंद पेपर चुनने का मिलेगा मौका

Posted: 15 Aug 2011 11:17 PM PDT

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में जल्द ही छात्रों को पढ़ाई के लिए अपने मनपसंद पेपर चुनन का मौका मिलेगा। ताकि छात्रों को उ स खास पेपर पर विशेष अध्ययन करने का मौका मिले। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इग्नू के कु लपति प्रो. वीएल राजशेखरन पिल्लै ने कहा कि इग्नू पढ़ाई को सरल और सहज बनाने के लिए पहल कर रहा है ताकि सभी के लिए शिक्षा सुलभ हो सके । उन्होंने क हा कि इग्नू पेपर के हिसाब से रजिस्ट्रेशन योजना की शुरुआत करने जा र हा है । इसके तह त कि सी भी प्रोग्राम के पेपर को चुन सक ते हैं । उ न्होंने बताया कि इस योजना के तहत छात्र किसी एक पेपर का चयन कर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं । जैसे पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास क म्युनिकेशन प्रोग्राम के छात्र अगर सिर्फ पब्लिक रिलेशन पेपर में यह डिग्री हासिल कर सकते हैं और वह उसी पेपर की परीक्षा दे सकते हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11) ।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा,शिक्षा बिकाऊ न हो, सुनिश्चित करे सरकार

Posted: 15 Aug 2011 11:13 PM PDT

सर कार को ऐसी शिक्षा व्यवस्था लाग क र नी चहि ए, जो आम आदमी की जेब के हि साब से हो। खुले बाजार म् शिक्षा की मनमानी कीमत वसूलने क छू ट नहीं दी जा सक ती। इसे बिकाऊ होने से बचाने की जिम्मेदारी सर कार की है । इसके जरू री है कि सर कार शिक्षा पर अपना नियंत्रण बनाए र खे। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टि प्पणी की। पीठ ने के न्द्र सर कार को सुझाव देते हु ए राजधानी के निजी स्कू लों द्वारा मनमानी फीस बढोतरी के खिलाफ अभिभावकों की ओर से दायर अपील का निपटारा क र ते हु ए दिया। शिक्षा पर सर कारी नियंत्रण क्यों जरू री है , इसे जस्टिस ए. के सीकरी व सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने भार तीय अर्थव्यस्था के जरिए समझाया। पीठ ने क हा कि वर्ष 1991 में भार तीय अर्थव्यवस्था में उ दारीक र ण, ग्लोबलाइजेशन व निजीक र ण का दौर शुरू हु आ। इसके बाद देश ने सभी क्षेत्रों में काफी तेजी से विकास कि या। इतना ही नहीं इस दौर में लाइसेंस व इंस्पेक्टर राज में भी क मी आई। सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास के बावजूद सर कार ने अर्थव्यवस्था को पूरी तरंह से नियंत्रण मुक्त नहीं किया। ठीक उसी प्रकार से शिक्षा को भी खुले बाजार में नहीं छोड़ना चाहिए। पीठ ने साफ क हा है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण व इसके नाम पर मुनाफाखोरी कानून में प्रतिबंधित है और सरकार को यह देखना होगा कि कोई इसका उल्लंघन न कर पाए। इसके लिए जरू री है कि सरकार एक राष्ट्रीय नीति बनाने के साथ-साथ इसे सख्ती से लागू क र वाने के लिए एक स्वतंत्र नियामक आयोग भी बनाए। हाईकोर्ट ने क हा है स्कू लों की फीस ऐसी होनी चाहिए, जो आम लोग भी वह न कर सके । ऊन हो, सुनिश्चित करे सरकार' स्कूलों पर निगरानी के लिए क्यों जरू री है स्वतंत्र नियामक आयोग दरअसल, राजधानी दिल्ली में फीस बढोतरी को लेक र स्कू लों व अभिभावकों के बीच कानूनी लड़ाई वर्ष 1997 में दायर एक जनहि त याचिका से शुरू हुई थी। इसके बाद दुग्गल कमेटी बनाई गई। काफी प्रयास के बाद भी इस समस्या का कोई ठोस ह ल नहीं निक ला। इसके कु छ साल बाद बंसल क मेटी गठि त की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट ने स्कू लों को फीस बढ़ाने की अनुमति देते वक्त सरकार द्वारा 1 फरवरी 2009 को गठित शिकायत समिति को भी अधिकारविहीन बताया और कहा कि इससे फीस बढोतरी की समस्या का हल नहीं निकाला जा सक ता। इसके लिए स्थायी नियामक आयोग बनाना जरूरी है(प्रभात कुमार,हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11) ।

डीयूःनौवीं कटऑफ के बाद भी सीटें खाली

Posted: 15 Aug 2011 11:06 PM PDT

दिल्ली विश्वविद्यालय में नौवीं कट ऑफ के आधार पर भी ओबीसी की सीटें नहीं भर पाई हैं । प्रशासन 10वीं कट ऑफ पर जारी क र सक ता है ।दिल्ली विश्वविद्यालय में नौवीं कट ऑफ के आधार पर ओबीसी दाखिले की अंतिम तिथि मंगलवार है लेकि न अब तक सीटें नहीं भर पाई हैं , जबकि कई कॉलेजों में कट ऑफ 39 प्रतिशत तक कर दिया गया है । मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन एक बैठक कर के ओबीसी एडमिशन पर चर्चा करेगा। बैठक में सीटों को भर ने की रणनीति बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है । इस मामले में कॉलेजों का कहना है कि कम से कम प्रतिशत तय कर के कट ऑफ निकाली गई है लेकि न सीटें फि र भी नहीं भर पा रही हैं । ज्यादातर कॉलेजों में ओबीसी कोटे की सीटें खाली हैं । दयाल सिंह कॉलेज में नौवीं कट ऑफ के आधार पर तीन दिन में महज दो दाखिले ही हु ए हैं , जबकि एक दिन का समय बाकी है । प्राचार्य डॉ. आईएस बख्शी का क ह ना है कि बीकॉम ऑनर्स और इकोनॉमिक्स ऑनर्स में सीटें खाली हैं । शनिवार को दो ही दाखिला हु आ है । हालांकि अभी भी छात्रों के पास एक दिन का मौका है । उन्होंने कहा कि अभी भी दोनों कोर्सों में 26 सीटें खाली हैं । उ न्होंने अगले क ट ऑफ की संभावनाओ को लेकर कहा कि अगर विश्वविद्यालय की ओर से निर्देश जारी होता है , तो अगली कट ऑफ भी निकाली जाएगी। नौवीं कट ऑफ में क ई कॉलेजों ने 9 प्रतिशत तक की गिरावट की है । कॉलेज हर कट ऑफ में जमकर गिरावट कर रहे हैं । भगिनी निवेदिता और अदिति कॉलेज में बीए प्रोग्राम के लिए 40 प्रतिशत कट ऑफ किया है, जबकि जाकिर हुसैन कॉलेज में संस्कृ त ऑनस के लिए 39 प्रतिशत कट ऑफ किया गया था। एसपीएम कॉलेज में बीए प्रोग्राम के लिए 54 प्रतिशत कट ऑफ र खी गई है । हालांकि डीयू के कई ऐसे कॉलेजो में कट ऑफ 80 प्रतिशत के आसपास है । मिरांडा हाउस, हंसराज कॉलेज और कि रोड़ीमल जैसे कॉलेजों में नौवी कट ऑफ भी काफी ऊपर ही है। सूत्रों की मानें तो ओबीसी की सीटों को किसी भी हालात में सामान्य वर्ग के लिए तब्दील नहीं किया जाएगा। 

कवायद 
- एडमिशन के मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन मंगलवार को करेगा बैठक 
- ओबीसी प्रवेश में एक और क ट ऑफ आने की संभावना(हिंदुस्तान,दिल्ली,16.8.11)

यूपीःनौ विवि ने फीस का ब्योरा सौंपा

Posted: 15 Aug 2011 10:40 PM PDT

प्रदेश भर के विश्वविद्यालय अब विद्यार्थियों से मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे। डिग्री कॉलेजों से लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस तक समान फीस ढांचा लागू करने की कवायद हो रही है। शासन ने फीस निर्धारण का जिम्मा सीएसजेएम विश्वविद्यालय के कु लपति प्रो. एच के सहगल को सौंपा है। उम्मीद की जा रही है कि बीए और बीएससी जैसे पाठ्यक्रमों में दशकों से ली जा रही फीस में इजाफा होगा जबकि इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट फीस के अंतर को समाप्त किया जाएगा। प्रदेश भर के 12 विश्वविद्यालय में वसूली जा रही अलग-अलग फीस को समान क रने की क वायद हो रही है। समान फीस का फार्मूला सरकारी, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों में एक साथ लागू होगा। ऐसे में ज्यादातर विषयों की फीस बढ़ सक ती है। वसंसीएसजेएम विश्वविद्यालय को फिलहाल नौ विवि ने फीस का ब्योरा सौंपा है। लखनऊ विवि, संपूर्णानंद विवि काशी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ ज्योतिबा फुले विवि बरेली, दीनदयाल उपाध्याय विविगोरखपुर, राम मनोहर राष्ट्रीय विधि विवि, लखनऊ और राजर्षि टंडन मुक्त विवि इलाहाबाद शामिल हैं। विवि के फीस ढांचे के अध्ययन के बाद परंपरागत कोर्सों की फीस बढ़नी लगभग तय है। बीए में ज्यादातर कॉलेजों में 2000 से 2800 रुपए तक ही फीस ली जा रही है। बीएससी में भी 2200 से 2800 रु पए फीस है। लखनऊ यूनिवर्सिटी एमबीए के लिए 75 हजार रुपए तक फीस वसूल रहा है। वहीं कानपुर विवि की फीस लगभग आधी है। फीस के अंतर को भी समाप्त क रने की क वायद है। विभिन्न विवि में चल रहे अन्य प्रोफेशनल कोर्सों की फीस का भी तुलनात्मक अध्ययन हो रहा है। सीएसजेएम विवि ने फिलहाल आगरा, झांसी, जौनपुर और फै जाबाद विवि से फीस का ब्योरा मांगा है। इसके आधार पर समान फीस का निर्धारण होगा(हिंदुस्तान,लखनऊ,स्वतंत्रता दिवस,2011)।

इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग मे करिअर

Posted: 15 Aug 2011 10:29 PM PDT

इंजीनियरिंग की जटिल लेकिन प्रगतिशील शाखा में से एक इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग भी है, जिसका अध्ययन इंजीनियरिंग की पृथक शाखा या इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के साथ किया जाता है। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग में मुख्यत: डिजाइन, कन्फिग्रेशन और स्वचालित सिस्टम पर केन्द्रित अध्ययन किया जाता है। जो प्रोफेशनल्स इन क्रियाकलापों में संलग्न होते हैं उन्हें इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर कहते हैं। इस तरह के इंजीनियर्स किसी इंडस्ट्री के आटोमेटेड प्रोसेस जैसे केमिकल या मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में काम करते हैं। इनका उद्देश्य यहां के सिस्टम की प्रोडक्टिविटी, सेफ्टी, रिलायबिलिटी और स्टेबिलिटी को इम्प्रूव करना होता है। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर्स किसी भी इंडस्ट्री के अन्तर्गत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स और पूरे इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम की डिजाइनिंग, कंस्ट्रक्शन और मेंटीनेंस में सहायता करता है। किसी भी प्रोडक्ट के बेहतर उत्पादन के लिए किन-किन इंस्ट्रूमेंट्स की आवश्यकता होगी, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर ही इसे तय करता है।

इंजीनियरिंग

सिस्टम, मशीनरी और प्रोसेस को मॉनिटर और कंट्रोल करने वाले इक्विपमेंट्स की आवश्यकतानुसार डिजाइनिंग, डेवलपिंग, इंस्टॉलिंग, मैनेजिंग और इक्विपमेंट्स को मेंटे न करने की जिम्मेदारी इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर की होती है। इनके अलावा, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर्स का लक्ष्य और जिम्मेदारियां कॉमन हैं जैसे : कंट्रोल सिस्टम की डेवलपिंग और डिजाइनिंग, मौजूदा सिस्टम्स को मेंटेन और मोडिफाई करना, मैने जिंग ऑपरेशंस, पच्रेजर्स और दूसरे इंटरनल स्टाफ के साथ मिलकर काम करना, क्लाइंट्स, सप्लायर, कॉन्ट्रेक्टर्स औ र संबंधित अधिकारियों से संपर्क बनाए रखना, समस्या का समाधान करना, एडवाइस और कंसल्टेंसी सपोर्ट देना, नये इक्विपमें ट् स खरीदना, नये बिजनेस प्रपोजल्स बनाना आदि।

क्वालीफिकेशन


जो कैंडीडे ट्स इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग में करियर बनाना चाहते हैं उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रू मेंटेशन इं जीनियरिंग या साधारण इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की शाखा से अंडरग्रेजुएट स्तर का बीई/बीटेक होना आवश्यक है। कैंडीडेट को प्लस टू की परीक्षा फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमेटिक्स जैसे विषयों के साथ के अच्छे परसेंटेज से उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। हालांकि इसमें सलेक्शन इंट्रेंस एग्जाम जो कि नेशनल और स्टेट लेवल पर (जैसे आईआईटीजीईई, एआईईईई, बीआईटीएसएटी) पर आधारित होती है, द्वारा होता है। इंट्रेंस एग्जाम पास होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन/इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग में चार साल की अवधि का बीई/बीटेक कोर्स कर सकते हैं। दसवीं के बाद डिप्लोमा प्रोग्राम में दाखिला लिया जा सकता है। ऐसे कैंडीडेट्स को जूनियर इंजीनियर का पद मिलता है। जो कैंडीडेट्स बीई/बीटेक के बाद भी आगे पढ़ना चाहते हैं, वे देश के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी या दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक कर सकते हैं। व्यक्तिगत रूप से जो रिसर्च एरिया में दिलचस्पी रखते हैं वे पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद रिसर्च वर्क को आगे बढ़ाने के लिए पीएचडी कर सकते हैं।


स्किल

मै थमैटिक्स, फिजिक्स और कैमिस्ट्री पर बेहतर पकड़, लॉजिकल रीजनिंग और टीम्स के साथ काम करने की हार्ड वर्क एबिलिटी। प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल, किसी चीज को तुरंत समझने की कला, वर्क प्रेशर में भी शांत रहना, टेक्निकल ड्राइंग में निपुण, कम्प्यूटर स्किल्स और कम्युनिकेशन की बेहतर काबिलियत भी जरूरी है।

जॉब प्रॉस्पेक्टस

इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर्स कंपनीज की आर एंड डी यूनिट में जॉब पा सकते हैं। इसके अलावा इनकी मांग हेवी इंडस्ट्रीज जैसे थर्मल पावर स्टेशन, स्टील प्लांट्स, रिफाइनरीज, सीमेंट और फर्टिलाइजर प्लांट्स में भी रहती है। ये किसी भी संस्था में मल्टीडिस्प्लेनरी रोल अदा करते हैं। इसके अलावा, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर करियर के दूसरे ऑप्शन्स चाहे तो इंडस्ट्री के भीतर या बाहर भी तलाश सकते हैं। इसके लिए कुछ क्षेत्र हैं जैसे पच्रेजिंग, सेल्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, एचआर, आईटी या जनरल मैनेजमेंट। इस तरह के इंजीनियर कंसल्टेंसी बेस्ड काम भी करते हैं। जिन इंजीनियर्स के अंदर अपने अनुभवों का बेहतर इस्तेमाल की काबिलियत होती है, वे इंडस्ट्री में सफलता पाते हुए यूनिवर्सिटी के एकेडमिक रिसर्च या फिर इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर्स के लिए लेक्चरर/ट्रेनर के रूप में टय़ूटोरिंग/कोचिंग में काम कर सकते हैं। मास्टर्स डिग्री वाले सीनियर लेवल पोजीशन तक पहुंचते हैं, जहां उन्हें उच्चस्तरीय जिम्मेदारी के साथ ही मैनेजिंग एक्टिविटी के साथ- साथ किसी नये डेवलपमेंट की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।

स्पेशलाइजेशन

हालांकि इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग खुद में विशेषज्ञता वाला सब्जेक्ट है फिर जो कैंडिडेट्स इससे आगे भी बढ़ना चाहते हैं वे निम्नलिखित क्षेत्रों में पीएचडी कर सकते हैं- डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग, मॉनीटर कंट्रोल, स्पीच प्रोसेसिंग, सेंसर नेटवर्किग, इंटेलिजेंट कंट्रोल।

सैलरी

इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर्स की फ्रेशर्स के रूप में शुरुआती सैलरी दस से बीस हजार रुपये प्रतिमाह हो सकती है, हालांकि इसी पद के लिए विदेशों में पे-पैकेज काफी ज्यादा है। शैक्षिक योग्यता के साथ ही अनुभव भी पे-पैकेज को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होता है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों को पब्लिक सेक्टर की तुलना में ज्यादा सैलरी मिलती है। अनुभव के साथ ही 25,000 से 80,000 रुपये तक की कमाई प्रतिमाह हो सकती है।


संस्थान
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (चेन्नई, नयी दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, खड़गपुर, मुंबई, बेंगलुरू और रुड़की) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉम्रेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, अहमदाबाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई इलाहाबाद एग्रीकल्चरल डिमीड यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची इंस्टीट्यूट ऑफ जूट टेक्नोलॉजी, कोलकाता जेएसएस एकेडमिक ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, नोएडा आईईसी कॉलेज ऑफ इंजी. एंड टेक्नो., ग्रेटर नोएडा
(सपना,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)

हिस्सों में भी कर सकते हैं इग्नू के कोर्स

Posted: 15 Aug 2011 09:28 PM PDT


यदि आप इग्नू के किसी कोर्स को पूरा नहीं करना चाहते हैं, तो भी कुछ मनपसंद हिस्सों को पूरा कर आप प्रमाण-पत्र हासिल कर सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विविद्यालय कुलपति प्रो. वीएन राजशेखरन पिल्लई ने यह घोषणा की। प्रो. पिल्लई ने कहा कि विविद्यालय ने पेपर आधारित कोर्स शुरू करने की योजना लागू की है। कोई भी विद्यार्थी यदि चाहे तो किसी भी डिग्री व डिप्लोमा में कुछ पेपर करके प्रमाणपत्र हासिल कर सकता है। मसलन, यदि कोई विद्यार्थी पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के एक पेपर जनसंचार को करना चाहता है, तो वह कर सकता है। लेकिन इसके बाद उसे डिप्लोमा की जगह प्रमाणपत्र मिलेगा(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,16.8.11)।

बिहारःनए सत्र से पीएचडी की नई गाइडलाइन

Posted: 15 Aug 2011 09:26 PM PDT

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से जारी पीएचडी की नई गाइडलाइन नए सत्र से प्रभावी हो जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से बनायी गयी कमेटी ने पीएचडी के नई गाइडलाइन से संबंधित अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है । पहले दो बैठ कों में स्टेच्यूटरी कमेटी ने नई गाइडलाइन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। पीएचडी गाइडलाइन की मामूली गलती को सुधार कर लिया गया। नए नियम के तहत प्री पीएचडी टेस्ट में सफ लता प्राप्त क रने वाले छात्रों को साक्षात्कार देना होगा। इसके बाद शोधार्थी को छह माह के लिए शोध की विधि का कोर्स क रना होगा। इसके बाद फि र से छात्रों को परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में सफ लता प्राप्त क रने के बाद शोध कार्य करने का मौका मिलेगा। मतलब यह कि अब शोध करना इतना आसान नहीं रह गया है । पीएचडी की नई गाइडलाइन के तहत शोधपत्र को यूजीसी की वेबसाइट पर जारी करना होगा। नए नियम के तहत छात्रों के शोधपत्रों का मूल्यांकन एक के बजाए दो विशेषज्ञ करेंगे। इसमें एक दूसरे राज्य का विशेषज्ञ होगा। किसके मार्गदर्शन में छात्रों को शोध करना है यह छात्र नहीं विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई कमेटी तय करेगी। विषयवार सीटों का उल्लेख वेबसाइट पर करना होगा। पास छात्र-छात्राओं को तय सीमा के अंदर शोधपत्र तैयार करना होगा(हिंदुस्तान,पटना,स्वतंत्रता दिवस,2011)।
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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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