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Saturday, November 22, 2025
नृशंस हत्या
#नृशंस_हत्या
गांवों को जोड़ने वाली pwd की बनाई उत्तराखंड की ग्रामीण लिंक सड़कों के किनारे जेसीबी से हर दस मीटर पर गड्ढे खोदकर पौधे लगाए गए कुछेक गड्ढों में ।बाकी पौधे आंकड़ों में लगाए गए।तीन साल में ये पौधे बड़े हो गए। न pwd और न वनविभाग ने इनकी सुधि ली। फिरभी अच्छी बारिश की वजह से पेड़ खड़े हो गए।
अब बेरहमी से ये पेड़ समेत सारे पेड़ काटे जा रहे हैं।
पेड़ पहाड़ों में काटे जा रहे हैं तो मैदानों में भी शहरीकरण और बाजारीकरण के लिए, उद्योग लगाने के लिए खूब पेड़ काटे जा रहे हैं। जंगलों का सफाया हो रहा है तो बैग बगीचे भी काटे जा रहे हैं।
फलों के हरे वृक्ष से लेकर नीम और वट वृक्ष तक। पेड़ jd से उखाड़ने के लिए जेसीबी का भी इस्तेमाल हो रहा है।
कृषि जमीन की प्लाटिंग निषिद्ध है। लेकिन जमीन की प्लाटिंग अंधाधुंध है।स्थानीय जनप्रतिनिधि की कमाई का यह बड़ा जरिया है।इसलिए स्थानीय निकाय चुनावों में भी बेहिसाब पैसा लगाया जा रहा है।
तराई में पीने को शुद्ध जल नहीं है। हम रासायनिक खाद और कीटनाशक, केमिकल पानी पी रहे हैं। शाक सब्जी अनाज सबकुछ जहरीला है।नदियां मर गईं। तलब भर दिए गए। जहरीले पानी से मछलियां, कीड़े मकोड़े, जीवनरक्षक पौधे,पक्षी और सांप तक विलुप्त हो रहे हैं।
मनुष्य भी मर रहे हैं बेहिसाब।कैंसर, मधुमेह और पथरी से लेकर हर तरह की बीमारियों से लोग मर रहे हैं या अस्पतालों में मरणासन्न हैं।
क्या पहले लोग इतने भारी पैमाने पर मरते थे।
अब ऑक्सीजन के रक्षा कवच हरियाली के चादर को भी छिन्नभिन्न कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि क्या अंधे हैं? भ्रष्ट प्रशासन से क्या उम्मीद करें?
यह किसी पेड़ का ठूंठ नहीं,हमारा भविष्य और वर्तमान है। यह पेड़ की नहीं, मनुष्यता की नृशंस हत्या है।
क्या आप भी नहीं देखते आत्मध्वंस का यह नजारा?

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