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Tuesday, November 25, 2025
व्हील चेयर वाले बाल साहित्यकार अनुभव राज
#मुजफ्फरपुर,#बिहार में #प्रेरणा_अंशु
ये चित्र बहुत खास हैं।
जुलाई 2025 में #दिनेशपुर_उत्तराखंड में प्रेरणा अंशु और अनसुनी आवाज़ Ansuni Awaaz की ओर से आयोजित #लघु #पत्र_पत्रिकाओं के अस्तित्व संकट पर राष्ट्रीय संवाद में कोई लेखक संगठन शामिल नहीं हुआ।क्योंकि हमने #बुक_पोस्ट सेवा बहाल करने के लिए स्थानीय #जनप्रतिनिधि के मार्फत #भारत सरकार को हर जिले से ज्ञापन देने का प्रस्ताव रखा था।
इस सम्मेलन में पढ़ने लिखने की संस्कृति बहाल करने के लिए बड़े पैमाने पर बच्चों को शामिल किया गया था।रंगयात्रा आयोजित की गई थी।
#देशभर से प्रतिनिधि आए थे।
Pankaj Bisht जी आए थे। #बंगाल,#बिहार और #त्रिपुरा से भी साहित्यकार आए थे। बड़ी संख्या में स्त्रियों की भागेदारी थी और #उत्तर_प्रदेश #उत्तराखंड से नए युवा रचनाकार आए।#रंगकर्मी भी।#ऑपरेशन_सिंदूर के दौरान अनेक राज्यों के साथ ट्रेन विमान और बस सेवा बंद होने से नहीं आ पाए।
चार पांच दशक पुराने हमारे #वैचारिक_मित्र नहीं आए।
ऐसी स्थिति में मुजफ्फरपुर से किशोर बाल साहित्यकार Anubhav Raj wheel chair पर पिता के साथ दिनेशपुर आए और छ गए।
हम उसे बचपन से छापते रहे हैं।व्हील चेयर में सीमाबद्ध यह अत्यंत मेधावी किशोर #हिंदी_भाषा और #साहित्य में चमकता हुआ सितारा है।
उसने हम सभी को रोशन कर दिया।उसकी रचनाएं परिपक्व हैं और विषयवस्तु आधुनिक है। उसमें शारीरिक सीमाओं के बावजूद संवाद की जबरदस्त चाह है।जबकि बोलने में उसे तकलीफ होती है।वह खूब लिखता है।
ये चित्र अनुभव ने भेजे हैं।जो हमें भावुक किए जाते हैं। मेरी पत्रकारिता अविभाजित मुजफ्फरपुर से हुई #झारखंड के #धनबाद से। लेकिन पूरे बिहार में हमारे अनेक मित्र हैं चार पांच दशक के।खासकर #पटना और #मुजफ्फरपुर से। Madan Kashyap ,#विजयकांत ,# #नचिकेता और कितने ही मित्र हैं।
अब अनुभव के अलावा मुजफ्फरपुर में मेरा कोई मित्र नहीं है। जबकि झारखंड के हर कोने से हमें सहयोग और समर्थन मिलता है।
इन चित्रों में अनुभव अपने कॉलेज के प्राध्यापकों को प्रेरणा अंशु की प्रतियां दे रहे हैं।साथ में दिनेशपुर सम्मेलन की कुछ तस्वीरें भी हम साझा कर रहे हैं।
इस युवा पीढ़ी के सहारे हैं हम अब।

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