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Thursday, July 6, 2017

बंगाल के बेकाबू हालात राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखडंता के लिए बेहद खतरनाक, चीनी हस्तक्षेप से बिगड़ सकते हैं हालात। इजराइल से दोस्ती की प्रतिक्रिया में इस्लामी कटट्रपंथी भी अब हर मायने में गोरक्षकों के बराबर खतरनाक। अमन चैन के लिए साझा चूल्हे की विरासत बचाना बेहद जरुरी है,जो खतरे में है। पलाश विश्वास

बंगाल के बेकाबू  हालात राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखडंता के लिए बेहद खतरनाक, चीनी हस्तक्षेप से बिगड़ सकते हैं हालात।
इजराइल से दोस्ती की प्रतिक्रिया में इस्लामी कटट्रपंथी भी अब हर मायने में गोरक्षकों के बराबर खतरनाक।
अमन चैन के लिए साझा चूल्हे की विरासत बचाना बेहद जरुरी है,जो खतरे में है।
पलाश विश्वास
बंगाल में जो बेलगाम हिंसा भड़क गयी है,राजनीतिक दलों की सत्ता की लड़ाई में उसके खतरे पक्ष विपक्ष में राजनीतिक तौर पर बंट जाने से बाकी देश को शायद नजर नहीं आ रहे हैं।
कोलकाता से लगे समूचे उत्तर 24 परगना जिला हिंसा की चपेट में है और पहाड़ में दार्जिंलिग में बंद और हिंसा का सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा है।गोरखा जन मुक्ति मोर्चा ने  अंतिम लड़ाई का ऐलान कर दिया है और पहाड़ों में बरसात और भूस्खलन के मौसम में जनजीवन अस्तव्यस्त है।
दार्जिलिंग के बाद सिक्किम के नजदीक कलिंगपोंग में भी हिंसा और आगजनी की वारदातें तेज हो गयी है।
सिक्किम सही मायने में दार्जिलिंग जिला होकर वहां तक पहुंचने वाले रास्ते के अवरुद्ध हो जाने की वजह से बाकी देश से अलग थलग पखवाड़े भर से है जबकि सिक्किम सीमा पर युद्ध के बादल उमड़ घुमड़ रहे हैं।
इसी बीच चीन ने मोदी के साथ जी 20 बैठक में बहुप्रचारित शीर्ष बैठक से मना कर दिया है और इसके साथ कश्मीर की तरह सिक्किम में भी अलगाववादियों को समर्थन देने की धमकी दी है।
सिक्किम ही नहीं, गोरखालैंड आंदोलनकारियों को भी अलगाव के लिए चीन समर्थन कर सकता है।
मैदानों में जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर जिले के आदिवासी बहुल इलाके भी आंदोलन के चपेट में आ जाने से उत्तर पूर्व भारत को जोड़ने वाला कुल 18 किमी का कारीडोर के भी टूट जाने का खतरा है जबकि असम और पूर्वोत्तर में अलगाववादी उग्रवादी तत्व भारत से अलगाव के लिए निरंतर सक्रिय है।उत्रपूर्वमें आजादी के बाद केंद्र सरकार की सारी राजनीति इन्हीं तत्वों के समर्थन से चलती है।
असम में जो सरकार बनी है,वह भी अल्फा के समर्थन से है और यह सरकार अल्फाई एजंडा के तहत राजकाज चला रही है।
बंगाल के हालात इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा,एकता और अखंड़ता के लिए बेहद खतरनाक होते जा रहे हैं।जिसे नजरअंदाज करके संघ परिवार बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने के हालात बनाने में लगा है और गोरखालैंड आंदोलन को भी उसका खुल्ला समर्थन है।
कल हस्तक्षेप पर लगे हमारे पोस्ट पर हिंदी के जाने माने कथाकार कर्मेंदु शिशिर ने टिप्पणी की है कि मैंं ममता बनर्जी को क्लीन चिट दे रहा हूं जो खुद दंगा भड़काती हैं।
कृपया हस्तक्षेप के तमाम पुराने आलेख देख लें,हमने कभी ममता बनर्जी का समर्थन नहीं किया है।
हमारे लिए मसला ममता बनर्जी या वामपक्ष का नहीं है।यह सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा का मामला है।
लगातार तीन चार दिनों से उत्तर चब्बीस परगना में हिंसा भड़की हुई है।संघ परिवारे के लोग सोशल मीडिया में उग्र हिंदुत्व के एजंडा के मद्देनजर धार्मिक ध्रूवीकरण के लिए भड़काऊ अफवाहें फैला रहे हैं।बंगाल में हिंदुओ पर अत्याचार हो रहे हैं और बंगाल में हिंदू सुरक्षित नहीं है,यह थीम सांग है।
फोटोशाप का खुलकर इस्तेमाल दंगा भड़काने के लिए हो रहा है।ऐसे पोस्ट विदेशी जमीन से बी हो रहे हैं,जिनपर नियंत्रण लगभग असंभव है।
ताजा पोस्ट एक फिल्म के दृश्य को उत्तर 24 परगना में हिंदू औरतों पर अत्याचार के आरोप के साथ फिल्मकार अपर्णा सेन को संबोधित है।
तो दूसरी तरफ मुस्लिम कट्टरपंथी संगठित तरीके से हिंसा भड़काने में सक्रिय हैं,जिनपर वोटबैंक की राजनीति की वजह से पहले 35 साल तक वाम शासन ने कोई नियंत्रण नहीं किया और तृणमूल जमाने में उनके संरक्षण का हाल यह है कि उत्तर 24 परगना में हिंसा पर सफाई देते हुए इन कट्टरपंथियों को चेताननी देकर मुख्यमंत्री ने कहा है कि आपको हमने बहुत संरक्षण दिया हुआ है और अब हम इस दंगाई तेवर को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ममता के बयान के मुताबिक सड़कों पर दंगाई भीड़ इतनी बड़ी तादाद में उमड़ रही है कि उन्हें तितर बितर करने के लिए पुलिस गोली चलाये तो सैकड़ों बेगुनाह मारे जायेंगे और इसलिए पुलिस प्रशासन लाठी गोली की बजाय बातचीत से भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रही है।
दूसरी ओर दार्जिलिंग के पहाड़ों में गोरखा आंदोलनकारियों के साथ बातचीत की कोई पहल नहीं हो रही है।
पहाड़ और मैदान में विभाजन हो गया है।
चाय बागानों में मौत का उत्सव शुरु हो गया है।
गौरतलब है कि पहाड़ की गोरखा आबादी की रोजमर्रे की जिंदगी इन्हीं चायबागानों से जुड़ी हैं।सुबास घीसिंग से लेकर विमल गुरुंग तक तमाम नेता चाय बागानों से हैं।
गोरखालैंड के जवाब में सिलीगुड़ी में भी हिंसा हो रही है।इसके साथ ही बंगाल अब पूरी तरह हिंदू और मुस्लिम उग्रवाद के शिकंजे में हैं,जिनपर सरकार,प्रशासन और पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है।
हिंसा पर नियंत्रण के लिए अर्धसैनिक बलों की कंपनियां भेजने की मांग केंद्र सरकार खारिज कर रही है।
जाहिर है कि इसमें राजनीति हो रही है।
बाकी देश में आतंकी हमला होने के बावजूद बंगाल आतंकवादी हमलों से अब तक बचा रहा है।
क्योंकि बंगाल का आतंकवादी और कट्टरपंथी मुसलमान सुरक्षित कारीडोर की तरह इस्तेमाल कर रहे थे।
इन तत्वों पर पिछले चालीस सालों में कोई नियंत्रण खालिस वोटबैंक की राजनीति की वजह से नहीं हुआ है तो अब उन पर काबू पाना या उनका मुकाबला करना बेहद मुश्किल है।उत्तर 24 परगना के हालात इसीलिए बेकाबू है।जल्दी इस आत्मघाती हिंसा पर काबू पाने की केंद्र और राज्य सरकार और सभी राजनीतिक दल मिलकर पहल न करें तो पूरे बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर भारत से लेकर बिहार में भी यह बेलगाम हिंसा संक्रमित हो सकती है।
इस बीच अमेरिका के बाद भारत इजराइल का भी रणनीतिक साझेदार बन गया है।पाकिस्तानी आईएसआई नेटवर्क को छोड़कर  भारत को अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकवादी समूहों ने निशाना बनाने से परहेज किया है।लेकिन इजराइल से मुस्लिम और अरब देशों और इस्लाम के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में इजराइल की सक्रिय और निर्णायक भूमिका के मद्देनजर यह समीकरण गड़बड़ाया हुआ नजर आ रहा है।
इस्लामी आंतकवादी समूह के स्लीपिंग सेल हमेशा दुनियाभर में सक्रिय हैं और भारत में भी वे बहुत बड़े पैमाने पर घुसपैठ कर गये हैं।इन तमाम तत्वों की भारतविरोधी गतिविधियां तेज होने की आशंका है।
पिछले कई बरस से दुर्गापूजा और मुहर्म पर बंगाल में चिटफुट सांप्रदायिक हिंसा होती रही है।लेकिन बंगाल में साहित्य और कला माध्यमों,लोकसंस्कृति,बाउल फकीर संत परंपरा के तहत भारत विभाजन के बावजूद गांव देहात में हिंदू और मुसलमान अमन चैन से रहते आये हैं और वे किसी तरह के उकसावे में नहीं आते और उन्हें अलग अलग पहचाना भी नहीं जाता।
मालदह और मुर्शिदाबाद जिलों में जनसंख्या लगभग बराबर होने के बावजूद इधर के वर्षों की छिटपुट वारदातों के अलावा सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास नहीं है।
कोलकाता में बड़ी संख्या में मुसलमान हैं और उत्तर और दक्षिण 24 परगना,हावड़ा,नदिया और हुदगली में बहुत सारे इलाकों में मुसलमानों की तादाद हिंदुओ के मुकाबले ज्यादा हैं।
फिरभी अमन चैन और साझा सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा बांग्ला की वजह से कोई बड़ी सांप्रदायिक वारदात नहीं हुई हैं।भारत विभाजन और शरणार्थी समस्या के शिकार देश के इस हिस्से में अमन चैन का माहौल काबिले  तारीफ रहा है।
उत्तर भारत,बाकी देश और बांग्लादेश में भी मंदिर मस्जिद विवाद की वजह से बार बार व्यापक पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हाल के दशकों में होती रही है।
वाम शासन के 35 सालों में वैसी हिंसा की कोई वारदात बंगाल में नहीं हुई है।हाल के वर्षों में जो छिटपुट हिंसा होती रही है,उसपर पुलिस प्रशासन ने तुंरत काबू  पा लिया।
लेकिन पिछले तीन चार दिनों से उत्तर 24 परगना में हिंसा का तांडव मचा हुआ है।इस बीच कोलकाता में भी गड़बजड़ी फैलाने की कोशिश हुई,कटट्रपंथियों को तुरंत गिरफ्तार करके कोलकाता में हालात नियंत्रित कर लिया गया।
अब तक उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती मुस्लिम बहुल इलाकों में सुंदरवन से सटे हिंगलगंज,बशीरहाट,बादुड़िया से लेकर सीमावर्ती वनगांव के देगंगा इलाकों तक हालात बेकाबू रहे हैं।
बादुड़िया में कर्फ्यू लगा है।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल में टकराव होने के बाद भाजपा ने जोर शोर से बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।केंद्र ने राज्यपाल से रपट मांगी है और राज्यपाल ने वह रपट भी भेज दी है।
ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस ने यह मांग उठते ही बाकायदा संवादाताओं को संबोधित करते हुए बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने का पुरजोर विरोध किया है। इसके साथ ही विमान बोस ने बंगाल में हाल की हिसां की वारदातों के संघ परिवार का गेमप्लान बताया है।
दार्जिलिंग में हिंसा भड़कने के तुरंत बाद हमने एक घंटे के वीडियो में बांग्ला में विस्तार से इस गेमप्लान के बारे में बताया है और सभी राजनीतिक दलों को सचेत रहने की चेतावनी दी है।
हमने ममता बनर्जी से विभाजन की राजनीति से बाज आने की अपील की थी और मौजूदा हालात को विपक्ष के सफाये और पहाड़ पर राजनीतिक कब्जे की उनकी महत्वाकांक्षा का परिणाम बताया था।इस वीडियो को अबतक करीब इक्कीस हजार से ज्यादा लोगों ने देखा है।
हस्तक्षेप पर लगे आलेखों में आप देख सकते हैं कि हम बंगाल में जाति,धर्म,भाषा,नस्ले के सभी क्षेत्रों में वर्चस्व के खिलाफ हमेशा मुखर रहे हैं।
महाश्वेता देवी से हमने दशकों पुराना अंतरंग रिश्ता सिर्फ इसलिए तोड़ दिया क्योंकि वे ममता बनर्जी की सरकार से नत्थी हो गयीं।उनकी वजह से नवारुण दा से भी हमारा संप्रक टूटा,जिसका हमें अफसोस है।
जाहिर सी बात है कि हमारे लिए यह सत्ता की राजनीति नहीं है और न यह ममता बनर्जी का मामला है।
हम इसे संघ परिवार का मामला भी नहीं मानते।हम शुरु से इसे राष्ट्रीय सुरक्षा,एकता और अखंडता का मामला मानते रहे हैं।
खासकर सिक्किम के हालात के मद्देनजर।चीन को भारत में हस्तक्षेप का अब तक कोई मौका नहीं मिला है।लेकिन सिक्किम में हस्तक्षेप करने की उसने खुल्ला ऐलान कर दिया है।
नेपाल और बांगलादेश के साथ भारत के संबंध अब वैसे नहीं रह गये हैं।खासकर नेपाल के रास्ते दार्जिलंग के पहाड़ों को सिक्किम के साथ अलग करने की गतिविधियों को चीन से हर तरह की मदद मिलने की आशंका है।ममता ने ऐसा आरोप लगाया भी है।
दूसरी ओर,अरुणाचल प्रदेश पर चीन ने अपना दावा नहीं छोड़ा।उस मोर्चे पर तनाव लगातार बना हुआ है।
उत्तराखंड में भी चीनी घुसपैठ होती रहती है।
हिमालय 1962 की लड़ाई में जख्मी हुआ है और अभ भी युद्ध हुआ तो हिमालय और हिमालयी जनता पर इसका सीधा असर है। उत्तराखंड में जमे,पले बढ़े होने की वजह से हमें सबसे ज्यादा फिक्र हिमालय की सेहत,जल संसाधन और पर्यावरण की है चाहे लोग हमें राष्ट्रद्रोही का तमगा देते रहे।
अगर बंगाल की हिंसक वारदातों को जल्द से जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो उत्तर पूर्व के अलग थलग पड़ने के नतीजे भारत की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
ममता बनर्जी की सरकार गिराकर या बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने से हालात पर राजनीतिक नियंत्रण रखना भी मुश्किल हो जायेगा।केंद्र सरकार इस पर गौर करें तो बेहतर।
हमारे ख्याल से वाम मोर्चा ने इसीलिए राष्ट्रपति शासन का विरोध किया है,जो इन हालात में एकदम सही है।
बाकी राजनीतिक दलों को भी अपने राजनीतिक हित के बजाये दार्जिलिंग के साथ बाकी बंगाल और समूचे पुर्वोत्तर में खतरे में पड़ी सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर कदम उठाने चाहिए। यह ममता का समर्थन नहीं है,राष्ट्रहित में ऐसा जरुरी है।
ममता बनर्जी ने संघ परिवार के दंगाई एजंडा के मुकाबले शांतिवाहिनी हर बूथ के स्तर पर बनाने का ऐलान किया है।
उन्होंने पंद्रह दिनों के भीतर साठ हजार शांति कमिटियां गैरराजनीतिक लोगों को लेकर बनाने का ऐलान किया है।
गोरक्षकों के तांडव के साथ साथ देश में मुस्लिम कट्टर पंथ के आक्रामक तेवर के मद्देनजर ऐसी शांति कमिटियां पूरे देश में बनें तो बेहतर।भाजपा की सरकारे भी ऐसी शांति कमिटियां बनायें तो और बेहतर है क्योंकि भाजपा शासित राज्यों से सांप्रदायिक हिंसा पूरे देश में संक्रमित हो रही है।
इस बीच आज बशीरहाट में दोबारा  हिंसा भड़क गयी है।जिसका सीधा मतलब है कि जुबानी जमाखर्च के अलावा जमीन पर शांति प्रक्रिया शुरु ही नहीं हो सकी है,जबकि पुलिस और प्रशासन की तरह से उत्तर 24 परगना में हिंदुओं और मुसलमानों को लेकर शांति बैठकें शुरु करने का दावा किया गया है।
अमन चैन के लिए साझा चूल्हे की विरासत बचाना बेहद जरुरी है,जो खतरे में है।कितने खतरे में है ,उसे समझने के लिए इस रपट पर गौर करें।
कोलकाता के बांग्ला दैनिक 'एई समय' (टाइम्स ऑफ इण्डिया ग्रुप) के पत्रकार ने बसिरहाट के मागुरखाली गाँव से रपट दी है - इस गाँव में हिन्दू-मुसलमान सैकड़ों साल से एक साथ रहते आ रहे हैं।
भजन-कीर्तन गाने वाले दल, हिन्दू -मुसलमान दोनों के घर-आँगन में गाते हैं। मस्जिद के सामने देवी-देवताओं की जय के नारे लगाते हैं।
इसी गाँव का 18 साल का युवा है - सौभिक सरकार, जिसकी एक धार्मिक घृणात्मक फेसबुक टिप्पणी ने आसपास के इलाकों में उत्तेजना फैला दी।
कुछ युवकों ने सौभिक के घर में आग लगाने की कोशिश की। मस्जिद कमिटि के अध्यक्ष अमीरुल इस्लाम ने उन्हें रोका।
बाद में बाहर से आये ढेरों युवाओं ने सरकार के घर पर हमला किया, जिसे गाँव के हिन्दूओं-मुसलमानों ने मिल कर रोका। मकसूद ने दमकल को खबर दे कर बुलाया।
बाहरी लोग आएं और गाँव के एक व्यक्ति के घर को आग लगा जाएँ, ऐसा कभी नहीं हुआ, कहा गाँव की गौरी मंडल ने।
कौन थे ये बाहरी हमलावर ...। "
(प्रसेनजित बेरा की रपट पर आधारित)

Wednesday, July 5, 2017

RSS is all set to push for President`s rule in West Bengal with full bloom Cow Politics.CPIM opposes. Mamata deploys sixty thousand peacekeeping committee civilians to counter RSS Game plan of communal violence.Should be replicated elsewhere. Palash Bisw

RSS is all set to push for President`s rule in West Bengal with full bloom Cow Politics.CPIM opposes.
Mamata deploys sixty thousand peacekeeping committee civilians to counter RSS Game plan of communal violence.Should be replicated elsewhere.
Palash Biswas
RSS is all set to push for President`s rule in West Bengal with full bloom Cow Politics.Mamta Banerjee is appealing for peace and decided to create sixty thousand booth level peace committes to counter RSS provoked violence.She has got an unexpected but very welcomesupport from the archrival Left as CPIM has opposed BJP demand for President Rule.
Mamata Banerjee has explained that the police and administration tried its best to control the rioting mob as for three days,Kolkata adjoing Muslim dominated North 24 pgs district is inflicted with communal violence.Had police opened fire to control or disperse the mob,hundreds would have been killed,it is her point.
Mamata`s peace committes to counter communal violence at grass root level is rather a very strong initiative as rumour monger mmachinery active in social media creating Hindutva wave and breaking news that temples are attacked by Muslims and Hindus are not safe in Bengal.It is now very clear that RSS is behind Gorkhaland movement as it openly supports partition of Bengal.At the same time ,different branches of RSS have been organizing cadre camps to capture Bengal and cows are being distibuted free of cost.
It is perhaps first time that the left has openly supported Mamata Banerjee as the CPI-M on Wednesday said that the situation prevailing in West Bengal does not call for imposition of President's rule, but demanded immediate restoration of peace in the troubled areas of North 24-Parganas district. 
President of BJP's West Bengal wing, Dilip Ghosh, has demanded that the Centre impose President's rule in West Bengal and send central observers to assess the deteriorating law and order situation in the state.
Chief Minister Mamata Banerjee, however, proposed the deployment of peacekeeping forces, or a 'Shanti Vahini' on Wednesday evening, to maintain communal harmony.
Banerjee said that this 'Shanti Vahini' would be formed in 15 days in collaboration with youth and peaceful citizens and the local police stations. It would be stationed in 60,000-odd booths across the state to maintain communal harmony.
West Bengal Left Front chairman Biman Bose said that by demanding President' rule in Bengal, the BJP and the RSS were only laying bare their game plan.
"Steps should be taken to immediately restore peace in areas of North 24-Parganas district. But we don't agree with what BJP has demanded regarding imposition of President's rule in Bengal. The situation doesn't call for President's rule. Such demands only show the game plan of BJP and RSS," Bose told reporters.
Earlier today, BJP's Bengal president Dilip Ghosh demanded that President's rule be imposed in the state fortwith and that central observers be sent to assess the "worsening law and order" situation in the aftermath of communal clashes in North 24-Parganas district.
Meanwhile, BJP state in charge Kailash Vijayvargia alleged that over 2,000 Muslims attacked Hindu families in the North 24 Parganas district of West Bengal and its offices at several places were set on fire. 
Accusing the state government of failing to tackle the situation, BJP State President Dilip Ghosh demanded President rule in the state. Kailash Vijayvargiya, BJP general secretary urged Home Minister Rajnath Singh for his intervention.
The CPI(M) had yesterday demanded that an all-party meeting be convened to chalk a strategy to contain the explosive situation.
The Ministry of Home Affairs has meanwhile, asked the state government to submit a report on the situation. Rajnath Singh was also apprised by the governor about the clashes. The Home Minister has also reportedly asked the Chief Minister and Governor to resolve their difference and control law and order in the state.
Mamta Banerjee, meanwhile, has promised strict action against those who indulged in the violence. She also appealed to the citizens to maintain peace. "I condemn such violence. Despite the person (who made the Facebook post) being arrested, some people are still spreading violence. I appeal to both sides, please don't do politics of riot."
The communal clashes snowballed into a spat between Mamta Banerjee and Keshari Nath Tripathi. Banerjee alleged that she was threatened and "insulted" by the governor. She also accused him of acting in a partisan manner. "He is speaking like a block president of BJP," Banerjee alleged. The TMC supremo also said that she even thought of quitting office over this "humiliation." Criticising the governor for crossing the constitutional line, TMC spokesperson Derek O'Brien compared the Raj Bhawan to 'RSS Shaakha.' He also demanded action against the governor.
Mind you,as the West Bengal government struggles to restore peace in Darjeeling, violent clashes between two communities in North 24 Parganas district has put the state once again on boil. The clashes that broke out on Monday night prompted the Centre to rush 300 paramilitary personnel to the spot to pacify the situation. As a precautionary measure, section 144 was imposed in Basirhat and the state government was asked to submit a detailed report to the Ministry of Home Affairs on the violence. However, the war of words between Chief Minister Mamta Banerjee and Governor Keshari Nath Tripathi has worsened the situation.
Media reports,an objectionable Facebook post allegedly shared by a class X student on Monday is said to have triggered the communal clashes in West Bengal's North 24 Parganas district. While the police arrested the accused on the same day, dozens of shops and houses were vandalised by a mob. They also blocked roads and demonstrated in front of Baduria police station.
Protesters also torched police and government vehicles. North 24 Parganas Superintendent of Police Bhaskar Mukherjee was injured when a mob attacked him, according to a report in PTI. Announcements were being made using the public address system asking people to refrain from resorting to violence. Train services were also disrupted in several areas.
The violence which started in Baduria, around 70 kms from Kolkata, later spread to the other districts in the state. Schools and colleges were shut following the riots. Internet services were suspended in Baduria on Wednesday and section 144 was imposed.

गोडसे भक्तों को गांधी का वास्ता : ये मजाक सिर्फ मोदी ही कर सकते हैं

समान नागरिक संहिता से पहले पूरे देश में गौहत्या तो रोकें
समान नागरिक संहिता से पहले पूरे देश में गौहत्या तो रोकें

भाजपा गौ रक्षा जैसे अति संवेदनशील तथा धार्मिक भावनाओं से सीधे तौर पर जुड़े हुए विषय पर पूरे देश में समान कानून बनाए जाने का साहस क्यों नहीं कर पाती?

तनवीर जाफ़री
2017-07-04 19:55:31
घुमक्कड़ छायाकार प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए
घुमक्कड़ छायाकार, प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले, भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए!

वे नैनीताल छोड़ने के बाद पूरी तरह यायावरी जीवन जी रहे थे और उनकी हर तस्वीर में मुकम्मल पहाड़ नजर आता था। दुर्गम पहाड़ों के पहाड़ से भी मुश्किल ज...

पलाश विश्वास
2017-07-03 22:31:36
वे मुसोलिनी के दीवाने थे हिटलर उनकी धड़कनों का राजा था उन्हें तो गांधीजी को मारना ही था
वे मुसोलिनी के दीवाने थे. हिटलर उनकी धड़कनों का राजा था. उन्हें तो गांधीजी को मारना ही था.

उन्हें तो गांधीजी को मारना ही था. उनके सामने सवाल एक व्यक्ति का नहीं एक विचारधारा का था. उन्हें भारत की मेलजोल की संस्कृति से नफ़रत थी. उन्हें गंग...

अतिथि लेखक
2017-07-03 22:13:36
ट्यूबलाइट  सलमान को महंगी पड़ी इस बार राष्ट्रभक्ति
ट्यूबलाइट : सलमान को महंगी पड़ी इस बार राष्ट्रभक्ति

ट्यूबलाइट आज के सीएफएल के जमाने में चल ही नहीं पाएगी। उम्मीद है सलमान आगे से विषय चयन पर गंभीरता बरतेंगे।

अतिथि लेखक
2017-07-03 18:57:57
राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव क्यों
राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव क्यों?

राष्ट्रपति पद पर आने वाले व्यक्ति की आरएसएस के प्रति अटूट वफादारी बहुत ही समस्यापूर्ण है।

राजेंद्र शर्मा
2017-07-03 18:33:43
नवउदारवादी नीतियों के समर्थक भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते
नवउदारवादी नीतियों के समर्थक भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते

नवउदारवादी नीतियों के समर्थक, चाहे वे नेता हों या सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट, भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते. साम्प्रदायिकता शुरू से ही पूंजीवादी कब्जे ...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-07-03 11:51:44
मोदीजी कॉमनसेंस और भीड़ संस्कृति  वे पहले भी बुद्धिजीवी नहीं थे
मोदीजी कॉमनसेंस और भीड़ संस्कृति : वे पहले भी बुद्धिजीवी नहीं थे

​​​​​​​मोदीजी पहले भी बुद्धिजीवी नहीं थे, उनकी विशेषता यह है कि उनके जैसा अनपढ़ और संस्कृतिविहीन व्यक्ति अब बुर्जुआजी की पहचान है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2017-07-03 09:53:19
संघ की पालकी ढो रहे नीतीश
संघ की पालकी ढो रहे नीतीश

नीतीश को दूसरे सोशलिस्टों ने ही सिरे से खारिज कर दिया है और कई गम्भीर सवाल उठाये हैं। सोशलिस्ट पार्टी के डॉ. प्रेम सिंह ने कहा है कि जद(यू) ने अप...

अमलेन्दु उपाध्याय
2017-07-02 19:14:55
जीएसटी  भाजपा और आरएसएस के लोग मरते लोगों को फिर से एक बार लड्डू खिलायेंगे
जीएसटी : भाजपा और आरएसएस के लोग मरते लोगों को फिर से एक बार लड्डू खिलायेंगे

यह पूँजीवाद का वही विजय रथ है जो अपने पीछे न जाने कितनी लाशों, कितनी बर्बादियों और मनुष्य के ख़ून और पसीने का कीचड़ छोड़ता जाता है। सर्वनाशी साबि...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-07-02 00:39:26
तद्भव का नया अंक  इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया
तद्भव का नया अंक : इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया

आने वाली पीढ़ी हमारे वर्तमान युग को मध्ययुग कहे या न कहे, कोई मायने नहीं रखता। लेकिन यह तय है कि हम अपने वर्तमान को जिस रूप में देखते है, आगत पीढ़ि...

अतिथि लेखक
2017-07-02 00:26:10
मुसलमानों को जेएनयू या कश्मीर पर बयान नहीं देना चाहिए पुलिस से ज्यादा भय गोरक्षकों का है
मुसलमानों को जेएनयू या कश्मीर पर बयान नहीं देना चाहिए, पुलिस से ज्यादा भय गोरक्षकों का है

आधुनिक राष्ट्र-राज्य का यह वीभत्सतम रूप है। आप मुझसे अनिर्बन के 'देशद्रोह' का हिसाब क्यों नहीं मांगते, उमर का ही क्यों?... ​​​​​​​बहुसंख्यक तुष्ट...

अतिथि लेखक
2017-07-02 00:11:47
फर्जी सेकुलरों के राज्य का भगवाकरण जारी है यह नीतीश से ज्यादा लालू के चेतने का वक्त है
फर्जी सेकुलरों के राज्य का भगवाकरण जारी है, यह नीतीश से ज्यादा लालू के चेतने का वक्त है

तो क्या अब बिहार भी 'जय श्रीराम' की आग में जलने वाला है? क्या बजरंग दल वालों को नीतीश कुमार के रुख का अंदाजा हो गया है?

अतिथि लेखक
2017-07-01 23:49:36
कोविन्द दलित राजनीति और हिन्दू राष्ट्रवाद  आरएसएस की राजनीति भारतीय राष्ट्रवाद की विरोधी है
कोविन्द, दलित राजनीति और हिन्दू राष्ट्रवाद : आरएसएस की राजनीति भारतीय राष्ट्रवाद की विरोधी है

क्या कोविन्द और पासवान जैसे लोग - जो दलितों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलते - दलित नेता कहे जा सकते हैं? इस समय देश का द...

राम पुनियानी
2017-07-01 23:04:41
सलाहुद्दीन के बहाने अमेरिका कश्मीर में हस्तक्षेप करने की भूमिका तो नहीं बना रहा
सलाहुद्दीन के बहाने अमेरिका कश्मीर में हस्तक्षेप करने की भूमिका तो नहीं बना रहा ?

जब भी धर्म को राज-काज में दखल देने की आज़ादी दी जायेगी राष्ट्र का वही हाल होगा जो आज पाकिस्तान का हो रहा। गाय के नाम पर चल रहे खूनी खेल की अनदेखी...

शेष नारायण सिंह
2017-06-30 18:44:49
चिंता भीड़तंत्र की
चिंता भीड़तंत्र की

हिंदुस्तान की बहुसंख्यक जनता मिल-जुलकर, शांति से रहने में ही भरोसा रखती है। वह किसी भी कारण से कानून हाथ में लेने की विरोधी है और अपने नाम पर तो,...

देशबन्धु
2017-06-30 16:07:10
ढाई युद्ध लड़ने की तैयारी राष्ट्रहित में या कारपोरेट हित में
ढाई युद्ध लड़ने की तैयारी राष्ट्रहित में या कारपोरेट हित में?

रक्षा क्षेत्र के विनिवेश के बाद युद्ध से किन कंपनियों को फायदा कि प्रधान स्वयंसेवक और विदेश मंत्री की जगह वित्तमंत्री चीन को करारा जबाव देने लगे?

पलाश विश्वास
2017-06-30 15:56:04
notinmyname  इस इंसान मोदी की एक डेमोक्रेसी में कोई जगह नहीं
#NotInMyName : इस इंसान (मोदी) की एक डेमोक्रेसी में कोई जगह नहीं

#NotInMyName आप किसमें अपना भविष्य ढ़ूंढ़ रहे हैं, जिन्ना के पाकिस्तान में, हिटलर के जर्मनी में या आज के सीरिया में? तय आपको ही करना है, क्योंकि ...

अतिथि लेखक
2017-06-30 15:12:49
नए दौर के आंदोलनों में मार्क्‍सवाद के अवशेषों की तलाश
नए दौर के आंदोलनों में मार्क्‍सवाद के अवशेषों की तलाश

एक मार्क्‍सवादी का काम उदारवाद से हासिल उपलब्धियों का इस्‍तेमाल करते हुए सैद्धांतिकी को व्‍यवहार में उतारना है, नकि दुश्‍मन का दुश्‍मन दोस्‍त वाल...



Tuesday, July 4, 2017

Now communal riots in Bengal! Palash Biswas

Now communal riots in Bengal!
Palash Biswas

We should unite for peace,law and order.It is anarchy in Bengal.The rioting elements in political dress must be curbed to save Bengal as well as India.If Bengal is set on fire it might inflict the borders and furthe refugee influx would complicate the already worse situation.
Sikkim is already cut off and Darjeeling continues to be burning.Violence unabated amidst Sikkim border stand off which threats national security and integrity.
 Now it is riot in West Bengal.Communal polarization politics created the chaos. Votebank politics supported,protected communalism is full bloom in Bengal added with Cow Politics.
RSS is distributing Cows in bengal free of cost.
Racial divide is complete.Bengal has been the target and the government as well as secular and democrate politics failed miserably.Not only Darjeeling,Benagl is set on fire.Communal polarization with racial repression sets Hell losing.
Just go trough the media coverage!
media reports:

An 'objectionable' Facebook post about a religious site has triggered communal clashes in West Bengal's North 24 Parganas district, prompting the Centre to rush 300 paramilitary personnel on Tuesday to bring the situation under control.

West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee said the clashes broke out between two communities in Baduria of the Basirhat sub-division over the "objectionable" post.

The clashes led to a war of words between the chief minister and Governor Keshari Nath Tripathi. Briefing the media at the state secretariat, Banerjee accused Tripathi of threatening her over phone and alleged that he was acting like a "BJP block president".

"He (Governor) threatened me over phone. The way he spoke, taking the side of BJP, I felt insulted. I have told him that he cannot talk like this," Banerjee told reporters.

"He (the governor) is behaving like a block president of BJP. He should understand that he has been nominated to the post…," she said. "He talked big on law and order. I am not here at the mercy of anyone. The way he spoke to me, I once thought of leaving (the chair)."

Meanwhile, the BJP alleged that over 2000 Muslims attacked Hindu families in the North 24 Parganas district of West Bengal and its offices at several places were set on fire. Accusing the state police of failing to control the situation, party general secretary Kailash Vijayvargiya, who is also in charge of the state, urged Home Minister Rajnath Singh to intervene in the matter.

Several shops were torched and houses ransacked in Baduria, Tentulia and Golabari. On Monday night, a mob attacked Baduria police station and set ablaze several police vehicles.

আহত পুলিশ সুপার, বাদুড়িয়ায় গেল বিএসএফ, আসছে আধা সেনাও

Story image for bengal communal riots from The Indian Express

Communal violence in West Bengal over 'objectionable' Facebook ...

The Indian Express-3 hours ago

Communal violence broke out in North 24 Parganas district of West Bengal on Tuesday over a Facebook post prompting Centre to rush 300 ...

Communal riots in Baduria, West Bengal over objectionable ...

Financial Express-1 hour ago

West Bengal: Communal violence in Baduria over objectionable FB ...

Daily News & Analysis-2 hours ago

Communal riots turn Bengal's Baduria into battlefield, Central forces ...

indiablooms-2 hours ago

Mamata Banerjee says communal violence breaks out in West ...

Zee News-3 hours ago

Mob goes on rampage in Bengal over blasphemous FB post ...

In-Depth-Hindustan Times-2 hours ago

আহত পুলিশ সুপার, বাদুড়িয়ায় গেল বিএসএফ, আসছে আধা সেনাও

ABP Anand Reports

কলকাতা: সাংবিধানিক প্রধানের সঙ্গে রাজ্যের প্রশাসনিক প্রধানের সরাসরি সংঘাত!


যা ঘিরে রাজ্য রাজনীতিতে শোরগোল। চরমে তৃণমূল-বিজেপি চাপানউতোর।


উত্তর ২৪ পরগনার বাদুড়িয়ার একটি ঘটনাকে কেন্দ্র করে ঘটনার সূত্রপাত। পুলিশ সূত্রে খবর, সম্প্রতি ফেসবুকে একটি পোস্ট করে একাদশ শ্রেণির এক ছাত্র। পোস্টে তাদের ভাবাবেগে আঘাত লেগেছে, এই অভিযোগ তুলে রবিবার ওই ছাত্রের বাড়ির সামনে জমায়েত হয় একটি গোষ্ঠী। পুলিশ পদক্ষেপের আশ্বাস দিলে তারা সরে যায়।


৩ জুলাই ভোরে ওই স্কুলছাত্রকে গ্রেফতার করে পুলিশ।


কিন্তু ওইদিনই বাদুড়িয়ার মোড়ে-মোড়ে অবরোধ শুরু করে অপর গোষ্ঠীর লোকজন। দুপুর পর্যন্ত পরিস্থিতি স্বাভাবিক ছিল। কিন্তু বিকেলের দিকে বেশ কিছু জায়গায় দুই গোষ্ঠীর মধ্যে সংঘর্ষ বাধে। অশান্তি ছড়ায় বসিরহাট ও দেগঙ্গার একাংশে।


মঙ্গলবার সকাল থেকে অনন্তপুর, মালতিপুর-সহ একাধিক স্টেশনে অবরোধ শুরু করে একটি গোষ্ঠী। এদিনই, সশস্ত্র মিছিলের অভিযোগকে কেন্দ্র করে উত্তপ্ত হয়ে ওঠে বসিরহাট শহর। সূত্রের খবর, পুলিশের একাধিক গাড়িতে ভাঙচুর করা হয়। অপর গোষ্ঠীর কয়েকজনকে মারধরেরও অভিযোগ উঠেছে।এরপর পরিস্থিতি আরও অশান্ত হয়ে ওঠে। কয়েকটি জায়গায় গুলি-বোমা নিয়ে দুই গোষ্ঠীর সংঘর্ষ হয়। অশান্তির জেরে দীর্ঘক্ষণ থানা থেকে বেরোতে পারেনি বাদুড়িয়ার পুলিশকর্মীরা। ঘটনা সামলাতে গিয়ে উত্তর ২৪ পরগনার পুলিশ সুপার আহত হন।


এই পরিস্থিতিতে, মধ্যমগ্রামের ক্যাম্প থেকে থেকে বাদুড়িয়ায় পৌঁছেছে বিএসএফ।


নবান্ন সূত্রে খবর, কলকাতা পুলিশের একটি টিমও বাদুড়িয়া যাচ্ছে।


হাওড়ার পুলিশের কমিশনারের নেতৃত্বেও একটি দল বাদুড়িয়ার উদ্দেশ্যে রওনা দিয়েছে।


সূত্রের খবর, কেন্দ্র ৩ কোম্পানি আধা সামরিক বাহিনী পাঠাচ্ছে।

Monday, July 3, 2017

घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले,भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए! पलाश विश्वास

घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले,भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए!

पलाश विश्वास

मन बेहद उदास था।कई दिनों से पढ़ना लिखना बंद सा है।इतना घना अंधेरा दसों दिशाओं में है कि रोशनी की कोई किरण दीख नहीं रही है।अभी अभी फेसबुक खोला तो जगमोहन रौतेला के पोस्ट से पता चला है कि घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी जी का आकस्मिक निधन आज 3 जुलाई 2017 को कोटद्वार में हो गया है , वे अपने घर में पंखे से लटके मिले !

हम जिस कमल जोशी को जानते पहचानते हैं,उसके ऐसे दुःखद अंत की कोई आशंका कभी नहीं थी।

गिर्दा जब चले गये, वीरेनदा ने भी जब सांसें तोड़ी,तो इस आशंकित अंत के लिए हम लंबे अरसे से तैयार थे।लेकिन इस हादसे के मुखातिब हो सकने की कोई तैयारी नहीं थी।

पर्यावरण का मुद्दा जन प्रतिरोध का एक मात्र रास्ता है और इस सिलसिले में मैं सविता के साथ 2014 में देहरादून गया था। हमारे आदरणीय मित्र राजीव नयन बहुगुणा हमारे मेजबान थे और चूंकि हमें उनके पिता सुंदर लाल बहुगुणा से मिलना था तो राजीव दाज्यू से ही ठहरने के इंतजाम के लिए कहा था।

कोलकाता से रवानगी से पहले कोटद्वार में कमल दाज्यू को फोन कर दिया था कि आ जाओ,देहरादून। अरसे से नहीं मिले।

इससे करीब दस साल पहले सविता और मैं दिल्ली में बीमार ताउजी को देखने के बाद उधम सिंह नगर में अपने गांव बसंतीपुर के रास्ते  बिजनौर में सविता के मायके में ठहरे थे और कमल दाज्यू का आदेश हुआ था, कोटद्वार आ जाओ।हम रवाना होने ही वाले थे कि दिल्ली से भाई ने ताउजी के निधन का समाचार दिया।उऩका पार्थिव शरीर दिल्ली से बसंतीपुर रवाना हो चुका था,तो हम तब कोद्वार जा नहीं सके थे।फिर कभी कोटद्वार जाना नहीं हो सका।सचमुच,हिमालय से कोलकाता की दूरी बहुत ज्यादा है और हम अब भी कोटद्वार पहुंच नहीं सकते।

सविता ने उन्हें देखा तक नहीं था।हम नैनीताल जब भी हम गये, कमल जोशी आगे पीछे निकलते रहे थे।

राजीव नयन दाज्यू और किशोरी उपाध्याय ने गोलकुंडा हाउस में हमारे ठहरने का इंतजाम किया।

रात को दस बजे के करीब भारी बारिश के बीच कमल जोशी हाजिर हो गये।कहा कि राजस्थान के लिए ट्रेन पकड़नी है।

हमने कहा कि कैसे यहां तक पहुंचे।बोले किसी की बाइक ले आया हूं।देर रात तक खूब गप्पे हुईं,,पुराने दिन और पुराने साथियों को याद किया।

सविता से कमल दाज्यू की यह पहली और आखिरी मुलाकात थी।

वे जाने लगे तो मैंने यूंही पूछ लिया, इतने बरस हो गये,  इतने बड़े फोटोकार हो,तुमने हमारी कोई तस्वीर नहीं खींची और आज भी कैमरा लेकर नहीं आये।

गर्मजोशी के साथ कमल जोशी बोले,फिर मिलेंगे न,तभी खींचेंगे फोटो।

हमारी कोई तस्वीर खींचे बिना हमारे सबसे प्रिय फोटो कलाकार इस तरह चले गये,यह भी यकीन करना होगा।

विपिन चचा,निर्मल जोशी,निर्मल पांडे का निधन भी असमय हुआ और झटका भी तगड़ा लगा लेकिन उऩमें से किसी ने इसतरह खुदकशी नहीं की थी।

हमारे प्रिय कवि गोरख पांडेय ने भी खुदकशी की थी और हम सभी कमोबेश यह जानते थे कि किन कारणों से ,किन परिस्थितियों में उन्होंने खुदकशी की।

कमल दाज्यू के इस तरह पंखे से लटक जाने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही है।

हम जब एमए कर रहे थे,तो कमल जोशी रसायन शास्त्र में शोध कर रहे थे।यूं तो वे शेखर दाज्यू और उमा भाभी के दोस्त थे, लेकिन हम लोगों से दोस्ती करने में उन्होंने कोई देर नहीं लगायी। डीएसबी के कैमिस्ट्री लैब में वे हमेशा दूध चीनी रखते थे।

सर्दी की वजह से हम नैनीताल में गुड़ के साथ चाय पीते थे।लेकिन कैमिस्ट्री लैब में कमल जोशी बीकर को बर्नर पर रखकर चाय बनाते थे और वह चाय हम परखनली में पीते थे।

ऐसी चाय फिर हमने जिंदगी भर नहीं पी।

गिरदा बेहद मस्त और मनमौजी थे।

कमल जोशी की तुलना उन्हीं से की जा सकती है।

दोनों खालिस कलाकार थे।

दोनों पहाड़ का चप्पा चप्पा जानते थे।

फिरभी गिरदा को नापसंद करने वाले लोग कम नहीं थे।लेकिन कमल जोशी को नापसंदकरने वाला कोई शख्स मुझे आज तक नहीं मिला।

अपनी सोच, अपनी सक्रियता और अपनी समझ में भी कमल दाज्यू की तुलना सिर्फ गिर्दा से की जा सकती है।

बरसों पहले उनके पिता घर से निकलकर लापता हो गये और कभी नहीं लौटे।पहाड़ को छानते रहने के बावजूद कमल जोशी की उनसे दोबारा मुलाकात हुई नहीं।

वे नैनीताल छोड़ने के बाद पूरी तरह यायावरी जीवन जी रहे थे और उनकी हर तस्वीर में मुकम्मल पहाड़ नजर आता था।

दुर्गम पहाड़ों के पहाड़ से भी मुश्किल जिंदगी गुजर बसर करने वालों के साथ वे एकात्म हो गये थे।

उनके ख्वाबों,उनकी आकांक्षाओं और उनके संघर्षों के वो जैसे अपने चित्रों में सहेज रहे थे,उन्हें देखकर हम अंदाजा लगाया करते थे कि बंगाल की भुखमरी में चित्र कला मार्फत इतिहास लिखने वाले सोमनाथ होड़ और चित्तप्रसाद जैसे लोग किस तरह चित्र बनाते होंगे।

दिशाएं खोने की वजह से ही शायद ऐसा विक्लप चुनने की सोची होगी कमल दाज्यू ने।

दिशाएं हम लोगों ने भी खो दी हैं।

अब नहीं मालूम कब कहां से इस तरह की खबरें हमारा इंतजार कर रही हैं और पता नहीं ,दिशाएं खो देने की स्थिति में हममें से कितने लोग इस तरह की त्रासदी से अपना जीवन का अंत कर देंगे।

जगमोहन रौतेला ने लिखा हैः

 

 

*** दुखद खबर ****

..............................

बड़े दुख और पीड़ा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी जी का आकस्मिक निधन आज 3 जुलाई 2017 को कोटद्वार में हो गया है . वे अपने घर में पंखे से लटके मिले ! एक घुमक्कड़ , यायावर , पहाड़ को बहुत ही नजदीक से जानने समझने , उसके लिए हमेशा चिंतित रहने वाले व्यक्ति का यूँ अचानक से चला जाना बहुत ही पीड़ादायक है . कल ही उन्होंने देर रात को इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक से फोन पर बात की थी . पर कहीं से भी कोई तनाव उनकी बातों में नहीं था . फिर अचानक आज क्या हो गया ? किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा है .

ये क्या किया कमल दा आपने ? क्या कोई भी ऐसा नहीं था जिसे आप अपने मन की कह सकते थे ? क्या इतने सारे मित्रों व शुभचिंतकों के बाद भी आप इतने अकेले थे ? जो पूरे उत्तराखण्ड में हमेशा घुमक्कड़ी करता रहता हो , वह इतना अकेला , बेबस कैसे हो सकता है कमल दा ! क्या कहूँ ? क्या लिखूँ ? समझ नहीं आ रहा है . आप हमेशा याद आवोगे कमल दा !

अलविदा कमल दा ! अलविदा !! और क्या कहूँ ? आखिरी विदाई तो मन मारकर देनी ही पड़ेगी ना आपको !


मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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