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Monday, February 16, 2026
क्या हमारे बच्चे लावारिश हैं?
#क्या_हमारे_बच्चे_लावारिश_हैं_?
पलाश विश्वास
ईलॉन मस्क कह रहे हैं कि AI के दौर में मेडिकल की पढ़ाई करने की ज़रूरत नहीं है। आने वाले सालों में AI ही सारे इलाज करेगा। AI कंपनियों के मालिक कहते हैं कि वकालत का काम भी AI ही करेगा। मैनेजमेंट और बाक़ी नौकरियाँ भी AI के सामने नहीं टिक पाएंगी। अगर इस दुनिया में कोई काम ही नहीं बचेगा, सब कुछ AI ही करेगा, तो फिर यह दुनिया किस काम की रह जाएगी? मानव इतिहास एक लाख साल पुराना है। क्या AI की रफ़्तार के सामने मानवता के वजूद पर ही सवाल खड़ा हो जाएगा?
Ravish Kumar
इसके बाद शत प्रतिशत अंक और शत प्रतिशत रिजल्ट, गला का प्रतिस्पर्धा और कामयाबी की आंधी दौड़ से क्या हासिल होगा? सभ्यता और मनुष्यता के अस्तित्व का सवाल है यह,सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं है।
मशीनें सबकुछ कर देंगी तो मनुष्य के जीने का क्या मतलब रह जाएगा?
बुनियादी जरूरत है भोजन, जो जमीन से मिलता है। जमीन पर अब सीमेंट का जंगल है।
फिर घर, परिवार और समाज,देश मनुष्य को मनुष्य बनाता है।भाषा और संस्कृति, विरासत, इतिहास और पर्यावरण से सभ्यता का विकास होता है। ये अब जरूरी नहीं रह गई है।सब कुछ टूट बिखर रहा है।
प्रकृति से संबंध विच्छेद हो गया है। न अमन चैन है और न मुहब्बत है।जो हाल है,निकट भविष्य में बच्चे भी मशीनें पैदा करेंगी।
चुनौती इतनी बड़ी है। आज विचार, संवेदना, विवेक, नैतिकता, रचनात्मकता और नेतृत्व, शोध और आविष्कार, अमन चैन और मुहब्बत की सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन हो क्या रहा है?
घर परिवार समाज देश और शिक्षा संस्थानों में पढ़ने लिखने की संस्कृति क्या है? हम कितने संवेदनशील हैं,कितने नैतिक और विवेकशील हैं? विचारों की कितनी स्वतंत्रता है? बिना संवेदना, बिना प्रेम, बिना विवेक कहीं रचनात्मकता और नेतृत्व संभव है?
हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं?
हमारे बच्चे क्या लिख पढ़ रहे हैं?
कामयाबी के लिए तेज और मेधावी बच्चे,वे भी कुलीन वर्ग के बच्चे सबको प्रिय हैं। औसत बच्चों, पिछड़े और कमजोर बच्चों,हाशिए के बच्चों की हम कितनी मदद करते हैं।
अब बहुत जल्दी उनके हाथ और पैर काट दिए जाएंगे।
उनसे उनकी सारी इंद्रियां छीन ली गई हैं। प्रकृति से वे बेदखल हैं।जमीन छीन ली गई है।मौसम छीन लिया गया है।जलवायु बदल दिया गया है।
उनके सपनों और विचारों पर सख्त पहरा है।
अभी तक नहीं सोचा है तो जरूर सोचिए।
वक्त बहुत कम है।

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