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Friday, January 2, 2026

बच्चे जितना समझते हैं, बड़े क्यों नहीं समझते?

#बच्चे_जितना_समझते_हैं, #बड़े_क्यों_नहीं_समझते_? बच्चों से मैं रोज कुछ न कुछ सीखता हूं। दर्शित सहदेव(बिट्ट), नायरा, जिया, के साथ नव वर्ष की ये पहली तस्वीरें हैं। #प्रेरणा_अंशु के जनवरी अंक फाइनल करने में वर्ष के पहले दिन देर रात तक रुद्रपुर दफ्तर में बने रहने के कारण बच्चों के साथ #नववर्ष मना नहीं सका। कोहरा और शीत लहर के कारण स्कूलों में छुट्टी है। डोडो, शिवन्या, उत्कर्ष, छनछन, श्रेया, निष्कर्ष और सूर्यांश मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। #समाजोत्थान_स्कूल और #बसंतीपुर के सारे बच्चे मेरे दोस्त हैं। आज साथी J.M. Sahdev Sonu इन बच्चों के साथ हमसे मिलने आए। मजा आ गया। Rekha Sahdev नहीं आई।अरसे से लिख भी नहीं रही है। बच्चे जितना समझते हैं,बड़े क्यों नहीं समझते? जीवन में धन संपत्ति, सुंदरता, जवानी, ताकत, स्वास्थ्य, पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान, रिश्ते नाते और यह जीवन अस्थाई हैं। लेकिन प्रेम स्नेह अमूल्य, अमर है। बच्चे जितना #प्रेम_स्नेह को अनुभव करते हैं, बड़े क्यों नहीं करते? मसलन राह चलते, बाजार या ऑटो में एक दो साल के बच्चे भी हर स्पर्श, हर शब्द की प्रतिक्रिया मीठी मुस्कान के साथ देते हैं।बोल सके या नहीं। हम आपसी सद्भाव और प्रेम बनाए रखने के पक्ष में है। किसी भी कीमत पर पीढ़ियों के रिश्ते बने रहने चाहिए। दो पैसे के लिए, दो इंच जमीन के लिए या धर्म, राजनीति के लिए दुश्मन बच्चे नहीं बनाते। मेरे पिताजी #पुलिनबाबू हमेशा यही कहते थे कि रिश्ते निभाने के लिए सबकुछ दांव पर लग जाए तो कम है। कल पड़ोस में सड़क के लिए जमीन को लेकर पड़ोसियों में झड़प हो थी ।#डोडो बेचैन हो गया। घर से चिल्लाया, चुप करो। चुप कोरबे? ना,आमी लाठी निये आसबो? एकदम पुलिनबाबू की तरह!

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