इंदिरा गांधी का करिश्मा दोहराने की जुगत में ममता दीदी
पलाश विश्वास
ममता बनर्जी लगता है कि इंदिरा गांधी का ख्वाब बुनने लगी हैं। जैसे अंतरात्मा की आवाज का नारा देकर वीवी गिरि को १९६९ में राष्ट्रपति बनाकर सत्ता के सारे समीकरण बदल डाले थे इंदिरा ने, दीदी का मंसूबा कुछ वैसा ही कर दिखाने का है। चारों तरफ से घिर जाने के बावजूद अभी उनका हौंसला बुलंद है और उन्होनें हार कतई नहीं मानी है। बल्कि अपने केंद्रीय मंत्रियों के यूपीए सरकार से इस्तीफे की चेतावनी जारी करते हुए उन्होंने फिर कलाम को ही राष्ट्रपति बनाने का अलाप जारी रखा है। कलाम के सार्वजनिक बयान कि वे फिर चुनाव नहीं लड़ेंगे, का दीदी पर कोई असर नहीं हुआ है। वे कांग्रेस को ही अपनी संसदीय शक्ति के दम पर मजबूर करना चाहती है कि वह प्रणव को पीछे हटाकर कलाम को ही राष्ट्रपति बना दें। उनकी पूंजी बंगाल में उनकी अतुलनीय लोकप्रियता है और इसीलिए इसी जनमत को अपने मुहिम के हक में लामबंद करने खातिर दीदी ने फेसबुक पर मोर्चा संभाला है।
उधर राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक बाध्यताओं के काऱण ब्याज दरों में कटौती के लिए इंतजार की अवधि लंबी हो गई है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज की मध्य तिमाही मौद्रिक नीति की समीक्षा में यथास्थिति बरकरार रखी है। बैंकों का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम रह गई है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई तब्दीली नहीं की है। लेकिन इससे प्रणव को मिल रहे कारपोरेट इंडिया और बाजार के समर्थन में कोई फर्क नही पड़ेगा क्योंकि नजर दीर्घकालीन नतीजों पर है।इस बीच केंद्र से पंगा लेने के बाद दीदी की आर्थिक दिक्कतें और संगीन हो गयी हैं। पश्चिम बंगाल सरकार पर कर्ज का मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने खुलासा किया है कि अगले वित्त वर्ष तक कर्ज के मूलधन और ब्याज की देनदारी 25 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगी।विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मित्रा ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में यह देनदारी 22 हजार करोड़ तक है। केंद्र सरकार से लिए गए धन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कर्ज की सीमा इस साल बढ़ाकर 2,750 करोड़ कर दी गई है। मित्रा ने बताया कि तकरीबन 22 हजार करोड़ रुपये तो राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च कर दिए गए। इसके अलावा 3,982 करोड़ रुपये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, 15,726 करोड़ रुपये शिक्षा, 795 करोड़ रुपये पिछड़े वर्गों और 672 करोड़ रुपये सामाजिक कल्याण और पोषण पर खर्च किए गए।ऐसी हालत में दीदी जो आक्रामक खेल दिखा रही हैं, उसके अंजाम पर बंगाल का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है।
१९६९ में तब हम सातवीं में पढ़ते थे दिनेशपुर हाईस्कूल में।निहायत बच्चे थे। पर घर में हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी अखबार पढ़ने का नियमित अभ्यास था। रेडियो से बी जानकारी मिलती थी। यह सही है कि १९६९ में वीवी गिरि के राष्ट्रपति चुनाव तक इंदिरा की कोई छवि नहीं थी और वे राजनीति में प्रियदर्शिनी ही थी। कांग्रेस के धुरंधरों ने कठपुतली बतौर नचाने के लिए ही उन्हें प्रधानमंत्री बनाया था। तब राजा रजवाड़े स्वतंत्र पार्टी में लामबंद थे। लेकिन कांग्रेस में भी उनका दबदबा था। मगर समाजवादी नेताओं, चंद्रशेखर और मोहन धारिया जैसे युवा तुर्कों की कोई कमी न थी। कामराज योजना से अंततः इंदीरा की ही ताकत बढ़ी थी और निजलिंगप्पा की सामंती हैसियत इंदिरा के करिश्मे को रोकने में नाकाम थी। तब ऐसी कोई खबर नहीं थी कि गिरि चुनाव के अनिच्छुक प्रत्य़ाशी थे। राजनीति पर तब भी औद्योगिक घरानों का वर्चस्व था पर बाजार तब तक सर्व शक्तिमान नहीं बना था।इंदिरा गांधी बाजार के खिलाफ नहीं , सामंती विरासत के खिलाफ परिवर्तन के समाजवादी एजंड के
साथ लड़ रही थीं। सत्ता वर्ग और आम जनता, दोनों तरफ से उन्हे पूरा समर्थन मिला। इसके उलट बाजार के गुलाम सत्तावर्ग में आज दीदी की क्या हैसियत रह गयी है, समधने की बात है। सत्ता के किसी ध्रूव में उनके प्रति तनिक आस्था नहीं है। बंगाल में अपार लोकप्रियता के बावजूद, वामपंथ का वध करने के बावजूद बाजार और सत्तावर्ग में उनकी कोई साख बची नहीं है। बंगाल के बाहर बाकी देश में लोकप्रियता के लिहाज से उनकी पैमाइश अभी बाकी है।रणनीति बनाने और उसे अंजाम देने में इंदिरा गांधी भी भावनाओं का खुलकर इस्तेमाल किया। अस्सी के दशक में तो वे नरम गरम दोनों पर्कार के हिंदू राष्ट्रवाद का इस्तेमाल करती देखी गयी। पर रणनीति के मामले में भावनाओं को वे कोई ज्यादा तरजीह देती हों, ऐसा उनका दुश्मन भी नहीं मानेंगे। पर दीदी की पूरी राजनीति भावनाओं पर केंद्रित हैजो बंगाली मानसिकता को जीतने में भले ही कामयाब रही हो, लेकिन अब उसकी अग्निपरीक्षा की घड़ी आ गयी है।
अब जो हालात दीख रहे हैं, कलाम के पीछे हट जाने का पैसला दरअसल दीदी के हक में है। कम से कम दीदी को पिलहाल संघ परिवार के साथ य़ूपीए प्रत्याशी के पक्ष में वोच डालना नही पड़ेगा। कलाम धर्म से मुसलमान है, इससे संघ परिवार के साथ प्रणव के खिलाफ वोट देकर बंगाल के मुस्लिम वोट बैंक ,जिसके पाला बदलने से दीदी लगातार जीतती रही हैं पिछले दिनों, का बने रहना संदिग्ध है, दीदी इस निर्मम हकीकत को समझने से इंकार कर रही हैं। अगर प्रणव निर्विरोध चुन लिये जायें, तो वोट डालने की नौबत नहीं आयेगी। ऐसे में तृणमूल के यूपीए में बने रहने में कोई दिक्कत नहीं आयेगी।अपने पक्ष में बने इस समीकरण को बदलकर फेस बुक के आभासी समर्थन के बरोसे ममता दीदी प्रणव मुखर्जी को रोकने के फिराक में हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को साफ किया कि केंद्र सरकार से उसके मंत्रियों के इस्तीफे देने की खबरों में जरा भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस का संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को समर्थन जारी रहेगा, भले ही वह चाहे तो उनकी पार्टी को निकाल बाहर करे।तृणमूल कांग्रेस के सांसदों व विधायकों की एक बैठक के बाद उसके वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि ऐसी खबरें चल रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया है और अपने इस्तीफे ममता को सौंप दिए हैं। इन खबरों में तनिक भी सच्चाई नहीं है। हमारा इरादा सरकार गिराने का नहीं है। हां, हम उसके लिए मुश्किल नहीं बनेंगे।
निजी तौर पर हम भी प्रणव के नीति निर्धारक बनकर जन विरोधी फैसले करते रहने के खिलाफ लगातार बोलते और लिखते रहे हैं। उन्हें राष्ट्रपति बनाने के बाजार के खेल को हम बखूब समझते हैं। पर प्रणव के पराक्रम को महज चुनावी राजनीति की कसौटी पर आंकते हुए दीदी ने भयंकर बूल की है। प्रणव को रोकने के फिराक में इंदिरा गांधी के करिश्मे को दोहराकर वे राष्ट्रीय ने ता बनने की महात्वाकांक्षा के चलते भूल गयीं कि वे कांग्रेस और यूपीए की नेता नहीं , जो सोनिया गांधी हैं। प्रणव को सरकार से किनारा कने की रणनीति भी वे समझ नहीं पायी। उन्होंने अपनी ही पार्टी के सांसद दिनेश त्रिवेदी के तर्ज पर प्रणव को रोकने के लिए राष्ट्रपति पद हेतु मनमोहन का नाम लेकर प्रधानमंत्री बदलने की ही कोशिश कर दी। अगर सोनिया की यही रणनीति रही होगी, ममता दीदी के विस्पोट से वह धरी की धरी रह गयी और दीदी के करतब से सोनिया को अपनी हैसियत के लिए चुनौती मिल गयी, जिससे वे बखूबी निपटीं। ममता दीदी ने दरअसल अपनी अधकचरी कार्रवाई से प्रणव और मनमोहन दोनों की स्थिति मजबूत की है।
दीदी ने समझा था कि दिल्ली में मुलायम से गठजोड़ करके वे प्रणव को आसानी से रोक लेंगी, यह चाल नाकाम हो गयी, ऐसा समझने में भी उन्हें बाकी देश के मुकाबले कुछ ज्यादा ही वक्त लगा। प्रणव बंगाल में भले ही दीदी के मुकाबले लोकप्रियता में कहीं नहीं हो, पर दशको के अपने राजनीतिक कैरियर में उनके मित्रों की कमी नहीं है। जो औद्योगिक घराने प्रणव को प्रधानमंत्री बनाने में लगे ते, उन्हे फेल करने के लिए जिस जबरदस्त कारपोरेट और राजनीतिक लाबिइंग को बाकी देश देख रहा था, दीदी ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया। प्रणव के समर्थन में खड़े बाजार को उन्होंने नहीं देखा और बंगाल की राजनीति के दम पर राष्ट्रीय राजनीति करने लगी, ऐसा दुस्साहस तो मायावती और जयललिता भी नहीं करतीं।
प्रणव को रोकना था तो सोनिया के दूसरे पसंद हमीद अंसारी के नाम पर दीदी हां कर देती, तो ह नौबत ही नहीं आती। मुलायम के साथ साथ उनके राजनीतिक समीकरण सध जाते और कांग्रेस को इससे खास परेशानी नहीं थी। वाम समर्थित होने की वजह से उन्होंने हमीद अंसारी को कारिज करके बड़ी भारी भूल की। फिर सोमनाथ मुखर्जी के नाम पर वे गंभीर थीं तो पहले से पहले करके कांग्रेस को इसके लिए राजी कर सकती थीं। जब सारे घटकों से बात करके सोनिया ने प्रणव का नाम फाइनल कर लिया और कारपोरेट राजनीतिक लाबिइंग ने पूरा माहौल प्रणव के पक्ष में कर दिया, तब जाकर कहीं दीदी दिल्ली आया और जिस तर्ज पर आर्खिक सुधार टालने में उन्होंने कामयाबी पायी, जैसे उन्होंने दिनेश त्रिवेदी को हटा दिया, उसी तरह दबाव और सौदेबाजी के दम पर उन्होंने प्रणव को रोकने कीमुहिम छेड़ दी। १९६९ में इंदिरा गांधी की रणनीति और कार्रवाइयों की कानोंकान किसी को खबर नहीं थी, पर दीदी की हर चाल पहले से पूरे देश को मालूम हो जाती है। इसी वजह से दीदी के फेसबुक पेज पर हमने यही लिखा कि प्रणव को रोकने के लिए कोई सुनियोजित योजना तो होनी थी।हमने यह भी लिखा कि दीदी, आपको कुछ बेहतर सलाहकारों और बेहतर दोस्तों की जरुरत है।
टीएमसी के 19 सांसदों का समर्थन सरकार को है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर टकराव के बाद कांग्रेस और तृणमूल दोनों माइंड गेम खेल रही हैं। कलाम के मैदान से हटने के बाद तृणमूल को अब अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। कलाम के हटने से बीजेपी को भी झटका लगा है। अब उसे नए सिरे से सोचना पड़ रहा है कि वह पी.ए. संगमा को समर्थन दे या प्रणव के पक्ष में ही हथियार डाल दे। बीजेपी में एक बड़ा गुट संगमा पर विश्वास करने को तैयार नहीं है, क्योंकि उसे लगता है कि देर सबेर संगमा भी मैदान से हट सकते हैं।वैसे भी संगमा के लिए बीजेपी को जेडीयू और शिवसेना को मनाना बड़ी चुनौती होगी। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी में वह तबका हावी हो रहा है, जो चाहता है कि प्रणव के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा न किया जाए। रणनीति बनाने के लिए देर रात तक बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में माथापच्ची हुई। मंगलवार को एनडीए की बैठक में इस पर फिर विचार हो सकता है।
लेकिन दीदी ने क्या किया?। राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने के ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के ऐलान के बाद सोमवार शाम को तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस को कड़ा मेसेज देते हुए कहा कि वह यूपीए सरकार से हटने के लिए मानसिक तौर पर तैयार है, इसलिए उसे अप्रत्यक्ष तौर पर कोई धमकी नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही उसने यह भी साफ किया कि राष्ट्रपति पद के लिए कलाम ही तृणमूल कांग्रेस की इकलौती पसंद हैं। तृणमूल कलाम को चुनाव लड़ने के लिए मनाएगी। ऐसी खबरें थीं कि यूपीए सरकार में तृणमूल के सभी छह मंत्रियों ने अपने इस्तीफे ममता को सौंप दिए हैं। इनमें रेल मंत्री मुकुल रॉय का इस्तीफा भी शामिल है। ऐसी भी चर्चा थी कि पार्टी यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। लेकिन कुछ देर बाद ही कोलकाता में पार्टी की बैठक से निकले पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने इसका खंडन करते हुए कहा कि हम यूपीए सरकार को गिराने के पक्ष में नहीं हैं। केंद्र में तृणमूल के मंत्री अभी इस्तीफा देने नहीं जा रहे हैं। राष्ट्रपति चुनाव पर पार्टी सही समय पर सही फैसला करेगी। हालांकि उन्होंने कांग्रेस को संकेतों में चेतावनी देते हुए कहा कि केंद्र में वह अकेले सरकार नहीं चला रही है। उन्होंने कहा कि ममता के निर्देश पर सभी मंत्री इस्तीफा देने में एक सेकंड भी नहीं लगाएंगे। सभी इसके लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं।
इस बीच टीम अन्ना ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जिन मंत्रिपों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उनमें प्रणब मुखर्जी भी शामिल हैं। अरविंद के मुताबिक प्रणब मुखर्जी पर दो गंभीर आरोप हैं। उनका कहना है कि 2007 में प्रणब पर घाना को चावल निर्यात में घोटाले का आरोप लगा था।खुद घाना सरकार ने प्रणब के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी। इस पर संसद में हंगामा भी मचा लेकिन जांच के आश्वासन के बावजूद कोई जांच नहीं हुई। वहीं टीम अन्ना का दूसरा आरोप है कि प्रणब ने नेवी वॉर रूम लीक केस के आरोपियों का बचाव किया। केजरीवाल की मानें तो प्रणब ने तब कहा था छोटा मामला है जबकि अब इसी केस की जांच हो रही है। इसी केस में गिरफ्तारियां भी हो रही हैं। केजरीवाल ने प्रणब से पूछा है कि क्या वो अब भी यही कहेंगे कि नेवी वॉर लीक रूम केस छोटा मामला था?टीम अन्ना ने प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी का विरोध किया है। टीम अन्ना के अहम सदस्य मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने योग्य नहीं हैं। मनीष ने आरोप लगाया कि पांच साल पहले पनडुब्बी डील के दौरान जो घोटाला हुआ था उसे प्रणब मुखर्जी ने छोटा मामला बताया था।
Monday, June 18, 2012
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मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha
হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!
मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड
Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!
हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।
In conversation with Palash Biswas
Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg
Save the Universities!
RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!
जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।
#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি
अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास
ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?
Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION!
Published on Mar 19, 2013
The Himalayan Voice
Cambridge, Massachusetts
United States of America
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Download Bengali Fonts to read Bengali
Imminent Massive earthquake in the Himalayas
Palash Biswas on Citizenship Amendment Act
Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003
Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003
http://youtu.be/zGDfsLzxTXo
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THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA
THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER
http://youtu.be/NrcmNEjaN8c
The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today.
http://youtu.be/NrcmNEjaN8c
Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program
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By JIM YARDLEY
http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA
THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR
Published on 10 Apr 2013
Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya.
http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE
अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।'
http://youtu.be/j8GXlmSBbbk
THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST
We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas.
http://youtu.be/7IzWUpRECJM
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP
[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also.
He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT
THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM
Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia.
http://youtu.be/lD2_V7CB2Is
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE
अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।'
http://youtu.be/j8GXlmSBbbk


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