Pages
▼
Tuesday, March 10, 2026
युद्ध नहीं चाहिए
युद्ध नहीं चाहिए
प्रेरणा अंशु का युद्ध विरोधी अंक अप्रैल में प्रकाशित होगा।
पश्चिम एशिया में युद्ध की निरंतरता बनी हुई है। फिलिस्तीन के सवाल पर अरब इजराइल युद्ध की निरंतरता रही है।
अब भी फिलिस्तीन युद्ध के भूगोल का केंद्र बना हुआ है।
पश्चिम एशिया के तेल पर कब्जा अमेरिका का शुरू से लक्ष्य रहा है, जो खाड़ी युद्ध और सद्दाम हुसैन की फांसी के बाद भी पूरा नहीं हुआ।
तेल के लिए ही आतंकवाद को जन्म दिया अमेरिका ने।आतंकवादी संगठनों की हर संभव मदद की। अफगानिस्तान को तालीबान को सौंपा रूस को खदेड़कर।फिर उसी तालिबान के खिलाफ आतंक के विरुद्ध अमेरिका का युद्ध शुरू हुआ।
इससे भी पहले ईरान और इराक के मध्य दस साल तक युद्ध रहा।
भारतीय उपमहाद्वीप में भी हम लगातार युद्ध के शिकंजे में है।
अगर इजराइल और अमेरिका का ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रहा तो कब्जे के लिए शायद ही तेल बचे।दुनिया अमेरिका और रूस पर निर्भर होगा तेल के लिए। वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जा और अमेरिकी शिकंजे में अरब देश। तेल का भूगोल अब अमेरिकी है।
भारतीय उपमहाद्वीप में युद्ध और गृहयुद्ध, आतंकवाद के पीछे भी अमेरिका है।
हमने अमेरिका से सावधान 1990 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद लिखना शुरू किया और 2006 में सद्दाम हुसैन को फांसी के बाद सिर्फ पश्चिम एशिया नहीं, पूरी दुनिया अमेरिकी शिकंजे में है।सारी सरकारें अमेरिका की सरकारें हैं और सारे देश अमेरिकी उपनिवेश।
यह बात हमारे लिए शुरू से सबसे बड़ी चिंता है।
हर युद्ध मनुष्यता और सभ्यता, प्रकृति और पृथ्वी के खिलाफ है।
इसलिए हमें युद्ध नहीं चाहिए।
यह कहानी 1988 में प्रकाशित हुई वर्तमान साहित्य में।

No comments:
Post a Comment