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Friday, March 9, 2012

मध्यावधि चुनाव शगूफा के साथ सुधारों के लिए दबाव बढ़ा। सबसे ज्यादा जोर राजकोषीय घाटा और सब्सिडी खत्म करने पर।

मध्यावधि चुनाव शगूफा के साथ सुधारों के लिए दबाव बढ़ा। सबसे ज्यादा जोर राजकोषीय घाटा और सब्सिडी खत्म करने पर।

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

बजट में आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर खास कदम नहीं उठाए जाएंगे। उद्योग जगत के सामने यह साफ जाहिर हो चुका है और इसीके मद्देनजर कारपोरेट रणनीतियां तय हो रही है। नये राजनीतिक विकल्प की तलाश भी शुरू हो गयी है। बाजार को अब मनमोहन सिंह सरकार से खास उम्मीद नहीं है। यह कांग्रेस  के लिए चुनावी शिकस्त से ज्यादा परेशानी का सबब है।

देशभर में होली का पर्व धूमधाम से मनाया गया।लगता है कि होली के रंगों ने बाजार का मूड भी बदल दिया है। अब कारपोरेट हितों को साधने के लिए बदली हुई परिस्थितियों में लाबिइंग के बजाय राजनीतिक दबाव पैदा करने की नीति पर अमल की जाने लगी है। छुनाव नतीजों से पिटने के बाद शुरुआती बाजार में तेजड़ियों की वापसी भी होने लगी है। मध्यावधि चुनाव शगूफा के साथ सुधारों के लिए दबाव बढ़ा। सबसे ज्यादा जोर राजकोषीय घाटा और सब्सिडी खत्म करने पर है। इस बीच सरकार की तरफ से नीतिगत घोषणाओं के इंतजार के मध्य वैश्विक बाजारों में तेजी के रुख के बीच शुक्रवार को निचले स्तर पर फंडों और छोटे निवेशकों की लिवाली से बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 311 अंक की बढ़त के साथ खुला। पिछले तीन सत्रों में 492 अंक गंवाने वाला सेंसेक्स आज 310.70 अंक मजबूत होकर 17456.22 अंक पर खुला। इसी तरह, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी 78.65 अंक की बढ़त लेकर 5299.10 अंक पर खुला। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के मध्यावधि चुनाव के बयान के बाद यूपीए सरकार में शामिल राजनीतिक दलों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर सपा नेता मुलायम सिंह ने भी पीएम पद को लेकर टिप्पणी की है। इन टिप्पणियों के बाद माना जा रहा है कि मनमोहन सरकार की उल्टी गिनती शुरु हो गई है त्रिवेदी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में हुये चुनाव से पता चलता है कि देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल है और भाजपा-सपा जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं. उन्होंने देश में मध्यावधि चुनाव की बात करते हुये कहा कि तृणमूल कांग्रेस भी दो साल पहले चुनाव होने पर खुश होगी।अपने गृहग्राम में आयोजित कार्यक्रम में मुलायम सिंह ने भी टिप्पणी कर दी कि अघर सपा के कार्यकर्ता अनुशासन बनाए रखेंगे तभी वे प्रधानमंत्री बन सकेंगे।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बार बार कहा है कि वो लगातार बढ़ती सब्सिडी से काफी परेशान हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सब्सिडी की वजह से उनकी नींद तक उड़ी हुई है।माना जा रहा है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी राजस्व बढ़ाने के लिए सेवा कर में बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं। इसका असर निश्चित रूप से उद्योगों पर दिखाई देगा। इसे देखते हुए उद्योगों का कहना है कि प्रोत्साहन पैकेज यदि अगले वित्त वर्ष में जारी रहता है तो उन्हें इससे काफी राहत मिलेगी।अगला हफ्ता बाजार के लिए बहुत ही अहम रहने वाला है। अगले हफ्ते आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी और बजट का ऐलान होने वाला है। चुनाव नतीजों के बाद बाजार में गिरावट देखने को मिली है। सीएनबीसी-टीवी18 के मैनेजिंग एडिटर उदयन मुखर्जी का कहना है कि बाजार में पूरी तरह सुस्ती का माहौल नजर आ रहा है। क्रेडिट पॉलिसी और बजट से पहले बाजार में ज्यादा उछाल की उम्मीद नहीं है।चीन की बढ़ती सामरिक ताकत का जवाब तैयार करने की जरूरतों का खाका खींचकर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से दो दौर की बातचीत की है। सूत्रों के अनुसार चीन से चौकन्ना रहने के लिए पूर्वी सेक्टर पर रक्षा परियोजनाओं को पूरा करने और 89000 जवानों की खेप तैयार करने समेत तमाम लंबित मसलों को एंटनी ने प्रणब को सौंपा है।  रक्षा मंत्रालय डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 90,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त चाहता है।ऱक्षा बजट ब​​ढ़ाने के दबाव से बाजार को राहत की उम्मीदें कम हो गयी हैं, जाहिर है।सरकार की हालत कितनी पतली है ,यह इसीसे पता चलता है कि देशभर में लोगों को एक नई पहचान देने के लिए काम कर रही संस्था यूनीक आईडेंडिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) को संसद के बजट सत्र में विधायी शक्तियां नहीं दी जा सकेंगी। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि यूआईडीएआई बिल 12 मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र की बजाय मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। फिलहाल योजना आयोग ही यूआईडीएआई को प्रशासनिक सहयोग दे रहा है। मोंटेक ने कहा है कि बजट सत्र में कई अन्य चीजों पर बात होनी है, यह कोई बड़ा फैसला नहीं है।


गौरतलब है कि सरकार बदलने की मुहिम में मुलायम सिंह और ममता बनर्जी के नामों का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। मजे की बात है कि अभी कल तक बाजार ​​की रणनीति सुधार विरोधी ममता से निजात पाने की थी, पर अब मध्यावधि चुनाव की चाहत में ममता को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जा रही है।​ ​ वहीं यूपी में त्रिशंकू विधानसभा की हालत में जिस मुलायम के जरिये कांग्रेस को मजबूत करके सुधारों के तेज करने की बात की जा रही थी, अब उन्हीं मुलायम की प्रधानमंत्रित्व की महात्वाकांक्षा को सबसे दारदार हथियार बनाने की रणनीति है। शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस ने संसदीय दल की बैठक बुलाकर मनमोहन सरकार को सकते में डाल दिया है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता और केंद्रीय रेलवे मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि देश में कांग्रेस विरोधी लहर चल रही है और सारी पार्टियां चुनाव चाह रही हैं। संभव है देश में मध्यावधि चुनाव हो। हालांकि, बाद उन्होंने कहा कि यह उनका निजी विचार है।मालूम हो कि उद्योग जगत से त्रिवेदी के मधुर संबंध है। पर ​बाजार पर इसका कोई असर न होना य़ूपीए सरकार के लिए खतरे की घंटी है। समझा जा रहा है कि सुधारों के भविष्य को लेकर चिंतित बाजार अब जल्द से जल्द केंद्र में सरकार बदलने के इंतजार में है और उसके धीरज का बांध टूट चुका है। बाजार सरकार के समर्थन में होता तो आज शुरुआती​ ​कारोबार में मध्यावधि चुनावों की गरमागर्म चर्चा का असर जरुर हुआ होता।

यह समझनेवाली बात है कि मुलायम तीसरे विकल्प के तौर पर ही प्रधानमंत्री पद के कहीं नजदीक पहुंच सकते हैं जबकि तीसरी ताकत के वजूद ​​ही खत्म है। वाम ताकतें हाशिए पर हैं। ममता जरूर अरुणाचल और मणिपुर की विधानसभाओं में अच्छी हालत में पहुंच गयी हैं और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में उनकी महत्वाकांक्षा उजागर हुई है। लेकिन तीसरी ताकत बतौर नहीं, बाजार और कारपोरेट जगत क्षेत्रीय दलों के नए उभार का इस्तेमाल यूपीए सरकार पर दबाव बनाने के मकसद से करने लगा है और कहा जा रहा है कि  यूपी विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद साइकल की रफ्तार में आई तेजी से दिल्ली की सियासत हिल उठी है। मुलायम सिंह यादव जहां पीएम पद का सपना देखने लगे हैं।  संभावना यह जताई जा रही है कि मुलायम सिंह, शरद यादव, चंद्रबाबू नायडू, जयललिता, नवीन पटनायक के साथ मिलकर ममता बनर्जी चौथा मोर्चा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं। अगर ऐसा कुछ होता है तो हालात देश को तेजी से मध्यावधि चुनाव की ओर ले जा सकते हैं।
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दूसरी तरफ कांग्रेस हालांकि मध्यावधि चुनाव की संभावना को सिरे से खारिज कर रही है पर खबर है कि अंदरखाने प्रशासनिक तौर पर इसकी तैयारियां शुरु हो गयी है। आर्थिक सुधारों को लागू करने के लिए पीएमओ की चुनाव पूर्व औचक सक्रियता से भी इसीका संकेत मिलता हुआ नजर आता है। समझा जाता है कि पुलक चटर्जी को खास जिम्मेवारी सौंपी गयी है। पुलक चटर्जी ने सभी मंत्रालयों पर मश्कें कसना आरंभ कर दिया है। पुलक चटर्जी इस समय आधारभूत अधोसंरचना वाले मंत्रालय विशेषकर उर्जा, कोयला, भूतल, शिपिंग, खनन, सामाजिक न्याय, पर्यावरण, वाणिज्य आदि पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। चटर्जी ने साफ तौर पर कहा दिया है कि सभी मंत्रालय अपना अपना लक्ष्य निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लें।मूलतः उत्तर प्रदेश काडर के आईएएस पुलक चटर्जी ने साफ तौर पर अधिकारियों को हिदायत दे दी है कि अगर वे निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं कर सकते हैं तो बेहतर होगा वे त्यागपत्र दे दें। राज्यों में हुए ताजा विधानसभा चुनाव परिणाम का राजनीतिक असर अब दिखाई देने लगा है। विशेषकर यूपी की हार का असर का असर ज्यादा ही दिख रहा है। यूपी में कांग्रेस की चुनावी कमान राहुल के हाथ में थी।

दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि देश में मध्यावधि चुनाव का राजनीतिक माहौल पैदा हो गया है और आम चुनाव जल्दी हो सकते हैं। मगर, उनके इस बयान पर तृणमूल नेतृत्व ने कोई सफाई नहीं दी है। शुक्रवार को कोलकाता में तृणमूल संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में पार्टी की अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा।  शरद यादव ने भी कहा कि अब केंद्र के चुनाव जब भी होंगे कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। उन्होंने भी मध्यावधि चुनाव से इनकार नहीं किया।

लेखा महानियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों ने राजकोषीय घाटा बजटीय अनुमान से 5.5 फीसदी ज्यादा होने की पुष्टि कर दी है। सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष में 4.13 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन जनवरी 2012 तक ही यह 4.35 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के फीसदी में मापा जाता है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए इसके जीडीपी का 4.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। दिसंबर तक राजकोषीय घाटा जीडीपी का 5.99 फीसदी था। सांख्यिकी गणना पर वास्तविक जीडीपी की कम वृद्घि दर का कोई खास असर नहीं पड़ सकता है लेकिन इसकी सुस्त वृद्घि दर की मार राजकोषीय घाटे पर पड़ी है क्योंकि इससे प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट आई है। प्रत्यक्ष कर केंद्रीय बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह बजटीय अनुमान से 15,000-20,000 करोड़ रुपये कम रह सकता है। लेकिन अप्रत्यक्ष कर संग्रह बजटीय अनुमान के मुताबिक ही हैं। चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक सरकार की कुल कर राजस्व प्राप्ति 4.58 लाख करोड़ रुपये थी जबकि बजटीय अनुमान 6.64 लाख करोड़ रुपये है। राजकोषीय घाटे पर ज्यादा मार गैर-कर राजस्व प्राप्तियां नहीं होने से पड़ी है। सरकार व्यय पर काबू पाने में सफल रही है।उद्योग संगठन एसोचैम ने हाल ही में 1,000 सीईओ के बीच एक बजट पूर्व सर्वे कराया। इसमें अधिकांश सीईओ का कहना था कि राजस्व बढ़ाने के लिए इनपुट मैटेरियल और कैपिटल गुड्स की बजाय आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क में निश्चित बढ़ोतरी के बारे में सरकार को विचार करना चाहिए। इसके साथ ही सार्वजनिक इकाइयों में विनिवेश के जरिए भी सरकार को अपना राजकोषीय घाटा कम करने और राजस्व बढ़ाने के विकल्प पर सोचना चाहिए।सर्वे में शामिल करीब 460 सीईओ का कहना था कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू कराने के लिए सरकार को केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) को दो फीसदी से घटाकर एक फीसदी करना चाहिए। जीएसटी के लागू होने से देश की आर्थिक विकास दर में 1.4 फीसदी से 1.6 फीसदी की वृद्धि आ सकती है। साथ ही इससे सरकार को 1.50 लाख करोड़ रुपये की सालाना कमाई होगी। उद्योग संगठन एसोचैम का मानना है कि कर सुधार के बढ़ रहे दबावों के बीच यह एक बेहतर विकल्प साबित होंगे।


सरकारी कंपनी 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड' (एचपीसीएल) ने किंगफिशर एयरलाइंस को तेल की आपूर्ति बहाल कर दी है। संकट के दौर से गुजर रही किंगफिशर की ओर से ईंधन की कीमत का भुगतान रोज का रोज करने पर सहमति जताए जाने के बाद एचपीसीएल ने यह फैसला किया है। एचपीसीएल किंगफिशर को सबसे ज्यादा ईंधन की आपूर्ति करती है। कंपनी ने विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को ईंधन देना बंद कर दिया था।

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