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Thursday, November 13, 2025

बाल साहित्य से ही बची हुई है मनुष्यता, सभ्यता और यह पृथ्वी

बच्चों तक साहित्य पहुंचाने में कृपया आगे आएं हमें अफसोस है कि हम बच्चों के लिए लिख नहीं सके। उनसे संवाद संभव होता,तो वे नई दुनिया जरूर रच देते। क्या आप बच्चों के लिए लिखते हैं?बच्चों को समय देते हैं? जिंदगी नई शुरुआत के लिए कभी छोटी नहीं होती। अंग्रेजी में,हिंदी में भी और सभी भारतीय भाषाओं में भी, दुनिया के हर हिस्से में शिक्षा की शुरुआत बच्चों के लिए खास तौर पर लिखे साहित्य से होती है। उदाहरण के लिए बांग्ला के लगभग सभी साहित्यकार बाल साहित्य लिखते हैं। वहां कुछ विश्वप्रसिद्ध साहित्यकार तो सिर्फ बाल साहित्य ही लिखते हैं। प्रेमचंद,भारतेंदु, महावीर प्रसाद द्विवेदी के काल में साहित्य में बच्चों की भूमिका प्रमुख रही है। विभूति भूषण बंदोपाध्याय,सत्यजीत राय,सुकुमार राय जो सत्यजीत राय के पिता हैं, अन्नदा शंकर राय, सुनील गंगोपाध्याय, समरेश बसु, सुचित्रा भट्टाचार्य, आशापूर्णा देवी जैसे साहित्यकारों का समग्र रचनासंसार बाल मानस में एकाकार है। रवींद्र नाथ ने बच्चों के लिए खूब लिखा है।जैसे मैक्सिम गोरकी और चार्ल्स डिकेंस का साहित्य। शरत चन्द्र के श्रीकांत को देख लीजिए। विभूति भूषण बंदोपाध्याय की अमर कृति पत्थर पांचाली। मैक्सिम गोरकी का आत्मकथात्मक लेखन। चार्ल्स डिकेंस का समूचा साहित्य। इसी से मनुष्यता,सभ्यता और पृथ्वी बची हुई हैं। प्रेरणा अंशु में हम चाहते हैं कि हर अंक में स्कूली बच्चे जरूर लिखें। उनकी हिस्सेदारी हम लगातार बढ़ाएंगे हर अंक में।सिर्फ शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से हिंदी साहित्य और समाज का स्वरूप बदल सकता है। प्रेरणा अंशु के बाल साहित्य विशेषांक नवंबर और दिसंबर अंक का संपादन युवा बाल साहित्यकार शिव मोहन यादव को सौंपा इसलिए गया है क्योंकि देशभर में बच्चों के पाठ्यक्रम बनाने वाली राष्ट्रीय संस्था ncert के संपादकीय में वे हैं। इससे पहले वे नैशनल बुक ट्रस्ट में थे। इस अंक का शानदार कवर राजकुमार घोष जी ने तैयार किया है,जो प्रतिष्ठित चित्रकार हैं। इस पोस्ट को लिखने के माध्यम से हम आप सभी से अनुरोध कर रहे हैं कि प्रेरणा अंशु के दोनों महत्वपूर्ण बाल विशेषांक आप जहां भी हैं, वहां हर बच्चे तक पहुंचाने में हमारी मदद करें। इसमें शिक्षा संस्थाओं की बड़ी भूमिका हो सकती है। आप चाहेंगे तो अतिरिक्त प्रतियों की भी व्यवस्था की जा सकती है। आप अपनी संस्था के बच्चों के लिए पत्रिका चाहते हैं तो हमारे युवा साथी Rupesh Kumar Singh से 9412946162 तुरंत संपर्क करें। पलाश विश्वास कार्यकारी संपादक 063984 18084

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