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Monday, March 16, 2026
ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार
जीते जी इलाहाबाद के संस्मरण पर ममता कालिया
को साहित्य अकादमी पुरस्कार
ममता कालिया हिंदी की समर्थ लेखिका हैं। वे घोषित तौर पर नारीवादी नहीं हैं, लेकिन स्त्री लेखन की सशक्त प्रतिनिधि हैं।ममता कालिया ने अपने लेखन में रोज़मर्रा के संघर्ष में युद्धरत स्त्री का व्यक्तित्व उभारा और अपनी रचनाओं में रेखांकित किया कि स्त्री और पुरुष का संघर्ष अलग नहीं, कमतर भी नहीं वरन् समाजशास्त्रीय अर्थों में ज़्यादा विकट और महत्तर है।
साहित्य अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा लंबे अरसे से टली हुई थी। ममता जी को पुरस्कार की घोषणा सुखद है। करीब चार माह के विलंब के बाद साहित्य अकेडमी ने पुरस्कारों की घोषणा कर दी और हिंदी की वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया को उनकी किताब जीते जी इलाहाबाद पर यह अवार्ड मिला।पहली बार हिंदी में संस्मरण विधा पर यह पुरस्कार मिला है।
निर्णायक मंडल में अरविंदाक्षन अरुणकमल और अनामिका थी।
85 वर्षीय ममता कालिया का जन्म वृंदावन में हुआ था।
उनकी शिक्षा दीक्षा वृंदावन इलाहाबाद दिल्ली में हुई थी ।वे दिल्ली में एक कॉलेज में पढ़ाती भी थी।
उन्होंने कविता कहांनी उपन्यास सभी विधाओं लिखा।वे अपने बेहतरीन संस्मरणों के लिए जानी जाती है। कविताओं से लेखन आरंभ कर ममता ने अपनी सामर्थ्य और मौलिकता का परिचय दिया और जल्द ही कथा-साहित्य की ओर मुड गईं।
उन्होंने अपने कथा-साहित्य में हाडमाँस की स्त्री का चेहरा दिखाया। जीवन की जटिलताओं के बीच जी रहे उनके पात्र एक निर्भय और श्रेष्ठतर सुलूक की माँग करते हैं जहाँ आक्रोश और भावुकता की जगह सत्य और संतुलन का आग्रह है।
ममता कालिया ने अपने लेखन में रोज़मर्रा के संघर्ष में युद्धरत स्त्री का व्यक्तित्व उभारा और अपनी रचनाओं में रेखांकित किया कि स्त्री और पुरुष का संघर्ष अलग नहीं, कमतर भी नहीं वरन् समाजशास्त्रीय अर्थों में ज़्यादा विकट और महत्तर है।
कोलकाता में रवींद्र कालिया जी और ममता जी जब भारतीय भाषा परिषद में थे और वागर्थ निकाल रहे थे तो अक्सर मुलाकात हो जाती थी। वैसे उनसे इलाहाबाद से दिनेशपुर तक करीब पांच दशक का रिश्ता है।नैनीताल में भी वे हमारी प्रिय लेखिका रही हैं।
इसलिए हमारे लिए यह बहुत खुशी की खबर है।
उनका अभिनंदन

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