खाद्य विधेयक एक ‘क्रूर मजाक’, लेकिन भाजपा नहीं करेगी विरोध
खाद्य विधेयक एक 'क्रूर मजाक', लेकिन भाजपा नहीं करेगी विरोध
| Saturday, 06 July 2013 16:48 |
नागपुर । खाद्य सुरक्षा विधेयक के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लाए गए अध्यादेश लोकतंत्र पर ''क्रूर मजाक'' है। खाद्य सुरक्षा विधेयक के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लाए गए अध्यादेश को लोकतंत्र पर ''क्रूर मजाक'' करार देते हुए भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आज कहा कि उनकी पार्टी संसद में विधेयक को पारित किए जाने का विरोध नहीं करेगी, लेकिन इसमें संशोधनों की मांग करेगी । राजनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ :आरएसएस: प्रमुख से यहां संघ मुख्यालय में मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ''हम संसद के आगामी मानसून सत्र में इसका :विधेयक: विरोध नहीं करेंगे, लेकिन इसमें कुछ खास संशोधन चाहते हैं ।'' हालांकि, उन्होंने इस बारे में स्पष्ट नहीं किया कि भाजपा क्या संशोधन लाना चाहती है । विधेयक को लाने में विलम्ब पर सवाल उठाते हुए राजनाथ ने कहा, ''संप्रग नीत कांग्रेस सरकार ने विधेयक को पारित कराने में इतना समय क्यों लगाया और वह भी अध्यादेश के जरिए, जबकि इसने 2004 के चुनावों में वायदा किया था कि सत्ता में आने के 100 दिन के भीतर विधेयक लाया जाएगा ।'' योजना देश की 67 प्रतिशत आबादी को हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम अनाज एक से तीन रूपये प्रति किलोग्राम की दर से मुहैया कराने पर केंद्रित है । योजना का लाभ 80 करोड़ लोगों को मिलने की संभावना है और सरकार को योजना पर 1,25,000 करोड़ रूपये खर्च करने होंगे । कार्यान्वित होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम होगा । बुधवार को मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए अध्यादेश पर शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हस्ताक्षर कर दिए थे । राजनाथ ने कहा, ''जब मानसून सत्र नजदीक है तो विधेयक पर अध्यादेश लाने की क्या जल्दबाजी थी...अध्यादेश का रास्ता अपनाना और कुछ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ क्रूर मजाक है ।'' इस सवाल पर कि क्या भाजपा मानसून सत्र को बाधित करेगी, राजनाथ ने यह कहकर जवाब दिया, ''हमने इसे बाधित नहीं किया था ।'' उन्होंने कहा, ''संसदीय कार्यवाही में बाधा के लिए सिर्फ कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए ।'' राजनाथ ने संघ मुख्यालय का दौरा ऐसे समय किया है जब उनसे पहले वरिष्ठ पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी यहां का दौरा कर चुके हैं । अपने इस दौरे को ज्यादा महत्व न देते हुए राजनाथ ने कहा कि उन्होंने मोहन भागवत से सामान्य चर्चा की और इसमें ज्यादा कुछ नहीं देखा जाना चाहिए । (भाषा) |
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