| Saturday, 11 February 2012 10:21 |
अनिल बंसल नई दिल्ली, 11 फरवरी। सूबे के लोगों को भयमुक्त राज देने के दावे तो उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियों ने किए हैं, पर दामन किसी का भी बेदाग नहीं है। सत्ता हासिल करना सबका एकमात्र मकसद है और जीतने की क्षमता उम्मीदवारों के चयन की एकमात्र कसौटी। अपराधियों को तो टिकट दिए ही हैं, कई सीटों पर तो ऐसे उम्मीदवार भी उतार दिए हैं जो जेल की हवा खा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाहुबली डीपी यादव को पार्टी में शामिल न करके खुद को पाक साफ दिखाने का उपक्रम कर रहे अखिलेश यादव भी इसी जमात में शामिल हैं। मुलायम सिंह यादव के लाडले को डीपी यादव भले दागी दिखे हों, पर जेल में बंद अभय सिंह, विजय मिश्र और शेरबाज खां उन्हें भले मानुष लगे होंगे। तभी तो सभी को उम्मीदवार बना दिया है। फिर भी अखिलेश डीपी यादव को गले नहीं लगाने के फैसले को ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हीं की पार्टी के एक हिस्ट्रीशीटर सीतापुर के ओमप्रकाश गुप्ता हैं। उनकी जगह उनके बेटे अनूप गुप्ता को उम्मीदवार बनाना पड़ा है क्योंकि सीट जीतने की मजबूरी है। |
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Friday, February 10, 2012
बेदाग नहीं उप्र में किसी भी दल का दामन
बेदाग नहीं उप्र में किसी भी दल का दामन
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