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Wednesday, August 10, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/10
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


एथिकल हैकिंग में करिअर

Posted: 09 Aug 2011 11:15 AM PDT

प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स अपनी जानकारी, ज्ञान और समझ के आधार पर न सिर्फ कंपनी की कॉन्फिडें शल डिटेल्स को सुरक्षित रखते हैं बल्कि हैकिंग किस लोकेशन से हुई है, उसे भी ट्रेस करने में सक्षम होते हैं

भारत में ऑफलाइन और ऑनलाइन एथिकल हैकिंग कोर्सेज की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। आज लगभग सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर कंपनियां इनफॉम्रेशन टेक्नोलॉजी की फील्ड में अपने वेब प्रॉपर्टीज को क्रिमिनल हैकिंग से सुरक्षित रखने की तीव्र जरूरत महसूस करते हैं। इसके लिए उन्हें प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। ये प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स अपनी जानकारी, ज्ञान और समझ के आधार पर न सिर्फ कंपनी की कॉन्फिडेंशल डिटेल्स को सुरक्षित रखते हैं बल्कि हैकिंग किस लोकेशन से हुई है उसे भी ट्रेस करने में सक्षम होते हैं। यह काफी जिम्मेदारियों भरा और फायदेमंद कार्य है। यदि आप आईटी क्षेत्र में एक्साइटिंग करियर बनाना चाह रहे हैं तो एथिकल हैकिंग में ट्रेनिंग प्रोग्राम काफी मददगार साबित हो सकती है।


एथिकल हैकिंग कोर्सेज- भारत में कई प्रकार के एथिकल हैकिंग ट्रेनिंग कोर्सेज ऑफर कराए जाते हैं, जिसमें शामिल है प्रैक्टिकल सेक्योरिटी ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग, कम्प्लाइयंस ट्रेनिंग, ऑनलाइन प्रोफेशनल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, आईटी ऑडिट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ट्रेनिंग आदि। इसके अलावा कुछ पॉपुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स जैसे वेब डिफेंसेज, लाइसेंस्ड पेनेट्रेशन टेस्टर, साइबर फॉरेंसिक और सर्टिफाइड एथिकल हैकर आदि भी इस फील्ड में उचित जानकारी के लिए आवश्यक व महत्वपूर्ण कोर्सेज हैं। साथ ही एथिकल हैकिंग से संबंधित अन्य कोर्सेज इस प्रकार हैं- इन्ट्रूजन प्रिवेंशन, एडवांस्ड कंप्यूटर फॉरेंसिक्स, रिवर्स इंजीनियरिंग ट्रेनिंग, डाटा रिकवरी ट्रेनिंग, जावा और जेईई के लिए सिक्योर कोडिंग, डाटाबेस सिक्योरिटी- एमएस, एसक्यूएल सर्वर और ओरैकल सर्वर, सर्टिफाइड इंफॉम्रेशन सिक्योरिटी कंसल्टेंट (सीआईएससी), हैकर ट्रेनिंग ऑनलाइन, एक्सपर्ट पेनेट्रेशन टेस्टिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम सिक्योरिटी-विंडो और यूनिक्स, सर्टिफाइड सिक्योर नेट डेवलपर(सीएसडीडी), वायरलेस सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए सिक्योरिटी अवेयरनेस आदि।

योग्यता- एथिकल हैकिंग में, जो कैंडिडेट सर्टिफाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स करना चाहते हैं उन्हें ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे विंडो 2000 और लिनक्स की जानकारी के साथ अनुभव भी जरूरी है।टीसीपी/आईपी में भी विशेषज्ञता दूसरी जरूरत है।

जॉब प्रॉस्पेक्टस- साइबरस्पेस में आपराधिक हैकिंग को रोकने और उसकी गोपनीयता और सुरक्षा के प्रति बढ़ती चिंता भारत में नैतिक हैकर्स(एथिकल हैकर्स) के करियर को काफी बढ़ावा दिया है। आज लगभग सभी छोटे से बड़े पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के पास एथिकल हैकिंग सेल या इस तरह की सर्विसेज उपलब्ध हैं ताकि क्लाइंट, कस्टमर, क्रेडिट कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। ऐसे में इस क्षेत्र में विशेषता हासिल छात्रों की मांग हमेशा रहती है। अनुभवी व्यक्तियों के लिए इस कार्यक्षेत्र में वेतन सालाना रूप से लाखों में होती है।

संस्थान- इंटरनेट सुरक्षा और वेब विकास व्यापार(वेब डेवलपमेंट बिजनेस) के लिए लगातार बढ़ती मांग के कारण ही भारत में भी नैतिक पाठय़क्रमों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। आज भारी संख्या में कई संस्थान सर्टिफिकेट प्रोग्राम्स ऑफर करने लगे हैं ताकि इस कार्यक्षेत्र में विशेषज्ञ प्रोफेशनल को सूझ-बूझ के साथ कार्य करने के समर्थ बनाया जा सके। कुछ संस्थान इस प्रकार हैं- जोडो इंस्टीटय़ूट, नोएडा एप्पिन नॉलेज सॉल्यूशन, बैंगलुरू साईकॉप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद फ्यूचरप्वाइंट टेक्नोलॉजी, हैदराबाद लाइफ ए5 एकेडमी, आगरा टेकडिफेंस प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद एडेप्ट टेक्नोलॉजी, चेन्नई एसआईएस ट्रेनिंग सेल, नोएडा नेटवर्क इंटेलिजेंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई इनोबज नॉलेज सॉल्यूशन्स, दिल्ली
(अंशुमाला,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)

नौकरी और संबंध

Posted: 09 Aug 2011 10:30 AM PDT

जॉब मिलने के बाद अक्सर व्यक्ति अपनी नौकरी पर ही ज्यादा ध्यान देने लगता है। जिसकी वजह से वह तमाम जानने वालों से दूर हटने लगता है। लेकिन तमाम व्यस्तताओं के बावजूद भी अगर आप थोड़ा-सा वक्त अपने जानने वालों साथ बिताएं तो यह आपके रिलेशन को लंबे समय तक मजबूती देता है। फेसबुक, ई-मे ल या फिर एसएमएस के जरिए टच में रहना कोई काम की चीज नहीं। बल्कि लाइफ में आगे बढ़ने के लिए रिलेशन को समझें और सिर्फ टच में रहने की बात को छोड़कर रिलेशनशिप में प्रगाढ़ता बढ़ाएं।

पब्लिक रिलेशन्स- अच्छी जॉब पर बने रहना, हर महीने अच्छी सैलरी पाना यह हर सर्विस क्लास का सपना होता है। जब व्यक्ति यह सब हासिल कर लेता है, तो वह अपने आपको सिक्योर समझने लगता है फिर वह रिसेशन या नौकरी से हटाए जाने की बात मन में नहीं लाता। लेकिन यही मौका होता है, अपने आप को साबित करने का। अपने आपको न केवल वहां बनाए रखें बल्कि अपनी मार्केट वेल्यू बढ़ाने के लिए भी पब्लिक रिलेशन्स बढ़ाएं।

चेंज योर पर्सनालिटी- हो सकता है कि कभी आपको जॉब छोड़ना पड़े, तब आप इन्हीं रिलेशन के सहारे दूसरा जॉब पा सकते हैं। यही कारण है जब तक आप नौकरी में हैं, तब तक अपने नेचर में घमंड ना आने दें। हमेशा सामान्य व्यवहार बनाए रखें।

नो सेल्फिश- रिलेशन को बढ़ाने में कभी सेल्फिश ना बने। सेल्फिश लोगों को दुनिया बहुत जल्दी पहचान लेती है। आपको अपनी ओर से जितना हो सके अपने अच्छे दिनों में लोगों की मदद करें। प्रोफेशनली तौर पर हेल्प जरूर करें। आप देखिए, जब आप जॉब पाना चाहते हैं या फिर जॉब बदलना चाहते है, तब यही संबंध आप से दोस्त की तरह पेश आएंगे और जरूर सहायता करेंगे।


कॉन्टेक्ट- कॉन्टेक्ट में रहने का मतलब आप अपने जानने वाले के साथ बाते करें। उससे इंडस्ट्री में क्या हो रहा है, इस बारे में जरूर खबर रखें, और इस बारे में बातें करे। अपनी बातों के अलावा संपकरे में रहने वाले व्यक्ति के बारे में भी सारी इंफॉम्रेशन लें और उसकी बातें भी सुनें। केवल नेटवर्किंग साइट से अपडेट रहने से कुछ नहीं होता। संबंधों को बढ़ाने के लिए आप रोजाना मिलने वाले लोगों के साथ भी संबंध बनाकर एक नया रिलेशन डेवलप कर सकते हैं।

रिफ्रेश योर रिलेशनशिप- सिर्फ टच में रहने से रिलेशन मजबूत नहीं बनते, इसमें आत्मीयता नहीं रहती। प्रोफेशनल और पर्सनल रिश्तों में काफी फर्क होता है। जब इंसान दोनों रिश्तों को एक ही तराजू में तौलते हैं तो दिक्कत आती है। अकसर प्रोफेशनल रिलेशन की तरह ही हम अपने रिलेटिव्स के साथ भी व्यवहार करने लगते हैं, तब इनमें निहित गर्माहट कहीं खो जाती है। किसी भी रिलेशनशिप में आप जब तक अपने प्रोफेशनल लेवल से थोड़ा ऊपर नहीं उठते तब तक उसमें आत्मीयता नहीं आ पाती और जहां आत्मीयता नहीं है, ऐसे रिलेशन ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाते।
(अनिता घोष,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)

इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ मैनिटोबा में आवेदन

Posted: 09 Aug 2011 09:30 AM PDT


यदि आपका सपना है किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ने का तो इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ मैनिटोबा (आईसीएम), कनाडा सितम्बर सेशन के लिए भारतीय छात्रों को आवेदन आमंत्रित करता है। यदि आपने आईसीएम में अपना प्रथम वर्ष के बैचलर डिग्री की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली तो मैनिटोबा यूनिवर्सिटी के दूसरे वर्ष में जाने के लिए योग्य हो जाएंगे। जो छात्र इंजीनियरिंग/बिजनेस/आर्ट्स/साइंस में मैनिटोबा यूनिर्वसटिी में बैचलर डिग्री हासिल करना चाहते हैं वे अपनी इस इच्छा को आईसीएम के जरिए पूरी कर सकते हैं। मैनिटोबा अंतरराष्ट्रीय कॉलेज साल में तीन सेमेस्टर में दाखिले की सुविधा प्रदान करता है जैसे जनवरी, मई और सितम्बर। सितम्बर महीने में शुरू होने वाली पढ़ाई के लिए आप आवेदन कर सकते हैं। इस प्रोग्राम के लिए आपको ऑल इंडिया सेकेंडरी स्कूल र्सटिफिकेट या उसके समकक्ष 55 प्रतिशत अंक और आईईएलटीएस में कम से कम 6.0 स्कोर या अधिक होना चाहिए। इंजीनियरिंग के लिए 10 अ2 मैथमेटिक्स, केमेस्ट्री, फिजिक्स में औसत 70 प्रतिशत, जिसमें सभी विषयों में 60 प्रतिशत से कम मार्क्‍स नहीं होने चाहिए। मैनिटोबा यूनिर्वसटिी वेस्टर्न कनाडा की सबसे पुरानी यूनिर्वसटिी है, जो कई तरह के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स ऑफर करती है। मैनिटोबा कनाडा में सबसे कम कॉस्ट में स्टडी ऑफर करता है, जिस वजह से यह इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए अफोर्डेबलहै। साथ ही यहां स्टूडेंट्स जिस फील्ड में पढ़ाई कर रहे हैं, उसमें को-ऑप प्रोग्राम्स ज्वाइन करने का भी फायदा उठा सकते हैं, जहां आप प्रैक्टिकल वर्कप्लेस एक्सपीरियंस भी प्राप्त कर सकते हैं। यानी कि पढ़ाई के साथ कमाई भी। पता- नविटैस इंडिया, सी/ओ ईपीआर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, ए-285, यूनिट नं. 202, सेकेंड फ्लोर, डिफेंस कॉलोनी मेन रोड, नई दिल्ली- 110024, भारत

फोन- 011-41551780(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)

क्लाइमेटोलॉजी में करिअर

Posted: 09 Aug 2011 08:30 AM PDT

क्लाइमेटोलॉजी में ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश रहती है जिनमें लॉन्ग टर्म क्लाइमेट ट्रेंड के अध्ययन की काबिलियत हो। किसी खास मौसम के पूर्वानुमान के बारे में जानकारी विशेष कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से क्लाइमेटोलॉजि स्ट ही देता है। इनका मौसम संबंधी अनेक सूचनाओं में दखल होता है।

समय से आगे के जलवायु के अध्ययन को क्लाइमेटोलॉजी कहते हैं। यह अत्यंत विशेषीकृत क्षेत्र है जो ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश करता है जिनमें लॉन्ग टर्म क्लाइमेट ट्रेंड के अध्ययन की काबिलियत हो। किसी खास मौसम के पूर्वानुमान के बारे में जानकारी विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से क्लाइमेटोलॉजिस्ट ही देता है। इनका मौसम संबंधी विभिन्न सूचनाओं की व्यापक चेन में दखल होता है जिसके जरिये क्लाइमेट मॉडल का निर्माण होता है। इन्हीं मॉडल्स के जरिये उन ऐतिहासिक घटनाओं को समझने का रास्ता मिलता है, जिन्होंने हमारी पृथ्वी के वातावरण को आकार दिया। भविष्य की घटनाओं के बारे में पूर्वानुमान लगाने का आधार भूतकाल की सूचनाएं होती हैं। क्लाइमेटोलॉजिस्ट द्वारा किया गया अध्ययन बिल्डिंग डिजाइनिंग, हीटिंग एंड कूलिंग सिस्टम का प्लान बनाने आदि में काफी उपयोगी होता है। साथ ही, भूमि के प्रभावशाली उपयोग की विधि और फसल के उत्पादन में भी इनका सुझाव कारगर साबित होता है।


कार्य : इस क्षेत्र में तापमान, धूप, बरसात और हवा का अध्ययन शामिल होता है। साथ ही, ये किसी खास सीजन के मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए समय के कई कालखंड जैसे महीना, साल या दशकों के क्लाइमेट पैटर्न का भी अध्ययन करते हैं। अकसर क्लाइमेटोलॉजी को मेटीरोलॉजी से जोड़ा जाता है जबकि दोनों में अंतर है। मेटीरोलॉजी में शॉर्ट टर्म वेदर पैटर्न का अध्ययन कर उसी के आधार पर पूर्वानुमान लगाया जाता है जबकि क्लाइमेटोलॉजिस्ट्स लॉन्ग टर्म क्लाइमेट ट्रेंड का अध्ययन कर लॉन्ग टर्म परिवर्तन और उन परिवर्तनों का दुनिया पर पड़ने वाले प्रभावों का पूर्वानुमान लगाते हैं। हम जिस वातावरण में रहते हैं, उसे कई चीजें प्रभावित करती हैं और क्लाइमेटोलॉजिस्ट के रूप में आप क्लाइमेट के खास क्षेत्र का अध्ययन करते हैं और उसके बाद भविष्यवाणी करने की कोशिश करते हैं कि इस खास क्षेत्र में लॉन्ग टर्म में क्या होने वाला है। फूड प्रोडक्शन से लेकर लुप्तप्राय पशु-पक्षियों की सुरक्षा यहां तक कि स्वास्थ्य, जीवन की आवश्यकता या जीवन की दौड़ सबकुछ वातावरण पर निर्भर करता है। हालांकि यह क्षेत्र ऐसे ट्रेंड प्रोफेशनल्स की मांग करता है, जिनमें लॉन्ग टर्म क्लाइमेट ट्रेंड के अध्ययन की योग्यता और वातावरणीय परिवर्तनों की भविष्यवाणी के साथ ही उनका पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अनुमान लगाने की योग्यता हो। अगर आपमें ये खूबियां हैं तो यह प्रोफेशन आपके लिए बिल्कुल सही है।

योग्यता : क्लाइमेटोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको हाई स्कूल से ही साइंस और मैथ्स जैसे विषयों में मेहनत शुरू कर देनी होगी। साथ ही, खुद को भिन्न-भिन्न क्लासेस जिनमें फिजिक्स, मेटीरोलॉजी, बायोलॉजी, जूलॉजी, बॉटनी, एंटोमोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, ओश्नोग्राफी और एस्ट्रोनॉमी आदि भी ज्वाइन करनी पड़ेंगी। साइंस स्ट्रीम में बारहवीं के बाद क्लाइमेटोलॉजी या इससे संबंधित क्षेत्र की बैचलर्स डिग्री आवश्यक है। हालांकि मास्टर्स या डॉक्टोरेट डिग्री इस फील्ड की जटिलता को समझने में सहायता करती है, जिससे यह जॉब और प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है। इस कोर्स के पाठय़क्रम में ओश्नोग्राफी, क्लाइमेटोलॉजी, एस्ट्रोनॉमी, मेटीरोलॉजी, मैथमेटिक्स, एटमॉस्फेरिक साइंस और फिजिक्स जैसे विषय शामिल होते हैं। इस क्षेत्र की पढ़ाई के साथ-साथ, अगर इंटर्नशिप भी कर लिया जाए तो बहुमूल्य प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस का लाभ मिलता है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें लगातार अध्ययन चलता रहता है। क्लाइमेटोलॉजिस्ट चाहें तो नियमित रूप से अपने स्किल्स को अपग्रेड कर सकता है।

कौशल : क्लाइमेटोलॉजिस्ट बनने के लिए आपके अंदर क्लाइमेटोलॉजी के प्रति गहरी दिलचस्पी आवश्यक है। इसके साथ ही आपमें विवेचनात्मक समझ, विस्तृत जानकारी की इच्छा और धुन के साथ ही धैर्य का होना जरूरी है। अपने शोध और खोजों को ज्यादा लोगों के सामने प्रस्तुत करने की योग्यता के साथ इंटर-पर्सनल और कम्युनिकेशन स्किल हो ना जरूरी है। व्यक्तिगत के अलावा आपके अंदर टीम के साथ काम करने का गुण होना अनिवार्य है।

अवसर : क्लाइमेटोलॉजिस्ट की सेवाओं की तलाश प्रोफेशनल सर्विस ऑर्गनाइजेशंस, गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन, प्रोफेशनल लैबोरेटरीज और नॉन-प्रॉफिट एजेंसीज को रहती है। यह प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है, इसलिए यहां उन्हें ज्यादा बेहतर मौका मिलता है, जिनके पास एडवांस ट्रेनिंग और लंबा अनुभव है। क्लाइमेट पैटर्न, कभी भी बदल जाने वाले मौसम और वातावरण पर शोध के बढ़ते स्वरूप के कारण क्लाइमेटोलॉजिस्ट के अवसर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। क्लाइमेटोलॉजी के प्रोफेशनल्स की संख्या थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि इन प्रोफेशनल्स को सैलरी भी अच्छी मिलती देखी गयी है। भारत के परिप्रेक्ष्य में क्लाइमेटोलॉजी को एटमॉस्फेरिक साइंस का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसके अन्तर्गत पृ थ्वी के गैसीय आउटर रिजन का अध्ययन किया जाता है। कुछ दूसरे महत्वपूर्ण विषय जो एडमॉस्फेरिक साइंस में आते हैं वे हैं- मिटीरोलॉजी, एयरोनॉमी और एग्रीकल्चर मिटीरोलोजी आदि(राष्ट्रीय सहारा,9.8.11)।

जेंडर स्टडीज

Posted: 09 Aug 2011 07:30 AM PDT

यह कोर्स देश में समुचित और सतत विकास को सुनिश्चित कराने में मदद करता है। जेंडर भेदभाव खत्म करने, औरतों के श्रम का सही इस्तेमाल कैसे हो, इसमें सरकार को मदद देता है। जेंडर के स्तर पर आर्थिक गैरबराबरी को खत्म करता है।

महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक उत्थान को आज देश के समग्र विकास से जोड़ा जा रहा है। इस विकास को अमलीजामा पहनाने में जेंडर स्टडीज की भूमिका अहम है। यह सरकारी योजनाओं की एक जरूरत सी बन गयी है।साथ ही, उन छात्रों के लिए भी जो इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। इसलिए विविद्यालयों में जें डर स्टडीज के लिए आए दिन अलग-अलग विभाग खुल रहे हैं और उनमें तरह-तरह के कोर्स भी कराए जा रहे हैं। इस कोर्स को करने वालों को आज स्वयंसेवी संगठन और सरकारी संस्थान करियर के नये अवसर प्रदान कर रहे हैं, कहीं शोध के बहाने तो कहीं फील्ड वर्क के रूप में।


कोर्स क्या : जेंडर स्टडीज पर आधारित कोर्स मुख्यत: तीन तरह के हैं। पहला सर्टिफिकेट कोर्स है। इसमें आमतौर पर जेंडर और इसके तहत महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास के अध्ययन की रूपरेखा बताई जाती है। समाज का ढांचा क्या है, वह पितृसत्तात्मक है या मातृसत्तात्मक। उसमें महिलाओं की स्थिति क्या रही है? इन सब बातों से रू-ब-रू कराया जाता है। समाज में महिलाओं के लिए क्या-क्या कानून बने हैं, उनके अधिकार क्या हैं, इन सब बातों की जानकारी दी जाती है। दूसरा डिप्लोमा कोर्स है जिसमें इन सब बातों को विस्तार दिया जाता है और डिग्री-डिग्री के स्तर पर इसे और भी गहन बनाया जाता है। एमए यानी पोस्ट ग्रेजुएशन में जेंडर स्टडीज के तहत औरतों को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए, देश या किसी समुदाय में गरीबी रेखा से नीचे कितनी औरतें रह रही हैं, उनका विकास कैसे हो- इन सब बातों पर जोर दिया जाता है। औरतें उद्यमी कैसे बनें। सरकारी नीति के स्तर पर इसे कैसे प्रभावी बनाया जाए, इसकी रूपरेखा से अवगत कराया जाता है। इस क्षेत्र में विभिन्न विविद्यालयों में एमफिल और पीएचडी भी अब खूब हो रहे हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : इग्नू में स्कूल ऑफ जेंडर एंड डेवलपमेंट स्टडीज की निदेशक सविता सिंह के मुताबिक, आज सरकारी स्तर पर जेंडर बजटिंग, कॉरपोरेट हाउस में जेंडर सेंसेटाइजेशन के प्रोग्राम चलते हैं। इन सब प्रोग्राम को अमलीजामा पहनाने के लिए जरूरी है कि कोई न कोई जेंडर स्टडीज का एक्सपर्ट काम करे। कॉरपोरेट हाउस की तरह मेडिकल साइंस में भी देखा जाता है कि ऐसी कौन-सी दवाएं प्रयोग में लाएं या तैयार करें, जो महिला और पुरुष में समान रूप से प्रयोग लायक हों। मेडिकल के अलावा, अन्य विभागों या क्षेत्रों में भी पॉलिसी तैयार करते वक्त जेंडर स्टडीज की जरूरत पड़ रही है। इसलिए एक यूनिवर्सल कोर्स बनाया गया है। एमए स्तर के दो वर्षीय कोर्स में इन सब पहलुओं से ही छात्रों को रू-ब- रू कराया जाता है। एमए के बाद इस विषय में अब विविद्यालयों में एमफिल और पीएचडी भी कराई जा रही है। यह कोर्स देश में समुचित और सतत विकास को सुनिश्चित कराने में मदद करता है। जेंडर भेदभाव खत्म करने, औरतों के श्रम का सही इस्तेमाल कैसे हो, इसमें सरकार को मदद देता है। जेंडर के स्तर पर आर्थिक गैरबराबरी को खत्म करता है।

दाखिले की प्रक्रिया : विविद्यालय स्तर पर सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स में दाखिला आमतौर पर स्नातक के बाद दिया जाता है। कहीं साक्षात्कार की प्रक्रिया से, तो कहीं अंकों के आधार पर। दिल्ली विविद्यालय में वूमेंस स्टडीज एंड डेवलपमेंट सेंटर के तहत जेंडर एंड सोसाइटी नाम से चलने वाले सर्टिफिकेट कोर्स में स्नातक पास छात्रों को साक्षात्कार के जरिए दाखिला दिया जाता है। एमए स्तर पर दाखिला कहीं सीधे तो कहीं लिखित परीक्षा से है।

रोजगार और कार्य क्षेत्र

इस कोर्स को करने के बाद आज बड़ा अवसर विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों में है। महिला सशक्तिकरण और उसकी योजनाओं से जुड़े एनजीओ के पास इस कोर्स के छात्रों की मांग अब खूब आ रही है। दूसरा सरकारी स्तर पर विभिन्न संस्थानों में प्रोजेक्ट के तहत जेंडर स्टडीज के विशेषज्ञों की जरूरत पड़ रही है। दिल्ली सरकार ने भागीदारी स्कीम शुरू की है। इसमें महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं में जेंडर स्टडीज के विशेषज्ञों को काम करने का मौका मिलता है। इस कोर्स को करने के बाद रिसर्च संस्थाओं में भी काम मिलते देखा गया है। विभिन्न विविद्यालय इससे जुड़े अलग से विभाग खोल रहे हैं। इनमें प्राध्यापन औ र प्रोजेक्ट से जुड़े काम में जेंडर स्टडीज के छात्रों को मौका दिया जा रहा है। दिल्ली विविद्यालय में 'जेंडर एंड सोसाइटी' नाम से सर्टिफिकेट कोर्स कराया जा रहा है। इग्नू में एमए इन वूमेंस एंड जेंडर स्टडीज का कोर्स चलाया जा रहा है। इसे कैंपस मोड में शुरू किया गया है। इसके अलावा, वहां एमए स्तर पर जेंडर एंड डेवलपमेंट स्टडीज का कोर्स भी है। सर्टिफिकेट स्तर पर वहां जेंडर ट्रेनिंग और जेंडर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का कोर्स कराया जा रहा है। यहां जेंडर एंड डेवलपमेंट स्टडीज और वूमेंस स्टडीज में डिप्लोमा कोर्स भी चल रहा है। महात्मा गांधी हिन्दी अंतरराष्ट्रीय विविद्यालय भी महिला अध्ययन में एमए का कोर्स करा रहा है। इसके अलावा, दे श के अन्य दूसरे विविद्यालयों में भी इससे जुड़े कोर्स चलाए जा रहे हैं।

-दिल्ली विविद्यालय 
-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विविद्यालय 
-महात्मा गांधी हिन्दी अंतरराष्ट्रीय विविद्यालय 
-भीमराव अंबेडकर विविद्यालय, दिल्ली
(अनुपम,राष्ट्रीय सहारा,9.8.11)

विदेश में शिक्षा पाने की मृगतृष्णा

Posted: 09 Aug 2011 06:30 AM PDT

ट्राई वैली विविद्यालय में भारतीय छात्रों के साथ हुई धोखाधड़ी के बाद एक बार फिर अमेरिका के ही वाशिंगटन में छात्रों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्दन वर्जीनिया में करीब 2400 छात्र पढ़ते हैं, इनमे से करीब 90 फीसद भारत के हैं और ज्यादातर आंध्रप्रदेश के हैं। इस विवि में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा की गई छापेमारी में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां पाईं गई हैं। यह विवि केवल 50 विदेशी छात्रों को प्रवेश देने की पात्रता रखता है लेकिन इसने हजारों छात्रों को धन कमाने के लालच में भर्ती कर लिया। हालांकि इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समेंट और एफबीआई के अधिकारी भरोसा दिला रहे हैं कि छात्र परेशान न हों क्योंकि उनके पास वैध दस्तावेज हैं और उन्हें दूसरे विवि में प्रवेश दिलाने की कोशिश की जाएगी। लेकिन अधिकारी कुछ भी कहें, फिलहाल तो छात्रों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है। वैीकरण और बाजारवाद के चलते उच्च शिक्षा के अध्ययन-अध्यापन में तेजी आई है। शिक्षा कई योरोपीय देशों की डूबती अर्थव्यवस्था संवारने का आधार भी बन रही है। इसी वजह से शिक्षा के व्यापारीकरण और बाजारीकरण को अमेरिका जैसा सख्त मिजाज देश भी प्रोत्साहित कर रहा है। नतीजतन वहां केलिफोर्निया जैसे शहर में कुछ समय पहले ट्राई-वैली नाम का विविद्यालय फर्जी पाया गया था जो वर्षो से विदेशी छात्रों को उच्च शिक्षा के बहाने रिझाकर विदेशी मुद्रा कमाने के गोरखधंधे में लगा था। शिक्षा के वैिक बाजार में आया उछाल कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को समृद्ध बना रहा है। विकासशील देशों से हर साल हजारों छात्र अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, जापान, जर्मनी और कनाडा उच्च शिक्षा हासिल करने जाते हैं। भारत और चीन के छात्र इसमें सबसे ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। इस मामले में से 81 प्रतिशत छात्रों के पंसदीदा देश अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया हैं। 2006 के आंकड़ों का आकलन करें तो ऐसे छात्रों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 18 अरब डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में करीब 8 अरब डॉलर का योगदान किया था। मंदी के दौर में लड़खड़ाती अर्थव्यवस्थाओं को स्थिरता देने में इस विपुल धनराशि का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान में करीब 24 लाख छात्र विदेशों में पढ़ रहे हैं। इनकी संख्या में और इजाफा हो, इसलिए कई नामचीन देश शिक्षा नीतियों को शिथिल करने के साथ ही शिक्षा-वीजा भी आसान बना रहे हैं। लिहाजा विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। ये सारे मामले संस्थागत दोष के हैं। ये विवि एक दशक से भी ज्यादा समय से बाकायदा विज्ञापन देकर गैरकानूनी शिक्षा-व्यापार में छात्रों को छलपूर्वक ठगने में लगे थे। लेकिन अमेरिकी प्रशासन इनको अब पकड़ने में सफल हो पा रहा है। सपने में भी यह नहीं सोचा जा सकता था कि अमेरिका जैसे देश में भी विस्तरीय फर्जी विवि अस्तित्व में हो सकते हैं जो छात्रों को बाकायदा प्रतिस्पर्धा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही दाखिला दे रहे थे। इसी बिना पर अमेरिका दूतावास ने तय अवधि के लिए शिक्षा वीजा भी दिया था। लेकिन वीजा जारी करने में अमेरिका जितनी सख्ती बरतता है, उतनी वह इन विविद्यालयों में अमेरिकी कानून व्यवस्था लागू करने के मामले में क्यों नहीं बरत रहा, यह समझ से परे है। ये विविद्यालय पिछले करीब दस सालों से पात्रता से अधिक छात्रें को प्रवेश दे रहे थे। अब तक न जाने कितने छात्र यहां से फर्जी डिग्री हासिल कर अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों में नौकरी पा चुके होंगे और इस धोखाधड़ी के खुलासे के बाद उनके भविष्य पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे होंगे। इन घटनाओं के लिए वह भारतीय मानसिकता भी दोषी है, जो हर हाल में विदेशी शिक्षा को सर्वश्रेष्ठ मानती है। इसी सोच व आकांक्षा का लाभ आज छोटे-बड़े विदेशी शिक्षा संस्थान उठा रहे हैं। विदेशों में पढ़ाई एक ऐसी होड़ बन गई है कि वहां के शिक्षा संस्थानों में प्रवेश दिलाने के दृष्टिगत भारत में कई एजेंसियां वजूद में आ गई हैं। ये एजेंसियां दिल्ली, मुबंई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूरू और हैदराबाद जैसे महानगरों में छात्रों को दाखिला दिलाने से लेकर पासपोर्ट व वीजा बनाने तक का काम ठेके पर लेती हैं। अमेरिका अथवा ऑस्ट्रेलिया में कौन सा महाविद्यालय अथवा विविद्यालय फर्जी है, इसकी जानकारी इन एजेंसियों के कर्ताधर्ताओं को भी नहीं होती। लिहाजा बिचौलिये इनकी हैसियत का बढ़ा- चढ़ाकर मूल्यांकन कर छात्रों की मंशा को सरलता से भुना लेते हैं। आस्ट्रेलिया में तो ऐसे संस्थान भी वजूद में हैं जो परदेशियों को सिलाई, कढ़ाई, बाल कटाई, रसोई जैसे कायरें में कौशल दक्षता का पाठ पढ़ा रहे हैं। मोटर मैकेनिक और कंप्यूटर के बुनियादी प्रशिक्षण जैसे मामूली पाठ्यक्रम भी यहां विदेशी पूंजी कमाने के लाभकारी माध्यम बने हुए हैं। और भी हैरानी की बात तो तब है जब आस्ट्रेलिया और अमेरिका में भारतीय छात्रों पर लगातार नस्लभेदी मानसिकता के तहत जानलेवा हमले होते रहे हैं। इसके बावजूद छात्र इन देशों में पढ़ने के लिए उतावले हैं। आस्ट्रेलिया में तो पिछले साल ही करीब एक दर्जन से ज्यादा छात्र नस्लभेदी हमलों का शिकार होकर अपनी जान गवां चुके हैं। भारतीय छात्रों के साथ कुछ हादसे अमेरिका में भी हुए हैं। दरअसल भारतीयों की श्रमसाध्य कर्तव्यनिष्ठा का लोहा हरेक देश मान रहा है। लेकिन भारतीयों की यही शालीनता और समर्पित भाव की स्थिति कुछ स्थानीय चरमपंथी समूहों के लिए नागवार हालात पैदा करती रही है। नतीजतन वे इसे स्थानीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन के रूप में देखते हैं और हिंसक बर्ताव के लिए मजबूर हो जाते हैं। बहरहाल भारतीय छात्र और उनके अभिभावकों को ही विदेशी शिक्षा के सम्मोहन से मुक्त होने की जरूरत है(प्रमोद भार्गव,राष्ट्रीय सहारा,9.8.11)।

बरकतउल्ला विश्र्वविद्यालय:अब सेमेस्टर पेटर्न में ढल जाएगा एलएलबी

Posted: 09 Aug 2011 06:05 AM PDT

बरकतउल्ला विश्र्वविद्यालय के हरेक पाठ्यक्रम सेमेस्टर में परिवर्तित हो गए हैं। लेकिन एलएलबी अभी तक पूर्ण रूप से सेमेस्टर में नहीं ढल पाया है। क्योंकि इसके अंतिम वर्ष की पूरक परीक्षाएं होना शेष हैं। एलएलबी पाठ्यक्रम एक साल पीछे चल रहा है। जहां समस्त पाठ्यक्रम के छठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं वहीं इस पाठ्यक्रम के तृतीय वर्ष की परीक्षाएं होने के बाद सेमेस्टर में नहीं ढल पाया है। इसकी वजह एलएलबी में एक साल विलंब से सेमेस्टर प्रणाली लागू होना है। बरकतउल्ला विश्र्वविद्यालय के अलावा करीब एक दर्जन कालेजों में एलएलबी पाठ्यक्रम का अध्ययन किया जा रहा है। जिसमें वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत तृतीय वर्ष की परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं। अब इसमें पूरक हासिल करने वाले छात्रों को सेमेस्टर में शामिल किया जाएगा। एक विषय में पूरक हासिल करने वाले को पूर्व छात्र में वार्षिक परीक्षाओं में शामिल किया जाएगा। दो विषय में पूरक मिलने पर छात्र को पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश दिया जाएगा, जिसमें उन्हें पांचवें और छठवें सेमेस्टर में उत्तीर्ण होने के बाद डिग्री दी जाएगी। इसके बाद विवि का हरेक पाठ्यक्रम पूर्ण रूप से सेमेस्टर प्रणाली में समाहित हो जाएगा(दैनिक जागरण,भोपाल,9.8.11)।

यूपी में खुलेंगे दो निजी विश्वविद्यालय

Posted: 09 Aug 2011 06:02 AM PDT

राज्य सरकार प्रदेश में दो नये निजी विविद्यालय खोलने की अनुमति दे रही है। इसके लिए बाकायदा विधानसभा में सोमवार को दो अलग-अलग विधेयक पेश किये गये। निजी क्षेत्र में खुलने वाले विविद्यालयों में एक लखनऊ में रामस्वरूप मेमोरियल विविद्यालय है तो दूसरा सहारनपुर में द ग्लोकल यूनिवर्सिटी शामिल है। इसके अलावा सरकार ने सदन में सोसाएटी रजिस्ट्रीकरण (उ.प्र. संशोधन) विधेयक और उ.प्र. नगर योजना और विकास (संशोधन) विधेयक भी पेश किए। दूसरी तरफ सदन में उ.प्र. स्थानीय निधि लेखा परीक्षा (संशोधन) विधेयक को बगैर किसी विरोध के पारित कर दिया गया। लखनऊ में एक निजी विविद्यालय को पूर्व में ही सरकार अनुमति दे चुकी है। इसके बाद अब तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही लखनऊ की संस्था रामस्वरूप मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट को निजी क्षेत्र में श्री रामस्वरूप मेमोरियल विविद्यालय खोलने की अनुमति देने के लिए विधेयक पेश कर दिया है। इसमें कुलाधिपति से लेकर वित्त अधिकारी तक सबकी नियुक्ति करने का अधिकार संस्था को होगा। सहारनपुर में अली अकबरपुर तहसील बेहट में अब्दुल वहीद एजुकेशनल एण्ड चैरिटेबल ट्रस्ट को ' द ग्लोकल यूनिवर्सिटी' खोलने के लिए सरकार ने विधेयक सदन में सोमवार को पेश किया(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,9.8.11)।

लविवि की फर्जी मार्कशीट!

Posted: 09 Aug 2011 05:59 AM PDT


लखनऊ विविद्यालय में सोमवार को एमएससी में प्रवेश लेने आये तीन अभ्यर्थियों को फर्जी अंकपत्रों के साथ पकड़ा गया। तीनों अभ्यर्थी बीएससी के बायो ग्रुप के थे। इनमें दो छात्राएं व एक छात्र हैं। विविद्यालय ने अंकपत्र तो जब्त कर लिए हैं, लेकिन अभ्यर्थियों को छोड़ दिया है। तीनों अंकपत्रों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जाएगी। मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. पद्मकांत ने प्राक्टर प्रो. यूडी मिश्र को तीनों फर्जी अंकपत्रों को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए लिखा है। निदेशक प्रवेश के यहां से भेजे गये तीनों अंकपत्रों में पता न होने से अब प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई मंगलवार को हो सकती है। विविद्यालय प्रशासन अब फर्जी अंकपत्र तैयार कराने वाले मास्टर माइंड की तलाश में जुटेगा। तीनों फर्जी अंकपत्र लखनऊ विविद्यालय के हैं। विविद्यालय के प्राक्टर प्रो. यूडी मिश्र ने बताया कि मंगलवार को आगे की कार्रवाई होगी। सूत्रों का कहना है कि अंकपत्र के खेल में शामिल लोग कुछ रसूखदार लोगों से जुड़े हैं। उन तक हाथ डालने के लिए अभी तक विविद्यालय को सूत्र नहीं मिल पा रहे हैं। अंकपत्र हू-ब- हू देखने में असली लगते हैं। उन्हें कम्प्यूटर से तैयार किया गया है। काउंसलिंग के दौरान अंकपत्र पर हस्ताक्षर देखकर विविद्यालय के अधिकारी चौंके और उन्होंने संदेह होने पर तत्काल कम्प्यूटरीकृत अंकपत्रों की तलाश की, लेकिन विविद्यालय से जारी रोल नम्बर से मैच नहीं होने से संदेह की पुष्टि हो गयी। इधर विवि प्रशासन ने काउंसलिंग कराने आयी दोनों छात्राओं व एक छात्र को छोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि विविद्यालय में फर्जी तरीके से दाखिले का खुलासा राष्ट्रीय सहारा ने स्नातक की काउंसलिंग से ही किया था। बीकाम में फर्जी तरीके से फीस की रसीद लेकर छात्र से दस हजार रुपये ऐंठ लिए गये थे। इस मामले में विविद्यालय ने अभी तक कोई प्राथमिकी नहीं दर्ज करायी है। पर इस बार बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इनकी काउंसलिंग में मूल कागजों की जांच में मामला न फंसता तो विवि में प्रवेश दिलाने वाले रैकेट की एक और कड़ी का खुलासा न होता। इस बात की आशंका ज्यादा है कि इसके पीछे कोई रैकेट काम कर रहा है और उसका सरगना पूरे खेल को पर्दे के पीछे से संचालित कर रहा है(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,9.8.11)।

इग्नूःअब होगी ऑन डिमांड परीक्षा

Posted: 09 Aug 2011 05:58 AM PDT

अब वह दिन दूर नहीं जब इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के छात्र हर शुक्रवार को परीक्षा दे सकेंगे। यह बहुत ही जल्दी संभव हो सकता है। कभी विद्यार्थी कुछ भावनात्मक कारणों से, तनाव की वजह से और कुछ महिला विद्यार्थियों की शादी होने की वजह से वे परीक्षा नहीं दे पाते हैं परंतु विद्यार्थी के लिए यह अच्छी खबर है कि वे आगामी दिनों में हर सप्ताह में परीक्षा दे सकेंगे। मौजूदा वक्त में परीक्षा दो बार जून और दिसबंर में ही ली जाती हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लाखों परीक्षार्थियों को इससे सीधे लाभ पंहुचेगा।

यह बहुत ही जल्दी संभव हो सकता है। कभी विद्यार्थी कुछ भावनात्मक कारणों से, तनाव की वजह से और कुछ महिला विद्यार्थियों की शादी होने की वजह से वे परीक्षा नहीं दे पाते हैं परंतु विद्यार्थी के लिए यह अच्छी खबर है कि वे आगामी दिनों में हर सप्ताह में परीक्षा दे सकेंगे। मौजूदा वक्त में परीक्षा दो बार जून और दिसबंर में ही ली जाती हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लाखों परीक्षार्थियों को इससे सीधे लाभ पंहुचेगा।

क्या है प्रस्ताव


प्रस्ताव यह है कि इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए दिल्ली प्रस्ताव भेजा गया है जिसकी योजना यह है कि नागपुर में भी ऑन डिमांड परीक्षा शुरू की जाए। इस प्रस्ताव के अनुसार दिल्ली में जारी ऑन डिमांड परीक्षा जैसी ही प्रक्रिया नागपुर रीजन में भी हो। यह सुविधा दिल्ली और कई रीजन में पहले से ही उपलब्ध है।

क्यों भेजा

यह प्रस्ताव इसलिए भेजा गया है कि इससे विद्यार्थियों को सुविधा मिल सकेगी। कई विद्यार्थी विभिन्न कारणों से परीक्षा नहीं दे पाते हैं और इससे उनका समय बरबाद होता है। वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। जून में और दिसंबर में। विद्यार्थियों को इससे लाभ पहुंचेगा। हमारी योजना यह है कि इससे विद्यार्थियों की उत्तरोत्तर वृद्धि हो सके।

क्या हैं फायदे

इस योजना के फलीभूत होने समहिला विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा फायदा है। महिलाओं को कई तरह की समस्याएं रहती हैं जिसकी वजह से वे निर्धारित समय पर परीक्षा नहीं दे पाती हैं परंतु ऑन डिमांड एक्जाम होने से बहुत लाभ मिलेगा। परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाने के लिए यह प्रस्ताव बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है।

मंजूरी मिलने की संभावना

कई जगहों में ऑन डिमांड परीक्षा की उपलब्धता की वजह से ऐसा लग रहा है कि प्रस्ताव जल्द ही पास हो सकता है। ऑन डिमांड परीक्षा होने से लाखों दूरस्थ पाठच्यक्रमों में अध्ययनरत बच्चों को सुविधा मिल सकेगी।

प्रस्ताव फिलहाल भेजा गया है परंतु इससे सबसे ज्यादा फायदा युवाओं को ही मिलने वाला है। निजी कारणों अथवा नौकरी पेशा युवाओं को इससे लाभ मिल सकता है(वंदना सोनी,दैनिक भास्कर,नागपुर,9.8.11)।

राजस्थानःअब नहीं रहेंगे एकल शिक्षक स्कूल

Posted: 09 Aug 2011 05:55 AM PDT

लम्बे समय के बाद प्रदेश भर में एकल शिक्षक स्कूल या शून्य शिक्षक वाले स्कूलों की सरकार ने सुध ली है। अब ऎसे स्कूलों की ब्लॉकवाइज सूची तैयार कराई गई हैं। जो वर्षो से एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं या कहीं एक भी बच्चे का नामांकन नहीं होने के बावजूद उन स्कूलों में शिक्षक लगे हुए हैं।
अब जयपुर में सरकार और उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में एकल शिक्षक स्कूलों पर चर्चा कर इनमें शिक्षक की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। बिना नामांकन वाले स्कूलों के शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। ताकि जरूरतमंद स्कूलों में साल भर बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
अभी तक अलवर के अलावा प्रदेश भर के अधिकतर जिलों में एकल शिक्षक स्कूलों की भरमार है। अकेले अलवर जिले में गत वर्ष की डाइस की रिपोर्ट के अनुसार करीब 364 एकल शिक्षक स्कूल हैं। जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यही नहीं करीब पांच स्कूल ऎसे भी हैं जिनमें एक भी बच्चे का नामांकन नहीं है और शिक्षक लगे हुए हैं।
पत्रिका ने उठाया मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने तीन अगस्त के अंक में '...फिर रो-धोकर निकलेगा सत्र' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर जिले के स्कूलों की स्थिति से सरकार और शिक्षा अधिकारियों को अवगत कराया था। इसके बाद विभाग ने ब्लॉकवाइज एकल शिक्षक स्कूलों की सूची तैयार कराई है। जो अब जल्दी ही जयपुर में उच्चाधिकारियों के सामने प्रस्तुत की जाएगी।


364 तो एकल शिक्षक स्कूल
ब्लॉक-एकल शिक्षक स्कूल
बानसूर 50
बहरोड़ 3
कठूमर 32
किशनगढ़ 18
कोटकासिम 5
लक्ष्मणगढ़ 44
मुण्डावर 3
नीमराणा 1
रैणी 25
राजगढ़ 28
रामगढ़ 25
थानागाजी 48
तिजारा 58
उमरैण 24
कुल 364

प्रस्ताव बनवा लिए
जिले में एकल शिक्षक और शून्य शिक्षक वाले सभी स्कूलों के प्रस्ताव ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों से तैयार करा लिए हैं। जिनकी स्थिति जयपुर में उच्चाधिकारियों के सामने रखी जाएगी। ताकि सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक लगाए जा सकें। संभावना है कि यह व्यवस्था जल्दी हो जाएगी।
-सुशील कुमार आसोपा, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक अलवर
(राजस्थान पत्रिका,अलवर,9.8.11)

मध्यप्रदेशःअनुशासन-ईमानदारी के भी मिलेंगे अंक

Posted: 09 Aug 2011 05:52 AM PDT

पहली से आठवीं तक के छात्रों को अनुशासन व ईमानदारी पर भी अंक मिलेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा इस बार पहली से आठवीं तक के छात्रों का वार्षिक परीक्षा परिणाम सतत समग्र मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर घोषित किया जाएगा। आरएसके ने वर्ष 2011-12 की वार्षिक परीक्षाओं में अंक विभाजन के दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो जाने के बाद मूल्यांकन में विद्यार्थियों का सर्वागीण विकास करना है। पहली से आठवीं तक छात्रों को तीन स्तर शैक्षिक, सह शैक्षिक व व्यक्तिगत सामाजिक गुणों के आधार पर अंक मिलेंगे। शैक्षिक स्तर पर किताबी ज्ञान पर आधारित रहेगा। इसमें पहली व दूसरी के छात्रों की वार्षिक परीक्षा में लिखित व मौखिक के आधे-आधे अंक रहेंगे। वहीं 3 से 5 वीं तक के छात्रों के लिखित के 70 व मौखिक के 30 अंक रहेंगे। वहीं 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए लिखित के 90 व मौखिक के दस अंक रहेंगे। 6 से 8 वीं तक के छात्रों के लिए प्रति विषय 20-20 अंक का प्रोजेक्ट वर्क भी दिया जाएगा। सह शैक्षिक में पांच बिंदु साहित्य, सांस्कृतिक, वैज्ञानिकता, सृजनात्मकता व खेलकूद को शामिल किया है। व्यक्तिगत सामाजिक गुणों में ईमानदारी, सत्यवादिता, स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, सहयोग की भावना, अनुशासन, समयबद्धता, नियमितता, अभिवृत्ति, नेतृत्व की क्षमता आदि दस गतिविधियां शामिल की गई हैं। सह शैक्षिक व व्यक्तिगत सामाजिक गुणों की हर गतिविधि पर 18 अंक निर्धारित हैं। वार्षिक परीक्षा में वर्ष भर के शैक्षिक, सह शैक्षिक व व्यक्तिगत सामाजिक गुणों में छात्रों को अंकों को जोड़कर परिणाम की घोषणा की जाएगी। राज्य शिक्षा केंद्र ने यह बनाए नियम : प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के छात्रों का सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लिए नियम बनाए है। सतत मूल्यांकन प्रणाली के तहत इस बार छात्रों के आठ मासिक टेस्ट के बजाय सात टेस्ट होंगे। साथ ही पहलीं से आठवी तक के किसी छात्रों को फेल नहीं किया जाएगा। मूल्यांकन व्यवस्था के लिए जिला मूल्यांकन समिति गठित करने के निर्देश दिए है। सतत मूल्यांकन प्रणाली के तहत छठवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों को साल में एक बार प्रोजेक्ट वर्क भी करना पड़ेगा। यह प्रोजेक्ट प्रत्येक विषय में 20-20 नंबर का होगा। इसके लिए स्कूलों को राशि भी दी जाएगी। इस राशि से स्कूल द्वारा प्रोजेक्ट की सामग्री छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी(दैनिक जागरण,भोपाल,9.8.11)।

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विविद्यालय में आयुर्वेद की परीक्षा कल से

Posted: 09 Aug 2011 05:50 AM PDT


दरभंगा संस्कृत विविद्यालय प्रशासन ने विवि क्षेत्रान्तर्गत सिवान एवं गया स्थित आयुव्रेद कॉलेजों के तीनों खण्डों की परीक्षा आयोजन को लेकर राजकीय संस्कृत कॉलेज पटना को परीक्षा केन्द्र निर्धारित किया है। जहां 10 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जायेगी। परीक्षा नियंत्रक डा़ आऱपी़ चौधूर ने बताया कि दोनों महाविद्यालयों के तीनों खण्डों के लगभग 400 छात्रों ने परीक्षावेदन जमा किया था। जिसमें से जॉच के दौरान त्रुटी को लेकर लगभग तीन दर्जन छात्रों का प्रवेश पत्र रोक लिया गया है। इधर आयुव्रेद के 6 छात्राओं ने महाविद्यालयों में छात्रों के साथ उत्पन्न हो रही समस्याओं से परीक्षा नियंत्रक को अवगत करवाया(राष्ट्रीय सहारा,दरभंगा,9.8.11)।

पटना यूनिवर्सिटी में स्नातकोत्तर की मेधा सूची जारी

Posted: 09 Aug 2011 05:57 AM PDT

पटना विविद्यालय (पीयू) में स्नातकोत्तर की मेधा सूची सोमवार को जारी कर दी गई। फिलहाल इतिहास व अर्थशास्त्र की मेधा सूची जारी की गई है। इसके बाद अन्य विषयों की भी मेधा सूची जारी की जाएगी। पिछले हफ्ते ही फॉर्म भरने की अंतिम तिथि समाप्त हुई थी। हालांकि नामांकन की तिथि अभी घोषणा नहीं की गई है लेकिन जल्द ही उसकी सूचना भी दे दी जाएगी। फिलहाल नामांकन को लेकर संशय बरकरार है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,9.8.11)।

बीपीएससी अभ्यर्थियों ने निकाला जुलूस

Posted: 09 Aug 2011 05:47 AM PDT

ऑल इंडिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन के बैनर तले बीपीएससी अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से आर ब्लॉक तक जुलूस निकाला। मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने आर ब्लॉक चौराहे पर रोक लिया। इसके बाद छात्रों ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने बिहार लोक सेवा आयोग की 53वीं से 55वीं परीक्षा के परिणाम में धांधली के आरोप में छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाये और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की। एआईएसएफ के राज्य सचिव विजीत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के उपसचिव से इस संबंध में बातचीत हुई। उन्होंने छात्रों की मांगों पर विचार करने का आासन दिया है। फिर भी सरकार कोई कदम नहीं उठाती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सत्रह अगस्त को पटना कॉलेज में इसी मामले को लेकर कन्वेंशन आयोजित किया जाएगा। राज्य सचिवमंडल सदस्य सुशील कुमार ने कहा कि पुलिस कार्रवाई की घटना को मानवाधिकार आयोग के पास ले जाया जाएगा। अभ्यर्थियों ने बीपीएससी मुख्य परीक्षा पर तत्काल रोक लगाये जाने की मांग की है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,9.8.11)।

राजस्थानःपांच जिलों में खुलेंगे आईटी ज्ञान केंद्र

Posted: 09 Aug 2011 05:44 AM PDT

जनजाति विभाग के आश्रम छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में आईटी ज्ञान केंद्र खोलने की तैयारी पूरी हो गई है। जनजाति उपयोजना क्षेत्र के पांचों जिलों में एक-एक चयनित स्थल पर 15 अगस्त को इन केंद्रों का उद्घाटन किया जाएगा। उदयपुर में इसकी शुरूआत फतह स्कूल परिसर स्थित जनजाति छात्रावास से होगी।

राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड [आरकेसीएल] से जनजाति विभाग के करार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस करार के साथ ही इस योजना की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस योजना के तहत छात्रावासों व आवासीय विद्यालयों के जनजाति छात्र-छात्राओं को राजस्थान स्टेट सर्टीफिकेट कोर्स इन इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी [आरएस-सीआईटी] और राजस्थान स्टेट सर्टीफिकेट कोर्स इन इंग्लिश लैंग्वेज [आरएस-सीईएल] कराए जाएंगे। 
9वीं से 11वीं के लिए
-यह पाठयक्रम 9वीं से 11वीं के बच्चों के लिए तैयार किया गया है। इससे कम्प्यूटर और अंग्रेजी में उनकी पकड़ बढ़ेगी। कुल 3600 बच्चे इससे लाभान्वित होंगे। इसके लिए 172.40 लाख का बजट स्वीकृत किया गया है। आरएस-सीआईटी के लिए 132 व आरएस-सीईएल के लिए 100 घंटे की कक्षाएं तय की गई हैं। आरएस-सीआईटी करने पर कोटा ओपन का तथा आरएस-सीईएल करने पर एसीटी यूनिवर्सिटी समूह का प्रमाण पत्र मिलेगा।
कहते हैं अघिकारी
-तैयारी पूरी हो चुकी है। 11 अगस्त को उदयपुर,बांसवाड़ा,डूंगरपुर, प्रतापगढ़ व सिरोही जिलों के परियोजना अघिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें उन्हें विस्तृत जानकारी दी जाएगी। 15 अगस्त को पांच जगह उद्घाटन कार्यक्रम होंगे।
-जीतेन्द्र उपाध्याय, अतिरिक्त जनजाति आयुक्त(राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,9.8.11)

पटनाःस्कूली बच्चों के लिए बनेंगे दो I-CARD

Posted: 09 Aug 2011 05:41 AM PDT

पटना में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और अधिक प्रभावी बनायी जायेगी। इसके लिए अब बिहार पुलिस अपने उस पुराने आदेश का पालन सुनिश्चित करायेगी, जिसके तहत सभी स्कूलों को छात्रों के लिए दो पहचान-पत्र निर्गत करने संबंधी गाइडलाइन जारी किया गया था। पुलिस मुख्यालय द्वारा स्कूलों को जारी गाइडलाइन के तहत एक आई कार्ड बच्चे के पास, जबकि दूसरा उनके अभिभावकों के पास रहना सुनिश्चित किया गया है। अर्थात छुट्टी होने के पश्चात स्कूल से घर लौटने वाले बच्चों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द तभी किया जायेगा जब वे स्कूल प्रबंधन द्वारा मुहैया कराये गये आई- कार्ड को दिखायेंगे। राज्य पुलिस मुख्यालय इसके साथ ही पटना में स्कूलों के इर्द-गिर्द सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए वर्ष 2006 में शुरू किए गए सेक्टर पेट्रोलिंग की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने जा रहा है। राजधानी स्थित क्राइस्ट चर्च स्कूल में पढ़ने वाले भाई-बहन के अपहरण की घटना के बाद पुलिस मुख्यालय स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपने पुराने निर्देश को लागू कराने के लिए सख्त रवैया अख्तियार करने वाला है। बताया जाता है कि सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय द्वारा पूर्व में जारी इस निर्देश का पालन कुछ स्कूल प्रबंधनों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन राजधानी के अधिकतर स्कूल इसे लेकर संजीदा नहीं हैं। अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) राज्यबर्धन शर्मा ने कहा कि वर्ष 2007-09 में छात्रों के लिए दो आई-कार्ड जारी करने से संबंधित गाइडलाइन स्कूल प्रबंधनों को जारी किया गया था। इसके अनुसार एक आई-कार्ड बच्चों के पास तथा दूसरा उनके अभिभावकों के पास रहना सुनिश्चित किया गया है, ताकि स्कूल से घर लौटते वक्त आई-कार्ड दिखाये जाने के बाद ही बच्चे अभिभावकों को सौंपे जायें। ऐसा सुरक्षा कारणों से किया गया। एडीजी ने निजी स्कूल प्रबंधनों को इस दिशा-निर्देश के पालन में शिथिलता नहीं बरतने को कहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल प्रबंधन द्वारा इस निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है तो उसे सुनिश्चित कराया जाएगा। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय स्कूल प्रबंधनों को फिर से दिशा-निर्देश जारी करेगा। इस बीच आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पांच वर्ष पूर्व पटना में स्कूली छात्रों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई सेक्टर पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया जा रहा है। वर्ष 2006 में शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत जिन क्षेत्रों में स्कूलों की तादाद ज्यादा है उन्हें सेक्टर में बांटकर उनके लिए पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई थी। स्कूल के शुरू होने और छुट्टी के समय पर विशेष तौर से गश्ती का ख्याल रखा जाता है। इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय जल्द ही पटना पुलिस को निर्देश जारी करेगा(राष्ट्रीय सहारा,पटना,9.8.11)।

मध्यप्रदेशःपीएटी में मिलेगा पसंदीदा विषय का पर्चा

Posted: 09 Aug 2011 05:38 AM PDT

प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (पीएटी) देने वाले छात्रों को खुशखबरी। अब उन्हें पर्चा हल करने ज्यादा माथापच्ची नहीं करना होगी क्योंकि व्यापमं ने पर्चो को पांच विषय समूह में बांट दिया है। इससे जहां छात्रों में भ्रम की स्थिति समाप्त होगी। वहीं व्यापमं को परीक्षा परिणाम तैयार करने में ज्यादा जद्दोजहद नहीं करना होगी। मप्र व्यावसायिक परीक्षा मंडल 21 अगस्त को पीएटी लेने वाला है। परीक्षा प्रदेश के चार शहरों में आयोजित होगी, जिसमें इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर शामिल हैं। एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम में प्रवेश कराने मंडल पहली प्रवेश परीक्षा पृथक से करा रहा है। इसके पहले प्री इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी टेस्ट (पीईटी) से एग्रीकल्चर में पढ़ने में छात्रों का चयन किया जाता था। लेकिन छात्रों की परेशानी को देखते हुए इसे पृथक से कराने का प्रबंध किया गया। छात्रों की सुविधा के लिए मंडल ने परीक्षा के प्रश्न पत्रों को पांच विषयों में बांट दिया है। ताकि एक दिन में समस्त पांच समूह की परीक्षा कराई जा सके(दैनिक जागरण,भोपाल,9.8.11)।

राजस्थानःपिछड़ा वर्ग की छात्राओं को भी मिलेगी साइकिल

Posted: 09 Aug 2011 05:34 AM PDT

प्रदेश में घर से स्कूल की दहलीज तक पहुंचने वाली विशेष पिछड़ा वर्ग की छात्राओं का सफर जल्द आसान होने वाला है। इसके लिए उनसे किसी तरह का अंशदान नहीं लिया जाएगा।
राज्य सरकार ने विशेष पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए देवनारायण साइकिल वितरण योजना लागू करने का मानस बनाया है। योजर्नातगत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से इस वर्ग की शहर व गांवों की छात्राओं के साइकिल आवेदन तैयार करने को कहा गया है।
शिक्षा विभाग ने अभी प्रदेश में संचालित साइकिल वितरण योजनार्तüगत ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को जोड़ रखा है।उनसे अंशदान के रूप में सौ रूपए लेने का प्रावधान है। देवनारायण साइकिल वितरण योजना में विशेष पिछड़ा वर्ग की छात्राओं से भी सौ रूपए अंशदान लेने का प्रावधान किया था। अब सरकार ने तय किया है कि छात्राओं के अंशदान का पुर्नभरण देवनारायण योजना से किया जाएगा। राज्य सरकार की इस घोषणा से विशेष पिछड़ा वर्ग की बन्जारा, बालदिया, बलाना, गाडिया लोहार, गाडोलिया लोहार, गूजर, गुर्जर, राइका , रेबारी (देवासी) परिवारों की छात्राओं को घर से स्कूल तक पहुंचने में सहूलियत मिल सकेगी। इस वित्तीय वर्ष में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग की ओर से विशेष पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए 200 करोड़ रूपए का विशेष पैकेज घोषित किया गया है(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,9.8.11)।

टीचर्स और स्टूडेंट्स के लिए होगी सीबीएसई की प्रतियोगिता

Posted: 09 Aug 2011 05:33 AM PDT

सीबीएसई बोर्ड द्वारा 11 नवंबर को नेशनल एजुकेशन डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाएगा। इसके तहत बोर्ड स्टूडेंट्स के लिए चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन थीम पर राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहा है। खास बात यह है कि स्टूडेंट्स के साथ-साथ टीचर्स भी कुछ प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे और कैश पुरस्कार जीत सकेंगे। सभी प्रतियोगिताओं के लिए रजिस्ट्रेशन और सबमिशन ऑनलाइन है। अंतिम तिथि 1 सितंबर है। फॉर्म और प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी सीबीएसई की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।

सभी के लिए पुरस्कार
सभी प्रतियोगिताओं में कैश प्राइज मनी प्रोत्साहन के रूप में विजेताओं को दी जाएगी। टीचर्स क्विज के लिए पहला पुरस्कार 20,000 रुपए, दूसरा 14,000 रुपए, तीसरा 10,000 रुपए और चौथा 8,000 रुपए दिया जाएगा। स्टूडेंट्स क्विज में पहला पुरस्कार 10,000 रुपए, दूसरा 8,000 रुपए, तीसरा 5,000 रुपए और चौथा 3,000 रुपए का दिया जाएगा। हर रीजन से मैसेज कैटेगरी के लिए दो एक-एक हजार रुपए दिए जाएंगे।

इन में होगा मुकाबला

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता
यह तीन वर्गो में होगी इसमें कक्षा-1 से 4 तक थीम द स्कूल आई लव,माय फ्रेंड और माय ड्रीम प्लेग्राउंड है। कक्षा 5 से 7-गोइंग टू स्कूल इज माई राइट, नेचर एज माय टीचर और कक्षा-8 से 10-लीविंग विद डिफरेंसेस, लर्निग फ्राम लाइफ एंड टीचिंग्स ऑफ ग्रेट एजुकेशनिस्ट, डॉ. जाकिर हुसैन, डॉ. एस राधाकृष्णन हैं।


मैसेज प्रतियोगिता
मुख्य थीम चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन है। मैसेज में शब्दों की संख्या 50 होगी। कक्षा 6 से 8 की थीम मैसेज फॉर माय टीचर और कक्षा-9 से 10-मैसेज फॉर सीबीएसई थीम दी गई है।

क्विज कॉम्पिटिशन
क्विज कॉम्पिटिशन स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स के लिए भी होगी। क्विज में इन टॉपिक्स को कवर किया जाएगा। चाइल्ड राइट्स,राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009,प्रोविशन्स ऑफ द कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया हेविंग ए बियरिंग ऑन एजुकेशन, एजुकेशन ऑफ गर्ल चाइल्ड, स्कूल हेल्थ, नेशनल पालिसी ऑन एजुकेशन 1986, आचार्य राममूर्ति कमेटी रिपोर्ट 1990, नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005, सर्वशिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, वोकेशनल एजुकेशन, सीसीई, नेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑफ एजुकेशन आदि(दैनिक भास्कर,दिल्ली,9.8.11)।

मध्यप्रदेशःअब नहीं होगी तीन साल में डॉक्टरी

Posted: 09 Aug 2011 05:31 AM PDT

प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिये प्रदेश सरकार ने तीन साल 6 माह का बैचलर ऑफ रूरल हैल्थ केयर कोर्स प्रारंभ करने की घोषणा की थी। यह कोर्स अब प्रारंभ नहीं होगा और जैसी चिकित्सीय शिक्षा व्यवस्था है, उसको कायम रखा जायेगा। चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने गत दिवस चरक जयंती के अवसर यह घोषणा की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह कोर्स प्रदेश में प्रारंभ नहीं किया जायेगा, जिसका सभी आयुर्वेद चिकित्स संगठनों ने स्वागत किया है।

आयुष मेडिकल ऐसोसियेशन ने कहा कि इस घोषणा का सभी आयुष मेडिकल ऐसोसियेशन के पदाधिकारी स्वागत करते हैं। आयुष मेडिकल ऐसियेशन के प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डे ने कहा कि संगठन यह मांग लम्बे समय से करता आ रहा है कि आयुष चिकित्सकों की भर्ती गांव में की जाए। ऐसे किसी भी कोर्स से डिग्री ले चुके डाक्टरों, चिकित्स शिक्षा का हित प्रभावित होगा और परिणाम भी बेहतर सामने नहीं आयेंगे। इस घोषणा के बाद अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पड़े पदों पर प्रदेश शासन की पहल पर आयुर्वेद डॉक्टरों की नियुक्ति संभव हो सकेगी। कई सालों से आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने की जो मांग की जा रही है, उस पर सरकार ने विचार करने का आश्वासन दिया, जिसका सभी आयुष मेडिकल ऐसोसियेशन पदाधिकारियों ने स्वागत किया है(दैनिक भास्कर,जबलपुर,9.8.11)।

बिजनेस स्कूल के सिलेबस में फील्ड वर्क भी

Posted: 09 Aug 2011 05:30 AM PDT

कॉरपोरेट जगत की जरूरतों में आ रहे बदलावों को देखते हुए अब बिजनेस स्कूल्स के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है। अभी तक सिलेबस केवल थ्योरी पर ही आधारित था, अब उसमें फील्ड स्टडी को भी शामिल किया गया है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार ज्यादातर कंपनियां कारोबारी कामकाज का अनुभव रखने वाले ग्रेजुएट्स को नौकरी देना पसंद कर रही हैं। अब सिलेबस में तीन बातों का ध्यान रखा गया है- नॉलेज, स्किल्स और एप्टीट्यूट। कुछ कॉलेज नए सत्र से इसे लागू करने जा रहे हैं, वहीं कुछ इस पर विचार कर रहे हैं।

वर्कशॉप व सेमिनार होंगे आयोजित
शहर के मैनेजमेंट कॉलेजों में हर साल सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित होती हैं, लेकिन अब इस पर और ध्यान दिया जाएगा। यह आयोजन विद्यार्थियों की दक्षता पर आधारित होगा। जिसमें डाटा एनालिसिस, प्रेजेंटेशन, राइटिंग, पूर्वानुमान से संबंधित चीजें शामिल होंगी। कंपनी में किसी भी पोस्ट पर एप्लाई करने के लिए इंडस्ट्री से लगाव होना जरूरी है। इसलिए अब कॉलेज के पाठ्यक्रम में कंपनियों से जुड़ाव रखा जाएगा। विद्यार्थियों का कंपनियों की मौजूद विधा के साथ तालमेल बहुत जरूरी है, जो उनकी एकेडमिक स्टडीज से कहीं ज्यादा रोचक साबित होगा। इसके साथ ही यह जानकारी उन्हें जॉब दिलाने में भी मदद करेगी(दैनिक भास्कर,ग्वालियर,9.8.11)।

मेरठःकंप्यूटर डिब्बों में बंद, कैसे सीखें छात्र?

Posted: 09 Aug 2011 05:27 AM PDT

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त, अशासकीय और शासकीय कालेजों में कंप्यूटर शिक्षा का हाल बेहाल है। किसी कालेज में कंप्यूटर तो आ गया है, लेकिन कक्ष नहीं है। कहीं कक्ष हैं तो कंप्यूटर के योग्य प्रशिक्षक नहीं, प्रशिक्षक हैं तो कंप्यूटर चलाने के लिए जनरेटर में तेल नहीं, सब कुछ है तो कंप्यूटर शिक्षा के लिए कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नही है। जिले अभी भी कंप्यूटर शिक्षा डिब्बा बंद ही है। एसएसडी ब्वायज इंटर कालेज लालकुर्ती में दस कंप्यूटर में से दो खराब पड़े हैं। कंप्यूटर चलाने के लिए जनरेटर तो है, लेकिन चलाने के लिए गैस नहीं है। केके इंटर कालेज में कंप्यूटर आ गए हैं, लेकिन डिब्बे में कंप्यूटर रखे हुए हैं। जनरेटर में डीजल कहां से आएगा पता नहीं। जवाहर इंटर कालेज राड़धना में कंप्यूटर, जेनरेटर भेज दिए गए, प्रशिक्षक का पता नही है। कंप्यूटर में उपयोग करने वाली स्टेशनरी भी नदारद है। जिले के अन्य कालेजों में कंप्यूटर शिक्षा का कमोवेश यही हाल है। कक्षा छठी से आठवीं तक कंप्यूटर को अनिवार्य रूप में और नौवीं से बारहवीं कक्षा में वैकल्पिक शिक्षा के रूप में इसकी शिक्षा दी जानी है। अधिकांश कालेजों में कंप्यूटर लगने के बाद भी बच्चों के हाथ अभी माउस नहीं पहुंच पाई है। कंप्यूटर प्रशिक्षक केवल कागज पर कंप्यूटर के विषय में बता रहे हैं। प्रधानाचार्य नित्यानंद शर्मा, डा. वीर बहादुर सिंह, सुशील कुमार सिंह ने बताया कि इस साल को शैक्षणिक गुणवत्ता के रूप में मनाया जा रहा है, विभाग ने कंप्यूटर दे दिया है, लेकिन संचालन की व्यवस्था सही नहीं हो पायी है। कंप्यूटर लगाने व चलाने की जिम्मेदारी एजेंसी की डीआइओएस कमलेश कुमार ने बताया कि पिछले साल 24 स्कूलों में कंप्यूटर लगाए गए। इस साल 54 स्कूलों में भेजे गए, 64 स्कूलों में और कंप्यूटर लगने वाले हैं। कंप्यूटर लगाने और चलाने की जिम्मेदारी एजेंसी को सौंपी गई है। अगर कंप्यूटर इंस्टाल न करके डिब्बे में पड़ा है तो गंभीर लापरवाही है। जल्द ही संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाकर कार्रवाई होगी(दैनिक जागरण,मेरठ,9.8.11)।

राजस्थान लोक सेवा आयोग की जूनियर सिविल जज परीक्षा

Posted: 09 Aug 2011 05:24 AM PDT

यदि आप राजस्थान की सामाजिक विविधताओं को समझते हैं और विवाद को तार्कि क और सटीक मत के जरिए सुलझाने में रुचि रखते हैं तो आपके लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) मौका दे रही है सिविल जज (जूनियर) बनने का। एक सौ एक रिक्त पदों के लिए इच्छुक उम्मीदवार आरपीएससी की वेबसाइट पर 25 अगस्त, 2011 तक ऑनलाइन आवेदनकर सकते हैं।

अर्हताएं: उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विविद्यालय से अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत मान्य एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार को राजस्थानी भाषा, लीपि और परिवेश की समझ होनी चाहिए। आवेदन करने वाले की उम्र पहली जनवरी, 2012 को कम से कम 23 साल लेकिन 35 साल से अधिक न हो। आरक्षण और उम्र सीमा में छूट का लाभ सरकारी प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी।

चयन प्रक्रिया: चयन प्रक्रिया तीन स्तरीय प्रतियोगिता के माध्यम से होगी- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। साक्षात्कार में सफल होने पर उम्मीदवार को राजस्थान न्यायिक सेवा के तहत (न्यायिक) डय़ूटी दी जाएगी।

पहला चरण : प्रारंभिक परीक्षा इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के दो प्रश्न पत्र लॉ- प्रथम और लॉ-द्वितीय से संबंधित होंगे। प्रारंभिक परीक्षा में इन दोनों प्रश्नपत्रों से 70 फीसद प्रश्न होंगे। शेष 30 फीसद प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी भाषा संबंधी प्रश्न होंगे। इसमें प्राप्त अंकों के आधार पर कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी। रिक्त पदों की कुल संख्या का पन्द्रह गुणो उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयन किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को दोबारा फार्म भरने होंगे, जो आरपीएससी से मुफ्त मिलेंगे।


दूसरा चरण : मुख्य परीक्षा मुख्य परीक्षा में चार प्रश्नपत्र होंगे। इसमें दो प्रश्नपत्र सौ-सौ अंकों के लॉ संबंधी हों गे। तीसरा प्रश्नपत्र हिंदी निबंध पचास अंकों का और चौथा प्रश्नपत्र अंग्रेजी निबंध का होगा। सभी के प्रश्न सब्जेक्टिव/ नरेटिव टाइप होंगे।

पहला प्रश्नपत्र लॉ प्रथम : इसमें भारतीय संविधान, सिविल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ कांट्रेक्ट एंड पार्टनरशिप, लॉ ऑफ टोर्ट एंड एसेसमेंट, लॉ ऑफ मोटर एक्सीडेंट क्लेम, लॉ ऑफ अरबिट्रेशन, रेंट कंट्रोल लॉ, राजस्थान का रेवन्यू लॉ, लॉ ऑफ स्पेसिफिक लॉ, हिंदू लॉ, मुस्लिम लॉ, लॉ ऑफ ट्रांसफर प्रॉपर्टी, लॉ ऑफ लिमिटेशन, लॉ ऑफ लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत, घरेलू हिंसा संबं धी नियम आदि संबंधी प्रश्न पूछे जाएंगे।

दूसरा प्रश्न पत्र सिविल लॉ सेकेंड : इसके तहत क्रिमिनल प्रोसिजर कोड, लॉ ऑफ एविडेंस कोड, आईपीसी, लॉ ऑफ नारकोटिक ड्रग, एससी/एसटी संबंधी प्रोटेक्शन क्रिमिनल लॉ, बाल अपराध नियम, चेक डिसऑनर संबंधी नियम, बिजली चोरी संबंधी नियम, साइबर क्राइम, सामान्य अपराध और जजों के आदेश संबंधी प्रश्न हों गे। दोनों प्रश्नपत्रों के सिलेबस की प्रैक्टिकल जानकारी उम्मीवारों को होनी चाहिए।

तीसरा प्रश्न हिंदी निबंध : इसके अंतर्गत हिंदी लेखन क्षमता और व्याकरण संबंधी प्रश्न होंगे।

चौथा प्रश्न पत्र अंग्रेजी (निबंध/लेख) : इस प्रश्नपत्र में अंग्रेजी लेखन, अनुवाद हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी, ग्रामर को परखा जाएगा। मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। पहले और दूसरे प्रश्नपत्रों में न्यूनतम 35 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। सभी प्रश्नपत्रों के पूर्णाक 300 का 40 फीसद यानी 120 अंक और उससे अधिक प्राप्तांक लाने वाले उम्मीदवारों की मेधावी सूची कैटेगरी वाइज बनाई जाएगी। एसटी/एससी उम्मीदवारों के लिए प्राप्तांक में पांच फीसद की छूट दी गई है। मेधावी सूची के आधार पर रिक्त पदों की कुल संख्या के तीन गुणो उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

तीसरा चरण : इंटरव्यू इंटरव्यू के बाद कैटेगरी वाइज मेधावी सूची बनाई जाएगी और रिक्त पदों की संख्या के अनुसार मेधावी उम्मीदवारों का चयन कर लिया जाएगा।
(दीपक राजा,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)

मेरठःकालेजों में वेटिंग लिस्ट के दाखिले शुरू

Posted: 09 Aug 2011 05:21 AM PDT

मेरठ कालेज में मंगलवार से फ‌र्स्ट वेटिंग लिस्ट वाले छात्रों के दाखिले किए जाएंगे। नौ व 10 अगस्त को स्नातक व स्नातकोत्तर की पहली वेटिंग लिस्ट में आने वाले सभी छात्र कालेज मे दाखिला करा सकते हैं। इसके साथ ही स्नातक द्वितीय व तृतीय वर्ष व पीजी द्वितीय वर्ष में प्रवेश की अंतिम तिथि को 10 अगस्त तक विस्तारित किया गया है। पहली वेटिंग लिस्ट में किसी डॉक्यूमेंट आदि के पूरे न होने की स्थिति में जिन छात्र-छात्राओं के दाखिले नहीं हो पाए हैं वह 12 अगस्त को कालेज में पहुंच कर दाखिले ले सकते हैं। इस्माईल नेशनल पीजी कालेज कालेज द्वारा यूजी व पीजी में दाखिले के लिए थर्ड कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी गई है। कट ऑफ में शामिल छात्राएं मंगलवार से कालेज में दाखिला ले सकती हैं। आरजी पीजी कालेज ने द्वितीय कट ऑफ जारी आरजी पीजी कालेज द्वारा बीए, बीएससी व बीकॉम द्वितीय कट ऑफ सूची जारी कर दी गई। इसमें शामिल छात्राएं नौ अगस्त से दाखिले करा सकती हैं। कालेजों की बैठक आज विवि में निजी बीएड कालेजों के खिलाफ अवैध फीस वसूली की बढ़ती शिकायतों व नए सत्र में कालेजों को रैगिंग संबंधी निर्देश देने के लिए मंगलवार को विवि में बैठक की जाएगी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. बीएन शुक्ला द्वारा नए सत्र में रैगिंग रोकने, सत्र 2011-12 की छात्रवृत्ति के बारे में जानकारी देने व बीएड कालेजों को निर्धारित फीस से ज्यादा न देने के लिए जनपद के सभी कालेजों के हेड को बैठक में आने के लिए कहा है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय के डॉ. संजय कुमार ने कहा कि बैठक मंगलवार को विवि के सुभाष चंद्र प्रेक्षागृह में सुबह 10:30 बजे से होगी। जिसमें सभी कालेजों के हेड को पहुंचना अनिवार्य है। रिजल्ट न निकलने पर पहुंचे विवि जनता वैदिक कालेज, बड़ौत के एमएससी माइक्रोबायोलॉजी छात्र-छात्राएं थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट अभी तक जारी न होने पर विवि पहुंचे। फोर्थ सेमेस्टर एग्जाम की भी परीक्षा दे चुके इन छात्रों का कहना था कि अभी तक उनके थर्ड सेमेस्टर का भी परिणाम जारी नहीं हुआ है। ऐसे में उच्च शिक्षा के लिए यह आवेदन नहीं कर पा रहे। छात्र-छात्राओं ने शीघ्र रिजल्ट जारी करने की अपील की(दैनिक जागरण,मेरठ,9.8.11)।
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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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