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Thursday, February 2, 2012

लाइसेंस रद्द होने से मोबाइल बिल बढ़ने की आशंका11 दूरसंचार कंपनियों को आवंटित 122 लाईसेंस रद्द,चिदंबरम को थोड़ी राहत!भारत सरकार और राजनीति मुक्त बाजार व्यवस्था में किसतरह कारपोरेट कंपनियों के शिकंजे में हैं और लोकशाही के नाम पर राजस्व को चूना लगाकर रा


लाइसेंस रद्द होने से मोबाइल बिल बढ़ने की आशंका11 दूरसंचार कंपनियों को आवंटित 122 लाईसेंस रद्द,चिदंबरम को थोड़ी राहत!भारत सरकार और राजनीति मुक्त बाजार व्यवस्था में किसतरह कारपोरेट कंपनियों के शिकंजे में हैं और लोकशाही के नाम पर राजस्व को चूना लगाकर राजनेता मालमाल हो रहे हैं, उसका खुलासा तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हो गया, पर बेशर्म भारत सरकार अपनी जवाबदेही से​ ​ साफ मुकर रही है। चिदंबरम को राहत ही नहीं मिली, राजा को बलि का बकरा बनाकर मामला रफा दफा किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में गृहमंत्री पी चिदंबरम को सह-आरोपी बनाए जाने के मामले पर कहा है कि इस पर सुनवाई अदालत फैसला सुनाएगी!

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में लाइसेंस रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज्यादा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। ट्राई ने कहा है कि इस फैसले से महज 5 प्रतिशत ग्राहक प्रभावित होंगे। इतना ही नहीं टैरिफ बढ़ने की भी ज्यादा संभावना नहीं है। दरअसल इन कंपनियों का ग्राहक आधार बहुत बड़ा नहीं है इसलिए भी यह असर ज्यादा नहीं होगा। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इश फैसले का असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।

पलाश विश्वास

सुप्रीम कोर्ट ने 2जी घोटाले में केंद्र सरकार को ज़बरदस्त झटका दिया है।दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को इस धारणा को खारिज किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा2जी मोबाइल सेवा के 122 लाइसेंस रद्द करने का गुरुवार का फैसला सरकार पर आक्षेप है। सिब्बल ने कहा है कि 2जी मामलों में लाइसेंस रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी है, और सरकार इसे मानेगी। ट्राई इस बीच स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए जल्द गाइडलाइंस जारी करेगी। कपिल सिब्बल के मुताबिक अनिश्चितताओं की वजह से टेलीकॉम सेक्टर पर असर पड़ा है। लेकिन सुप्रीम कोर्टके फैसले के बाद अब कांग्रेस खुद को बचाती फिर रही है।2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2008 के बाद दिए गए सभी 122 2जीलाइसेंस रद्द किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2जी लाइसेंस रद्द करने के फैसले से टेलिकॉम शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है। आइडिया सेल्यूलर 4 फीसदी से ज्यादा टूटकर 89.30 रुपये परआ गया है। टाटा टेलिसर्विसेस भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 15.55 रुपये परकारोबार कर रहा है। वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज 3 फीसदी की कमजोरी के साथ 168.50 रुपये परआ गया है।   

टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को थोड़ी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में अहम फैसला देते हुए 11 दूरसंचार कंपनियों को आवंटित 122 लाईसेंस रद्द करने के साथ ही इन कंपनियों पर पांच-पांच करोड़ रूपए जुर्माना लगाने का आदेश दिया। 2-जी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद मोबाइल बिल के बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है, हालांकि मोबाइल फोन बंद नहीं होंगे।


भारत सरकार और राजनीति मुक्त बाजार व्यवस्था में किसतरह कारपोरेट कंपनियों के शिकंजे में हैं और लोकशाही के नाम पर राजस्व को चूना लगाकर राजनेता मालमाल हो रहे हैं, उसका खुलासा तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हो गया, पर बेशर्म भारत सरकार अपनी जवाबदेही से​ ​ साफ मुकर रही है। चिदंबरम को राहत ही नहीं मिली, राजा को बलि का बकरा बनाकर मामला रफा दफा किया जा रहा है।जबकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इस बात के लिए जिम्मेदार माना है कि २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने के अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया। आगामी विधानसभा चुनावों में इस मामले के गरमाने की पूरी संभावना है। चुनावों से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सरकार परभारी पड़ सकता है।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में लाइसेंस रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज्यादा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। ट्राई ने कहा है कि इस फैसले से महज 5 प्रतिशत ग्राहक प्रभावित होंगे। इतना ही नहीं टैरिफ बढ़ने की भी ज्यादा संभावना नहीं है। दरअसल इन कंपनियों का ग्राहक आधार बहुत बड़ा नहीं है इसलिए भी यह असर ज्यादा नहीं होगा। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इश फैसले का असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।

इस फैसले के बाद आशंका जताई जा रही है मोबाइल कंपनियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉल दरें बढा सकती हैं।  टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि मोबाइल भाव बढने के बारे में सरकार कुछ नहीं कर सकती।


इससे जुड़े एक सवाल के जबाव में सिब्बल ने कहा, जब बिल आएगा, तब पता चलेगा, लेकिन इस बारे में सरकार कुछ नहीं करेगी. नए आवंटन पूरी तरह से ट्राई के सुझाव पर किए जाएंगे।


इसके साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सरकार ने सफाई दी है। टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले आओ, पहले पाओ की नीति के आधार पर दिए गए लाइसेंस रद्द किए हैं। ये नीति एनडीए सरकार के कार्यकाल में बनी थी और इस पर अमल के लिए पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा जिम्मेदार हैं।


सिब्बल के मुताबिक 2-जी घोटाले के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तब के वित्त मंत्री और मौजूदा गृह मंत्री पी चिदंबरम जिम्मेदार नहीं हैं.


केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि सरकार पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा के कार्यकाल में दूरसंचार कम्पनियों को आवंटित किए गए लाइसेंसों को रद्द करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा करेगी और फिर इसके अनुसार ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुखर्जी ने कहा कि आप जानते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ गया है। हमें निर्णय और उसके परिणामों को जांचना होगा। सरकार इसकी समीक्षा करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को साल 2008 के बाद दूरसंचार कम्पनियों को दिए गए सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए। वैसे सर्वोच्च न्यायालय ने दूरसंचार नियामक को मामले पर विचार करने और नीलामी की सिफारिश करने के लिए चार महीने का समय दिया है।


पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए . राजा के खिलाफकेस की मंजूरी का मसला लंबे समय तक दबाए रखने परसुप्रीम कोर्ट में किरकिरी झेल चुकी यूपीए सरकार दो दिनबाद फिर उसी स्थिति में फंस गई। यूपीए सरकार केपिछले कार्यकाल में जनवरी 2008 के बाद आवंटित किएगए सभी 2 जी लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए औरउन्हें नीलाम करने का आदेश दिया।

जस्टिस जी . एस . सिंघवी और ए . के . गांगुली की बेंच ने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की सीबीआई जांच कीनिगरानी के लिए एसआईटी बनाने की याचिका को खारिज कर दिया।

सीवीसी को स्टेटस रिपोर्ट देगी सीबीआई
सीपीआईएल ने ही 2 जी घोटाले की चल रही सीबीआई जांच में खामियां बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से दो - तीनविशेषज्ञों का विशेष जांच दल ( एसआईटी ) गठित करने की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई सेकहा कि वह 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जारी जांच की स्टेटस रिपोर्ट केंदीय सतर्कता आयोग (सीवीसी ) के सामने पेश करे। सीवीसी इस मामले में कोर्ट को सहयोग करेगा। स्वामी ने इस आदेश कास्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश वस्तुत : एसआईटी गठन का निर्देश देने के समान है।



4 महीने में लाइसेंसों की नीलामी
सुप्रीम कोर्ट ने ' पहले आओ पहले पाओ ' के तहत मनमाने और असंवैधानिक तरीके से ए . राजा द्वारा अलॉटकिए गए 2 जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द कर दिए। लाइसेंस हासिल करने के बाद अपने शेयर बेचने वालीतीनों कंपनियों पर पांच - पांच करोड़ का जुर्माना लगाते हुए कोर्ट ने टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफइंडिया ( ट्राई ) से कहा कि वह 2 जी लाइसेंस आवंटन के लिए ताजा सिफारिशें दे। जस्टिस जी . एस . सिंघवीऔर ए . के . गांगुली की बेंच ने सरकार को ट्राई की सिफारिशों पर एक महीने के अंदर अमल करने और चारमहीने के भीतर स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट नीलामी के आधार पर करने का निर्देश दिया।

बेंच ने यह फैसला गैर - सरकारी संगठन सीपीआईएल और जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी कीयाचिकाओं पर दिया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के पहलेकार्यकाल में राजा ने स्पेक्ट्रम लाइसेंस अलॉटमेंट में घोटाला किया और कैग ने इससे 1.76 लाख करोड़ रूपयेके नुकसान का अनुमान जताया है। राजा ने सिर्फ 9,000 करोड़ रुपये 122 लाइसेंस दिए , जबकि 3 जी केकेवल कुछ ही लाइसेंसों की नीलामी से सरकार को 69,000 करोड़ रुपये मिले थे।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टू-जी घोटाले से जुड़े तीन अहम फैसले दिए और इन फ़ैसलों से थोड़ी राहत और ढेर सारी आफत सरकार पर आ गई।


याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि 2-जी महाघोटाला था और यह कैबिनेट का कलेक्टिव फेलियर है, हालांकि अदालत ने इस घोटाले में चिदंबरम को आरोपी बनाए जाने के मामले में फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया.।


दो दिन बाद यानी चार फरवरी को पटियाला हाउस में चिदंबरम की तकदीर पर फैसला होगा, लेकिन इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उससे संचार की कारोबारी दुनिया से लेकर सरकार के ताक़तवर गलियारों तक हड़कंप मच गया है..


फैसला ये है कि जून 2008 के बाद जारी 122 लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द माने जाएं और जिस आबंटन ने सरकारी खजाने को अरबों रुपए का चूना लगा दिया वो नीति ही गड़बड़ थी।

अब टेलीकॉम रेगुलेट्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया चार महीने के भीतर स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगा। मतलब अब टेलीकॉम कंपनियों को न्यूनतम बाजार भाव के ऊपर स्पेक्ट्रम की बोली लगानी होगी।


लाइसेंस रद्द करने के फैसले पर जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि इससे ये साबित हो गया है चिदंबरम पर उनके आरोप बिल्कुल दुरुस्त हैं. 2जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की जांच के लिए स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.



लाइसेंस रद्द होने से जो कंपनियां प्रभावित होंगी उनमें यूनिनॉर , लूप टेलिकॉम , सिस्टेमा श्याम , एतीसलातडीबी , एस टेल , विडियोकॉन , टाटा और आइडिया शामिल हैं।

कोर्ट का फैसला आते ही सरकार में हड़कंप मच गया है। शीर्ष अदालत के आदेश पर विचार-विमर्श के लिए पीएम आवास पर कैबिनेट की मीटिंग हुई। इसमें चिदंबरम भी शामिल हुए। कैबिनेट की मीटिंग के बाद कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई। इसमें मनमोहन सिंह ने प्रणब मुखर्जी, ए के एंटनी, चिदंबरम और सिब्‍बल से बात की।

शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार मजबूत दिखाई दे रहा था। लेकिन 2जी घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर बाजार पर दिखाई देने लगा है। 2जी घोटाले में गृहमंत्री पी. चिदंबरम की भूमिका की जांच के लिए दायर जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत में यह मामला चल रहा है और वही इस बारे में फैसला करेगी।

साल 2008 में पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए राजा द्वारा दिए गए 2 जी के सभी 122 लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। 2जी लाइसेंस पाने वालीं कपनियों पर 5-5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। भारती एयरटेल को छोड़कर तकरीबन सभी टेलिकॉम कंपनियों को 2008 के बाद लाइसेंस जारी किए गए थे।

कोर्ट ने विडियोकॉन और लूप टेलिकॉम के 21 लाइसेंस, यूनिनॉर के 22 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने आइडिया के 9 लाइसेंस, टाटा टेलिसर्विसेज के 3 लाइसेंस और स्वॉन टेलिकॉम के 13 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। साथ ही, एतिसलात के 14 लाइसेंस भी कैंसिल किए गए हैं। टेलिकॉम कंपनियां रद्द लाइसेंसों पर चार महीने तक संचालन कर सकती हैं।

मामले पर कोर्ट के इस फैसले से टेलिकॉम कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज हो गई है। टाटा टेलिसर्विसेज का शेयर 0.62 पर्सेंट नीचे कारोबार कर रहा है, विडियोकॉन का शेयर 1.41 पर्सेंट लुढ़क चुका है और यूनिटेक का शेयर 7.22 पर्सेंट तक फिसल चुका है। हालांकि, भारती एयरटेल के शेयरों में 6.55 पर्सेंट की तेजी देखी गई।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस कम्युनिकेशंस ने कहा है कि कोर्ट द्वारा 122 लाइसेंस रद्द किए जाने का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीएसई को दी जानकारी में कंपनी का कहना कि उसे साल 2001 या उससे पहले लाइसेंस जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने नए आवंटन के लिए ट्राई को चार महीने का वक्त दिया है।


सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जो मामला चलेगा वह अब निचली अदालत में चलेगा। अब निचली अदालत ही चिदंबरम को सह-आरोपी बनाने पर फैसला करेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन नहीं होगा। इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2जी के सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के साथ ही केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम को टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सहअभियुक्त बनाने की याचिका पर कहा कि इसका फैसला निचली अदालत करेगी। न्यायालय ने कहा कि चिदंबरम को सहअभियुक्त बनाए जाने की याचिका पर फैसला केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत करेगी। सीबीआई की विशेष अदालत में इस मामले पर शनिवार को फैसला आने की उम्मीद है।

ुप्रीम कोर्ट ने 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में गृहमंत्री पी . चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच की मांगपर फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया। सुब्रमण्यम स्वामी ने चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच के लिएसीबीआई को आदेश देने की मांग करते हुए याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं का निपटारा करते हुएजस्टिस जी . एस . सिंघवी और ए . के . गांगुली की बेंच ने कहा कि उसके आदेश से ट्रायल अदालत कीकार्यवाही किसी भी तरह प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई अदालत गृह मंत्री के बारे में दोसप्ताह के भीतर फैसला करे।

गौरतलब है कि चिदंबरम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग कर रही , स्वामी की एक अलग याचिका परसुनवाई कर रहे सीबीआई के विशेष जज ओ पी सैनी ने पहले ही अपना आदेश 4 फरवरी तक के लिए सुरक्षितरख लिया था। स्वामी ने तर्क दिया था कि वित्त मंत्री होने के नाते चिदंबरम की भूमिका 2 जी स्पेक्ट्रम केलाइसेंस के मूल्य तय करने में और टेलिकॉम कंपनियों द्वारा दो विदेशी कंपनियों को शेयर बेचे जाने में थी।

2जी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, सरकार कोर्ट के आदेश का सम्‍मान करती है। इसका पूरी तरह पालन करेगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फैसले की वजह से कोई इस्तीफा नहीं देने वाला है। उनके मुताबिक कोर्ट के फैसले से यह जाहिर हुआ है कि 2जी घोटाले के लिए प्रधानमंत्री और चिदंबरम जिम्मेदार नहीं हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा, 122 कंपनियों के लाइसेंस रद्द होने के बाद अब आगे की कार्यवाही के लिए ट्राई की सिफारिशों का इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा रद्द लाइसेसों के बारे में ट्राई फैसला लेगा। उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि पहले आओ पहले पाओ की नीति एनडीए सरकार की थी, हमने तो एनडीए की नीति को ही आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनडीए देश से माफी मांगे।

उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला टेलिकॉम को लेकर हमारी नीति को सामने रखता है और इससे टेलिकॉम नीति के को लेकर पारदर्शिता आई है।

सिब्बल ने 2जी मामले में प्रधानमंत्री और चिंदबरम का बचाव करते हुए कहा है कि तत्कालीन टेलिकॉम मंत्री ए. राजा ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय से सलाह नहीं मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में गृहमंत्री पी चिदंबरम को सह-आरोपी बनाए जाने के मामले पर कहा है कि इस पर सुनवाई अदालत फैसला सुनाएगी।

न्यायालय ने 2जी मामले में चिदंबरम के खिलाफ जांच कराने का फैसला सुनवाई अदालत पर छोड़ा. कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि विशेष अदालत यह तय करे कि चिदंबरम पर मुकदमा चलाया जाए या नहीं।

कोर्ट ने मामले में चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच करने का सीबीआई को निर्देश देने से इंकार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अदालत से कहा कि वह गृह मंत्री के बारे में दो सप्ताह के भीतर फैसला करे।


सुप्रीम कोर्ट  ने याचिकाकर्ता जनता दल अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की अर्जी पर अपना फैसला सुनाया. स्वामी ने अपनी अर्जी में मांग की है कि 2जी घोटाले में सीबीआई को चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच के आदेश दिए जाएं. स्वामी के अनुसार ए. राजा के हर फैसले पर चिदंबरम की मुहर थी और वो चिदंबरम की हरी झंडी के बगैर स्पैक्ट्रम की कीमत तय ही नहीं कर सकते थे।


सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चिंदबरम तथा स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द करने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अपना फैसला पिछले वर्ष क्रमश: 10 अक्तूबर तथा 17 मार्च को सुरक्षित रख लिया था।

चिदंबरम पर क्या हैं आरोप

-राजा पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम बेचना चाहते थे, चिदंबरम ने इजाजत दी।
-अफसर चाहते थे कि ग्रोथ के आधार पर फीस तय हो। राजा ने मना किया। चिदंबरम ने भी राजा का ही साथ दिया।
-राजा स्पेक्ट्रम की लिमिट बढ़ाकर अपनों को फायदा पहुंचाना चाहते थे। चिदंबरम ने कोई आपत्ति नहीं जताई।

चिदंबरम की मुश्किल दो बड़ी वजहें
राजा का बयान
ए राजा ने सीबीआई कोर्ट में कहा था कि 2जी के लाइसेंस बांटने में चिदंबरम भी उतने ही जिम्मेदार हैं जितना मुझे बताया जा रहा है। राजा ने पूछा था कि चिदंबरम उस समय चुप क्यों रहे जब वित्त सचिव डी. सुब्बाराव ने आपत्ति दर्ज कराई कि राजा स्पेक्ट्रम की कीमत सही तरह से नहीं लगा रहे?

वित्त मंत्रालय की चिट्ठी
प्रणब के मंत्रालय से 25 मार्च 2011 को पीएमओ को चिट्ठी भेजी गई थी। इसमें कहा गया था कि चिदंबरम चाहते तो घोटाला रोका जा सकता था। 30 जनवरी 08 को राजा के साथ मीटिंग में चिदंबरम ने पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम बेचने की अनुमति दे दी। यह चिट्ठी स्वामी ने कोर्ट में बतौर सबूत पेश की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी लोक सेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने के अनुरोध पर सरकार चार महीने के भीतर निर्णय नहीं लेती तो यह मान लिया जाय कि अनुमति दे दी गई है।

खंडपीठ ने कहा कि हमारे सामने जो तथ्य हैं उनसे पता लगता है कि सीबीआई को  इस प्रकरण में  प्राथमिकी दर्ज करने  और जांच का काम शुरू करने का  निर्देश प्रधानमंत्री  की ओर से नहीं मिला था। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही गंभीर जांच शुरू हुई। पूर्व  दूरसंचार मंत्री ए. राजा के खिलाफ इस घोटाले में मामला दर्ज कराये जाने की  अनुमति दिये जाने के बारे में डा. स्वामी के अनुरोध पत्र पर कार्रवाई नहीं किये जाने के संबंध में खंडपीठ ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विधि मंत्रालय के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। न्यायाधीशों ने कहा कि इन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी थी कि वे प्रधानमंत्री को तथ्यों और न्यायालय के संबंधित फैसलों की जानकारी दें।

उधर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का परीक्षण किया जा रहा है। पीएमओ ने सुप्रीम कोर्ट के दोनों न्यायधीशों के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट ने प्रधानमंत्री पद की भारी जिम्मेदारियों को महसूस करते हुए इस मामले में उनकी भूमिका को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के संदर्भ में सरकार ऐसे आवेदनों का निपटारा करने की प्रक्रिया तय करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय को खारिज कर दिया कि वह ए.राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने के अनुरोध पर प्रधानमंत्री को निर्देश नहीं दे सकता है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ जनता पार्टी के अध्यक्ष डा.सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जीएस सिंघवी और ए.के.गांगुली ने एटार्नी जनरल एके वाहनवति के इस तर्क को खारिज कर दिया कि डा.स्वामी को मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने का कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के हर नागरिक को भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने का अनुरोध करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ए.राजा के मामले में जिन लोगों को प्रधानमंत्री को उचित सलाह देनी थी, उन्होंने दुर्भाग्य से ऐसा नहीं किया। यदि मामले से जुड़े सभी तथ्य व कानूनी स्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया होता तो उन्होंने उचित निर्णय लिया होता और एक साल तक यह मामला अधर में नहीं लटका होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में निर्धारित समय के भीतर मुकदमा चलाने की अनुमति देने का प्रावधान होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि १९९८ के विनीत नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश तय किए थे, जिनका पालन होना चाहिए। तीन महीने के भीतर निर्णय लिया जाय और यदि परामर्श की जरूरत हो तो एक महीना और बढ़ाया जा सकता है। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में ऐसा प्रावधान नहीं है, इसलिए संसद में इसमें उचित संशोधन किया जा सकता है। इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री को जिम्मेदार बताए जाने के तर्क पर कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी इतनी अधिक है कि उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे हर मामले की बारिकियों में जाएंगे। यह काम उनके सलाहकारों व अफसरों का है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायाल का प्रधानमंत्री को निर्देश न देने का आदेश इस गलत धारणा पर आधारित था कि स्पेक्ट्रम घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश प्रधानमंत्री के निर्देश पर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि २जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच सीवीसी ने की थी और बाद में यह मामला सीबीआई को सौंपा था।

2जी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, सरकार कोर्ट के आदेश का सम्‍मान करती है। इसका पूरी तरह पालन करेगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फैसले की वजह से कोई इस्तीफा नहीं देने वाला है। उनके मुताबिक कोर्ट के फैसले से यह जाहिर हुआ है कि 2जी घोटाले के लिए प्रधानमंत्री और चिदंबरम जिम्मेदार नहीं हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा, 122 कंपनियों के लाइसेंस रद्द होने के बाद अब आगे की कार्यवाही के लिए ट्राई की सिफारिशों का इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा रद्द लाइसेसों के बारे में ट्राई फैसला लेगा। उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि पहले आओ पहले पाओ की नीति एनडीए सरकार की थी, हमने तो एनडीए की नीति को ही आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनडीए देश से माफी मांगे।

उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला टेलिकॉम को लेकर हमारी नीति को सामने रखता है और इससे टेलिकॉम नीति के को लेकर पारदर्शिता आई है।

सिब्बल ने 2जी मामले में प्रधानमंत्री और चिंदबरम का बचाव करते हुए कहा है कि तत्कालीन टेलिकॉम मंत्री ए. राजा ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय से सलाह नहीं मांगी थी।




अशोक रोड। संचार भवन। पहली मंजिल। दस जनवरी 2008। वक्त दोपहर पौने तीन बजे। संचार मंत्री एंदीमुथु राजा के निजी सहायक आरके चंदोलिया का दफ्तर। राजा के हुक्म से एक प्रेस रिलीज जारी होती है। 2 जी स्पेक्ट्रम 3.30 से 4.30 के बीच जारी होगा। तुरंत हड़कंप मच गया। सिर्फ 45 मिनट तो बाकी थे..


वह एक आम दिन था। कुछ खास था तो सिर्फ ए. राजा की इस भवन के दफ्तर में मौजूदगी। राजा यहां के अंधेरे और बेरौनक गलियारों से गुजरने की बजाए इलेक्ट्रॉनिक्स भवन के चमचमाते दफ्तर में बैठना ज्यादा पसंद करते थे। पर आज यहां विराजे थे। 2जी स्पेक्ट्रम के लिए चार महीने से चक्कर लगा कंपनियों के लोग भी इन्हीं अंधेरे गलियारों में मंडराते देखे गए।


लंच तक माहौल दूसरे सरकारी दफ्तरों की तरह सुस्त सा रहा। पौने तीन बजते ही तूफान सा आ गया। गलियारों में भागमभाग मच गई। मोबाइल फोनों पर होने वाली बातचीत चीख-पुकार में तब्दील हो गई। वे चंदोलिया के दफ्तर से मिली अपडेट अपने आकाओं को दे रहे थे। साढ़े तीन बजे तक सारी खानापूर्ति पूरी की जानी थी। उसके एक घंटे में अरबों-खरबों रुपए के मुनाफे की लॉटरी लगने वाली थी।


जनवरी की सर्दी में कंपनी वालों के माथे से पसीना चू रहा था। मोबाइल पर बात करते हुए आवाज कांप रही थी। सबकी कोशिश सबसे पहले आने की ही थी। लाइसेंस के लिए कतार का कायदा फीस जमा करने के आधार पर तय होना था। फीस भी कितनी- सिर्फ 1658 करोड़ रुपए का बैंक ड्राफ्ट। साथ में बैंक गारंटी, वायरलेस सर्विस ऑपरेटर के लिए आवेदन, गृह मंत्रालय का सिक्यूरिटी क्लीरेंस, वाणिज्य मंत्रालय के फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) का अनुमति पत्र.। ऐसे करीब एक दर्जन दस्तावेज जमा करना भी जरूरी था। वक्त सिर्फ 45 मिनट...


परदे के आगे की कहानी


25 सितंबर 2007 तक स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों में से जिन्हें हर प्रकार से योग्य माना गया उन कंपनियों के अफसरों को आठवीं मंजिल तक जाना था। डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एक्सेस सर्विसेज) आर के श्रीवास्तव के दफ्तर में। यहीं मिलने थे लेटर ऑफ इंटेट। फिर दूसरी मंजिल के कमेटी रूम में बैठे टेलीकॉम एकाउंट सर्विस के अफसरों के सामने हाजिरी। यहां दाखिल होने थे 1658 करोड़ रुपए के ड्राफ्ट के साथ सभी जरूरी कागजात। यहां अफसर स्टॉप वॉच लेकर बैठे थे ताकि कागजात जमा होने का समय सेकंडों में दर्ज किया जाए।


किसी के लिए भी एक-एक सेकंड इतना कीमती इससे पहले कभी नहीं था। सबकी घड़ियों में कांटे आगे सरक रहे थे। बेचैनी, बदहवासी और अफरातफरी बढ़ गई थी। चतुर और पहले से तैयार कंपनियों के तजुर्बेकार अफसरों ने इस सख्त इम्तहान में अव्वल आने के लिए तरकश से तीर निकाले। अपनी कागजी खानापूर्ति वक्त पर पूरी करने के साथ प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लोगों को अटकाना-उलझाना जरूरी था। अचानक संचार भवन में कुछ लोग नमूदार हुए। ये कुछ कंपनियों के ताकतवर सहायक थे। दिखने में दबंग।


हट्टे-कट्टे। कुछ भी कर गुजरने को तैयार। इनके आते ही माहौल गरमा गया। इन्हें अपना काम मालूम था। अपने बॉस का रास्ता साफ रखना, दूसरों को रोकना। लिफ्ट में पहले कौन दाखिल हो, इस पर झगड़े शुरू हो गए। धक्का-मुक्की होने लगी। सबको वक्त पर सही टेबल पर पहुंचने की जल्दी थी। पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम की विशेष कृपा के पात्र रहे हिमाचल फ्यूचरस्टिक कंपनी (एचएफसीएल) के मालिक महेंद्र नाहटा की तो पिटाई तक हो गई। उन्हें कतार से निकाल कर संचार भवन के बाहर धकिया दिया गया।


दबंगों के इस डायरेक्ट-एक्शन की चपेट में कई अफसर तक आ गए। किसी के साथ हाथापाई हुई, किसी के कपड़े फटते-फटते बचे। आला अफसरों ने हथियार डाल दिए। फौरन पुलिस बुलाई गई। घड़ी की सुइयां तेजी से सरक रही थीं। हालात काबू में आते-आते वक्त पूरा हो गया। जो कंपनियां साम, दाम, दंड, भेद के इस खेल में चंद मिनट या सेकंडों से पीछे रह गईं, उनके नुमांइदे अदालत जाने की घुड़कियां देते निकले।


लुटे-पिटे अंदाज में। एक कंपनी के प्रतिनिधि ने आत्महत्या कर लेने की धमकी दी। कई अन्य कंपनियों के लोग वहीं धरने पर बैठ गए। पुलिस को बल प्रयोग कर उन्हें हटाना पड़ा। आवेदन करने वाली 46 में से केवल नौ कंपनियां ही पौन घंटे के इस गलाकाट इम्तहान में कामयाब रहीं। इनमें यूनिटेक, स्वॉन, डाटाकॉम, एसटेल और शिपिंग स्टॉप डॉट काम नई कंपनियां थीं जबकि आइडिया, टाटा, श्याम टेलीलिंक और स्पाइस बाजार में पहले से डटी थीं।


एचएफसीएल, पाश्र्वनाथ बिल्डर्स और चीता कारपोरेट सर्विसेज के आवेदन खारिज हो गए। बाईसेल के बाकी कागज पूरे थे सिर्फ गृहमंत्रालय से सुरक्षा जांच का प्रमाणपत्र नदारद था। सेलीन इंफ्रास्ट्रक्चर के आवेदन के साथ एफआईपीबी का क्लियरेंस नहीं था। बाईसेल के अफसर छाती पीटते रहे कि प्रतिद्वंद्वियों ने उनके खिलाफ झूठे केस बनाकर गृह मंत्रालय का प्रमाणपत्र रुकवा दिया। उस दिन संचार भवन में केवल लूटमार का नजारा था। पौन घंटे का यह एपीसोड कई दिनों तक चर्चा का विषय बना रहा।


परदे के पीछे की कहानी


इसी दिन। सुबह नौ बजे। संचार मंत्री ए. राजा का सरकारी निवास। कुछ लोग नाश्ते के लिए बुलाए गए थे। इनमें टेलीकॉम सेक्रेट्री सिद्धार्थ बेहुरा, डीडीजी (एक्सेस सर्विसेज) आर के श्रीवास्तव, मंत्री के निजी सहायक आर. के. चंदोलिया, वायरलेस सेल के चीफ अशोक चंद्रा और वायरलेस प्लानिंग एडवाइजर पी. के. गर्ग थे।


कोहरे से भरी उस सर्द सुबह गरमागरम चाय और नाश्ते का लुत्फ लेते हुए राजा ने अपने इन अफसरों को अलर्ट किया। राजा आज के दिन की अहमियत बता रहे थे। खासतौर से दोपहर 2.45 से 4.30 बजे के बीच की। राजा ने बारीकी से समझाया कि कब क्या करना है और किसके हिस्से में क्या काम है? चाय की आखिरी चुस्की के साथ राजा ने बेफिक्र होकर कहा कि मुझे आप लोगों पर पूरा भरोसा है। अफसर खुश होकर बंगले से बाहर निकले और रवाना हो गए।


दोपहर तीन बजे। संचार भवन। आठवीं मंजिल। एक्सेस सर्विसेज का दफ्तर। फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ डीडीजी (एक्सेस सर्विसेज) आर. के. श्रीवास्तव थे। यहां मौजूद अफसरों को चंदोलिया के कमरे में तलब किया गया। मंत्री के ऑफिस के ठीक सामने चंदोलिया का कक्ष है। एक्शन प्लान के मुताबिक सब यहां इकट्ठे हुए। इनका सामना स्वॉन टेलीकॉम और यूनिटेक के आला अफसरों से हुआ। चंदोलिया ने आदेश दिया कि इन साहेबान से ड्राफ्ट और बाकी कागजात लेकर शीर्ष वरीयता प्रदान करो। बिना देर किए स्वॉन को पहला नंबर मिला, यूनिटेक को दूसरा।


सबकुछ इत्मीनान से। यहां कोई धक्कामुक्की और अफरातफरी नहीं मची। बाहर दूसरी कंपनियों को साढ़े तीन बजे तक जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में पसीना आ रहा था। अंदर स्वॉन और यूनिटेक को पंद्रह मिनट भी नहीं लगे। इन कंपनियों को पहले ही मालूम था कि करना क्या है। इसलिए इनके अफसर चंदोलिया के दफ्तर से प्रसन्नचित्त होकर विजयी भाव से मोबाइल कान से लगाए बाहर निकले। दूर कहीं किसी को गुड न्यूज देते हुए। 45 मिनट के तेज रफ्तार घटनाक्रम ने एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए के घोटाले की कहानी लिख दी थी। राजा के लिए बेहद अहम यह दिन सरकारी खजाने पर बहुत भारी पड़ा था।


एक महिला, 9 फोन लाइनें, 300 दिन, 5851 कॉल्स


फोन कॉल्स में दर्ज फरेब

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की मुख्य किरदार नीरा राडिया के नौ टेलीफोन 300 दिन तक आयकर विभाग ने टैप किए। कुल 5,851 कॉल्स रिकार्ड की गईं। इनमें से सौ का रिकॉर्ड लीक हो चुका है। अपने पाठकों के लिए भास्कर प्रस्तुत कर रहा है - टेप हुई गोपनीय बातचीत के मुख्य अंश। साथ में, इससे जुड़े संपादकों और किरदारों की सफाई भी। ताकि पता चले कि दुनिया को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले खुद क्या कर रहे हैं।




(लेखक दैनिक भास्‍कर के नेशनल न्‍यूज रूम में एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर हैं।
http://www.bhaskar.com/indiakisoch/153

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2जी मामले में गृह मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ जांच के बारे में निर्णय निचली अदालत पर छोड़ने के साथ ही बीजेपी ने मांग की कि मामले में फैसले तक उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

बीजेपी नेता बलबीर पुंज ने कहा, 'वह (चिदंबरम) घोटाले में पूरी तरह से शामिल हैं और उन्हें दो दिन की राहत मिली हुई है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की मांग है कि या तो चिदंबरम अपना इस्तीफा स्वयं दे दें, लेकिन यदि वह ऐसा करने से इनकार करते हैं तो प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति से यह सिफारिश करनी चाहिए कि वह उन्हें तत्काल सरकार से बर्खास्त कर दें।'

वहीं, रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि 2जी मामले में सरकार के भ्रष्टाचार का भांडाफोड़ हुआ है और केंद्र सरकार चिंदबरम को बचा रही है। उन्होंने कहा, 'देश को प्रधानमंत्री के जवाब का इंतजार है। क्या पीएम अब जवाबदेही लेंगे।'

यह पूछे जाने पर कि पार्टी द्वारा तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के त्यागपत्र की मांग करना जल्दबाजी है? पुंज ने कहा कि निचली अदालत यदि उन्हें क्लीन चिट दे देती है तो वह केंद्रीय कैबिनेट में दोबारा लौट सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उसने इसकी पुष्टि की है कि 2 जी सबसे बड़ा घोटाला था जिसके बारे में देश को पहले से जानकारी थी। इसके तहत जो भी आवंटन किए गए वे 'पूरी तरह से धोखाधड़ी से किए गए और वे गुणदोष के आधार पर नहीं बल्कि अन्य आधारों पर किए गए।'

सीपीएम ने आज कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को रद्द कर उच्चतम न्यायालय ने सरकार को स्पष्ट तौर पर दोषी ठहराया है। उसने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस फैसले को अमल में लाने के लिए कहा क्योंकि इसने यूपीए-दो सरकार के दावों की पोल खोल दी है।

टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं होने का दावा करने के लिए दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल से इस्तीफे की मांग करते हुए माकपा के वरिष्ठ नेता नीलोत्पल बसु ने कहा कि नैतिकता का आदर्श समझे जाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फैसले को लागू करने पर निर्णय करना होगा क्योंकि इस फैसले ने 2 जी घोटाले पर सरकार के दावों की पोल खोल दी है।

यह फैसला सरकार को बिल्कुल कठघरे में खड़ा करता है। विपक्ष और माकपा के आरोपों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है जबकि प्रधानमंत्री लगातार कहते रहे हैं कि बिल्कुल पारदर्शिता रही है। अदालत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए सीपीएम पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने कहा कि, 'यह सरकार को और उन सबको गलत साबित करता है जो निवेश को बढ़ावा देने के नाम पर 2जी आबंटन से जुड़े फैसलों का बचाव कर रहे थे।'

2जी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हो गए हैं। कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संचार मंत्री कपिल सिब्‍बल ने भाजपा को आड़े हाथ लिया तो प्रमुख विपक्षी दल ने सरकार पर जमकर पलटवार किया। सिब्‍बल ने कहा कि स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन के लिए न तो पी. चिदंबरम और न ही पीएम मनमोहन सिंह जिम्‍मेदार हैं। उन्‍होंने चिदंबरम पर आरोप लगाने और उनका इस्‍तीफा मांगने के लिए एनडीए खासकर बीजेपी को माफी मांगने की नसीहत दे डाली। सिब्‍बल ने कहा, 'सरकार कोर्ट के आदेश का सम्‍मान करती है। ट्राई को 2जी स्‍पेक्‍ट्रम की नए सिरे से नीलामी के लिए गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। हम ट्राई की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं।'  

सिब्‍बल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कोर्ट के ताजा फैसले से कई मसलों पर स्थिति साफ हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में स्‍पेक्‍ट्रम का आवंटन केवल नीलामी से ही होना चाहिए। 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति की शुरुआत से ही गलत थी जो 2003 में (तत्‍कालीन एनडीए सरकार के कार्यकाल में) लागू की गई थी। संचार मंत्री ने चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि पीएम और चिदंबरम इस मामले में जिम्‍मेदार नहीं हैं। सिब्‍बल के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि संचार मंत्री ने तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री (चिदंबरम) की सिफारिश नहीं मानी थी।   

हालांकि भाजपा प्रवक्‍ता रविशंकर प्रसाद ने सिब्‍बल पर प्रेस कांफ्रेंस में देश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी तक अदालत की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है जिसका हवाला देकर सिब्‍बल चिदंबरम और पीएम को बेगुनाह ठहरा रहे हैं। प्रसाद ने चिदंबरम के इस्‍तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन्‍हें सरकार में बने रहने का हक नहीं है। उन्‍होंने सिब्‍बल से देश की जनता से माफी मांगने को कहा।

माकपा ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए सिब्‍बल का इस्‍तीफा मांगा और पीएम से जवाब देने की मांग की है। तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्‍वागत किया है। वहीं गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आज के फैसले के बाद सरकार को सत्‍ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कांग्रेस पूरे तौर पर केंद्र में सरकार चलाने का अपना नैतिक आधार खो चुकी है।
  
'घोटाले की 60 फीसदी रकम सोनिया के पास'

इस बीच, एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में जनता पार्टी अध्‍यक्ष सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्‍होंने कहा कि 2 जी मामले में 60 फीसदी रकम सोनिया गांधी ने लिया है और इसका सबूत उनके पास है। 2जी मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले स्‍वामी ने समय आने पर अदालत में सबूत पेश करने का भी दावा किया। कपिल सिब्‍बल के बारे में स्‍वामी ने कहा, ' वह तो बेशर्म हैं। सबसे पहले उन्‍हें इस्‍तीफा देना चाहिए और कानून की पढ़ाई फिर से करने के लिए कॉलेज ज्‍वाइन करना चाहिए।' स्‍वामी ने केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के भी इस्‍तीफे की मांग की।
2जी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ज्‍यादातर ने इसे सरकार की हार बताया है. सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी और बाबा रामदेव समेत बीजेपी ने भी इसे केंद्र सरकार की नाकामी करार दिया है.
सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी
सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने आजतक से कहा सुप्रीम कोर्ट फिलहाल चिदंबरम पर फैसला नहीं सुना सकती क्‍योंकि फैसला ट्रायल कोर्ट में लंबित है. लाइसेंस रद्द होना सरकार की सामूहिक असफलता है. इसके लिए प्रधानमंत्री अकेले जिम्‍मेदार नहीं हैं बल्कि यूपीए अध्‍यक्ष समेत तमाम लोग इसमें शामिल हैं.
स्‍वामी ने यह भी कहा कि उनके पास चिदंबरम के खिलाफ इतने सबूत हैं कि उन्‍हें चिदंबरम के खिलाफ केस चलाने के लिए सीबीआई की जरूरत नहीं है. गौरतलब है कि सीबीआई ने पहले ही चिदंबरम को क्‍लीन चिट दे रखी है. सुब्रमण्यम स्वामी ने 2जी मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को बेहतरीन फैसला बताया और कहा कि देश शीर्ष अदालत पर गर्व कर सकता है.
बाबा रामदेव
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि 2 जी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ हो गया कि स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन मामले में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था और इसके लिए सरकार और उसके मंत्री जिम्‍मेदार हैं. रामदेव ने कहा कि अब तो और जरुरी हो गया है कि सीबीआई को स्‍वायतता दी जाए. उन्‍होंने साथ ही यह भी कहा कि केंद्र का पाप सामने आ गया है.
प्रशांत भूषण
सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी के साथ संयुक्‍त याचिकाकर्ता और वरिष्‍ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस फैसले के बाद कहा कि यह पूरे देश की जीत है. उन्‍होंने कहा कि इस फैसले के बाद सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई हो सकेगी. भूषण ने इसे कड़ा संदेश करार दिया.


और भी... http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/690655/SC-decision-on-2G-is-a-setback-for-govt.html

'कोर्ट के फैसले से साफ,यूपीए महाभ्रष्टाचारी'

अंतिम बार अपडेट: Thursday, February 2, 2012,19:18
टैग्स: अदालत का फैसला, महाभ्रष्टाचारी, मायावती, संप्रग0

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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 2जी लाइसेंस रद्द करने के सर्वोच्च न्यायालय के गुरुवार के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार महाभ्रष्टाचारी है।

मायावती ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने 2जी लाइसेंस मामले में हुए भ्रष्टाचार को गम्भीरता से लेकर इसके 122 टेलीकॉम लाइसेंस रद्द कर दिए। इससे कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महाभ्रष्टाचारी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में आवंटित किए गए 122 लाइसेंस रद्द करते हुए कहा कि मामले में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम को सह आरोपी बनाने पर फैसला निचली अदालत करेगी।  (एजेंसी)
'सरकार की विश्वसनीयता पर उठे सवाल' | 2जीः 122 लाइसेंस रद्द
आजतक ब्यूरो | लखनऊ, 2 फरवरी 2012   |  अपडेटेड : 17:49 IST
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भाग 1 | भाग 2
लखनऊ में राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने 2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक (कैग) ने इस भ्रष्टाचार और गड़बडियों का खुलासा किया था लेकिन इसके बावजूद संप्रग सरकार तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा का बचाव करती रही. जेटली के अनुसार, प्रधानमंत्री ने चिदंबरम को सम्मानित सहयोगी बताते हुए कहा कि उन्होंने जो किया ठीक किया. और अब देश की शीर्ष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के सरकार के फैसले को अवैध और असंवैधानिक करार दे दिया है. यह एक व्यक्ति का निर्णय नहीं बल्कि सरकार का निर्णय था.


और भी... http://aajtak.intoday.in/videoplay.php/videos/view/690691/Govts-credibility-under-question-after-SC-order-on-2G-BJP.html



*राजीव रंजन झा : सर्वोच्च न्यायालय का ताजा फैसला सरकार के लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है, बशर्ते वह इसे इस्तेमाल करना चाहे।

न्यायालय ने उसे कुछ बीती गलतियाँ सुधारने और आगे एक साफ-सुथरा दौर शुरू करने का मौका दे दिया है। अभी सबसे बड़ी सुर्खी तो यही है कि 122 लाइसेंस रद्द किये गये हैं। जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किये गये हैं, उन्हें न्यायालय ने 4 महीने का समय दिया है। इन 4 महीनों तक ये ऑपरेटर अपनी सेवाएँ चलाते रह सकते हैं। लेकिन ये 4 महीने सरकार के लिए भी हैं, जिस अवधि में वह पुरानी उलझनों को सुलझाये और आगे का रास्ता निकाले।

अभी तो हर किसी को न्यायालय का निर्णय विस्तार से पढ़ना है। इस फैसले की बारीकियों में पता नहीं क्या और निकल आये! लेकिन पहली नजर में यह साफ है कि अदालत ने गलत को सीधे-सीधे गलत कहने और उसे सुधारने की बात कह दी है। मैंने 26 अप्रैल 2011 को राग बाजारी में लिखा था, "अब तो रद्द करें घोटालों के 2जी लाइसेंस।" अगर सरकार ने उस समय ऐसा कदम उठा लिया होता, तो आज न्यायालय में उसकी यह फजीहत नहीं होती।

उस समय मैंने यह भी सवाल उठाया था कि "अभी तक सीबीआई की सारी कार्रवाई केवल डीबी रियल्टी और स्वान टेलीकॉम के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। राजा ने 2जी स्पेक्ट्रम केवल स्वान टेलीकॉम को नहीं दिया था। तो क्या सीबीआई कह रही है बाकी किसी कंपनी को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम देते समय राजा ने बड़े पाक-साफ तरीके से काम किया था। कहीं किसी और मामले में सीबीआई को कोई गड़बड़झाला नहीं दिखा है?" न्यायालय का आदेश साफ बता रहा है कि पूरा खेल ही गड़बड़झाले का था।

सवाल उठेगा कि जो 122 लाइसेंस रद्द किये गये, उनमें से जिन लाइसेंसों के आधार पर कंपनियों ने बड़े नेटवर्क बिछा लिये, अरबों-खरबों रुपये का निवेश कर दिया, बड़ी संख्या में ग्राहक बना लिये, उन सबका क्या होगा?  रास्ता साफ है – जैसे 3जी स्पेक्ट्रम की खुली नीलामी की गयी थी, वैसे ही 2जी के इन सभी 122 लाइसेंसों की भी खुली नीलामी कर दी जाये। अगर कोई कंपनी अपने लाइसेंस को बचाना चाहे तो बोली लगाये और जीते। बोली जीत जाये तो पहले दी गयी रकम काट कर वह बाकी रकम जमा करे। अगर बोली न लगाये तो पिछली रकम जब्त! दूसरा पहलू आपराधिक षडयंत्रों और रिश्वतखोरी का है। इस पहलू पर कार्रवाई चलती रहे। Rajeev Ranjan Jha

(शेयर मंथन, 02 फरवरी 2012)


http://www.sharemanthan.in/index.php/rag-bazaari/16740-rajeev-ranjan-jha-column-20120202

२जी स्पेक्ट्रम घोटाला

मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
२जी स्पेक्ट्रम घोटाला भारत का एक बहुत बड़ा घोटाला है जो सन् २०११ के आरम्भ में प्रकाश में आया था।

[संपादित करें]परिचय

केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों जिनको त्याग करना पड़ा उनमे सर्व श्री सुरेश कलमाड़ीजी जो कि कामनवेल्थ खेल में ७०,००० हजार करोड़ का खेल किये। दुसरे महारास्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हद जिनको कारगिल शहीदों के लिए बने आवास में ही उलटफेर किया । तीसरे राजा साहब जिन्होंने १ लाख ७६ हजार करोड़ का वारा न्यारा किया। इसप्रकार राजा द्वारा किया गया घोटाला स्वातंत्र भारत का महाघोटाला होने का कीर्तिमान स्थापित किया।
किसी भी विभाग या संगठन में कार्य का एक विशेस ढांचा निर्धारित होता है,टेलीकाम मंत्रालय इसका अपवाद हो गया है। विभाग ने सीएजी कि रिपोर्ट के अनुसार नियमो कि अनदेखी के साथ साथ अनेक उलटफेर किये। २००३ में मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नीतियों के अनुसार वित्त मंत्रालय को स्पेक्ट्रम के आबंटन और मूल्य निर्धारण में शामिल किया जाना चाहिए । टेलीकाम मंत्रालय ने मंत्रिमंडल के इस फैसले को नजरंदाज तो किया ही आईटी ,वाणिज्य मंत्रालयों सहित योजना आयोग के परामर्शो को कूड़ेदान में डाल दिया । प्रधानमंत्री के सुझावों को हवा कर दिया गया। यह मामला २००८ से चलता चला आ रहा है, जब ९ टेलीकाम कंपनियों ने पूरे भारत में आप्रेसन के लिए १६५८ करोड़ रूपये पर २जी मोबाईल सेवाओं के एयरवेज और लाईसेंस जारी किये थे । लगभग १२२ सर्कलों के लिए लाईसेंस जारी किये गए इतने सस्ते एयरवेज पर जिससे अरबों डालर का नुकसान देश को उठाना पड़ा । स्वान टेलीकाम ने १३ सर्कलों के लाईसेंस आवश्यक स्पेक्ट्रम ३४० मिलियन डालर में ख़रीदे किन्तु ४५ % स्टेक ९०० मिलियन डालर में अरब कि एक कंपनी अतिस्लास को बेच दिया। एक और आवेदक यूनिटेक लाईसेंस फीस ३६५ मिलियन डालर दिए और ६०% स्टेक पर १.३६ बिलियन डालर पर नार्वे कि एक कम्पनी तेल्नेतर को बेच दिया।
इतना ही नहीं सीएजी ने पाया कि स्पेक्ट्रम आबंटन में ७०% से भी अधिक कंपनिया हैं जो नाटो पात्रता कि कसौटी पर खरी उतरती है नही टेलीकाम मंत्रालय के नियम व शर्ते पूरी करती है । रिपोर्ट के अनुसार यूनिटेक अर्थात युनिनार ,स्वान याने अतिस्लत अलएंज जो बाद में अतिस्लत के साथ विलय कर लिया । इन सभी को लाईसेंस प्रदान करने के १२ महीने के अन्दर सभी महानगरो,नगरों और जिला केन्द्रों पर अपनी सेवाएँ शुरू कर देनी थी। जो इन्होंने नहीं किया ,इस कारण ६७९ करोड़ के नुकसान को टेलीकाम विभाग ने वसूला ही नहीं ।
इस पूरे सौदेबाजी में देश के खजाने को १७६,००० हजार करोड़ कि हानि हुई । जब २००१ से अब तक २जी स्पेक्ट्रम कि कीमतों में २० गुना से भी अधिक कि बढ़ोत्तरी हुई है तो आखिर किस आधार पर इसे २००१ कि कीमतों पर नीलामी कि गई? देश के ईमानदार अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते रहे कि हमारे कमुनिकेसन मंत्री राजा ने किसी भी नियम का अतिक्रमण नही किया और भ्रष्ट मंत्री के दोष छिपाते रहे क्यों ?

[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ


२जी स्पेक्ट्रम घोटाला हिन्दी निबन्ध

http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A5%A8%E0%A4%9C%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE_%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE
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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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