Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Sunday, August 14, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/14
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


आंध्रप्रदेश में उपेक्षित है शिक्षा

Posted: 13 Aug 2011 03:30 AM PDT

केंद्र सरकार के बार-बार मना करने के बावजूद पंजाब में किसानों और गरीब मजदूरों को बिजली मुफ्त दी जा रही है। इस पर कोई बहस इसलिए भी नहीं की जा सकती है क्योंकि यह पंजाब की अपनी नीति है और सरकार यह मानती है कि कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा किसानों के घाटे को कम करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है। दूसरी ओर प्रदेश में पांच सौ से अधिक ऐसे स्कूल हैं जिनके बिजली के कनेक्शन बिल का भुगतान न होने के कारण काटे जा चुके हैं। कुछ स्थानों पर तो गर्मी से बचने के लिए शिक्षकों ने अपने पास से बिजली के बिल का भुगतान किया है और बहुत से स्थानों पर पावरकाम की लाइन से अवैध रूप से बिजली लेकर स्कूलों का काम चलाया जा रहा है। जाहिर है कि शिक्षा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में शामिल नहीं है। वर्तमान में जब स्कूलों में कंप्यूटर की शिक्षा की बात हो रही है तो सरकारी स्कूलों में बिजली न होना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पठन-पाठन में तो व्यवधान उत्पन्न होता ही है साथ ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में भी हीन भावना पैदा होती है जिसका कुप्रभाव उनके व्यक्तित्व के विकास पर पड़ता है। सर्वाधिक घातक स्थिति उन स्कूलों की है जहां चोरी की बिजली उपयोग में लाई जा रही है। ऐसे स्कूलों में बच्चे क्या नैतिक शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे जहां अध्यापक और प्राध्यापक चोरी की बिजली का इस्तेमाल कर रहे हों? सर्वाधिक दुखद बात तो यह है कि जिन स्कूलों के बिजली कनेक्शन बिल के भुगतान के अभाव में काट दिए गए हैं उनमें शिक्षा मंत्री के गृह जिले के भी सौ से अधिक स्कूल शामिल हैं। स्पष्ट है कि शिक्षा मंत्री को भी इस बात का भान है कि सरकार की दृष्टि में कृषि क्षेत्र अधिक महत्वपूर्ण है और शिक्षा क्षेत्र कम। हैरानीजनक बात तो यह है कि सरकार के नीति नियंता यह मामूली बात भी नहीं समझ पाते हैं कि शिक्षा के अभाव में कृषि का विकास भी संभव नहीं है(संपादकीय,दैनिक जागरण,दिल्ली,13.8.11)।

केरलःअगड़ी जातियों को आरक्षण के फैसले की समीक्षा होगी

Posted: 13 Aug 2011 01:30 AM PDT

उच्चतम न्यायालय ने आर्थिक दृष्टि से बदहाल अगड़ी जातियों को दस फीसदी आरक्षण देने के केरल सरकार की व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है। कई संगठनों द्वारा केरल सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को शीर्ष न्यायालय इस मामले पर विचार करने के लिए राजी हुआ। हालांकि प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली बेंच के सदस्य जस्टिस एचएल दत्तू ने मामले से खुद को अलग रखने का फैसला किया। इसके बाद मामले की सुनवाई टाल दी गई। केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में केरल मुस्लिम जमात काउंसिल, क्रिश्चियन सर्विस सोसायटी और कुछ अन्य संगठनों की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी थी। यह फैसला सुनाए जाने के वक्त जस्टिस दत्तू केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे इसलिए उन्होंने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद जस्टिस सिंघवी ने मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया। इन संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस सिंघवी ने जमात से पूछा कि केरल सरकार के फैसले से उन पर कैसे प्रभाव पड़ेगा? संगठन के वकील ईएमएस अनाम ने कहा कि राज्य सरकार ने सिर्फ अगड़ी जातियों के आर्थिक रूप से पिछड़ों को इस कोटे का लाभ देने का फैसला किया है, जबकि अन्य समुदायों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अगड़ी जातियों को आरक्षण को लाभ असंवैधानिक है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 15(4) के अनुसार आरक्षण का लाभ सिर्फ सामाजिक भेदभाव के शिकार समुदायों को दिया जाता है। हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि अगर अगड़ी जातियों के गरीबों को कोटा व्यवस्था के तहत लाया भी जाता है तो यह लाभ एकसमान तौर पर सभी समुदायों के गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वालों को दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि केरल की पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने 2008 में अगड़ी जातियों के लिए इस आरक्षण को लागू किया था। आश्चर्यजनक रूप से राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता रमेश बाबू ने अगड़ी जातियों को आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले अन्य संगठनों की राय भी जानी(दैनिक जागरण,दिल्ली,13.8.11)।

हरियाणा में बनेगा आईआईटी दिल्ली का रिसर्च कैंपस

Posted: 12 Aug 2011 10:49 PM PDT

तकनीक के क्षेत्र में रिसर्च की बढ़ती मांग को देखते हुए अब आईआईटी दिल्ली ने भी इस दिशा में पग बढ़ाना शुरू कर दिया है। छात्रों के हुनर को बेहतर ढंग से तराशने और रिसर्च के लिए कैंपस शुरू करने की तैयारी में आईआईटी दिल्ली जुट गया है। हालांकि इस सपने को साकार होने में अभी तीन से चार साल का समय लगेगा, पर 100 एकड़ के बनने वाले कैंपस के लिए हरियाणा सरकार ने सहमति दे दी है।


आईआईटी दिल्ली के कार्यकारी निदेशक प्रो सुरेन्द्र प्रसाद ने बताया कि देश के अन्य आईआईटी की तरह हमारे यहां भी सालभर अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ तमाम तरह की अनुसंधानात्मक गतिविधियों संचालित होती हैं। इसी को देखते हुए वर्तमान कैंपस छोटा लगने लगा, जिसके चलते जल्द से जल्द इसका विस्तार किया जाएगा। रिसर्च को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अब एक अलग रिसर्च कैंपस शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना पर प्रारम्भिक स्तर पर काम भी शुरू हो गया है। 

अब जो 100 एकड़ का कैंपस बनेगा वह पूरी तरह से रिसर्च केंद्रित होगा। यहां एमटेक, पीएचडी व इंड्स्ट्री प्रोग्राम चलाने की कोशिश की जाएगी, ताकि रिसर्च के क्षेत्र में और दो कदम आगे बढ़कर आईआईटी दिल्ली अपनी पहचान बना सके। 

उनसे जब यह पूछा गया कि वर्तमान कैंपस क्या रिसर्च के लिहाज से उपयुक्त नहीं है तो उनका कहना था कि रिसर्च के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है जो मौजूदा कैंपस में विकसित कर पाना संभव नहीं है। जानकारी के अनुसार नए कैंपस के लिए गुडगांव सहित तीन से चार जगहों पर विचार जारी है(शैलेन्द्र सिंह,दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.8.11)।

जम्मूःक्या है पैरा मेडिकल के रिजल्ट का सच!

Posted: 12 Aug 2011 10:46 PM PDT

पैरामेडिकल इंस्टीच्यूट के रिजल्ट ने असमंजस पैदा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की निदेशक का दावा है कि अभी किसी इंस्टीच्यूट का रिजल्ट नहीं निकला। लेकिन रिजल्ट की तो नोटिफिकेशन तक जारी हो चुकी है। यहां तक कि रिजल्ट इंस्टीच्यूट को कुरियर हो चुका है। कई स्टूडेंट्स को प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी हो गए हैं।

दैनिक भास्कर के पास रिजल्ट की नोटिफिकेशन भी है। इसमें साफ है कि रिजल्ट को निकले करीबन दो हफ्ते हो गए हैं। विभाग के पूर्व निदेशक ने रिटायर होने से दो दिन पहले रिजल्ट जारी कर दिया था। खुद पूर्व निदेशक का भी कहना है कि रिजल्ट जारी हो चुका है। साथ ही उनका कहना है कि उन्होंने खुद कुरियर करवाया था।

कहीं नामोनिशान नहीं : रिजल्ट न तो विभाग की बेवसाइट पर उपलब्ध है। न तो विभाग की डिस्पैच एवं रिसीव सेक्शन में दर्ज है। लेकिन रिजल्ट का गजट नोटिफिकेशन के साथ इंस्टीच्यूट पहुंच गया है।


री-चेकिंग के लिए दरबदर : नोटिफिकेशन में साफ है कि रिजल्ट निकलने के 15 दिन के भीतर री-चेकिंग के लिए 400 रुपए के जेके बैंक के ड्राफ्ट के साथ आवेदन करें। स्टूडेंट री-चेकिंग के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन फार्म स्वीकार नहीं किए जा रहे। कहा जा रहा है कि अभी रिजल्ट ही नहीं निकला। 

कहां है नई नोटिफिकेशन : यदि पुराना रिजल्ट रोक दिया गया है या फिर इसमें संशोधन करना है तो इसकी कोई नोटिफिकेशन जारी होनी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने रिजल्ट जारी करने की नोटिफिकेशन तो जारी कर दी, लेकिन नए रिजल्ट की कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं की। 

कुछ इंस्टीच्यूट से बात करने पर इंस्टीच्यूट मालिकों का कहना है कि उनके लिए तो यही रिजल्ट वैलिड है, क्योंकि यह रिजल्ट नोटिफिकेशन के साथ आया है। अगर नया रिजल्ट आना है या पुराना कैंसिल होना है तो इसकी कोई नोटिफिकेशन जारी होनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

रिजल्ट में गोलमाल : सूत्रों के अनुसार रिजल्ट में गोलमाल किया गया है। उन स्टूडेंट्स को पास कर दिया गया जो फेल थे, जो पास थे उन्हें फेल कर दिया गया। शायद इसी कारण कई स्टूडेंट्स रि चेकिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं। विभाग ने करीब 18 कांट्रेक्चुअल पदों के लिए आवेदन मांगें हैं लेकिन आवेदन करने के लिए मार्क शीट नहीं।

क्या कहती है नोटिफिकेशन 

जम्मू संभाग में एएमटी स्कूल, एएनएमटी स्कूल और निजी पैरा मेडिकल के 35 इंस्टीच्यूट में इस वर्ष करीब 8 हजार स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी। 

जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 30 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल फैकल्टी ने रिजल्ट जारी किया है, जो 35 इंस्टीच्यूट को जारी हुआ है। नोटिफिकेशन में यह भी लिखा गया है कि नोटिफिकेशन जारी होने के 15 दिन के भीतर रि-चेकिंग करने के लिए आवेदन किया जा सकता है।

दोनों निदेशकों की अलग-अलग कहनी 

इस बारे में पूछे जाने पर पूर्व निदेशक अशोक शर्मा का कहना था कि रिजल्ट तो जारी कर दिया है। सभी इंस्टीट्यूट को कुरियर कर दिया है। पहली बार इतनी जल्दी रिजल्ट निकाला गया है। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को रिजल्ट घोषित किया गया था। 

वहीं, दूसरी तरफ वर्तमान निदेशक मधु खुल्लर ने बताया कि रिजल्ट अभी जारी होना है। अभी इस पर काम चल रहा है। कुछ कमियां रह गई हैं जिनके पूरा होते ही रिजल्ट जारी कर दिया गया जाएगा। अभी १क् दिन लग जाएंगे(अजय मीनिया,दैनिक भास्कर,जम्मू,13.8.11)।

झारखंडःडिप्लोमा में पहली पसंद मैकेनिकल

Posted: 12 Aug 2011 10:42 PM PDT

राज्य में डिप्लोमा इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ा है। इस सत्र में एडमिशन के लिए हुई काउंसलिंग में सभी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सीटें फुल हो गई हैं। डिप्लोमा इंजीनियरिंग में छात्रों ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच को पहली प्राथमिकता दी है।
इसके बाद सिविल, फिर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को प्राथमिकता को पसंद किया। गवर्मेट ब्वायज पॉलिटेक्निक में सामान्य वर्ग के लिए सीएमएल रैंक 3310 तक के छात्रों की काउंसिलिंग हुई थी, इसमें एक भी सीट खाली नहीं बची है। वहीं गवर्मेट वीमेंस पॉलिटेक्निक के लिए सीएमएल रैंक 4677 तक की काउंसिलिंग हुई थी। सामान्य वर्ग में यहां भी सभी सीटें फुल हो गई हैं।

पॉलिटेक्निक में कुल 4337 सीटें : राज्य के 13 सरकारी और 7 प्राइवेट पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कुल 4337 सीटें सभी ब्रांचों में उपलब्ध हैं। काउंसिलिंग में छात्रों ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों को पहली प्राथमिकता दी है। अधिकांश कॉलेजों में सिर्फ सैन्य कोटा की सीटें बच गई हैं।
जिन कॉलेजों में सीटें हुईं फुल
गवर्मेट पॉलिटेक्निक रांची, गवर्मेट पॉलिटेक्निक धनबाद, गवर्मेट पॉलिटेक्निक निरसा धनबाद, गवर्मेट पॉलिटेक्निक दुमका, गवर्मेट पॉलिटेक्निक आदित्यपुर जमशेदपुर, गवर्मेट पॉलिटेक्निक जैनामोड़ खुतरी बोकारो, गवर्मेट पॉलिटेक्निक कोडरमा, गवर्मेट पॉलिटेक्निक बाघा धनबाद, गवर्मेट पॉलिटेक्निक लातेहार, गवर्मेट पॉलिटेक्निक खरसावां, गवर्मेट वीमेंस पॉलिटेक्निक थड़पखना, गवर्मेट वीमेंस पॉलिटेक्निक गम्हरिया जमशेदपुर, गवर्मेट वीमेंस पॉलिटेक्निक बारीडीह बोकारो, झारखंड गवर्मेट मिनी टूल रूम रांची, झारखंड गवर्मेट मिनी टूल रूम दुमका, केके पॉलिटेक्निक देवली गोविंदपुर धनबाद।
पॉलिटेक्निक की सामान्य वर्ग की सभी सीटें फुल हो गई हैं। सैन्य कोटा की कुछ सीटें बची हुई हैं।""ओम प्रकाश कुमार, प्रशासी पदाधिकारी(दैनिक भास्कर,रांची,13.8.11)

उदयपुरःशिक्षक तलाशते रहते हैं,पर अभिभावक भी नहीं बता पाते कहां हैं बच्चे

Posted: 12 Aug 2011 10:33 PM PDT

गुजरात में बीटी कपास खेतों में काम करने जाने वाले अधिकांश बच्चे स्कूलों से ड्राप आउट हैं, लेकिन शिक्षा विभाग इससे बेखबर हैं। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षक बच्चों को गांव में तलाशते हैं, मगर उनका कोई पता नहीं मिलता। अभिभावक भी बच्चों के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाते हैं।
मजदूरी से लौटने के बाद ये बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। ऐसे हजारों बच्चों को शिक्षा की सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। भास्कर संवाददाता ने जब इस बारे में झाड़ोल, फलासिया, पानरवा, मांडवा व कोटड़ा जाकर इसकी पड़ताल से सामने आया कि हजारों बच्चे स्कूल छोड़कर गुजरात में मजदूरी करने चले गए हैं।

पढ़ने लिखने व खेलने की उम्र में मासूम बच्चों को गुजरात के बीटी कपास के खेतों में मजदूरी करनी पड़ रही है। रासायनिक व कीटनाशी दवा के छिड़काव से जहरीले बन चुके कपास के पौधे इन मासूमों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।
स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम
कोटड़ा में मेडी पंचायत की सरपंच नापी बाई ने बताया कि पहली बरसात से ही कपास की बुवाई शुरू हो जाती है। इसके तहत आदिवासी इलाकों में शाम होते ही चार पहिया वाहन मांडवा, कोटड़ा, पानरवा, झाड़ोल, फलासिया के आसपास के गांव व फलों में लग जाती है। यही वजह है कि इन दिनों में क्षेत्र में स्थित अधिकांश स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो जाती है। इसके बाद कुछ बच्चे स्कूल आते हैं और कई स्कूल छोड़ देते हैं।
हादसा होने पर दबा देते हैं मामला
सूत्रों के अनुसार गुजरात बीटी कपास के खेतों के मालिक बहुत प्रभावशाली होते हैं। इनके खेत में काम करते अगर किसी बच्चे की मौत हो जाती है तो उसे चंद रुपए देकर दबा दिया जाता है(नरेंद्र पूर्बिया,दैनिक भास्कर,उदयपुर,13.8.11)।

यूपी बोर्ड के अफसर सुधारेंगे शिक्षा का स्तर

Posted: 12 Aug 2011 10:32 PM PDT

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में मंत्री के बाद अब अफसर गुणवत्ता के गीत गाएंगे। इनमें यूपी बोर्ड के अफसरों के साथ ही शिक्षा निदेशालय के अफसर भी होंगे। यह दौरा आकस्मिक होगा और कौन कहां जाएगा, इसकी रूपरेखा अभी तय नहीं की गई है। अफसरों पर स्कूलों में भ्रमण कर वहां पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। अगले हफ्ते के बाद यह दौरे शुरू हो जाएंगे। हाईस्कूल परीक्षा का रिजल्ट अपेक्षा के अनुरूप न आने के बाद से ही शिक्षा महकमे में गुणवत्ता बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। इसी का परिणाम था कि खुद शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने इसकी कमान संभाली और पिछली 12 जुलाई से 11 अगस्त के बीच उन्होंने हर मंडल पर खुद जाकर शैक्षिक उन्नयन गोष्ठियों में भाग लिया। दो दिन पहले ही राजधानी लखनऊ की गोष्ठी से उनके इस दौरे की समाप्ति हुई है। उनके बाद अफसरों को यह कड़ी आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। संभवत: यह पहला अवसर है, जबकि स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में यूपी बोर्ड और निदेशालय के अफसरों की सक्रिय भागीदारी होगी। अफसरों के दौरे राज्य सरकार के अफसरों की तर्ज पर होंगे। फर्क इतना होगा कि सरकारी अफसर विकास योजनाओं की जांच पड़ताल करते हैं, जबकि शिक्षा विभाग के अफसर स्कूलों में पढ़ाई का हाल-चाल लेंगे। उन्हें यह रिपोर्ट देनी होगी कि शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों और शैक्षिक कैलेंडर का कितना पालन हो रहा है। गत दिनों हुई मंडलीय अधिकारियों की बैठक में उन्हें इससे अवगत करा दिया गया है। शिक्षा निदेशक संजय मोहन के अनुसार अधिकारियों को इसमें इसलिए लगाया जा रहा है ताकि गुणवत्ता के लिए किए गए प्रयासों का क्रम न टूटने पाए। यह पूछे जाने पर कि क्या अफसरों को जवाबदेह भी बनाया जाएगा, उन्होंने कहा कि सबके दायित्व पहले से तय हैं। जिम्मेदार प्रधानाचार्य और शिक्षक ही रहेंगे(हरिशंकर मिश्र,दैनिक जागरण,लखनऊ,13.8.11)।

झारखंड में एक लाख पद होने के बाद भी हजारों बेरोजगार

Posted: 12 Aug 2011 10:29 PM PDT

झारखंड के विभिन्न विभागों में एक लाख से ज्यादा पद (अफसरों-कर्मियों) रिक्त हैं, वहीं दूसरी ओर सूबे में 25.28 फीसदी युवा बेरोजगार बैठे हैं। ऐसा इसलिए कि विवि और कालेज बेरोजगारों की फौज खड़ी करते गए, जबकि सरकार नौकरी देने के नाम पर इक्का-दुक्का प्रतियोगी परीक्षाएं ही आयोजित करा सकी है। दस साल में मात्र तीन सिविल सेवा परीक्षा पूरी हुई, उन पर घपले-घोटाले का ग्रहण लग गया। चौथी प्रारंभिक स्तर पर ही है। दस वर्षो में ड्रग इंस्पेक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई। दूसरी तरफ प्रतिवर्ष सैकड़ों युवा फार्मेसी स्नातक बनकर बेरोजगार होते गए। पांच हजार से अधिक बीपीएड, एमपीएड बेरोजगार बैठे हैं, क्योंकि राज्य गठन से अब तक शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं हुई। विभिन्न विभागों में एक लाख से अधिक रिक्त हैं। राज्य सरकार की इस संबंध में की गईं कोशिशें सफल नहीं हो सकी हैं। दस साल में सरकार ढंग का एक भी तकनीकी संस्थान नहीं खोल सकी। तकनीकी शिक्षा के लिए युवा दूसरे राज्यों में पलायन और वहां के छात्रों के हाथों पिटने को मजबूर हो गए। तकनीकी विश्वविद्यालय आज भी फाइलों में है। मेडिकल कालेज सपना ही रह गया। युवाओं के चहुंमुखी विकास के लिए 2007 में युवा नीति बनी, लेकिन इसे धरातल पर उतारने में सरकार सफल न हुई। अब युवा आयोग के गठन की बात कही जा रही है। कौशल विकास मिशन का गठन हुआ लेकिन इसकी प्रगति सुस्त है। युवा संसाधन केंद्र खोलने की परिकल्पना भी धरातल पर उतर नहीं पाई। प्रदेश के पांचों प्रमंडलों के मुख्यालयों में ये केंद्र खोले जाने थे, जिनमें युवाओं के मानसिक विकास की सभी सुविधाएं जैसे, पुस्तकालय, वाचनालय, करियर काउंसलर आदि की व्यवस्था की जानी थी। रांची में यूथ हास्टल स्थापित करने की योजना का भी यह हश्र हुआ(नीरज अम्बष्ठ,दैनिक जागरण,रांची,13.8.11)।

राजस्थानःबोर्ड परीक्षा के आवेदन अब ऑनलाइन जमा होंगे

Posted: 12 Aug 2011 10:27 PM PDT

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2012 की सभी परीक्षाओं के नियमित विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन पत्र ऑनलाइन भरवाने का फैसला किया है। बोर्ड की वेबसाइट के माध्यम से परीक्षार्थियों के परीक्षा आवेदन पत्र भरवाने की व्यवस्था की गई है।
विद्यालय बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन परीक्षा आवेदन के लिंक लॉग इन कर आवेदन पत्र भर सकेंगे। बोर्ड द्वारा सभी विद्यालयों को लॉग इन आईडी तथा पासवर्ड दिया जा रहा है। विद्यालय प्रथम बार लॉग इन करने के पश्चात अपना पासवर्ड बदल सकेंगे।
बोर्ड सचिव मिरजूराम शर्मा ने बताया कि सभी विद्यालयों को एक रिक्त परीक्षा आवेदन पत्र का नमूना भेजा जा रहा है। यह नमूना बोर्ड की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। जहां से डाउनलोड किया जा सकता है।

आवेदन की फोटो प्रतियां करवा कर विद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी से आवेदन भरवाएंगे। जिन विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है उन विद्यालयों को समीप के किसी ई मित्र, कियोस्क अथवा कंप्यूटर सेंटर के माध्यम से ऑन लाइन परीक्षा आवेदन भरवाने होंगे। विद्यालयों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क पंजाब नेशनल बैंक अथवा आईसीआईसीआई बैंक की राजस्थान स्थित किसी भी शाखा में जमा करा सकते हैं। परीक्षा शुल्क ऑन लाइन परीक्षा आवेदन पत्र भरने के पश्चात कम्प्यूटर द्वारा मुद्रित चालान के माध्यम से करवाना होगा।
विद्यालय प्रधानों से कहा गया है कि वे परीक्षा आवेदन पत्रों की सभी प्रविष्टियों का सत्यापन विद्यालय के रिकार्ड से अवश्य कर लें। ऑनलाइन आवेदन संबंधी निर्देश बोर्ड की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
आवेदन पत्र भरने की तिथि जल्द घोषित की जाएगी। बोर्ड द्वारा इस वर्ष सभी विद्यालयों को जारी स्थाई कोड परिवर्तित किए गए हैं। अब सभी विद्यालयों के स्थाई कोड सात अंकों में होंगे। विद्यालय का लॉग इन आईडी ही अब विद्यालय का स्थाई कोड होगी(दैनिक भास्कर,अजमेर,13.8.11)।

हिमाचलःहर सेमेस्टर में 90 दिन की पढ़ाई जरूरी

Posted: 12 Aug 2011 10:25 PM PDT

प्रदेश की सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को डिप्लोमा या डिग्री कोर्स के हर सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन की पढ़ाई करना अनिवार्य किया गया है। इसी तरह यूजीसी के उन सभी मानकों पर अमल करना अनिवार्य है, जिसे डिप्लोमा या डिग्री कोर्स चलाने के लिए अपनाना जरूरी है। इस तरह के आदेश सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को जारी किए गए हैं।

प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सफल संचालन को लेकर प्रधान सचिव शिक्षा डॉ. श्रीकांत बाल्दी की सभी यूनिवर्सिटी के वीसी के साथ बैठक हुई, जिसमें सभी पहलुओं पर चर्चा हुई। एनुवल अकाउंट की जानकारी 31 दिसंबर तक सरकार को देनी जरूरी है। सेक्शन-38 के तहत एनुवल रिपोर्ट को तैयार करना होगा। यदि एनुवल अकाउंट में किसी तरह की गड़बड़ी होगी, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


प्रदेश में कितनी यूनिवर्सिटी : प्रदेश में इस समय 11 प्राइवेट यूनिवर्सिटी अब तक स्थापित की गई है। इसके अलावा आठ यूनिवर्सिटी को खोला जाना विचाराधीन है। जो 11 यूनिवर्सिटी अब तक खोली जा चुकी है, इसमें चितकारा यूनिवर्सिटी, इंटरनल यूनिवर्सिटी बड़ूसाहिब, मानव भारती यूनिवर्सिटी, अरनी यूनिवर्सिटी, इंडस यूनिवर्सिटी, बद्दी यूनिवर्सिटी ऑफ इमर्जिग साइंसिज एंड टेक्नोलॉजी मलकूमाजरा, शूलिनी यूनिवर्सिटी, महर्षि मरकडेश्वर यूनिवर्सिटी सोलन, बहारा यूनिवर्सिटी, श्री साई यूनिवर्सिटी और द इक्फाई यूनिवर्सिटी कालूझंडा शामिल है। 

प्रधान सचिव का कहना था कि जो भी यूनिवर्सिटी नियमों की अवहेलना करती पाई गई, उसकी मान्यता खतरे में पड़ सकती है। सरकार ने पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए खास निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए यूजीसी की तरफ से 2009 में जारी निर्देशों पर सख्ती से अमल करना होगा(दैनिक भास्कर,शिमला,13.8.11)।

मध्यप्रदेशःपादरियों व मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल को सीखनी होगी हिंदी

Posted: 12 Aug 2011 10:24 PM PDT

आर्क बिशप से लेकर पादरी और मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल तक अब हिंदी की क्लास अटेंड करेंगे। साथ ही आंचलिक भाषा का भी ज्ञान होना अनिवार्य है। हाल में इलाहाबाद में कैथोलिक हिंदी साहित्य समिति की बैठक में ये फैसले लिए गए। जानकारी के अनुसार राज्य के तमाम चर्चो के फादर और ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के गैर हिंदी भाषी प्रिंसिपलों के लिए हिंदी का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। हिंदी सीखने के लिए दो माह की क्लास लगाई जाएगी जिसमें हिंदी की व्यवहारिक शिक्षा दी जाएगी। यही नहीं दूरस्थ अंचलों में स्थित चर्चो और स्कूलों के क्रमश: फादर व प्रिंसिपलों को क्षेत्रीय भाषा का कामचलाऊ ज्ञान भी लेना होगा। राज्य में कैथोलिक चर्च के प्रवक्ता फादर आनंद मुटुंगल ने बताया कि बैठक में मध्य प्रदेश समेत अन्य हिंदी भाषी प्रदेशों के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। जिसके मुताबिक कैथोलिक चर्च की पूजा पद्धति कोभी हिंदी भाषा में तैयार किया जाएगा तथा हिंदी के बड़े लेखकों और उनके महत्वपूर्ण योगदान पर संगोष्ठी जैसे आयोजन होंगे। दरअसल मिशनरी स्कूलों में ज्यादातर प्रिंसिपल दक्षिण भारत समेत कई गैर हिंदी भाषी राज्यों के हैं। हिंदी कम जानने के कारण कई बार अभिभावकों से बातचीत नहीं हो पाती इसीलिए यह निर्णय लिया गया है। भोपाल में हिंदी सिखाने के लिए पास्टल सेंटर में क्लास भी शुरू हो गई है(दैनिक भास्कर,भोपाल,13.8.11)।

राजस्थानः पटवारी परीक्षा 25 सितंबर को

Posted: 12 Aug 2011 10:23 PM PDT

पटवारी सीधी भर्ती प्रतियोगी परीक्षा 2011 इस वर्ष 25 सितंबर को आयोजित की जाएगी। मंडल प्रशासन ने परीक्षा तिथि की सूचना सभी कलेक्टरों को भिजवा दी है। अभ्यर्थियों की संख्या के लिहाज से यह राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा साबित हो सकती है। परीक्षा के लिए जिला स्तर पर 15 जून तक आवेदन लिए गए थे।

मंडल प्रशासन ने जिलावार होने वाली इस परीक्षा के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मंडल प्रशासन ने परीक्षा तिथि तय करने से पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सितंबर में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी ली है।

आयोग द्वारा कराए जाने वाली अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं व पटवारी परीक्षा की तिथि नहीं टकराए इसका ध्यान रखते हुए 25 सितंबर की तिथि तय की गई है।

परीक्षा की तैयारियों के मद्देनजर मंडल प्रशासन द्वारा परीक्षा केंद्र बनाने के लिए जिलावार समीक्षा की जा रही है। परीक्षा में पारदर्शिता बनी रहे इसके मद्देनजर अभ्यर्थियों को रेंडम पद्धति से रोल नंबर आवंटित किए गए जाएंगे। परीक्षा आयोजन के लिए अभ्यर्थियों की संख्या के अनुरूप जिला व तहसील स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए जा रहे हैं।


मंडल प्रशासन को परीक्षा आयोजन के लिए राज्य सरकार ने आठ करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। जिला स्तर पर परीक्षा आयोजन की तैयारियां कलेक्टरों द्वारा की जाएगी, वहीं परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी राजस्व मंडल प्रशासन की रहेगी।

गौरतलब है कि राजस्व मंडल द्वारा लंबे अर्से बाद पटवारी भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। पटवारी परीक्षा के लिए करीब 9 लाख 25 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जबकि पदों की संख्या 2363 है। इतने अभ्यर्थियों की परीक्षा का आयोजन राजस्व मंडल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। भास्कर ने 10 अगस्त को सितंबर के अंतिम सप्ताह में 25 से 30 सितंबर के बीच परीक्षा तिथि तय करने बाबत समाचार प्रकाशित किया था(दैनिक भास्कर,अजमेर,13.8.11)।

डूसू चुनाव में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स को अवसर नहीं!

Posted: 12 Aug 2011 10:15 PM PDT

दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स को छात्रसंघ चुनाव लड़ पाना संभव नहीं होगा। यदि सबकुछ योजनागत ढंग से चला तो डीयू में सत्र 2011-12 में छात्रसंघ की सत्ता पर कोई भी फस्र्ट ईयर का स्टूडेंट्स काबिज नहीं हो सकेगा।

चुनाव अधिकारियों की ओर से इस बाबत एक प्रस्ताव तैयार कर कुलपति प्रो. दिनेश सिंह को भेज दिया गया है और उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही इसे अमली जामा पहनाया जाएगा।

डूसू चुनाव कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार ग्रेजुएशन में लागू हो रहे सेमेस्टर सिस्टम के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रथम वर्ष में फेल हुए सभी छात्रों को पुन: प्रथम वर्ष में दाखिले का फरमान सुनाया है। अब वे एक्स छात्र के तौर पर कॉलेज से बाहर रहकर नहीं बल्कि नए छात्र के तौर पर कक्षाओं में दाखिल होंगे।

ऐसे में चुनाव अधिकारियों की परेशानी इस बात को लेकर है कि जो छात्र बीते साल भी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं, उन्हें तो एक बार फिर से सुनहरा मौका मिल रहा है। इसी बात को आधार बनाते हुए चुनाव कार्यालय की ओर से काफी चर्चा के बाद एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें कुलपति को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए इस सत्र में प्रथम वर्ष के छात्रों को डूसू चुनाव लड़ने से रोकने की बात कही गई है। 

अब फैसला कुलपति पर निर्भर करता है। यदि वहां से भी मंजूरी की मोहर लगती है तो प्रथम वर्ष के नए छात्र डूसू तक का सफर इस साल पूरा नहीं कर पाएंगे(दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.8.11)।

हिमाचलःप्राइवेट नर्सिग संस्थानों फीस तय हुई

Posted: 12 Aug 2011 10:14 PM PDT

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश में चल रहे जनरल नर्सिग स्कूल और बीएससी नर्सिग कॉलेजों की फीस तय कर दी है। प्राइवेट जीएनएम स्कूलों में निदेशालय स्टेट कोटा सीटों के लिए एडमिशन फीस 5 हजार, आईडीएफ चार्जिज 2 हजार, ट्यूशन फीस 12 हजार, हॉस्टल चार्जिज 12 हजार, हॉस्पिटल अटैचमेंट चार्जिज 10 हजार और सिक्योरिटी फीस तीन हजार रुपए तय की गई है।

प्रबंधन कोटा सीटों के लिए एडमिशन फीस साढ़े सात हजार, आईडीएफ चार्जिज साढ़े चार हजार, ट्यूशन फीस 36 हजार, हॉस्टल चार्जिज 12 हजार, हॉस्पिटल अटैचमेंट चार्जिज 10 हजार और सिक्योरिटी फीस तीन हजार रुपए तय की है। निदेशक डॉ. जय शर्मा ने बताया कि बीएससी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट कोटा सीटों के लिए एडमिशन फीस पांच हजार, आईडीएफ चार्जिज 2 हजार, ट्यूशन फीस 31 हजार, हॉस्टल चार्जिज 12 हजार, हॉस्पिटल अटैचमेंट 10 हजार, और सिक्योरिटी तीन हजार जबकि प्रबंधन कोटा सीटों के लिए एडमिशन फीस 5 हजार रुपए, आईडीएफ चार्जिज 5 हजार रुपए, ट्यूशन फीस 1,08,000 रुपए , हॉस्टल चार्जिज 12 हजार रुपए, हॉस्पिटल अटैचमेंट 10,200 रुपए और सिक्योरिटी फीस तीन हजार रुपए तय की गई है(दैनिक भास्कर,शिमला,13.8.11)।

छत्तीसगढ़ काउंसिलिंग: मेडिकल की खाली सीटों पर फिलहाल ब्रेक

Posted: 12 Aug 2011 10:12 PM PDT

राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की खाली सीटों की काउंसिलिंग पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा संचालनालय खाली सीटों की काउंसिलिंग अब ऑल इंडिया कोटे की सीटों की काउंसिलिंग खत्म होने के बाद आयोजित करेगा।

ऑल इंडिया कोटे की सीटें 20 अगस्त तक बांटी जाएंगी, इसके बाद लगभग दो सप्ताह उम्मीदवारों को कॉलेजों में प्रवेश लेने का समय दिया जाएगा। ऐसे में छत्तीसगढ़ की काउंसिलिंग सितंबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। अखिल भारतीय कोटे की सीटों की काउंसिलिंग की वजह से ही डीएमई ने छत्तीसगढ़ की काउंसिलिंग अगस्त के पहले सप्ताह में ही आयोजित की थी।

उम्मीदवारों ने इसका विरोध भी किया था। उनका कहना था कि दोनों काउंसिलिंग का समय एक होने की वजह से वे किसी एक काउंसिलिंग में शामिल हो पाएंगे। प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 12 सीटें खाली रह गई हैं।

इसके अलावा एक शासकीय और पांच डेंटल कॉलेजों की 100 से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। इन सभी सीटों को संचालनालय की ओर से आयोजित दूसरे चरण की काउंसिलिंग में भरने की कोशिश की जाएगी।


प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटे की लगभग 45 (एमबीबीएस) सीटें हैं। ऑल इंडिया कोटे की काउंसिलिंग खत्म होने के बाद यह साफ हो जाएगा कि दूसरे राज्यों के कितने उम्मीदवारों ने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया है। कई बार अखिल भारतीय कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं, जिसे राज्य के कोटे में बदल दिया जाता है। इस साल ऐसा हुआ तो इसका सीधा फायदा राज्य के छात्रों को होगा। पिछले साल भी काउंसिलिंग के बाद राज्य को आधा दर्जन सीटों का फायदा हुआ था।

"मेडिकल की खाली सीटों के लिए काउंसिलिंग ऑल इंडिया कोटे की सीटों के आवंटन के बाद होगी। सितंबर के पहले सप्ताह में दूसरे चरण की काउंसिलिंग आयोजित की जा सकती है।"

डॉ. सुबीर मुखर्जी, 
डायरेक्टर, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय
(दैनिक भास्कर,रायपुर,13.8.11)

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करिअर

Posted: 12 Aug 2011 07:30 PM PDT

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत कृषि संबंधी क्षेत्रों जैसे मिट्टी, खाद्य पदार्थ, बीज, बायोलॉजिकल सिस्टम में तकनीक का प्रयोग करना सिखाया जाता है। इस क्षेत्र के प्रोफेशनल अपनी नॉलेज और स्किल से कृषि संबंधी समस्याओं को सुलझाते हैं। पिछले साल की तुलना में सरकार ने कृषि के लिए 300 करोड़ रुपए अधिक दिए हैं। बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का और अन्य मोटे पौष्टिक अनाजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नवीन टेक्नोलॉजी लाने की बात कही है। इस तरह नई-नई तकनीक फसलों का उत्पादन तो बढ़ाएगी ही, नौकरी के अवसर भी प्रदान करेगी।

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग का कार्य
एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग इस बात को सुनिश्चित करती है कि कृषि की परंपरागत विधियों के स्थान पर मशीनों का प्रयोग कर लाभ को कैसे बढ़ाया जाए। कृषि के क्षेत्र में आने वाले सूक्ष्म से बड़े स्तर तक के उपकरणों का विकास एवं निर्माण एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग का काम है। साथ ही कृषि भूमि उपयोग में आने वाले बीज और खादों की भी जानकारी देना इसकी विशेषता में शामिल है।
कौन-कौन से हैं कोर्स
ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों तरह के कोर्स उपलब्ध हैं:
ग्रेजुएशन कोर्स
बीटेक, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग

बीटेक कोर्स में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को साइंस सब्जेक्ट के साथ (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स)10+2 होना चाहिए। हर साल आईआईटी, राज्य सरकारें, विभिन्न यूनिवर्सिटीज एंट्रेंस टेस्ट कंडक्ट करती हैं। ग्रुप डिस्कशन के बाद उत्तीर्ण छात्रों को एडमिशन दिया जाता है। इसके अलावा इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भी एक ऑल इंडिया प्रवेश परीक्षा के माध्यम से सेंट्रल एवं स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की15 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन देता है। ये परीक्षाएं अप्रैल से जून तक आयोजित की जाती हैं।

पोस्ट ग्रेजुएशन 
एमटेक/एमएससी
पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश पाने के लिए बीटेक होना जरूरी है। इसके अलावा गेट एंट्रेंस टेस्ट के जरिए फिजिक्स, मैथ्स आदि क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएट भी एमटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) में एडमिशन मिलता है। बीटेक (एग्रो. इंजीनियरिंग) किए हुए छात्रों को एंट्रेंस टेस्ट और मेरिट, दोनों तरह से एमटेक में एडमिशन दिया जाता है।
करियर ऑप्शन्स
हाल के सालों में चारा विकास, मिट्टी की सेहत और जैविक खेती के क्षेत्र में निवेश किया जा रहा है। इसके अलावा रासायनिक उर्वरक, जमीन की गुणवत्ता को बढ़ाने, शुष्क इलाकों में पोषक अनाजों की खेती आदि चीजों को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में कृषि इंजीनियर्स की खास जरूरत होगी और आने वाले वर्षो में इस क्षेत्र में ढेर सारे रोजगार प्राप्त होंगे। वैसे इस क्षेत्र में ज्यादा जॉब प्राइवेट कंपनियां दे रही हैं। ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियां, सिंचाई के उपकरण बनाने वाली कंपनियां, बीज बनाने वाली कंपनियां, खाद बनाने वाली कंपनियां अपने यहां सेल्स, मैनेजमेंट, मार्केटिंग तथा रिसर्च के क्षेत्र में जॉब दे रही हैं। क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स के लिए प्रोडक्शन, सेल्स, मैनेजमेंट, रिसर्च जैसे क्षेत्र में जॉब के अवसर हैं। इसके अलावा कई कंपनियां प्लेसमेंट के जरिए छात्रों की नियुक्ति करती हैं। प्लेसमेंट के माध्यम से नियुक्त छात्रों को सालाना 3 लाख से ज्यादा सैलरी मिलती है।
प्रमुख संस्थान
इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार (हरियाणा)
जेबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर 
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना, पंजाब
आनंद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, आणंद, गुजरात 
इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीटय़ूट, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
विदेश में भी है खूब मांग
एक्सपर्ट व्यू/इंद्रमणि
सीनियर साइंटिस्ट, आईएआरई, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट
एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग क्या है और इसके माध्यम से किस तरह समस्याओं का समाधान संभव है?
एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है, जहां नवीनतम टेक्नोलॉजी के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी, खाद और बीजों पर तरह-तरह के रिसर्च किए जाते हैं। इसके अलावा एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में मैकनाइजेशन के तहत भूमि संरक्षण, जल व मृदा संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था तथा बायोलॉजिकल सिस्टम में तकनीक का प्रयोग भी स्टूडेंट्स को सिखाया जाता है। इस फील्ड के प्रोफेशनल एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में अपनी नॉलेज और स्किल द्वारा कृषि में क्रांति का प्रयास करते हैं।
एक क्वालिफाइड प्रोफेशनल के लिए इस फील्ड में क्या संभावनाएं हैं?
देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में, खासकर यूरोपीय देशों में एग्रीकल्चर इंजीनियर्स की खूब मांग है। अमेरिका, कनाडा जैसे विकसित देशों में बायो सिस्टम के नाम से कॉलेज हैं और भारतीय एग्रीकल्चर साइंटिस्ट वहां ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। आजकल आईआईटी खड़गपुर भी एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, डिग्री जैसे कोर्स करवा रहा है। इस फील्ड में कई आईआईएम स्टूडेंट्स भी भाग्य आजमा रहे हैं। बेहतर उत्पादकता की वजह से एग्रीकल्चर विशेषज्ञों की मांग बढ़ने लगी है।
किन-किन कंपनियों में एग्रीकल्चर इंजीनियर्स की खास डिमांड है?
वैसे तो एग्रीकल्चर के हर फील्ड में एग्रीकल्चर इंजीनियर्स की खासी मांग है, लेकिन आज राष्ट्रीय बागबानी मिशन, खाद्य सुरक्षा मिशन और नरेगा मिशन में इनकी डिमांड है।
नौकरी के और बेहतर अवसर?
आज इस क्षेत्र में प्राइवेट और सरकारी, दोनों जगह अवसर हैं। वैसे इस क्षेत्र में ज्यादा जॉब प्राइवेट कंपनियां दे रही हैं। ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियां, सिंचाई के उपकरण बनाने वाली कंपनियां, बीज बनाने वाली कंपनियां, खाद बनाने वाली कंपनियां, सेल्स, मैनेजमेंट, मार्केटिंग तथा रिसर्च के क्षेत्र में भारी मांग है।
सैलरी के बारे में बताएं?
जहां तक सैलरी का सवाल है, सरकारी कार्यालयों में एक जूनियर साइंटिस्ट की तनख्वाह 42,000 रुपए तक है, जबकि गैर सरकारी इंस्ट्रीज में पैकेज की व्यवस्था है। वहां 5 लाख तक का पैकेज कंपनियां ऑफर करती हैं(अशोक वशिष्ठ, हिंदुस्तान,दिल्ली,10.8.11)।

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के तौर पर करिअर

Posted: 12 Aug 2011 05:30 PM PDT

हवाई यात्रा करने में बेहद मजा आता है, लेकिन हमारी-आपकी इस हवाई यात्रा को सुखद और सुरक्षित बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑफिसर (एसीटीओ)। एसीटीओ का काम उड़ान भरते हुए, लैंडिंग के समय और यहां तक कि हवाई यात्रा के दौरान भी हवाई जहाज को रास्ता दिखाना है। ये ऑफिसर न सिर्फ भारत से उड़ान भरने और लैंडिंग करने वाले हवाई जहाजों की मदद करते हैं, बल्कि एक से दूसरे देश जाने के लिए भारतीय आसमान का उपयोग करने वाली दूसरी उड़ानों में भी मदद करते हैं। ये ऑफिसर एटीसी टावर की खिड़कियों और राडार के जरिये आसमानी यातायात पर नजर बनाए रखते हैं। भारत के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आधी रात के वक्त अंतरराष्ट्रीय व घरेलू उड़ानों की संख्या 200 से 300 तक पहुंच जाती है। एटीसीओ की नियुक्ति भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की ओर से की जाती है।

वेतन
एक जूनियर ऑफिसर के रूप में एक माह का वेतन 16,400 रुपये से 40,500 रुपये, साथ में कुछ अन्य भत्ते, होता है। इन भत्तों में रेटिंग भत्ता और तनाव भत्ता भी शामिल होता है, जो 6,000 रुपये से 24,000 रुपये तक हो सकता है। कार्यकारी निदेशक के रूप में एक माह का वेतन 62,000 रुपये से 80,000 रुपये तक होता है।

योग्यताएं
12वीं कक्षा में विज्ञान की पढ़ाई के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रेडियो इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रथम श्रेणी के साथ स्नातक की डिग्री या इलेक्ट्रॉनिक्स या किसी अन्य क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रेडियो, भौतिकी विषयों के साथ स्नातकोत्तर डिग्री। एटीसीओ बनने के लिए सबसे पहले एएआई की लिखित परीक्षा को पास कर, आवाज के लिए टेस्ट, साक्षात्कार और फिर मेडिकल टेस्ट को पास करना जरूरी है। इसके बाद चुने गए आवेदकों को सिविल एविएशन ट्रेनिंग कॉलेज, इलाहाबाद और हैदराबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।

संस्थान

सिविल एविएशन ट्रेनिंग कॉलेज, इलाहाबाद। सफल आवेदकों को एरिया कंट्रोल सेंटर ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद भी भेजा जाता है।

काम के घंटे
दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नियुक्त किसी भी एटीसीओ की शिफ्ट पहले दिन दोपहर 1.30 बजे से शाम के 7.30 बजे तक, दूसरे दिन सुबह 7.30 बजे से दोपहर के 1.30 बजे तक और तीसरे दिन शाम के 7.30 बजे से सुबह के 7.30 बजे तक होती है। शिफ्ट का यह चक्र हर चौथे दिन पर दोबारा शुरू किया जाता है। एक एटीसीओ की सुबह की शिफ्ट कुछ इस प्रकार से होती है:
सुबह 7.15 बजे: (दो शिफ्ट की अदला-बदली में लगभग 15 मिनट का वक्त लगता है) पहले रात में काम कर रहे कंट्रोल से संक्षेप में मुख्य जानकारी लेना, उससे काम और चेनल का जिम्मा लेना और उन्हें उनके काम से मुक्त करना।
सुबह 7.30 बजे: यातायात की स्थिति को समझना। स्थिति को देखते हुए उड़ान भरने या उसे रोकने और यातायात को साफ करने की सूचनाएं देना। हवाई जहाजों को उनकी स्थिति को समझने में मदद करना।
सुबह 8.45 बजे: अपने सहकर्मी को संक्षेप में स्थिति से अवगत कराना।
सुबह 9 बजे: रेस्टरूम या प्रशिक्षण सत्र के लिए जाना।
सुबह 10 बजे से दोपहर के 12 बजे तक: काम दोबारा शुरू करना।
दोपहर 1.15 बजे: दूसरी शिफ्ट पर आए ऑफिसर को संक्षेप में ट्रैफिक की स्थिति समझाना।
दोपहर 1.30 बजे: शिफ्ट खत्म।
कौशल
तर्कसंगत विचार करने की क्षमता
संचार बनाने का कौशल
जल्दी से जल्दी निर्णय लेने और पूरा ध्यान लगा कर काम करने की क्षमता
नफा-नुकसान
बड़े हवाई जहाजों और इंसानों की सुरक्षित उड़ान में मदद।
यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी का काम है, जिसमें सैकड़ों-हजारों लोगों की जिंदगी एक तरह से आपके हाथ में होती है। 
एटीसीओ अपने पूरे करियर में तरक्की करते हैं। वे सिर्फ कंट्रोल रूम तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बतौर प्रोफेशनल ट्रेनर्स, किसी घटना के जांचकर्ता और सुरक्षा एक्सपर्ट के रूप में भी आगे बढ़ सकते हैं
डीके बेहेरा, महासचिव, एटीसी गिल्ड, इंडिया(रुचि गुप्ता,हिंदुस्तान,दिल्ली,9.8.11)
You are subscribed to email updates from भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To stop receiving these emails, you may unsubscribe now.
Email delivery powered by Google
Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610



--
Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

No comments:

मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

Tweet Please

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA

THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER

http://youtu.be/NrcmNEjaN8c The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today. http://youtu.be/NrcmNEjaN8c Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program ______________________________________________________ By JIM YARDLEY http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR

Published on 10 Apr 2013 Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya. http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP

[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also. He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM

Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia. http://youtu.be/lD2_V7CB2Is

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk