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Tuesday, December 2, 2025

बच्चों को उनका साहित्य क्यों नहीं देते?

नमस्कार। प्रेरणा अंशु का बाल विशेषांक दो, दिसंबर अंक प्रकाशित हो गया है। रचनाकारों और देशभर के सहयोगियों को स्पीड पोस्ट से पत्रिका भेज दी जाएगी। रचनात्मक सहयोग के लिए रचनाकारों का आभार। विशेष तौर पर अतिथि संपादक Shiv Mohan Yadav और आवरण चित्रकार #राजकुमार_घोष का बहुत बहुत आभार। बड़ी संख्या में देश के कोने कोने से रचनाएं आईं हैं।दोनों अंकों में सौ से ज्यादा नए पुराने बाल साहित्यकारों के लिए हम जगह बना सके।सीमित संसाधनों के कारण हम मोटे विशेषांक नहीं निकाल सकते। आप सभी के आर्थिक सहयोग से ही पत्रिका निकलती है। सबको मुद्रित प्रति भी नियमित भेज नहीं सकते। पीडीएफ भी अब सबको भेजना संभव नहीं है। पीडीएफ जारी कर दी गई है और यथासंभव अधिकतम लोगों तक पहुंच सके इसके लिए जरूरी है कि आप भी अपने नेटवर्क को पीडीएफ शेयर करें। जो साथी पत्रिका का प्रकाशन जरूरी मानते हैं, वे जरूर आर्थिक सहयोग Rupesh Kumar Singh के मोबाइल नंबर 9412946162 पर गूगल पे या पेटीएम या फोन पे से भेज सकते है।आप ही के सहयोग से पत्रिका निकलती है। मार्च में प्रकाशित हो रहे स्त्री विशेषांक के लिए आपसे खास सहयोग का अनुरोध है। इस अंक में किशोरियों की रचनात्मकता और उनकी समस्याओं पर फोकस करें। आप लिखें तो स्वागत।लेकिन अपने परिवार, शिक्षा संस्थान, परिचित अध्यापिकाओं के माध्यम से इस अंक में देशभर की किशोरियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने में हमारी जरूर मदद करें। जनवरी और फरवरी अंक सामान्य होंगे। *प्रेरणा अंशु का मार्च 2026 अंक स्त्री विशेषांक होगा।* इस अंक की अतिथि संपादक होंगी *अध्यापिका, कथाकार, चिंतक डॉ ऋचा पाठक जी।* रचनाओं पर अंतिम निर्णय उनका ही होगा। उन्हें सीधे मेल से रचनाएं भेज सकते हैं। उनका मेल: dr.richapathak5@gmail.com हमें कैसी सामग्री चाहिए और आपको क्या लिखना है इस पर ऋचा जी से कृपया सीधे उनके मोबाइल नंबर +91 89232 03995 पर बात की जा सकती है। आप हमें भी मेल कर सकते हैं। हमारा mail- prernaanshu@gmail.com रचना भेजने की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2026 है। यह अंक सभी तबके की स्त्रियों और विशेष तौर पर किशोरी कन्याओं की समस्याओं और उनके संघर्ष पर केंद्रित होगा। कथा रिपोर्ताज को प्राथमिकता दी जाएगी। लघुकथा, कहानी, ग़ज़ल और काव्य विधाओं में रचनाएं आमंत्रित हैं। आलेख की शब्दसीमा डेढ़ हजार शब्द है। स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं की रचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वे अपने स्कूल कॉलेज, कक्षा का उल्लेख जरूर करें। पुरुष रचनाकारों की रचनाओं का भी इन मुद्दों पर स्वागत है। अस्मिता, स्त्रीवाद, स्त्री विमर्श के अलावा स्त्रियों की जो व्यवहारिक समस्याएं, मुद्दे और उनकी रचनात्मकता है,उसकी गहन पड़ताल के लिए आप सभी का स्वागत है। कृपया सहयोग बनाए रखें। पलाश विश्वास कार्यकारी संपादक प्रेरणा अंशु, दिनेशपुर, उत्तराखंड

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