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Thursday, December 11, 2025
घुसपैठिए कहकर दंडकारण्य पुनर्वास योजना के तहत बसे बंगाली विस्थापितों को आदिवासियों से लड़ाने का मकसद क्या है?
मैं मानता हूं कि मेरा खून आदिवासी है, मिजाज योद्धा का है और अंतरात्मा स्त्री है।
आदिवासी हमसे अलग नहीं है।
धर्म और जाति के तंत्र में हम फंसे हुए हैं ,आदिवासी नहीं।
मीडिया में ओड़िशा के मलकानगिरी में दंडकारण्य प्रोजेक्ट के तहत बसाए गए विभाजन पीड़ित विस्थापितों को बांग्लादेशी बताया जाना बहुत भ्रामक और आपत्तिजनक है।
मलकानगिरी में उपद्रव दो गांवों का मामला है।एक आदिवासी स्त्री की हत्या से यह गुस्सा भड़का।पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है और वहां स्थिति अब नियंत्रित है। कृपया इसे आदिवासी बंगाली दंगा के रूप में प्रचारित करने से बाज आएं।
घटना का तथ्यात्मक ब्यौरा बीबीसी ने दिया है। गलत बयानी और गलत रिपोर्टिंग से पहले इसे जरूर पढ़ें।
1960 में भारत विभाजन के बाद आए विस्थापितों को विभिन्न कैंपों से लाकर मलकानगिरी के 250 गांवों, पाखनजोड़ कांकेर,छत्तीसगढ़ में नब्बे और ओडिशा के नवरंगपुर जिले के 85 गांवों में भारत सरकार की पुनर्वास योजना के तहत बसाया गया।इसके अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र और तेलंगाना में भी विभाजन पीड़ित बंगाली विस्थापित 1960 में बसाए गए उन्हें बांग्लादेशी हिंदू कहना सरासर गलत है।
यह एक आपराधिक कृत्य के खिलाफ एक गांव के लोगों का दूसरे गांव के खिलाफ भड़के गुस्से से फैली हिस्सा है। इसे बांग्लादेश हिंदुओं पर आदिवासियों का हमला कहना,प्रचारित करना और इस पर राजनीति करना भी बेहद गलत है।
जिन साथियों को इस बारे में कुछ मालूम नहीं है, वे कृपया Rupesh Kumar Singh की लिखी बंगाली विस्थापितों की आपबीती की किताब #छिन्नमूल और इस महादेश में सभी समुदायों के विस्थापन और पुनर्वास की लड़ाई पर केंद्रित मेरी किताब #पुलिनबाबू जरूर पढ़ें।
#बीबीसी की रपट इस प्रकार है:
ओडिशा के मलकानगिरी में हिंसाइमेज स्रोत,Subrat Kumar Pati
इमेज कैप्शन,पुलिस ने कहा है कि स्थिति उनके नियंत्रण में है
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की. घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है.
ओडिशा के गृह विभाग की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया कि असामाजिक तत्व स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए ग़लत सूचना न फैलाएं, इसलिए इंटरनेट सेवा बंद की गई है.
मलकानगिरी के एसपी विनोद पाटिल ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा कि स्थिति नियंत्रण में है. इंटरनेट सेवा बंद है, ज़रूरत पड़ने पर आगे भी इसे बंद रखा जाएगा.
उन्होंने बताया कि पुलिस की मौजूदगी में मंगलवार को मृत महिला का अंतिम संस्कार किया जाएगा. एसपी विनोद पाटिल के मुताबिक़ इस मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है.
#BBC_News_हिन्दी

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