| Thursday, 15 March 2012 19:11 |
नयी दिल्ली, 15 मार्च (एजेंसी) गठबंधन में शामिल दलों को साथ ले कर नहीं चल पाने का केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने आज राज्यसभा में कहा कि सरकार यदि ढंग से शासन नहीं कर पा रही है तो उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए। सरकार के सहयोगी दलों ने भी गैर कांग्रेसी सरकारों के साथ भेदभाव और संघीय ढांचे से छेड़छाड़ करने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई। बीजद के किशोर कुमार मोहंती ने कहा कि केन््रद सरकार का रवैया राज्यों के अधिकारों की अनदेखी करता है। इन्हीं कारणों से कई मुख्यमंत्री एनसीटीसी जैसे कानून के विरोध में हैं। भाकपा के डी राजा ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण टूटे हुए वायदों का दस्तावेज है तथा संप्रग सरकार ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार अन्तर्विरोधों में फंसी सरकार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव में भारत..ईरान..पाकिस्तान गैर पाईपलाइन परियोजना में भारत पीछे हटा है फिर ऐसे में हम कैसे उर्च्च्जा सुरक्षा की बात कर सकते हैं। अन्ना्रदमुक के एन बालगंगा ने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर राष्ट्रपति के अभिभाषण में खामोशी बरती गई है। उन्होंने कहा कि एनसीटीसी कानून राज्य पुलिस की भूमिका में कटौती करता है। मनोनीत एच के दुआ ने अभिभाषण का समर्थन करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कें्रद और राज्य दोनों को मिलकर लड़ने की जरूरत है। मनोनीत सदस्य एवं प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ एम एस स्वामीनाथन ने कहा कि सरकार को खाद्य उत्पादन के साथ साथ उसके भंडारण पर भी जोर देना चाहिए। उन्होेंने कहा कि देश में दक्षता मिशन चलाने की जरूरत है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। अगप के वीरेन््रद प्रसाद वैश्य ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में मूल्य वृद्धि और मु्रदास्फीति को नियंत्रित करने में सरकार की विफलता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में पूर्वोत्तर भारत के लोगों को चीन द्वारा वीजा नहीं दिये जाने की प्रथा और ब्रह्मपुत्र नदी की धारा को रोके जाने के बारे में खामोशी बरती गई है। भाजपा के भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को नीरस करार देते हुए कहा कि सरकार का प्रशासन विफल है क्योंकि जो सरकार सेनाध्यक्ष की उम्र के विवाद को नहीं सुलझा पा रही है वह भारत चीन के बीच के भूमि और सीमा विवाद को कैसे सुलझा सकती है। |
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Thursday, March 15, 2012
शासन नहीं चला पा रही है तो सत्ता छोड़ दे सरकार : विपक्ष
शासन नहीं चला पा रही है तो सत्ता छोड़ दे सरकार : विपक्ष
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