कोयले की कोठरी में मुंह काला! कोयला खदानों की लाइसेंसिग में 10 लाख 67 हजार करोड़ के घोटाला!155 कोयला खदानों के इस्तेमाल की इजाजत बिना नीलामी के ही दे दी गई!
सीएजी की रिपोर्ट साल 2004 से 2009 के बीच के समय का जिक्र किया गया है, खास बात यह कि साल 2006 से 2009 के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय था।
मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोयले की कोठरी में मुंह काला! 2जी घोटाले पर उठा विरोध अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया है और अब सरकार कोयला घोटाले में घिर गई है। सरकार एक बार फिर देश के सामने कटघरे में खड़ी दिख रही है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कैग रिपोर्ट के अनुसार यूपीए सरकार ने देश के सामने एक नए घोटाले को पेश किया है।कैग के मुताबिक कोयला खदानों की लाइसेंसिग में 10 लाख 67 हजार करोड़ के घोटाले की आशंका है, और इसके अलावा 155 कोयला खदानों के इस्तेमाल की इजाजत बिना नीलामी के ही दे दी गई है।यानी यूपीए सरकार ने राज्य में देश के कोयला खदानों का बंदरबाट कर देश के खजाने को करीब 10.7 लाख करोड़ का नुकसान किया गया है।कैग रिपोर्ट में सरकार पर आरोप है कि कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बगैर नीलामी के ही टेंडर कंपनियों को दे दिए गए।यदि घोटाला साबित हुआ तो यह 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले से कई गुना बड़ा होगा। कैग रिपोर्ट की बातों को माने तो ये टेलीकॉम घोटाले से 6 गुना बड़ा घोटाला है।गौरतलब है कि कोयले का कारोबार भी उसी की तरह काला है! कोयले के काला बाजार में सफेदपोशों की चलती है जिसके कारण यह माफियाओं की पहली पसंद बन गया है!
इस खुलासे से खोयला उद्योग में हड़कंप मच गया है।कोयला मंत्रालय के 155 कोयला खदानों को नीलाम न करने से पब्लिक सेक्टर यूनिट्स जैसे एनटीपीसी समेत कुल 10 कंपनियों को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचा। मालूम हो कि कोल इंडिया की कीमत पर बिजली क्षेत्र कोपर सरकार जरुरत से ज्यादा मेहरबान है। बजट में भी बिजली के लिए कोयला आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए खास इंतजाम है। मालूम हो कि कोयला काफी मलाईदार महकमा है। इस घोटाले में खासकर शिबू सोरेन पर उंगलियां उठ रही है। पर आगे पीछे दूसरे लोग राष्ट्रीयकरण के बाद से और फिर उदारीकरण के दौर में कोयला मंत्रक और कोल इंटिया से जुड़े रहे हैं, वे दूध के धुले हैं , ऐसा नहीं है।कोयलाघोटालों की सिरे से जांच ईमानदारी के साथ बिना भेदभाव की जाये, तो घोटाला देश के काला धन से यकीनन कम नहीं होगा। कोयला उद्योग जहां जहां पसरा है, खदानों से लेकर दफ्तरों तक सफेदपोश माफिया राज है। जो इस रपट के खुलासे तो खत्म होने वाला नहीं है। दो चार दिन के संसदीय हंगामे के बाद कोयलागाड़ी धड़धड़ाकर आगे चलती रहेगी।
कोयला खदान की कालिख संसद पहुंची,करीब 11 लाख करोड़ के कोयला घोटाले में विपक्ष ने यूपीए सरकार और प्रधानमंत्री पर जबरदस्त हमला बोल दिया है।मीडिया में सीएजी की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार की मुश्किल बढ़ गई है। रिपोर्ट में साल 2004 से 2009 के बीच के समय का जिक्र किया गया है, खास बात यह कि साल 2006 से 2009 के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय था। विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की है। शिवसेना और जनता दल (यू) ने सीधे-सीधे प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए इस्तीफा मांगा है। वहीं, लेफ्ट पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री इस पूरे मामले में सदन में सरकार की स्थिति बताएं, जबकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा और सरकार को समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी ने लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित कर रिपोर्ट पर चर्चा कराने की मांग की है।वाम दल के डी. राजा ने कहा कि यह बहुत गंभीर अपराध है। खदानें देश की संपदा हैं। सरकार बगैर नीलामी के खदानों को कैसे बेच सकती है। यह राष्ट्रीय संपदा की बहुत बड़ी लूट है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मामले में सरकार की स्थिति साफ करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घोटाले सरकार की गलत नीतियों के कारण हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने कोल इंडिया को सख्त निर्देश दिया है कि वह बिजली कंपनियों को दीर्घकालिक कोयला आपूर्ति की गारंटी दे, नहीं तो उस पर पेनाल्टी लगाई जा सकती है। यह पहल सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से की गई है। निर्देश में कहा गया है कि कोल इंडिया 2015 में चालू की जानेवाले बिजली परियोजनाओं के साथ 20 साल तक ईंधन (कोयला) सप्लाई करने का करार करे।सरकारी बयान के अनुसार इससे देश में 50,000 मेगावॉट से ज्यादा बिजली पैदा की जा सकेगी। अभी तक कोल इंडिया ज्यादा से ज्यादा पांच साल तक कोयला देने का अनुबंध करती रही है। बता दें कि देश के कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का एकाधिकार है। कुल उपलब्ध कोयले का 82 फीसदी उत्पादन अकेले यह कंपनी करती है।सरकार के ताजा निर्देश की खबर मिलते ही निजी क्षेत्र की तमाम बिजली कंपनियों के शेयर छलांग लगा गए। रिलांयस पावर के शेयर में 12.9 फीसदी, टाटा पावर में 6 फीसदी और अडानी पावर में 13.78 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। सरकार का यह फैसला बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गुहार लगाने का नतीजा है। ये लोग 18 जनवरी 2012 को प्रधानमंत्री से मिले थे। उनकी शिकायत थी कि कोल इंडिया सिर्फ 50 फीसदी कोयला आपूर्ति का आश्वासन देती है जिसके चलते अप्रैल 2009 से किसी करार पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।आखिरकार प्रधानमंत्री ने किस दिलच्स्पी के तहत बिजली महकमे को फायदा पहुंचाने के लिए पहल की, ्ब इसका भी खुलासा होना चाहिए।
कैग के मुताबिक, 31 मार्च 2011 की कीमत को आधार बनाएं, तो सरकारी खजाने को 10.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैग का कहना है कि नुकसान का आकलन करते वक्त सबसे घटिया श्रेणी के कोयले की कीमत को आधार बनाया है। मध्यम श्रेणी के कोयले की कीमत के आधार पर यह आकलन किया जाता, तो नुकसान कहीं ज्यादा बैठता। अगर यह अनुमान कोयला खदान आवंटन के समय(2004-2009) को आधार बनाकर लगाया जाए, तब भी नुकसान का आंकड़ा 6.31 लाख करोड़ रुपये से ऊपर होगा।
कैग के मुताबिक अब जाकर कहीं खुलासा हुआ कि बगैर निलामी की प्रक्रिया अपनाए ही औने-पौने दाम में लाइसेंस कुछ खास कंपनियों को दे दिए गए। गौरतलब है कि साल 2004-09 के बीच शिबू सोरेन कोयला मंत्री थे।वर्ष 2004 से 2009 के बीच 155 कोयला खदानों के इस्तेमाल की इजाजत बिना नीलामी के ही दे दी गई। इस दौरान 33 हजार मिलियन टन से ज्यादा कोयले की गैरकानूनी माइनिंग हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कंपनियों को फायदा पहुंचना के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई। ये कंपनियां पॉवर, स्टील और सीमेंट उद्योगों से जुड़ी हुई हैं।इस घोटाले का फायदा 100 से ज्यादा प्राइवेट कंपनियों के अलावा कुछ पब्लिक सेक्टर यूनिट्स ने भी उठाया। ये कंपनियां पॉवर, स्टील और सीमेंट उद्योगों से जुड़ी हुई हैं।निजी क्षेत्र की बेनिफिशियरीज की बात करें तो इस लिस्ट में टाटा ग्रुप की कंपनीज, जिंदल स्टील ऐंड पावर लिमिटेड, इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग्स लिमिटेड, अनिल अग्रवाल ग्रुप फर्म्स, दिल्ली की भूषण पावर ऐंड स्टील लिमिटेड, जायसवाल नेको, आदित्य बिड़ला ग्रुप कंपनीज, एस्सार ग्रुप पावर वेंचर्स, अदानी ग्रुप, आर्सेलर मित्तल इंडिया, लैंको ग्रुप जैसे बड़े नाम शामिल हैं। पावर सेक्टर की दिग्गज खिलाड़ी रिलायंस पावर सासन और तिलैया में मेगा पावर प्रॉजेक्ट्स पर काम कर रही है। रिलायंस पावर इस लिस्ट में शामिल नहीं है, क्योंकि इस रिपोर्ट में 12 कोयला ब्लॉक्स को शामिल नहीं किया गया है। इन ब्लॉक्स का आवंटन टैरिफ आधारित बिडिंग रूट के जरिए किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक कई पब्लिक सेक्टर कंपनियों ने भी कोयला खदानों की इस धांधली में जमकर फायदा उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले से पब्लिक सेक्टर कंपनी को एनटीपीसी को 35 हजार 24 करोड़, टीएनईबी एंड एमएसएमसीएल को 26 हजार 584 करोड़, एमएमटीसी को 18 हजार 628 करोड़ का, सीएमडीसी को 16 हजार 498 करोड़, जेएसएमडीसीएल को ग्यारह हजार 988 करोड़ का फायदा पहुंचा।
सीएजी की 110 पेज की रिपोर्ट संसद में बजट के पास होने के बाद रखी जा सकती है। यह रिपोर्ट फाइनल रिपोर्ट की तरह ही है। संसद में आम बजट पारित होने के बाद इसे पेश किए जाने की उम्मीद है। इस मुद्दे पर गुरुवार को संसद में प्रश्नकाल के दौरान जमकर हंगामा हुआ। सदन के दोनों सदनों की कार्रवाई दोपहर 12 बजे तक स्थगीत कर दी गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सपा नेता रेवती रमन सिंह से बात कर इस मुद्दे पर सपा से समर्थन भी मांगा। कैग रिपोर्ट से संबंधित खबरों पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।प्रत्येक ब्लॉक के 90 फीसदी रिज़र्व के आधार पर कैलकुलेशन को देखें तो कुल मिलाकर कैग ने 33,169 मिलियन टन कोयला भंडार पर अपनी रिपोर्ट दी है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इतना कोयला 150,000 मेगावॉट बिजली पैदा करने के लिए पर्याप्त है। बगैर नीलामी आवंटन से निजी और सराकरी, दोनों क्षेत्र की कंपनियों को फायदा पहुंचा है। निजी कंपनियों के खजाने में करीब 4.79 लाख करोड़ की रकम गई, तो सरकारी कंपनियों ने 5.88 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा जोड़ा।
भारत के छह सौ मिलियन टन के घरेलू कोयला उत्पादन में से लगभग 80 प्रतिशत का आवंटन कोयला मंत्रालय की प्रशासनिक समितियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के आवेदकों को किया गया। अतिरिक्त 10 प्रतिशत की बिक्री ऑनलाइन ई-नीलामी के माध्यम से की गई, जिसके परिणामस्वरूप अच्छा-खासा राजस्व भी मिला है। 2009-10 में ई-नीलामी मूल्य औसतन अधिसूचित मूल्यों से लगभग 60 प्रतिशत ऊपर रहा. अवरुद्ध कोयला ब्लॉक, जिन्हें जल्द ही प्रतियोगी बोलियों के माध्यम से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को आवंटित कर दिया जाएगा, 19 प्रतिशत अतिरिक्त था। अंतत: घरेलू कोयला उत्पादन का आ़खिरी 1 प्रतिशत राज्य सरकार की एजेंसियों को, जो इसे स्थानीय बाज़ारों को उपलब्ध करा देते हैं, आवंटित कर दिया जाता है।
संसद में हंगामे के बाद कांग्रेस 'डैमेज कंट्रोल' करने में जुट गई है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सपा नेता रेवती रमण सिंह से बात की है। कैग की रिपोर्ट पर जब टाइम्स नाउ ने कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल से प्रतिक्रिया मांगी,तो उन्होंने कहा कि हवा में आई किसी रिपोर्ट पर वह जवाब नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने कैग से संपर्क साधा है और अगर ऐसी कोई रिपोर्ट है तो शाम तक उन्हें मिल जाएगी। इसके बाद ही इस पर कोई प्रतिक्रिया दी जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय और कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कुछ भी टिप्पणी से इनकार कर दिया है।।दूसरी तरफ अन्ना की वरिष्ठ सहयोगी किरण बेदी ने कहा कि मीडिया और कैग भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे हैं। कोई भी मंत्रालय ऐसा नहीं है जहां घोटाला नहीं हुआ है। सरकार इसी वजह से लोकपाल बिल नहीं लाना चाह रही है।कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला ने कहा है कि कोई घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट संसद में नहीं रखी जाती है। शुक्ला ने कहा है कि नीलामी होती तो बोझ जनता पर पड़ता। गौरतलब है कि वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने यह कहते हुए सरकार का बचाव करने की कोशिश की है कि यह कोई घोटाला नहीं है, बल्कि इसमें सिर्फ घाटा हो सकता है। गौरतलब है कि सीएजी ने अभी इस मामले में ड्राफ्ट रिपोर्ट ही तैयार की है। सीएजी को इस बाबत अंतिम रिपोर्ट अभी तैयार करना बाकी है।
सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा, जद यू, वाममोर्चा, अकाली दल के सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की।जदयू सदस्यों ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को थर्मल पावर स्टेशन के विस्तार के लिए कोल लिंकेज नहीं दे रही है और देश में कोयला ब्लॉक के आवंटन में 10 लाख करोड़ रुपए का घोटाला हो रहा है।
गौरतलब है कि सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खजाने को यह नुकसान 2004-09 के बीच हुआ। इस दौरान शिबू सोरेन कोयला मंत्री थे। हालांकि, कुछ समय के लिए यह मंत्रालय प्रधानमंत्री के पास भी था। बीजेपी ने इसी को आधार बनाकर प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा है। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने संसद में प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए नोटिस देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा है कि अब केंद्र सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। वहीं, लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि हम लोगों ने कोयला खदानों की नीलामी करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस पर अमल नहीं किया।
अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने और शून्यकाल में इस विषय को उठाने को कहा लेकिन सदस्यों ने शोर शराबा जारी रखा।
भाजपा, जद यू, वाममोर्चा के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आ गए। वहीं, सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली सपा और बसपा के सदस्य भी अपने स्थान से इस विषय को उठाते देखे गए। शोर शराबा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), सिंगरेनी कोल कोलियरी लिमिटेड (एससीसीएल) और नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (एनएलसी) के बीच राज्यों की स्वाधिकृत कंपनियों के उत्पादन के अल्पाधिकार की भरपाई ऐतिहासिक रूप में क्रय के एकाधिकार द्वारा की जाती रही है। उदारीकरण से पहले तक कोयले के सबसे बड़े औद्योगिक उपभोक्ता अर्थात बिजली, लोहा व इस्पात और सीमेंट के कारख़ाने भी ज़्यादातर राज्यों के स्वाधिकृत कारख़ाने ही रहे हैं, लेकिन वास्तव में रेलवे ही एक ऐसी संस्था है जिसके पास कोयले को बड़े पैमाने पर उठाने और उसे वितरित करने की अच्छी-खासी मूल्य-शक्ति है। उदारीकरण के बाद जब ये जि़म्मेदारियां सीआईएल को औपचारिक रूप में सौंप दी गईं, तब कोयला मंत्रालय ने 2000 के दशक की शुरुआत तक मूल्यों पर नियंत्रण बनाए रखा। फिर भी आयात-समानता के मूल्यों पर केवल कोयले के उच्चतम ग्रेड ही बेचे गए और भारत का अधिकांश उत्पादन निचले ग्रेड का होने के कारण कम मूल्य पर बेचा गया और हो सकता है कि इन मूल्यों का निर्देश अनिवार्य वस्तुओं, खास तौर पर बिजली की लागत को कम रखने के लिए कदाचित कोयला मंत्रालय द्वारा दिया गया था। सन 2011 के आरंभ में सीआईएल ने विभेदक मूल्य प्रणाली शुरू की, जिसके आधार पर बाज़ार-संचालित क्षेत्रों के लिए उच्चतर मूल्य तय किए गए।
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THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION!
Published on Mar 19, 2013
The Himalayan Voice
Cambridge, Massachusetts
United States of America
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Download Bengali Fonts to read Bengali
Imminent Massive earthquake in the Himalayas
Palash Biswas on Citizenship Amendment Act
Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003
Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003
http://youtu.be/zGDfsLzxTXo
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THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA
THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER
http://youtu.be/NrcmNEjaN8c
The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today.
http://youtu.be/NrcmNEjaN8c
Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program
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By JIM YARDLEY
http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA
THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR
Published on 10 Apr 2013
Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya.
http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE
अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।'
http://youtu.be/j8GXlmSBbbk
THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST
We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas.
http://youtu.be/7IzWUpRECJM
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP
[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also.
He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT
THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM
Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia.
http://youtu.be/lD2_V7CB2Is
THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE
अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।'
http://youtu.be/j8GXlmSBbbk


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