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Tuesday, January 20, 2026

हमारी विदेश नीति क्या ट्रंप की सनक है?

हमारी विदेश नीति क्या ट्रंप की सनक है? हमारी कोई विदेश नीति है या राष्ट्रपति ट्रंप की सनक तय करती है हमारी विदेश नीति?अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की जिसमें ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र बताया गया है।इस पोस्ट के बाद यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है और क्षेत्र का तनाव भी गहरा गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस के साथ तीखी नोकझोंक शुरू कर दी है। उन्होंने फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। यह सब इसलिए क्योंकि फ्रांस ने ट्रंप के प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया। भारत को भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्यौता है।क्या करेगी भारत सरकार। भगोड़ों की दादागिरी मानने से साफ इनकार कर दिया है यूरोप, लैटिन अमेरिका के देश, रूस और चीन ने। नाटो टूटने के कगार पर है।इजराइल के सिवाय इस दुनिया में अमेरिका का सबसे जिगरी दोस्त है अमेरिका। टैरिफ के साथ भारत विरोधी ट्रंप की सनक के बावजूद। क्या मजबूरी है? अमेरिका के हितों के साथ किनके हित जुड़े हैं? फोटो:आजतक

Monday, January 19, 2026

खुद को बदलकर देखें

दिनेशपुर हाईस्कूल से नैनीताल में डीएसबी कॉलेज परिसर में जीआईसी में 1973 में जब हमने प्रवेश किया तो पढ़ने लिखने का जबरदस्त माहौल था। डीएसबी रीडिंग रूम और लाइब्रेरी के अलावा मालरोड के दुर्गा साह पुस्तकालय हमारे लिए ज्ञान के खजाने थे।सारे सहपाठी,मित्र और प्रोफेसर भी पढ़ने लिखने वाले थे। हम चूंकि शुरू से करियरिस्ट नहीं थे, हम अपने पाठ्यक्रम के अलावा दुनियाभर के साहित्य और ज्ञान विज्ञान की जरूरी किताबें पढ़ते थे।हम सभी। इसपर कॉलेज और मालरोड पर हिमपात के मध्य भी हमारी निरंतर चर्चा होती थी। किताबें तब मोटी होती थी। लेकिन हम कोई किताब शुरू करके अंत तक जरूर पढ़े थे।खाना पीना नहाना सोना सबकुछ छोड़कर। हमारी पीढ़ी ही ऐसी थी। लिखना नियमित शुरू हुआ नैनीताल समाचार से। जस का तस कितना ही लंबा लिखने की आदत बन गई। Rajiv Lochan Sah दा कहते रहते,थोड़ा छोटा लिखो।हम कभी नहीं माने। 1980 में दैनिक आवाज धनबाद से पेशेवर पत्रकारिता शुरू की।छह पेज के अखबार में हर रोज एक डेढ़ पेज मेरे होते थे। कोयला खानों, आदिवासियों और मजदूरों के बारे में मेरे लिखे के पाठक भी पूरे झारखंड में थे।जो अब भी हमारे साथ हैं। दैनिक जागरण और दैनिक अमर उजाला में तो पहले ही पेज पर लगभग रोज मेरे लंबे लंबे लेख छपते थे। जनसत्ता में चूंकि संपादकीय के लोग न रिपोर्टिंग करते थे और न उन्हें लिखने का मौका था। अखबारों में लंबा लिखने का पटाक्षेप हो गया। डीएसबी से ही कहानियां कविताएं छपने लगी थीं। मेरी लगभग सभी कहानियां लंबी या बहुत लंबी होती थी। उनका मिशन, नई टिहरी पुरानी टिहरी कहानी के रूप में लघु उपन्यास ही थे। कविताएं भी लंबी छपती थीं।जैसे तराई कथा पूरे बत्तीस पेज की। अमेरिका से सावधान इंटरैक्टिव नोवेल था,जो दस साल तक छपता रहा।इतना लंबा छपा कि समेटना असंभव हो गया। अंग्रेजी में लेख चूंकि दुनियाभर में छपते थे, उनकी लंबाई अंग्रेजी पत्र पत्रिकाओं के मुताबिक होती थी।लेकिन मेरे ब्लॉग बहुत लंबे होते थे।हिंदी और अंग्रेजी में। बांग्ला में मेरे पाठक कम हैं,इसलिए बांग्ला में लिखे सारे ब्लॉग छोटे थे। बांग्ला में प्रकाशित आलेख भी। यूट्यूब पर चैनल चलाया अंग्रेजी में तो वीडियो तीन तीन घंटे के बनते गए। कुल हासिल क्या हुआ? लगभग शून्य। नब्बे के दशक में ही इंटरनेट और गूगल से पहले की दुनिया में अंग्रेजी अखबार हिंदू ने शेषांश छापना बंद कर दिया। अखबारों को बदलती दुनिया का सच पहले समझ में आया। फिर बाजार के मुकाबले अखबारों को वैचारिक सामग्री की जरूरत नहीं रही। जरूरी लेखन के बजाय ट्रेडिंग लेखन शुरू हो गया और हम तब भी अपनी शर्तों पर लिखना चाह रहे थे। प्रिंट से बाहर हो गए। अब प्रासंगिक और जरूरी जैसी कुछ बात है भी नहीं।सबकुछ ट्रेडिंग है। प्रेरणा अंशु का संपादन करते हुए आर्थिक संकट के साथ साथ कंटेंट संकट का सामना किया।लेकिन पठनीयता और पाठकीय संकट सबसे ज्यादा गहरा हो गया। जो पत्रिकाएं बौद्धिक और शोध सामग्री प्रकाशित करती हैं या प्रतिष्ठित लोगों को ही छापती हैं,उनके लिए कोई संकट है या नहीं, हम नहीं जानते। उनके पाठक निश्चित तौर पर होंगे। हमारे पाठक ऐसे आम लोग हैं,जो पढ़ने लिखने की दुनिया से बाहर हाशिए के लोग हैं। हमारे ज्यादातर रचनाकार नए और युवा हैं और इनमें भी ज्यादातर वंचित वर्गों और समूह के लोग हैं। पत्रिका जनता के लिए और जन सहयोग से ही चलती है तो जनता को पत्रिका से जोड़े रखना हमारी मजबूरी है,जबकि हम जनता के मुद्दों पर ही पत्रिका निकाल रहे हैं।बाजार के तौर तरीके हम अपना नहीं सकते। लोग पढ़ नहीं रहे। अपने मुद्दों में भी उनकी रुचि नहीं है। दृष्टि नहीं है।समझ नहीं है। ऐसे पाठकों को जोड़ने के लिए बेहद रचनात्मक होने की जरूरत है। ये सभी लोग डिजिटल हो गए हैं। जितना समय वे दें,उतने में ही सटीक,तथ्यपूर्ण,प्रभावी और संक्षिप्त लिखने की जरूरत है। इसलिए अब हम ठोस लेखन की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। यह हम सबके लिए चुनौती है। कमोबेश सबको लंबा लिखने की आदत है। हम 1973 से अब तक लंबा ही लिखते रहे हैं। हमें अपनी आदत बदलनी पड़ रही है।लोग पढ़े ही नहीं तो पत्रिका हो या किताब, छापने का क्या मतलब है? प्रेरणा अंशु में अब मैं एक पेज से लंबा कुछ नहीं लिखूंगा। कोशिश और प्रयोग करके देखने में हर्ज क्या है? यह सही है कि जो पढ़ते नहीं हैं,उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर हैं। लंबा हो या छोटा, बहुसंख्य पाठकों को पढ़ने लिखने की संस्कृति से जोड़ने की चुनौती उंगली पर हिमालय उठाने की जैसी है। हम हिमालय के लोग हैं। हार कैसे मान लें? कुछ नया करके ही देख लें। सत्तर साल की जिंदगी में हम कामयाब कभी नहीं रहे। एकबार फिर नाकाम ही तो होंगे। आप हमारे साथ हैं?

Tuesday, January 13, 2026

बच्चों के विवेकानंद

#युवा_दिवस, #बसंतीपुर #बच्चों_के_स्वामी_विवेकानंद #नवीन_संघ Nityanand Mandal की पहल पर बसंतीपुर के नन्हे मुन्ने बच्चों ने युवा दिवस पर काव्यपाठ के माध्यम से स्वामी विवेकानंद को याद किया। बड़े बच्चों के साथ डोडो ने अपने दोस्तों राम, कनिष्क, रुद्रांश,सिद्धार्थ, कौशिक, काव्या,हिमानी,शिवन्या, जया, शिवा,पुनीत, धनराजऔर कुछ बड़े बच्चों भावना, हर्षिता,प्रतिभा और गांव के तमाम बच्चों के साथ कविताओं के माध्यम से स्वामी विवेकानंद को स्मृति प्रणाम किया। इस अवसर पर डॉक्टर Gurubachan Lal Khurana , डॉक्टर सुधीर अधिकारी, गुरुजी भृगुनाथ मौर्य और बसंतीपुर के लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में कवितापाठ के मध्य ही स्वामीजी के बारे में बच्चों से सवाल किए गए और तत्काल उन्हें अपने जवाब के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम उसी नवीन संघ के बैनर के तहत आयोजित किया गया,जिस हम जब बच्चे थे और प्राइमरी के छात्र थे,हमने यानि बसंतीपुर में जन्मे पहली पीढ़ी के बच्चों ने संगठित किया था। नवीन संघ के माध्यम से आज से साठ साल पहले हमने बसंतपुर में विवेकानंद पुस्तकालय खोला था।हम सभी पढ़ते थे और अपनी किताबों से यह पुस्तकालय शुरू किया था। नवीन संघ के संस्थापक कृष्णपद मंडल बंगाल में अपने ननिहाल में कक्षा दो तक पढ़कर आए थे।नवीन संघ इनका इडिया आइडिया था।वे बहुत अच्छे खिलाड़ी थे। नवीन संघ के माध्यम से हम खेल कूद भी करते थे।पुस्तकालय का आइडिया मेरा और टेक्का यानि नित्यानंद का था।कार्यक्रम में तबके नवें संघ के मेरे और नित्यानंद के अलावा विवेक दास, गोविंद मंडल और कई सदस्य उपस्थित थे। अफसोस यह है कि नवीन संघ के हमारे ज्यादातर साथी अब दिवंगत है,जिनमें कृष्णपद भी शामिल है।कृष्णपद का पोता प्रियांशु राष्ट्रीय स्तर का एथलीट है। हमने स्वामीजी के बारे में बताते हुए मनुष्यता के धर्म और नर नारायण के उनके विचारों के साथ रामकृष्ण मिशन की भी चर्चा की और बच्चों को नवीन संघ की कथा भी सुनाई। बच्चों से पढ़ने लिखने की संस्कृति बहाल करने और नवें संघ का काम आगे बढ़ाने की अपील की। यह बच्चों का कार्यक्रम था।उन्हें बहुत मजा आया। डोडो और उसके सभी दोस्तों को खूब मजा आया। क्या ऐसे कार्यक्रम हर गांव में आयोजित करना संभव नहीं है?

Sunday, January 11, 2026

आखिरी मुलाकात:सबकुछ याद रखने वाली 108 साल की मनमोहनी देवी

सबकुछ याद रखने वाली मनमोहनी देवी अब नहीं हैं। उनसे दूसरी मुलाकात नहीं हो सकी। यह आखिरी मुलाकात की कथा है। एक सौ आठ साल की जिंदगी की हम अकाल मृत्यु और बेमौत लाखों मौतों,एक के बाद एक आपदा,महामारी और घनघोर बेरोजगारी,महंगाई के दुस्सामाय में कल्पना भी नहीं कर सकते।हमारे आस पास कितने ही लोग बहुत कम उम्र में दुनिया को रोज अलविदा कह रहे हैं। रामपुर जिले के बिलासपुर तहसील के अंतर्गत 1959 में बसाए गए पूर्वी बंगाल के विभाजन पीड़ितों के गांव मानपुर ओझा यानी सूरज फार्म की मनमोहनी बैरागी 108 साल की हैं। सात पीढ़ियों को देख चुकी हैं वे।बिल्कुल स्वस्थ हैं। न शुगर, न प्रेशर और न कोई दूसरी बीमारी। गांव से एक मिल दूर अपनी जमीन में बने घर से रोज भी गांव टहलने निकलती हैं लाठी ठक ठक करती हुई। खूब बोलती है और अब भी बिना चश्मे को दुनिया को आंख खोलकर देखती हैं।सिर्फ उनके दांत नहीं रहे।बोली,शाकाहारी हूं क्योंकि दांत नहीं रहे। उन्होंने बंगाल की भुखमरी देखी,दूसरा विश्वयुद्ध देखा,प्लेग और हैजा चेचक का कहर देखा,गुरुचांद ठाकुर का मतुआ आंदोलन देखा,भारत विभाजन देखा, बारह रिफ्यूजी कैंपों की जिंदगी देखी,रोज सैकड़ों लोगों की मौतें देखी,सामूहिक चिताओं पर जलती सैकड़ों लाशे देखी, कोलकाता और हावड़ा शहर को बनते देखा,सुंदरवन और बंगाल की नदियों को देखा,जंगल महल और यूपी उत्तराखंड की तराई का जंगल देखा और उन्हें सबकुछ याद है। आजकल के नौजवानों के कंधे लटक जाते हैं। पचास पार करते न करते जिजीविषा मर जाती हैं।लेकिन पूर्वी बंगाल में जन्मी इस एक सौ आठ साल की अपढ़ स्त्री कभी थकती नहीं है। प्रेरणा अंशु की टीम पूर्वी बंगाल के विभाजनपीड़ितों की आपबीती दर्ज करने जिला जिला गांव गांव बुजुर्गों की खोज में भटक रही हैं। बहुत कम लोग आप बीती सुनाने लायक बचे हैं और उनमें से ज्यादातर लोग बहुत कुछ भूल चुके हैं। लेकिन मनमोहनी देवी को सबकुछ याद है। परीक्षा में बैठ रहे युवाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए। कल हम अपनी बड़ी दीदी के पोते को देखने सूरज फार्म गए थे। मैं,सविता,रूपेश और शालिनी। बंटी ने कल हमारे घर वापस पहुंचने से पहले दम तोड दिया।उसकी हालत देखी नहीं जा रही थी।सिर्फ सविता परिजनों के साथ अंदर थी। हम बाहर बैठे थे तो अनसुनी आवाज के दर्शकों ने कहा कि 108 साल की मन्मोहिनी देवी हमारे आने से पहले बंटी को देखकर घर चली गई और उनकी स्मृतियां बची हुई है। हमें यकीन नहीं आया। हम तुरंत पैदल ही उनके घर निकल गए। उनके बेटों और पोतों ने मुझे पहचान लिया। करीब 45 साल पहले उनसे मुलाकात हुई होगी और वे हमारे रिश्तेदार भी नहीं हैं। उनके बेटे ने आवाज लगाई, मां,पलाश एसेचे। मनमोहनी देवी बाहर निकल आई। बोली,पलाश पलाश। तुम इतने बूढ़े हो गए। फिर हंसने लगी।उनकी वह हंसी विश्वसुंद्रियो की हंसी से ज्यादा मोहक थी। फिर उन्हें मेरे पिता पुलिन बाबू की याद आई। उनकी बात करने लगी। फिर पूछा,तुम्हारे ताऊ अनिल कब गुजर गए? चाचा डॉक्टर सुधीर जो शक्तिफर्म चले गए थे और उनका बेटा सुभाष जो कोलकाता में है,कैसे हैं? तुम्हारी ताई,मां और चाची का क्या हुआ? तुम्हारे तहेरे भाई अरुण की पत्नी तो अब नहीं रही? तुम तीन भाई हो,पलाश,paddo और पंचानन फिर हमने पूछना शुरू किया। भुखमरी की याद है? जापानी बमबारी? गुरू चांद ठाकुर का आंदोलन प्लेग भारत जब आजाद हुआ तब क्या हुआ था क्यों पूर्वी बंगाल छोड़कर आए बोली, पूर्वी बंगाल पाकिस्तान बन गया था और हम हिंदू थे,इसलिए हिंदुस्तान आ गए। क्या हिंदू मुसलमानों में दंगा हुआ था? उन्होंने कहा,हिंदू मुसलमान का कोई झगड़ा नहीं था।झगड़ा हिंदुस्तान पाकिस्तान का था। उन्हे सारी नदियों के नाम याद हैं ब्योरा समेत। फिर उन्होंने 12 कैंपों की नर्क कथा सुनाई। साल्टलेक और उल्टाडांगा,बालीगंज और हावड़ा, संतरागाछी,मेदिनीपुर, कैनिंग और 50के दशक के कोलकाता का दर्शन कराया। खूब बोली,रुक जाओ। कितने सालों बाद आए हो। हमने कहा, हम आकर आपका इंटरव्यू रिकार्ड करेंगे।चार पांच घंटे लगेंगे।तब रुकेंगे।चाय भी पियेंगे और खाना भी खायेंगे। फिर मनमोहनी देवी की मनमोहक मुस्कान।उनसे जवान कौन है? कोई स्त्री ही 108 साल क्या 108 हजार साल की कथा सुना सकती है शायद। पलाश विश्वास 23 मई 2022

Wednesday, January 7, 2026

पुस्तकमेला:विस्थापन और पुनर्वास

हमारे लिए खुशी की बात यह है कि बंगाली विस्थापितों की आपबीती पर लिखी Rupesh Kumar Singh की किताब #छिन्नमूल का बांग्ला संस्करण कोलकाता पुस्तकमेला में प्रकाशित होने जा रहा है। दिल्ली और कोलकाता दोनों पुस्तकमेला में विस्थापन और पुनर्वास पर चर्चा हो, यह उम्मीद रहेगी। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन का आभार। हम कोलकाता में होते तो दिल्ली भी चले आते विश्व पुस्तक मेले में। हम हों न हों, पुलिनबाबू होंगे विश्व पुस्तक मेले में। एक एक इंच दिल्ली को उन्होंने अपने पैरों से नापा है पुनर्वास की लड़ाई में। उन्हें होना भी चाहिए। गांव में हूं। रिटायर्ड हूं। अब कहीं निकलना मुश्किल है। जाने की इच्छा है जरूर,क्योंकि साहित्यकार मित्रों से कोलकाता छोड़ने के बाद कहीं मुलाकात नहीं होती और दिनेशपुर बहुत छोटी जगह है,जिसे हम भी बड़ी जगह बना नहीं सके कि लोग दौड़े चले आएं। Rupesh Kumar Singh की सेहत थोड़ी सुधर जाए और शीत लहर का कहर कम हो तो शायद न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन के स्टाल पर किसीदीन मुलाकात हो ही जाए। नब्बे के दशक तक दिल्ली जाने पर अक्सर जेएनयू में ठहरते थे। अब वहां अपना कोई मित्र नहीं है। दिल्ली में ठहरने का कोई जुगाड नहीं है। फिरभी.. वैसे कोलकाता पुस्तक मेला जाना सिंगुर नंदीग्राम आंदोलन के दौरान छोड़ दिया था साहित्यकारों की प्रतिबद्धता के खिलाफ। दिल्ली अब साहित्य,संस्कृति और सत्ता का केंद्र है। पुलिनबाबू जनता की लड़ाई में संवाद को हथियार के रूप में खूब इस्तेमाल कर लेते थे। इस मामले में उदारता शायद उनकी मजबूरी रही हो। दौलत उनके पास नहीं थी और राजनीतिक ताकत भी नहीं। पुनर्वास लड़कर ले नहीं सकते थे।जहां लड़ सकते थे, वहां खूब लड़े। सत्ता के गलियारे में भी खूब दौड़े। मैं उनकी तरह उदार कभी नहीं हो सका। चालीस साल तक बड़े अखबारों में पत्रकारिता के बावजूद सत्ता और सत्ता के गलियारे से हमेशा दूरी बनाए रखी। शायद सत्ता की बेरूखी और अमानवीय चेहरे के कारण।दिल्ली दिलवालों की हो न हो, देश की राजधानी है।दमन का सर्वोच्च कमान है वह।इसलिए दिल्ली मुझे रास नहीं आई। तबसे जब मैं पिताजी के साथ दिल्ली और नई दिल्ली की दूरी पैदल तय कर रहा था। अब उन्हीं पुलिनबाबू के लिए शायद फिर दिल्ली जाना ही एकबार फिर और करीब दो दशक बाद पुस्तक मेले में भी।

Sunday, January 4, 2026

तेल युद्ध:भारत सरकार क्यों चुप है?

#अमेरिका_से_सावधान #भारत_सरकार_क्यों_चुप है? अमेरिका साम्राज्यवाद का उपनिवेश है यह ग्लोबल विश्व। खाड़ी युद्ध और सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिकी साम्राज्यवाद निरंकुश हो गया। गुलाम भारत में साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई भारतीय जनता के दो सौ साल के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी विशेषता रही है। स्वतंत्रता के बाद भारत अंग्रेजी हुकूमत से आजाद तो हो गया,लेकिन आहिस्ते आहिस्ते अमेरिकी साम्राज्यवाद का उपनिवेश बनता गया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो गई। मैंने बरेली अमर उजाला के दिनों में 1990 में लघु पत्रिका कथानक, संपादक सुरेश कौशिक के लिए अमेरिका से सावधान लिखना शुरू किया था। 1991 में मैं जनसत्ता कोलकाता चला गया और हरीश भदानी संपादित वातायन, सोहन शर्मा संपादित समझ में इस उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन शुरू हुआ। इसी बीच मेरे पुराने अखबार धनबाद में दो खास मित्र आ गए। Chaturved Arvind अरविंद चतुर्वेद और साहित्य संपादक Shyam Bihari Shyamal , इन दोनों की पहल पर दैनिक आवाज में 1993 से अमेरिका से सावधान धारावाहिक प्रकाशित होता रहा और देश भर की लघु पत्रिकाओं में इसके अंश छपते रहे। सुधीर विद्यार्थी ने संदर्श का एक पूरा अंक अमेरिका से सावधान पर केंद्रित किया।हिंदी के आम पाठक से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता, कवि, लेखक सब उपन्यास के धारावाहिक प्रकाशन के दौरान साम्राज्यवाद के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी संवाद में शामिल हुए। उसके बाद छत्तीस साल हो गए। हमारे देश में आम जनता का निर्मम दमन की जनसंहार संस्कृति की राजसत्ता अमेरिका और इजराइल के साथ है। देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता गिरवी पर है। प्राकृतिक राष्ट्रीय संसाधनों की खुली लूट है।देशभर में बुलडोजर राज है। अरावली से लेकर हिमालय तक को ध्वस्त करने का अभियान तेज है। इसी के मध्य साम्राज्यवादी अमेरिका ने वेनेजुएला की अकूत तेलसंपदा पर कब्जा कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि यह तेल का मामला है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला भेजकर तेल उत्पादन बढ़ाने और अन्य देशों को बेचने की बात कही। वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह केवल एक प्रतिशत ही निकाल पाता है। खड़ी युद्ध भी तेल युद्ध था। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम बड़ी-बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला भेजेंगे। वे अरबों डालर खर्च करेंगी। वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करेंगी और देश के लिए मुनाफा कमाना शुरू करेंगी। तेल की खरीद चाहने वाले अन्य देशों की बात करें तो, हम तेल के कारोबार में हैं। हम उन्हें तेल बेचेंगे। हम उन्हें बहुत अधिक मात्रा में तेल बेचेंगे। वेनेजुएला का बुनियादी ढांचा इतना खराब था कि वह पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पा रहा था। अब हम अन्य देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेंगे। क्या भारत में खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए कोई अमरीकी राष्ट्रपति भविष्य में ऐसा नहीं कर सकता? पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियों को अमेरिकी समर्थन को आखिर कब तक नजरअंदाज करेगी भारत सरकार। भारत सरकार चुप है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को 30 मिनट के अंदर गिरफ्तार कर लिया। 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नामक यह मिशन 2-3 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया, जिसमें 150 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल थे। भारत सरकार चुप है। चीन बोला- अमेरिका मादुरो को तुरंत रिहा करे:राष्ट्रपति को अगवा करना गलत; उत्तर कोरिया भी वेनेजुएला के समर्थन में, कहा- अमेरिका गुंडागर्दी कर रहा। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूरोपीय देश भी विरोध में हैं। भारतीय अमेरिकी सांसदों ने वेनेजुएला में सैन्य बलों का इस्तेमाल करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदम और उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की है कि उस देश को अमेरिका चलाएगा। छह भारतीय अमेरिकी सांसदों (सभी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के) ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में संसद को दरकिनार किया गया है और राष्ट्रपति के अधिकारों की संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण किया गया है। भारत सरकार चुप है। अमेरिका की विदेश नीति जिस तरह से बदलती हुई दिख रही है, उससे कई देशों पर खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका का रणनीतिक बदलाव न केवल उसकी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, बल्कि उसके पड़ोसी देशों और दुश्मनों में सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियों को जन्म दे रहा है। दुनिया भर में यह सवाल उठने लगा है कि अमेरिका के टार्गेट पर अगला कौन सा देश होगा? ट्रंप का यह कदम केवल वेनेजुएला तक सीमित रहने वाला है, या फिर वो आगे बढ़कर वैश्विक शक्ति विस्तार की रणनीति बन रहा है? ईरान में जिस तरह से प्रदर्शनों को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है, उसे लेकर आशंकाएं और गहरा रहा है। गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी को कई विश्लेषकों ने अवैध तख्तापलट तक बताया है, क्योंकि यह कार्रवाई बिना स्थानीय कानूनी या अंतरराष्ट्रीय संधियों के बल्कि सैन्य बल के इस्तेमाल से की गई दिखती है।यह कदम केवल ड्रग्स की अवैध तस्करी या अवैध प्रवास को रोकने के बहाने के तहत नहीं, बल्कि व्यापक सैन्य और राजनीतिक दबाव की शुरुआत भी माना जा रहा है।इस कार्रवाई के जरिये अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश में सैन्य और राजनीतिक बदलाव लाने के लिए सीधे हस्तक्षेप करने से नहीं डरता, ऐसे में यह चिंता करना जायज लगता है कि अगला निशाना कौन हो सकता है? फिरभी भारत सरकार चुप है। अमेरिका के ऑपरेशन के बाद फिलहाल वेनेजुएला की सत्ता डेल्सी रॉड्रिगेज के पास है। उपराष्ट्रपति रॉड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है। इधर, उनके पद संभालते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी कर दी है। ‘द अटलांटिक’ पत्रिका को रविवार को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि रोड्रिग्ज अगर लातिन अमेरिकी देश के लिए सही काम नहीं करतीं तो उन्हें ‘बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है’।’ फिरभी भारत सरकार चुप है।

Friday, January 2, 2026

बच्चे जितना समझते हैं, बड़े क्यों नहीं समझते?

#बच्चे_जितना_समझते_हैं, #बड़े_क्यों_नहीं_समझते_? बच्चों से मैं रोज कुछ न कुछ सीखता हूं। दर्शित सहदेव(बिट्ट), नायरा, जिया, के साथ नव वर्ष की ये पहली तस्वीरें हैं। #प्रेरणा_अंशु के जनवरी अंक फाइनल करने में वर्ष के पहले दिन देर रात तक रुद्रपुर दफ्तर में बने रहने के कारण बच्चों के साथ #नववर्ष मना नहीं सका। कोहरा और शीत लहर के कारण स्कूलों में छुट्टी है। डोडो, शिवन्या, उत्कर्ष, छनछन, श्रेया, निष्कर्ष और सूर्यांश मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। #समाजोत्थान_स्कूल और #बसंतीपुर के सारे बच्चे मेरे दोस्त हैं। आज साथी J.M. Sahdev Sonu इन बच्चों के साथ हमसे मिलने आए। मजा आ गया। Rekha Sahdev नहीं आई।अरसे से लिख भी नहीं रही है। बच्चे जितना समझते हैं,बड़े क्यों नहीं समझते? जीवन में धन संपत्ति, सुंदरता, जवानी, ताकत, स्वास्थ्य, पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान, रिश्ते नाते और यह जीवन अस्थाई हैं। लेकिन प्रेम स्नेह अमूल्य, अमर है। बच्चे जितना #प्रेम_स्नेह को अनुभव करते हैं, बड़े क्यों नहीं करते? मसलन राह चलते, बाजार या ऑटो में एक दो साल के बच्चे भी हर स्पर्श, हर शब्द की प्रतिक्रिया मीठी मुस्कान के साथ देते हैं।बोल सके या नहीं। हम आपसी सद्भाव और प्रेम बनाए रखने के पक्ष में है। किसी भी कीमत पर पीढ़ियों के रिश्ते बने रहने चाहिए। दो पैसे के लिए, दो इंच जमीन के लिए या धर्म, राजनीति के लिए दुश्मन बच्चे नहीं बनाते। मेरे पिताजी #पुलिनबाबू हमेशा यही कहते थे कि रिश्ते निभाने के लिए सबकुछ दांव पर लग जाए तो कम है। कल पड़ोस में सड़क के लिए जमीन को लेकर पड़ोसियों में झड़प हो थी ।#डोडो बेचैन हो गया। घर से चिल्लाया, चुप करो। चुप कोरबे? ना,आमी लाठी निये आसबो? एकदम पुलिनबाबू की तरह!

मैं नास्तिक क्यों हूं# Necessity of Atheism#!Genetics Bharat Teertha

হে মোর চিত্ত, Prey for Humanity!

मनुस्मृति नस्ली राजकाज राजनीति में OBC Trump Card और जयभीम कामरेड

Gorkhaland again?আত্মঘাতী বাঙালি আবার বিভাজন বিপর্যয়ের মুখোমুখি!

हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला हिंदुत्व की राजनीति से नहीं किया जा सकता।

In conversation with Palash Biswas

Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Save the Universities!

RSS might replace Gandhi with Ambedkar on currency notes!

जैसे जर्मनी में सिर्फ हिटलर को बोलने की आजादी थी,आज सिर्फ मंकी बातों की आजादी है।

#BEEFGATEঅন্ধকার বৃত্তান্তঃ হত্যার রাজনীতি

अलविदा पत्रकारिता,अब कोई प्रतिक्रिया नहीं! पलाश विश्वास

ভালোবাসার মুখ,প্রতিবাদের মুখ মন্দাক্রান্তার পাশে আছি,যে মেয়েটি আজও লিখতে পারছেঃ আমাক ধর্ষণ করবে?

Palash Biswas on BAMCEF UNIFICATION!

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS ON NEPALI SENTIMENT, GORKHALAND, KUMAON AND GARHWAL ETC.and BAMCEF UNIFICATION! Published on Mar 19, 2013 The Himalayan Voice Cambridge, Massachusetts United States of America

BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Imminent Massive earthquake in the Himalayas

Palash Biswas on Citizenship Amendment Act

Mr. PALASH BISWAS DELIVERING SPEECH AT BAMCEF PROGRAM AT NAGPUR ON 17 & 18 SEPTEMBER 2003 Sub:- CITIZENSHIP AMENDMENT ACT 2003 http://youtu.be/zGDfsLzxTXo

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THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS BLASTS INDIANS THAT CLAIM BUDDHA WAS BORN IN INDIA

THE HIMALAYAN TALK: INDIAN GOVERNMENT FOOD SECURITY PROGRAM RISKIER

http://youtu.be/NrcmNEjaN8c The government of India has announced food security program ahead of elections in 2014. We discussed the issue with Palash Biswas in Kolkata today. http://youtu.be/NrcmNEjaN8c Ahead of Elections, India's Cabinet Approves Food Security Program ______________________________________________________ By JIM YARDLEY http://india.blogs.nytimes.com/2013/07/04/indias-cabinet-passes-food-security-law/

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN VOICE: PALASH BISWAS DISCUSSES RAM MANDIR

Published on 10 Apr 2013 Palash Biswas spoke to us from Kolkota and shared his views on Visho Hindu Parashid's programme from tomorrow ( April 11, 2013) to build Ram Mandir in disputed Ayodhya. http://www.youtube.com/watch?v=77cZuBunAGk

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS LASHES OUT KATHMANDU INT'L 'MULVASI' CONFERENCE

अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICAL OF BAMCEF LEADERSHIP

[Palash Biswas, one of the BAMCEF leaders and editors for Indian Express spoke to us from Kolkata today and criticized BAMCEF leadership in New Delhi, which according to him, is messing up with Nepalese indigenous peoples also. He also flayed MP Jay Narayan Prasad Nishad, who recently offered a Puja in his New Delhi home for Narendra Modi's victory in 2014.]

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS CRITICIZES GOVT FOR WORLD`S BIGGEST BLACK OUT

THE HIMALAYAN TALK: PALSH BISWAS FLAYS SOUTH ASIAN GOVERNM

Palash Biswas, lashed out those 1% people in the government in New Delhi for failure of delivery and creating hosts of problems everywhere in South Asia. http://youtu.be/lD2_V7CB2Is

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अहिले भर्खर कोलकता भारतमा हामीले पलाश विश्वाससंग काठमाडौँमा आज भै रहेको अन्तर्राष्ट्रिय मूलवासी सम्मेलनको बारेमा कुराकानी गर्यौ । उहाले भन्नु भयो सो सम्मेलन 'नेपालको आदिवासी जनजातिहरुको आन्दोलनलाई कम्जोर बनाउने षडयन्त्र हो।' http://youtu.be/j8GXlmSBbbk