एस आई आर मामले में जितना दोषी चुनाव आयोग है,उससे कम दोषी सुप्रीन कोर्ट नहीं है। एस आई आर मामले में फैसला टालने और न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होने के कारण भारत के तेरह करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया।न्याय का तराजू सत्ता के पक्ष में ही रहा।
सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ही क्यों?
क्यों नहीं,भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाया जाए? क्या विपक्ष ऐसा नहीं कर सकता?
लोकतंत्र की हत्या के सिर्फ एक हत्यारे को ही क्यों,सभी हत्यारों को क्यों नहीं कठघरे में खड़े करते आप?
हाँ, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ पद से हटाने की प्रक्रिया चलाई जा सकती है, जिसे आम बोलचाल में महाभियोग (Impeachment) कहा जाता है। हालांकि संविधान में जजों के लिए 'महाभियोग' शब्द केवल राष्ट्रपति (अनुच्छेद 61) के लिए है, जबकि जजों के लिए 'पदच्युत' (Removal) शब्द का प्रयोग होता है।
हटाने का आधार
सिद्ध दुराचार (Proved Misbehaviour)
अक्षमता (Incapacity)
प्रक्रिया (Judges Inquiry Act, 1968)
प्रस्ताव की शुरुआत: संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है। लोकसभा में कम से कम 100 सांसद या राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षरयुक्त नोटिस की आवश्यकता होती है।
जांच समिति: यदि लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति प्रस्ताव स्वीकार करते हैं, तो तीन सदस्यीय जांच समिति बनती है जो आरोपों की जांच करती है।
संसद में मतदान: समिति द्वारा दोषी पाए जाने पर प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से पारित होना अनिवार्य है।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर: दोनों सदनों से पास होने के बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास जाता है, और राष्ट्रपति के आदेश पर ही जज को हटाया जाता है।
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