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Sunday, January 4, 2026

तेल युद्ध:भारत सरकार क्यों चुप है?

#अमेरिका_से_सावधान #भारत_सरकार_क्यों_चुप है? अमेरिका साम्राज्यवाद का उपनिवेश है यह ग्लोबल विश्व। खाड़ी युद्ध और सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिकी साम्राज्यवाद निरंकुश हो गया। गुलाम भारत में साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई भारतीय जनता के दो सौ साल के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी विशेषता रही है। स्वतंत्रता के बाद भारत अंग्रेजी हुकूमत से आजाद तो हो गया,लेकिन आहिस्ते आहिस्ते अमेरिकी साम्राज्यवाद का उपनिवेश बनता गया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो गई। मैंने बरेली अमर उजाला के दिनों में 1990 में लघु पत्रिका कथानक, संपादक सुरेश कौशिक के लिए अमेरिका से सावधान लिखना शुरू किया था। 1991 में मैं जनसत्ता कोलकाता चला गया और हरीश भदानी संपादित वातायन, सोहन शर्मा संपादित समझ में इस उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन शुरू हुआ। इसी बीच मेरे पुराने अखबार धनबाद में दो खास मित्र आ गए। Chaturved Arvind अरविंद चतुर्वेद और साहित्य संपादक Shyam Bihari Shyamal , इन दोनों की पहल पर दैनिक आवाज में 1993 से अमेरिका से सावधान धारावाहिक प्रकाशित होता रहा और देश भर की लघु पत्रिकाओं में इसके अंश छपते रहे। सुधीर विद्यार्थी ने संदर्श का एक पूरा अंक अमेरिका से सावधान पर केंद्रित किया।हिंदी के आम पाठक से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता, कवि, लेखक सब उपन्यास के धारावाहिक प्रकाशन के दौरान साम्राज्यवाद के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी संवाद में शामिल हुए। उसके बाद छत्तीस साल हो गए। हमारे देश में आम जनता का निर्मम दमन की जनसंहार संस्कृति की राजसत्ता अमेरिका और इजराइल के साथ है। देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता गिरवी पर है। प्राकृतिक राष्ट्रीय संसाधनों की खुली लूट है।देशभर में बुलडोजर राज है। अरावली से लेकर हिमालय तक को ध्वस्त करने का अभियान तेज है। इसी के मध्य साम्राज्यवादी अमेरिका ने वेनेजुएला की अकूत तेलसंपदा पर कब्जा कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि यह तेल का मामला है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला भेजकर तेल उत्पादन बढ़ाने और अन्य देशों को बेचने की बात कही। वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह केवल एक प्रतिशत ही निकाल पाता है। खड़ी युद्ध भी तेल युद्ध था। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम बड़ी-बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला भेजेंगे। वे अरबों डालर खर्च करेंगी। वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करेंगी और देश के लिए मुनाफा कमाना शुरू करेंगी। तेल की खरीद चाहने वाले अन्य देशों की बात करें तो, हम तेल के कारोबार में हैं। हम उन्हें तेल बेचेंगे। हम उन्हें बहुत अधिक मात्रा में तेल बेचेंगे। वेनेजुएला का बुनियादी ढांचा इतना खराब था कि वह पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पा रहा था। अब हम अन्य देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेंगे। क्या भारत में खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए कोई अमरीकी राष्ट्रपति भविष्य में ऐसा नहीं कर सकता? पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियों को अमेरिकी समर्थन को आखिर कब तक नजरअंदाज करेगी भारत सरकार। भारत सरकार चुप है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को 30 मिनट के अंदर गिरफ्तार कर लिया। 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नामक यह मिशन 2-3 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया, जिसमें 150 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल थे। भारत सरकार चुप है। चीन बोला- अमेरिका मादुरो को तुरंत रिहा करे:राष्ट्रपति को अगवा करना गलत; उत्तर कोरिया भी वेनेजुएला के समर्थन में, कहा- अमेरिका गुंडागर्दी कर रहा। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूरोपीय देश भी विरोध में हैं। भारतीय अमेरिकी सांसदों ने वेनेजुएला में सैन्य बलों का इस्तेमाल करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदम और उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की है कि उस देश को अमेरिका चलाएगा। छह भारतीय अमेरिकी सांसदों (सभी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के) ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में संसद को दरकिनार किया गया है और राष्ट्रपति के अधिकारों की संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण किया गया है। भारत सरकार चुप है। अमेरिका की विदेश नीति जिस तरह से बदलती हुई दिख रही है, उससे कई देशों पर खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका का रणनीतिक बदलाव न केवल उसकी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है, बल्कि उसके पड़ोसी देशों और दुश्मनों में सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियों को जन्म दे रहा है। दुनिया भर में यह सवाल उठने लगा है कि अमेरिका के टार्गेट पर अगला कौन सा देश होगा? ट्रंप का यह कदम केवल वेनेजुएला तक सीमित रहने वाला है, या फिर वो आगे बढ़कर वैश्विक शक्ति विस्तार की रणनीति बन रहा है? ईरान में जिस तरह से प्रदर्शनों को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है, उसे लेकर आशंकाएं और गहरा रहा है। गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी को कई विश्लेषकों ने अवैध तख्तापलट तक बताया है, क्योंकि यह कार्रवाई बिना स्थानीय कानूनी या अंतरराष्ट्रीय संधियों के बल्कि सैन्य बल के इस्तेमाल से की गई दिखती है।यह कदम केवल ड्रग्स की अवैध तस्करी या अवैध प्रवास को रोकने के बहाने के तहत नहीं, बल्कि व्यापक सैन्य और राजनीतिक दबाव की शुरुआत भी माना जा रहा है।इस कार्रवाई के जरिये अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश में सैन्य और राजनीतिक बदलाव लाने के लिए सीधे हस्तक्षेप करने से नहीं डरता, ऐसे में यह चिंता करना जायज लगता है कि अगला निशाना कौन हो सकता है? फिरभी भारत सरकार चुप है। अमेरिका के ऑपरेशन के बाद फिलहाल वेनेजुएला की सत्ता डेल्सी रॉड्रिगेज के पास है। उपराष्ट्रपति रॉड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है। इधर, उनके पद संभालते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी कर दी है। ‘द अटलांटिक’ पत्रिका को रविवार को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि रोड्रिग्ज अगर लातिन अमेरिकी देश के लिए सही काम नहीं करतीं तो उन्हें ‘बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है’।’ फिरभी भारत सरकार चुप है।

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