Welcome

Website counter
website hit counter
website hit counters

Friday, January 31, 2014

सबसे भयानक राष्ट्रद्रोह है यह अंध राष्ट्रवाद

सबसे भयानक राष्ट्रद्रोह है यह अंध राष्ट्रवाद

सबसे भयानक राष्ट्रद्रोह है यह अंध राष्ट्रवाद


HASTAKSHEP

पलाश विश्वास

नैनीताल से हमारे डीएसबी के पुराने मित्र उमेश तिवारी विश्वास ने सही लिखा है। जागो रे जिन जागणा जब जागण की बार, फिर क्या जागे नानका जब सोवे पाँव पसार!

अब सवाल है कि जागणा सम्भव कैसे हो, अंध राष्ट्रवादी इस महादेश के सगे रक्त सम्बंधी देशों बांगलादेश,पाकिस्तान और भारत में अज्ञानता की मौनी अमावस्या शाश्वत है उपभोक्तावादी ग्लोबल चकाचौंध के बावजूद। सर्वोच्च तकनीक ले लैस तमाम पापी आत्माएं अविराम पुण्यस्नान में निष्णात जो बीज मन्त्र से दीक्षित होते रहते हैं, वह कुरुक्षेत्र का रणक्षेत्र का निर्माण ही करता है।

गनीमत है कि बांग्लादेश भारत के लिये सशस्त्र चुनौती है नहीं और नेपाल में बारम्बार भारतीय हस्तक्षेप के बावजूद कोई प्रतिक्रिया की सम्भावना है ही नहीं। लेकिन कुरु पक्ष और पांडव पक्ष भारत और पाकिस्तान की हुकुमतों के जरिये रणहुंकार की अभिव्यक्ति में पारमाणविक महाविनाश क्षेत्र बना ही चुके हैं इस उपमहाद्वीप को, जिसका इतिहास भूगोल साझा है।

अब संजोग देखिये, दुनिया भर में भारत और पाकिस्तान में ही सबसे ज्यादा बालिग अपढ़ हैं। हमारे मेधा संप्रदाय के लोग उत्तर भारत की गायपट्टी को ही मध्ययुगीन अंधकार में फँसे बताते हैं लेकिन यह फँसान और धँसान सीमा के आर-पार पूरे महादेश में समान है और पूरा क्षेत्र आत्मघाती युद्धस्थल में तब्दील है।

आज और कल दो दिनों से आनंद तेलतुंबड़े से इसी मुद्दे पर चर्चा हो रही है कि मध्यवर्ग के लोग चाहे कितने ही क्रांतिकारी हों, हालात तब तक नहीं बदल सकते जब तक न हम इन अपढ़ लोगों को अंध राष्ट्रवाद के तिलिस्म से बाहर निकाल लें।

यह हमारी मुख्य चिन्ता है। मुख्य चिन्ता यह है कि जिस भाषा के जरिये हम पूरे देश से सम्वाद कर सकते हैं, उसमें सम्वाद और लोकतन्त्र की तहजीब ही नहीं है। दूसरी ओर क्षेत्रीय अस्मिता की वजह से संवेदनशील मुद्दों पर जिन्हें हम सम्बोधित करना चाहते हैं, उनसे हिंदी में सम्वाद हो नहीं सकता। अपने लोगों से बात करने के बजाय हमारे लोग दूसरों की मध्यस्थता के मोहताज है। देश की सत्ता में बैठे लोग और देश के बहुसंख्य नागरिक अलग-अलग वर्ग के हैं। हम लोग सिर्फ सत्ता से ही सम्वाद और विमर्श के अभ्यस्त हैं, आम लोगों के साथ नहीं।

हमें तकलीफ यह है कि कश्मीर, सिख राजनीति, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत से सम्वाद के लिये हमें अंग्रेजी में बात करनी होती है। वे हमारी भाषा में बात करने को तैयार नहीं हैं और हम उनकी भाषा जानते नहीं हैं या जानने समझने की कोशिश ही नहीं करते।

आज विषय विस्तार से पहले एक खबर बहुत अच्छी है। ऑपरेशन के बाद हमने पहली दफा वीरेनदा से बात की है। डॉक्टरों को अब उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद है, इसकी पुष्टि करने के बाद वीरेनदा से बात किये बिना रह नहीं गया। डॉक्टरों ने उन्हें बात करने की मनाही कर रखी है। फिर भी वे बोलने लगे तो मैंने फोन पर रीता भाभी को बुला लिया और उनसे ही बात की। वीरेनदा अभी इलाज की इस कवायद में बेहद कमजोर हो गये हैं, उनको सेहतमंद होने में वक्त लगेगा। वीरेनदा से खुलकर बात करने के लिये अभी हमें और सब्र करना होगा। यशवंत को फोन लगाकर वीरेनदा की ताजा हालत जानकर ही हमने फोन लगाने की हिम्मत की थी। अब जैसा कि मैं शुरू से कहता रहा हूँ कि वीरेन दा फिर सक्रिय तौर पर हमारे साथ होंगे, इसका पक्का यकीन हो गया है।

अरविंद केजरीवाल के लिये स‌िख दंगों की जाँच की माँग पर-

इस माँग पर आपका दो स‌ौ फीसद स‌मर्थन।सिखों को न्याय दिलाने की पहल करके आपने पूरे तीन दशक स‌े जारी राष्ट्र के अन्यायपूरण असमतामूलक मौन को तोड़ने का काम किया है। आभार।

क्या पैंतीस स‌ाल स‌े मरीचझांपी नरसंहार पर राष्ट्र का मौन अब टूटेगा या फिर किसी केजरीवाल की अराजकता की जरूरत होगी?

इस पर सिलसिलेवार चर्चा से पहले यह बता देना उचित होगा कि राहुल गांधी के सिख जनसंहार में कांग्रेसी नेताओं की भूमिका स्वीकर करने के सिलसिले में आज दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर सिखों का तीस साल से लम्बित न्याय के लिये जो प्रदर्शन हो रहा है, पूरे राष्ट्र को उसका समर्थन करना चाहिए। हम सारे देशवासी सिखों के साथ खड़े होकर ही इस पापस्खलन का मौका बना सकते हैं। अरविंद केजरीवाल ने जो सिट गठन करने की माँग की है, हमें उसका भी समर्थन करना चाहिए। यह भी हमें भूलना नहीं चाहिए कि दंगों में भले ही कांग्रेस की भूमिका रही है लेकिन अंधराष्ट्रवादी सिख विरोधी उस समय के हिस्सेदार सारा देश है। सिखों की तरह कश्मीरियों, पूर्वोत्तर के भारतीयों, सलमा जुड़ुम भूगोल में कैद आदिवासियों और अनार्य संस्कृति के दक्षिणात्य समेत पूरे भूगोल के साथ खड़े होकर ही हम एक सार्वभौम राष्ट्र का भूगोल बना सकते हैं।

 हमारे युवा साथी, बेहद काबिल भाषाविद भाषा योद्धा रियाजुल हक ने गोरख पाण्डेय की याद को सलाम जो किया है, बहस जारी रखने से पहले उस पर तनिक गौर जरूर करें।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

 

झीनी-झीनी बीनींचदरिया लहरेले तोहरे कान्‍हे

जब हम तन के परदा माँगी आवे सिपहिया बान्‍हे

सिपहिया से अब नाही बन्‍हइबोचदरिया हमरा के भावेले।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

 

कंकड चुनि-चुनि महल बनवलीं हम भइलीं परदेसी

तोहरे कनुनिया मारल गइलीं कहवों भइल न पेसी

कनुनिया अइसन हम नाहीं मनबोमहलिया हमरा के भावेले।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

 

दिनवा खदनिया से सोना निकललीं रतिया लगवलीं अँगूठा

सगरो जिनगिया करजे में डूबलि कइल हिसबवा झूठा

जिनगिया अब हम नाहीं डुबइबोअछरिया हमरा के भावेले।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

 

हमरे जंगरवा के धरती फुलाले फुलवा में खुसबू भरेले

हमके बनुकिया के कइल बेदखली तोहरे मलिकई चलेले

धरतिया अब हम नाहीं गंवइबोबनुकिया हमरा के भावेले।

गुलमिया अब हम नाही बजइबोअजदिया हमरा के भावेले।

मैत्रेयी पुष्पा को किन परिस्थितियों में आप ने दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया है, हम वह चर्चा नहीं करना चाहते। बहरहाल मैत्रेयी की नियुक्ति का अरविंद केजरीवाल का यह कदम भी स‌कारात्मक है। इसका तहेदिल स‌े स्वागत है। अपनी प्रिय लेखिका को भी बधाई। उम्मीद है कि वह रीति विरुद्ध जाने की हिम्मत करते हुये कम स‌े कम भारत की राजधानी में स्त्री की दासता को तोड़ने की कोई पहल करेंगी।

हमारे वरिष्ठ लेखक वीरेंद्र यादव ने भी सही लिखा है कि दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष पद के लिये प्रख्यात लेखिका मैत्रेयी पुष्पा का नाम प्रस्तावित करके अरविन्द केजरीवाल ने अच्छा संकेत दिया है। इसके पूर्व इस तरह के पद अपनी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं को सौगात के रूप में बाँटें जाते रहे हैं। इसी तरह अभी दो माह पूर्व झारखण्ड महिला आयोग के अध्यक्ष के रूप में जानी मानी हिन्दी कथाकार महुआ माजी की नियुक्ति की गयी है। यह एक अच्छी परम्परा की शुरुवात हुयी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि 'आप' सरकार दिल्ली साहित्य अकादमी के अध्यक्ष के रिक्त पद पर भी किसी प्रतिष्ठित साहित्यकार को मनोनीत करेगी। मैत्रेयी पुष्पा जी को हार्दिक बधाई।

हमारे दूसरे जंगी साथी अभिषेक श्रीवास्तव ने लिखा हैः

पता नहीं क्‍योंबचपन से ही "ऐ मेरे वतन के लोगों…सुनकर मन करता है कि लगे हाथ आजादी के आंदोलन में बोरिया-बिस्‍तर लेकर कूद पड़ूं। मेरे भीतर हालांकि देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर नहीं भरी हैफिर भी इतना घटिया गाना शायद मैंने नहीं सुना आज तक।

हम इस गीत को घटिया नहीं मानते। भारत चीन युद्ध के सदमे से उबरने के लिये पस्त हौसला देश के बाशिन्दों के लिये इस गीत की प्रासंगिकता अपनी जगह है, ठीक उसी तरह जैसे स्वर कोकिला लता मंगेशकर अब भी इस महादेश की सर्वश्रेष्ठ गायिका हैं। लेकिन सत्ता संघर्ष में इस ऐतिहासिक देशभक्ति गीत का जो निर्लज्ज इस्तेमाल हो रहा है और जिस तरह लता जी को राजनीति के दलदल में धकेला जा रहा है, इससे अंध राष्ट्रवादी कॉरपोरेट तिलिस्म का भयावह स्वरूप सामने आ ही जाना चाहिए।

परमाणु आयुधों और अंतरिक्ष अभियान से कालाधन की अर्थ व्यवस्था का ही निर्माम हुआ है और राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के नाम पर अंध राष्ट्रवाद की पूँजी ही निरंकुश कॉरपोरेट राज की असली ताकत है। जैसे सेना पर बहादुर हमारे देशभक्त जवान हैं, उसी तरह सही मायने में एकजुट देशवासियों की सजगता से ही देश की एकता और अखंडता हो सकती है, नस्ली भेदभाव, दमन और उत्पीड़न के मध्य पारमाणविक होड़ से नहीं।

सन 62 से लेकर सन 65 की धुँधली तस्वीरें हमारे दिमाग में कैद हैं। युद्धक तैयारियों की नींव उसी हिमालयी भूल की गहराइयों में है। कालाधन के थोक कारोबार बतौर रक्षा सौदों का सिलसिला तभी से है। उस वक्त महंगाई, मुद्रास्फीति और उत्पादन दर की कोई समस्या थी नहीं। सन् 65 में भारत पाक युद्ध के अवसान के बाद पीएल 480 और हरित क्रांति के जरिये तभी से हम आहिस्ते-आहिस्ते अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील होते गये।

समाजवादी विकास के मध्य जो युद्धक तकनीकी कॉरपोरेट पूँजी का गठबंधन आकार लेने लगा, उसी के ईश्वर बनकर अवतरित हुये मनमोहन सिंह औक कॉरपोरेट देवमंडल ने हमें अपने देश से ही बेदखल कर दिया। साठ के दशक में जो खाद्य आन्दोलन हुआ, उस वक्त भी उत्तर भारत में चावल, दाल, सरसों तेल, आटा प्रति किलो अठन्नी से कम है।

अंध राष्ट्रवाद का महाविस्फोट हुआ बांग्लादेश युद्ध में एकतरफा जीत से और तभी से हम निरंतर युद्धोन्माद में जी रहे हैं, तभी से हम निरंतर जल जंगल जमीन आजीविका और नागरिकता से बेदखल हो रहे हैं। तभी से जारी है अविराम उत्पीड़न, दमन, बहिष्कार और बेदखली का सिलसिला। कभी समाजवाद के नाम पर तो कभी विकास के नाम पर। तभी से देश दरअसल मुक्त बाजार है। मुक्त बाजार का अनिवार्य तत्व है यह अंध धर्मोन्माद जिसका पहला शिकार बतौर सिखों का जनसंहार सम्पन्न हुआ।

अब मसला सिर्फ सिखों का नहीं है। सिखों के अलगाव की वजह से ही उनका जनसंहार सम्भव हुआ। आदिवासी भी इसी अलगाव के शिकार हैं तो देश के मुसलनमान भी इसी अलगाव के दुश्चक्र में फँसकर लगातार लगातार दंगों से लहूलुहान है। लहूलुहान हैं कश्मीर, पूर्वोत्तर और समूचा आदिवासी भूगोल।

राज्यतन्त्र और सत्ता की राजनीति की हत्यारी भूमिका तो है ही, लेकिन असल हत्यारा है हमारा यह अंध राष्ट्रवाद,जो बहिष्कार की नस्लभेदी मनुस्मृति के उत्तर आधुनिक जायनवादी मुक्त बाजार के एकदम माफिक है।

किसी को भी राष्ट्रद्रोही कह देने से हम सीधे उसे राष्ट्रद्रोही मान लेते हैं और महिषासुर वध के उत्सव में शामिल हो जाते हैं। सम्वाद यहाँ देशद्रोह है।

रक्षा सौदों की गोपनीयता राष्ट्रीय सुरक्षा का पवित्र मामला है जो खुल्लमखुल्ला कालाधन का थोक जखीरा है। कोई कानूनी या संवैधानिक रक्षा कवच नहीं, इन तामाम घोटालों का असली रक्षाकवच है अंध राष्ट्रवाद। आर्थिक सुधारोंके नाम पर मनुष्यता और प्रकृति पर्यावरण का जो महासर्वनाश आयोजन है, उसका आधार भी यह अंध राष्ट्रवाद है।

असंवैधानिक आधार बायोमेट्रिक डिजिटल रोबोटिक वध आयोजन के पीछे फिर वही एकता, अखण्डता और फर्जी सुरक्षा के फर्जी नारे।

अंध राष्ट्रवाद की ही वजह से हम बार-बार निर्वस्त्र होने को अभ्यस्त हैं और वधस्थल पर बलिप्रदत्त भी।

अर्थव्यवस्था, रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, आन्तरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, आतंक के विरुद्ध युद्ध, विदेशी पूँजी, सशस्त्र सैन्य विशेषाधिकार कानून, सिख जनसंहार, बाबरी विध्वंस, भोपाल गैस त्रासदी, रोजमर्रे के दंगों, कश्मीर, आदिवासी भूगोल, पूर्वोत्तर और वंचित समुदायों की आवाज बाकी देश सुनता ही नहीं है, इसलिये राज्यतन्त्र, सत्ता की राजनीति और कॉरपोरेट वर्चस्व के साथ विदेशी शक्तियों को भारत राष्ट्र के विरुद्ध कुछ भी करने की खुली छूट देते हुये हम देश बेचो ब्रिगेड के पक्ष में लाम बंद हैं।

… और दरअसल यह अंध राष्ट्रवाद सबसे भयानक राष्ट्रद्रोह है।

रियाजुल के पोस्ट पर फेसबुक प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प हैं। गौर करें-

Sanjay Tiwari वन्दे मातरम् गिरोह कहां है? अभी तक राष्ट्रप्रेम का कोई निशान नजर नहीं आया?

Yesterday at 7:39am · Like · 1

Reyazul Haque- Kalakar to kalakar hota hai, yah anmol vachan logon ko tab nahin yaad atey jan koi kalakar jail me dal diya jata hai.ye sahulat bhi modiparaston aur un jaiso ko hi milti hai.

Yesterday at 10:38am · Like

Mitra Ranjan- behad durbhagypoorn ki mere vichar bhi kuch ap hee se milte-julte hain

Yesterday at 1:09pm · Like · 1

Anjani Kumar- pahali hi line me aasu ki jaga paani aa jata hai…..phir dharm aur jaati…..guru abhishek! ek vajpaye hua karate the, isi gane ko sun sun kar jhumate rahate the…..aur shayad pagala bhi gaye. pata nahi kaha hai….

19 hours ago · Like · 1

Palash Biswas- अंध राष्ट्रवाद ही कालाधनमूलक कॉरपोरेटराज की असल पूँजी है

a few seconds ago · Like

Uday Prakashसब ठीक ही है। पहले जैसा ही।

बस समझ में ये नहीं आता कि तमाम साम्प्रदायिक दंगों में, अनगिनत जन-संहारों के दोषियों को 'क्लीन-चिट' कौन देता है ?

१९४७,१९८४, २००२ या २०१३ या और भी जो छूट रहे हैं इधर।

हमारे जैसों के जीवन को असह्य और दारुण बनाने वाले हर रोज़ सत्ताओं के शिखरों पर क्यों आसीन दिखाई देते हैं ?

सत्ता और न्याय प्रणाली है किनके लिये ? वे कौन हैं ?

क्या हम नहीं जानते ?

मुक्तिबोध की एक कविता है : 'इस चौड़े ऊंचे टीले पर'. उसकी पंक्तियाँ हैं :

"कमरे के भीतर कमरे हैं,

परदों के भीतर परदे हैं,

जो सबके अंदर ठीक केंद्र में बैठा है,

वह एक बड़ा अफसर है, उसी की सत्ता है।

आतंक बहुत

उसके दिमाग़ में गुपचुप जो चलता है

वह सरकारी गुप्तता -नियम के अंतर्गत

अनकहा रहेगा आख़िर तक, हाँ आख़िर तक। "

(अब कौन बनेगा हमारे समय की सत्ताओं के दिमाग़ का गुप्तचर ?)

Like · · Share · about an hour ago · Edited ·

Jagadishwar Chaturvedi - वामशासन के दौरान हुये चर्चित नंदीग्राम गोलीकांड पर आज सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपनी चार्जशीट जमा की है इस चार्जशीट में ममता बनर्जी के उस समय लगाए सभी आरोपों को एकसिरे से अस्वीकार करते हुये उन परिस्थितियों का विवरण दिया गया है और बताया है कि नंदीग्राम भूमि उच्छेद कमेटी ने झूठा प्रचार किया। गाँव वालों को इकट्ठा किया, हिंसा के लिये भड़काया। और पुलिसबलों पर हथियारों से हमला किया, पत्थरबाज़ी की। भीड़ के साथ अपराधी भी सक्रिय थे और भीड़ में से वे पीछे से फ़ायरिंग कर रहे थे।

पुलिस और माकपा के संयुक्त हमले की ममता बनर्जी की झूठगाथा को चार्जशीट में कोई जगह नहीं दी गयी है बल्कि ममतापंथी भूमिउच्छेद कमेटी पर हिंसा भड़काने और पुलिस बलों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही बताया है कि पुलिस ने मजबूरी में फ़ायरिंग की। यह चार्जशीट फिर से बुद्धदेव सरकार के बयान की पुष्टि करती है।

Like · · Share · about an hour ago ·

Himanshu Kumarमुज़फ्फर नगर दंगों के बारे में भाजपा ने झूठ फैलाया है कि ये दंगा कवाल गाँव में एक लड़की के साथ छेड़खानी के कारण हुआ।

मैंने कवाल की एफआईआर हासिल कर ली है। इस में किसी छेड़खानी का कोई ज़िक्र नहीं है। सिर्फ साईकिल और मोटरसाइकिल की टक्कर का मामला था।

लेकिन भाजपाइयों ने ज़बरदस्ती इसे लड़की के साथ छेड़खानी का मामला बनाया और दंगे करवाए ताकि हिंदू वोटों इकठ्ठा कर भाजपा की झोली में डाला जा सके।

शाहनवाज़ को मारने छह लोग गए थे। हत्या करने के बाद दो हत्यारे मारे गए और चार हत्यारे भाग निकले।

भाग खड़े हुये चार हत्यारे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

इस एफ आई आर में गौरव के पिता ने स्वयं कबूला है कि वह भी घटना स्थल पर मौजूद था। इसके बावजूद भी आज तक मुजस्सिम उर्फ शाहनवाज़ की हत्या करने पर किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।

एफ आई आर की प्रतिलिपि नीचे दी गयी है

एफ आई आर नम्बर ४०३/ १३

धारा १४७- १४८- १४९- ३०२, ५०६ भारतीय दंड संहिता व ७ क्रिमिनल ला एक्ट थाना जानसठ, जिला मुज़फ्फर नगर दिनांक २७- ०८ २०१३ , समय ४ : ४५

वादी का नाम- रविन्द्र पुत्र तिलक राम निवासी मलिकपुरा माजरा कवाल थाना जानसठ जिला मुज़फ्फर नगर

९५५७८७८६८३

प्रतिवादी के नाम

मुजस्सिम S/O नसीम उर्फ कल्लू कुरैशी

बिल्ला S/O नसीम

फुरकान S/O फज़ल कुरैशी

जहांगीर S/O सलीम उर्फ मेघा

कलवा S/O सलीम

अफजाल S/O इकबाल

नदीम S/O सलीम

असल तहरीर हिन्दी कापी

सेवा में

श्रीमान प्रभारी निरीक्षक

थाना जानसठ

निवेदन है कि प्रार्थी रविन्द्र पुत्र तिलकराम गाँव मलिकपुरा माजरा कवाल थाना जानसठ में ज़मीन खरीद कर खेती करता है। वह यहीं का निवासी है। मेरा लड़का गौरव कुमार कक्षा बारह, जनता इंटर कालेज का विद्यार्थी था। वह रोज स्कूल कवाल से होकर जाता था। एक दिन पहले मेरे लड़के के साथ कवाल के मुजस्सिम के साथ साइकिल टकराने पर कहा सुनी हो गयी थी। इस बात को मेरे बेटे गौरव ने मुझे आकर बताया था। आज दिनांक २७ / ०८ / २०१३ को मैं अपने बेटे गौरव और उसके मामा के बेटे सचिन को स्कूल से लेकर गाँव वापिस जा रहा था। जब हम लोग करीब एक बजे दिन गाँव कवाल में चौराहे पर पहुंचे वहाँ पहले से मुजस्सिम पुत्र नसीम उर्फ कल्लू कुरैशी व बिल्ला S/O नसीम उर्फ कल्लू कुरैशी फुरकान पुत्र फज़ल निवासी कवाल अपने हाथों में सरिया डंडे व चाकू लिये खड़े मिले और गौरव को गाली देते हुये कहा कि साले तू कल बहुत अकड़ रहा था, आज तुझे इसका मज़ा चखाते हैं। और मेरे लड़के गौरव व सचिन पर लाठी सरिया चाकू से जान से मारने की नियत से हमला कर दिया। मैं गौरव व सचिन भागे तो सामने से जहांगीर पुत्र सलीम उर्फ मेघा ने घेर लिया और उन्होंने सरिया आदि से मारपीट की। मैं बच कर भागा व शोर मचाया तो शोर पर जगदीश S/O सतवीर निवासी नंगला मुबारिकपुर, सोमपाल सिंह S/O जगदीश निवासी सिखेड़ा व सर्वेंदर उर्फ कालू S/O इलम सिंह निवासी सिखेड़ा गवाहान आ गये जिन्होंने यह घटना देखी है। ये लोग इन लोगों को मारते रहे जब तक वह मर नहीं गए, और हम गवाहान को मारने की धमकी दी .

इस दौरान कलवा पुत्र मेघा की उसी के साथियों के हथियारों से चोट आयी थी जिसे वह उठा कर ले गए। उन लोगों के भय व डर के कारण जनता के लोगों ने अपने दरवाजे बंद कर लिये दुकानदारों ने अपने शटर व दुकाने बंद कर लिये राहगीर भी भाग खड़े हुये। दोनों लाश मौके पर पड़ी हैं। रिपोर्ट दर्ज़ कर कार्यवाही करने की कृपा करें।

प्रार्थी

रविन्द्र कुमार S/O तिलकराम जाति जाट

निवासी मलिकपुरा माजरा कवाल थाना जानसठ जिला मुज़फ्फर नगर

फोन ९९५५१८२८६८३

लेखक -अमित कुमार निवासी सिखेड़ा थाना

Like · · Share · 2 hours ago near Delhi ·

Bijan Hazra shared his photo.

About The Author

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। "अमेरिका से सावधान "उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना ।

No comments:

मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

Tweet Please

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA

THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER

http://youtu.be/NrcmNEjaN8c The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today. http://youtu.be/NrcmNEjaN8c Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program ______________________________________________________ By JIM YARDLEY http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR

Published on 10 Apr 2013 Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya. http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP

[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also. He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM

Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia. http://youtu.be/lD2_V7CB2Is

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk