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Wednesday, March 4, 2026

साम्राज्यवाद मुर्दाबाद

1990-91 में बरेली अमर उजाला में इंद्रभूषण रस्तोगी, सुनील साह और मैं खा डेस्क पर थे।साहित्य संपादक कवि #वीरेन_डंगवाल हमारे साथ थे।तब अयोध्या में कार सेवा शुरू नहीं हुई थी और न सोवियत संघ का पतन हुआ था।विश्वबैंक से बुलाकर डॉ मनमोहन सिंह को नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री बना दिया था। आर्थिक सुधारों की शुरुआत होनी थी और अभी भारत को अमेरिका और इजराइल से नत्थी होना था। खाड़ी युद्ध के दौरान हर रोज पहले पेज पर हमारा विश्लेषण प्रकाशित होता था। इसके अलावा हम वीरेन डंगवाल के नेतृत्व में राजेश श्रीनेत, दीप अग्रवाल, सुनील साह के साथ साप्ताहिक समकालीन नजरिया बरेली से निकालते थे। इसी दरम्यान मैंने लंबी कहानी लिखी खाड़ी युद्ध पर कहकशां। #सुनील_कौशिक तब कानपुर से कथानक निकालते थे।उनके कहने पर। उन्होंने कहानी पढ़ने के बाद क
हा कि यह तो पूरा उपन्यास है।कहानी नहीं, उपन्यास लिखो। और हमने लिखना शुरू किया उपन्यास अमेरिका से सावधान। बरेली से 1991 में। अक्टूबर 1991 में हम जनसत्ता कोलकाता चले गए।#धनबाद में तब #दैनिक_आवाज में साहित्य संपादक थे Shyam Bihari Shyamal , उन्होंने 1993 में पहली किश्त अमेरिका से सावधान की प्रकाशित की। दैनिक आवाज में करीब तीन साल तक यह उपन्यास धारावाहिक छपता रहा। फिर #जमशेदपुर से #दैनिक_चमकता_आईना में। लघु पत्रिकाओं ने बड़े पैमाने पर इस उपन्यास के अंश प्रकाशित किए 1994 से 2003 तक। दर्जनों पत्रिकाओं में। क्योंकि इसका हर अध्याय एक पूरी कहानी के रूप में था और इंटर एक्टिव भी। दैनिक आवाज में तो संवाद श्यामल जी के नेतृत्व में लगातार चला। आखरी किश्तें #समकालीन_तीसरी_दुनिया और #अलाव में छपे तो #सुधीर_विद्यार्थी ने #संदर्श का एक अंक इस उपन्यास पर केंद्रित किया। सबसे पहले लघु पत्रिकाओं में #हरीश_भदानी जी ने #वातायन में #अमेरिका_से_सावधान का धारावाहिक प्रकाशन किया। उनके बाद #सोहन_शर्मा जी ने मुंबई से #समझ में। ,#इराक_युद्ध से #ईरान पर हमला तक एक पूरी परिक्रमा है। इराक युद्ध के समय भी भारत एक #गुट_निरपेक्ष देश था। दोस्त सद्दाम हुसैन का साथ तो #सोवियत_संघ में भी नहीं दिया और खाड़ी युद्ध के बाद सोवियत संघ का विभाजन हो गया। #नई_विश्व_व्यवस्था में सारा विश्व अमेरिका का उपनिवेश हो गया।भारतीय सत्ता वर्ग अमेरिका के साथ रहा है।लेकिन इतनी बेशर्मी कभी नहीं देखी गई। हम अब सीधे सीधे #अमेरिका और #इजराइल के साथ हैं। वातायन की एक प्रति मिल गई। इसमें छपी दो किश्तें चाहे तो आप पढ़ सकते हैं।

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