Pages

Wednesday, December 10, 2025

लिखोगे तो बचोगे। चेहरा एक सा नहीं रहता।

एक प्रिय बेटी के लिए बहुत बहुत आभार।आप जितना अच्छा बोलती हैं ,उतना ही अच्छा लिखती हैं। विजुअल मीडिया में लोकप्रियता जल्दी मिलती है और व्यस्तता बढ़ जाती है।लिखना आहिस्ते आहिस्ते छूट जाता है। बहुतों के साथ ऐसा होता रहा है। मुझे इसकी चिंता थी आपको लेकर। नब्बे के दशक में कोलकाता में जब न्यूज चैनल नए नए खुल रहे थे, अंग्रेजी,बांग्ला और हिंदी में कोलकाता में बोलने वाले कम लोग थे।हर चैनल से मुझे बहुत अच्छे ऑफर मिले। सविताजी ने veto लगा दिया।कहा, जब तक चेहरा दिखेगा,अच्छा आकर्षक नजर आएगा, जब तक पर्दे पर बने रहोगे, सबकी नजर तुम पर रहेगी।फिर लोग भूल जाएंगे।कोई रिकॉर्ड भी नहीं बचेगा। इंडियन एक्सप्रेस छोड़कर कहां जाओगे? लिखोगे तो आज नहीं तो कल,सौ दो सौ या पांच सौ साल बाद लोग पढ़ेंगे जरूर।

No comments:

Post a Comment